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नागरिक सुरक्षा और आपदा प्रबंधन को सशक्त बनाने के लिए दृढ़संकल्पित है हमारी सरकार : मुख्यमंत्री साय

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 रायपुर : प्रदेश की नागरिक सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाने के लिए छत्तीसगढ़ सरकार लगातार प्रतिबद्ध प्रयास कर रही है। संसाधनों के आधुनिकीकरण, अग्निशमन सेवाओं को तकनीकी रूप से उन्नत करने और जवानों के प्रशिक्षण व मनोबल को प्राथमिकता देने की दिशा में ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। इसी कड़ी में मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने आज राजधानी रायपुर के माना कैंप स्थित नगर सेना केंद्रीय प्रशिक्षण संस्थान परिसर में आयोजित कार्यक्रम में 18 नवीन अग्निशमन वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस अवसर पर उन्होंने सेक्टर-13, नवा रायपुर में नवनिर्मित अग्निशमन केंद्र सह आवासीय परिसर और माना में नवीन सेनानी कार्यालय का भी लोकार्पण किया। कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा सहित अनेक जनप्रतिनिधि व वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित थे।


आपातकालीन सेवाओं को मजबूती देने की दिशा में बड़ा कदम
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि ये अत्याधुनिक अग्निशमन वाहन प्रदेश की त्वरित आपातकालीन सेवाओं की क्षमता को नई गति देंगे। उन्होंने इसे नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करार दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि लोकार्पित भवनों के माध्यम से अग्निशमन तंत्र को मजबूती मिलेगी और हमारे जवानों की दक्षता में भी इजाफा होगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इन नए वाहनों से आगजनी की घटनाओं पर पहले से कहीं अधिक प्रभावी तरीके से और तेज़ी से काबू पाया जा सकेगा, जिससे जान-माल की रक्षा सुनिश्चित हो सकेगी। उन्होंने कहा कि जीवन की रक्षा सबसे बड़ा कार्य है और इसे पूरी निष्ठा और तत्परता से निभाने वाले अग्निशमन कर्मी हमारे सच्चे नायक हैं, जिनकी सेवाओं को समाज हमेशा सम्मान की दृष्टि से देखता है।

आपातकालीन सेवा का डेमो और अत्याधुनिक उपकरणों की प्रदर्शनी
कार्यक्रम के दौरान राज्य आपदा मोचन बल और अग्निशमन राहत दल द्वारा आगजनी की घटना पर आधारित आपातकालीन सेवा का प्रदर्शन (डेमो) भी किया गया। मुख्यमंत्री साय ने पूरे रेस्क्यू ऑपरेशन को गहरी रुचि और गंभीरता से देखा और जवानों की तत्परता व सजगता की भूरी-भूरी प्रशंसा की। साथ ही उन्होंने अग्निशमन सेवाओं में उपयोग होने वाले अत्याधुनिक उपकरणों की प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया। विभागीय अधिकारियों ने उन्हें लुकास जैक, ग्लास ब्रेकर, एयर लिफ्टिंग बैग, पेलिकन टावर लाइट, डायमंड टिप, चेन सॉ, फायर जैल ब्लैकेट, फायर सूट और अंडर वॉटर कैमरा जैसे उपकरणों की कार्यप्रणाली और उपयोगिता की जानकारी दी।

अग्निशमन सेवाओं का निरंतर हो रहा सशक्तिकरण
उप पुलिस महानिरीक्षक अजात शत्रु बहादुर सिंह ने बताया कि वर्ष 2017 में अग्निशमन सेवा को नगरीय निकाय से हस्तांतरित किया गया था। वर्तमान में प्रतिवर्ष औसतन 8,000 फायर कॉल प्राप्त होते हैं, जबकि ग्रीष्मकाल में यह संख्या प्रतिदिन 40 तक पहुंच जाती है। उन्होंने कहा कि आज जिन 18 नवीन अग्निशमन वाहनों को शामिल किया गया है, उनके साथ विभाग के पास अब कुल 161 अग्निशमन वाहन उपलब्ध हो गए हैं। रायगढ़, कोरबा, कबीरधाम, दंतेवाड़ा, धमतरी, कोरिया और अंबिकापुर जैसे जिलों को आज ही ये वाहन सौंपे गए हैं। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि एनआरडीए द्वारा नवा रायपुर में अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवाओं के लिए 5.5 करोड़ रुपये की लागत से फायर स्टेशन सह आवासीय परिसर का निर्माण कराया गया है, जिसका आज लोकार्पण हुआ।

शहीद अग्निशमन कर्मियों को समर्पित अग्निशमन सुरक्षा सप्ताह
अजात शत्रु बहादुर सिंह ने बताया कि अग्निशमन सेवाओं में अपने कर्तव्य का निर्वहन करते हुए सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर कर्मचारियों की स्मृति में प्रतिवर्ष 14 अप्रैल को शहीद दिवस मनाया जाता है और 14 से 20 अप्रैल तक पूरे देश में अग्निशमन सुरक्षा सप्ताह आयोजित किया जाता है। इसी क्रम में छत्तीसगढ़ में भी इस वर्ष अग्निशमन सुरक्षा सप्ताह का आयोजन किया जा रहा है।

कार्यक्रम में विधायक मोतीलाल साहू, अपर मुख्य सचिव गृह मