Media24Media.com: अभिभावकों

Responsive Ad Slot


 

Showing posts with label अभिभावकों. Show all posts
Showing posts with label अभिभावकों. Show all posts

छत्तीसगढ़ निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग ने, प्रवेश पूर्व आवश्यक परीक्षण बिंदु (Check Points) की पुष्टि करने को कहा

No comments Document Thumbnail

रायपुर। छत्तीसगढ़ निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग ने राज्य के निजी विश्वविद्यालयों में प्रवेश के लिए विद्यार्थियों एवं अभिभावकों को आवश्यक परीक्षण बिंदु (Check Points) के आधार पर तथ्यों की पुष्टि करने को कहा है।

आयोग के प्रभारी सचिव ने कहा है कि वे सुनिश्चित कर ले कि संबंधित विश्वविद्यालय छत्तीसगढ़ निजी विश्वविद्यालय (स्थापना एवं संचालन) अधिनियम-2005 के अंतर्गत अधिसूचित है और उनके परीनियम (statutes) एवं अध्यादेश (ordinance) छत्तीसगढ़ शासन के राजपत्र में प्रकाशित हो चुके है। इसके प्रकाशन के उपरांत ही विद्यार्थियों का प्रवेश दिया जा सकता है।

इस बात की पुष्टि भी कर ले कि निजी विश्वविद्यालयों में संचालित संस्थान/अध्ययन शाला, विश्वविद्यालय की एक संघटक इकाई (constituent unit) है। यह कोई संबद्ध (Affiliated) महाविद्यालय, शिक्षण संस्थान, शोध संस्थान नहीं है, क्योंकि निजी विश्वविद्यालय एकात्मक (Unitary) स्वरूप के हैं एवं इन्हें किसी अन्य महाविद्यालयों को संबद्ध करने (Affilliation) की अनुमति नहीं है।

इस बात की पुष्टि भी कर ले कि पाठ्यक्रम-डिग्री आदि, जिसमें प्रवेश लिया जा रहा है, यूजीसी द्वारा अनुमोदित है एवं राजपत्र में प्रकाशित अध्यादेशों में इस पाठ्यक्रम से संबंधित अध्यादेश (ordinance) भी शामिल है।

इसी तरह यह भी सुनिश्चित कर ले कि पी.एच.डी. की उपाधि के लिए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (पी.एच.डी. उपाधि के लिए न्यूनतम मानक एवं प्रक्रिया) विनियम, 2022 प्रभावशील है। जिस विषय में पी.एच.डी. पाठ्यक्रम में प्रवेश दिया जा रहा है, उस विषय पर विद्यार्थी यह सुनिश्चित कर लें कि संबंधित निजी विश्वविद्यालय से संबंधित विषय में मानदण्डों के अनुरूप योग्यता प्राप्त शोध निर्देशक नियमित रूप से पदस्थ है। बाहर के शोध निर्देशकों की सेवाएं लेकर शोध कार्य कराना यू.जी.सी. विनियम-2022 की भावना के प्रतिकूल है।


प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का 29 जनवरी को ‘परीक्षा पे चर्चा‘ कार्यक्रम

No comments Document Thumbnail

रायपुर। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा प्रति वर्षानुसार इस वर्ष भी स्कूली बच्चों, शिक्षकों और अभिभावकों के साथ परीक्षा को उत्सव की तरह मनाने एवं विद्यार्थियों में तत्संबधी तनाव दूर करने के लिए सीधा संवाद करेंगे। परीक्षा पे चर्चा-2024‘ का कार्यक्रम 29 जनवरी को प्रातः 11 बजे भारत मण्डपम, प्रगति मैदान नई दिल्ली में आयोजित किया जा रहा है।

सचिव स्कूल शिक्षा ने परीक्षा पे चर्चाकार्यक्रम में सहभागिता के लिए सभी कलेक्टरों को पत्र लिखकर आवश्यक व्यवस्था करवाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कलेक्टरों से कहा है कि यह समय है कि जब परीक्षाओं को हम सब एक उत्सव के रूप में मनाये विद्यार्थियों को अध्ययन हेतु प्रेरित करने के साथ-साथ उनके परीक्षा संबंधी तनाव को दूर करने में सहयोग करें तथा उन्हें अपना सर्वोत्तम प्रदान करने हेतु प्रोत्साहित करें।

सचिव स्कूल शिक्षा ने कलेक्टरों को जारी पत्र में कहा है कि इस कार्यक्रम का लाईव प्रसारण दूरदर्शन राष्ट्रीय चैनल, दूरदर्शन न्यूज, दूरदर्शन भारत, यू-ट्यूब व डलळवअण्पद आदि के माध्यम से उपलब्ध रहेगा। इसके लिए मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत, आयुक्त नगर निगम और जिला शिक्षा अधिकारी के मध्य समन्वय स्थापित कर कार्यक्रम का प्रचार-प्रसार कराया जाए। जिले के केन्द्रीय विद्यालयों, नवोदय विद्यालयों, सीबीएसई से संबद्ध विद्यालयों, शासकीय एवं निजी विद्यालयों के साथ-साथ जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान में स्मार्ट टीव्ही, डिजीटल क्लासरूम के प्रोजेक्टर स्क्रीन का उपयोग करते हुए कक्षा 6वीं से 12वीं तक के अधिक से अधिक विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं अभिभावकों को इस लाईव प्रसारण से लाभान्वित करें।

कलेक्टरों से कहा गया है कि जिन स्थलों में इंटरनेट अथवा टेलीविजन की सुविधा सुगम नहीं वहां ऑलइंडिया रेडियो एवं एफएम चैनल के द्वारा इस कार्यक्रम का लाईव प्रसारण सुनाया जाए। कार्यक्रम के पश्चात् बच्चों एवं शिक्षकों के फोटो डलळवअज च्वतजंस पर अपलोड किया जाए।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की पहल से तीन स्कूलों में दूर हुई शिक्षकों की कमी

No comments Document Thumbnail

रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की पहल से जशपुर जिले के तीन स्कूलों में शिक्षकों की कमी से लंबे समय से परेशान बच्चों और उनके अभिभावकों को बड़ी राहत मिली है। मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद जिले के इन तीन स्कूलों में पढ़ाई व्यवस्था सुचारू बनाएं रखने के लिए शिक्षकों की त्वरित नियुक्ति कर दी गई है। अभिभावकों ने इस संवेदनशीलता के लिए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का आभार जताया है।

जशपुर जिले के बगीचा ब्लॉक के रायकेरा गांव के हाईस्कूल में भूगोल, अंग्रेजी, हिंदी, संस्कृत, विज्ञान और गणित विषय के शिक्षकों की कमी थी। स्कूल के छात्रों के अभिभावकों ने समस्या से बगिया स्थित सीएम निवास को अवगत कराते हुए बताया था कि शिक्षकों के ना होने से बच्चों की पढ़ाई पर बुरा असर पड़ रहा है। अभिभावकों का कहना था कि माध्यमिक शिक्षा मंडल ने बोर्ड परीक्षाओं की समय-सारणी घोषित कर दी है। ऐसे में शिक्षकों के ना होने से बच्चों का भविष्य बिगड़ने की आशंका बनी हुई है। यह जानकारी जब मुख्यमंत्री साय को मिली तो उन्होंने अभिभावकों की समस्या को गंभीरता से लेते हुए जशपुर कलेक्टर डॉ. रवि मित्तल को रायकेरा स्कूल में शिक्षक की कमी दूर करने के निर्देश दिए। 

कलेक्टर डॉ. मित्तल ने तत्काल कार्रवाई करते हुए इस स्कूल में 6 शिक्षकों को संलग्न करते हुए, सत्रांत तक अध्यापन कार्य पूरा कराने का आदेश दिया। इसी तरह फरसाबहार के फोकटपारा प्राथमिक शाला में शिक्षक रोशन लाल रावटे को संलग्न किया गया है। दुलदुला ब्लॉक के करडेगा स्कूल की महिला शिक्षक सुश्री अनुपमा किंडों को जिला ग्रंथालय के प्रभार से मुक्त कर वापस मूल संस्था में पदस्थ किया गया है, ताकि करडेगा स्कूल में बच्चों की पढ़ाई प्रभावित ना हो।

उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के छत्तीसगढ़ का मुख्यमंत्री बनने के बाद जिले के कांसाबेल ब्लॉक के बगिया स्थित सीएम निवास में जिले भर से लोग समस्या लेकर पहुंच रहे हैं। यहां इन समस्याओं का त्वरित निराकरण किया जा रहा है। बता दें कि मुख्यमंत्री साय ने शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में प्राथमिकता से काम करने के निर्देश अधिकारियों को दिया हैं। बहरहाल स्कूलों में शिक्षकों की कमी दूर होने से छात्र और उनके अभिभावक काफी प्रसन्न हैं।

आलेख : शैक्षणिक प्रगति के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के साथ ही अधोसंरचना का किया जा रहा विकास

No comments Document Thumbnail

रायपुर। आज 26 जून को शाला प्रवेशोत्सव मनाया गया। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इसकी शुरूआत की। मन में उत्साह, उमंग लिए घर से पहली बार स्कूल जा रहे बच्चे हो या गर्मी की छुट्टी बिता कर आगे की कक्षा में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थी। आगे बढ़ने की उम्मीद के साथ अपने सपनों को साथ लिए मेहनत कर रहे इन बच्चों से उम्मीदे सभी को होती है। सरकार और अभिभावकों की एक बड़ी जिम्मेदारी होती है कि इन बच्चों को अच्छी शिक्षा मिलने के साथ ही उनका व्यक्तित्व विकास भी हो।

सभी वर्गो के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले इसके लिए छत्तीसगढ़ सरकार बच्चों की शुरूआती शिक्षा उपलब्ध कराने के साथ ही उनके आगे की शिक्षा के लिए भी सुविधाएं उपलब्ध करा रही हैं। आदिवासी बाहुल्य छत्तीसगढ़ वनों से घिरा हुआ है। यहां पर 44 प्रतिशत से अधिक वन क्षेत्र हैं। छत्तीसगढ़ सरकार ने समग्र विकास की अवधारणा के आधार पर योजनाओं का निर्माण किया। राज्य सरकार ने न्याय योजना और दूसरी योजनाओं के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के साथ ही इन इलाकों में अच्छी शिक्षा उपलब्ध कराने को एक चुनौती की तरह स्वीकार किया। आज यहां पर वैश्विक भाषा अंग्रेजी में गरीब बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा दिलाने के लिए स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम स्कूल का निर्माण किया गया है।

गरीब परिवारों के बच्चे भी निजी स्कूलों जैसी सुविधाओं के साथ उत्कृष्ट शिक्षा का लाभ ले सकें इसके लिए स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट विद्यालय योजना के माध्यम से आज अंग्रेजी माध्यम के 377 एवं हिंदी माध्यम के 350 स्कूल शुरू किए गए हैं। इसका असर यह हुआ की इन स्कूलों में प्रवेश लेने के लिए विद्यार्थियों की होड़ लगी हुई है। निजी स्कूल के बच्चें भी आज इन सरकारी स्कूलों में प्रवेश पाने के लिए जतन कर रहे हैं। स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम स्कूल की लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के भेंट-मुलाकात कार्यक्रम के दौरान हर जगह इन स्कूलों की मांग की गई।

बच्चों के अभिभावकों पर आर्थिक बोझ ना हो इसके लिए स्कूल खुलते ही छात्रों को निःशुल्क पाठ्य पुस्तकें, स्कूल यूनिफार्म इत्यादि प्रदान किए जा रहे हैं। छात्राओं को प्रोत्साहन देने के लिए कक्षा नवमी में प्रवेश लेते ही निःशुल्क साइकल प्रदान की जा रही है। स्कूल के विद्यार्थियों के लिए पढ़ाई में किसी प्रकार की बाधा उत्पन्न न हो इसके लिए जर्जर हो चुके स्कूल की मरम्मत भी की जा रही है। उनका रंग-रोगन किया जा रहा है। इसके लिए मुख्यमंत्री जतन योजना के माध्यम से 29 हजार 284 स्कूल भवनों के लिए 2 हजार करोड़ रूपए की योजना बनाई गई है। इसके साथ ही शासकीय स्कूलों में शिक्षको की कमी नहीं रहे इसके लिए राज्य सरकार द्वारा 10 हजार 884 शिक्षकों की नियुक्ति की जा चुकी है और 12 हजार से अधिक शिक्षकों की नियुक्ति किया जाना प्रक्रियाधीन है। 5 से 6 वर्ष तक की आयु के बच्चों को सीखने एवं समझने की क्षमता के विकास के लिए बालवाड़ी योजना संचालित की जा रही है। जिनमें बच्चों को सीखने एवं समझने की क्षमता का विकास खेल-खेल में किया जा रहा है। पिछले साल 5 हजार 173 बालवाड़ियां शुरू की गई थी। दूसर चरण में 4 हजार 318 बालवाड़ियां का शुभारंभ मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने शाला प्रवेशोत्सव के दिन 26 जून को किया। इस प्रकार राज्य में बालवाड़ियों की संख्या 9 हजार 491 हो गई है।  

Don't Miss
© Media24Media | All Rights Reserved | Infowt Information Web Technologies.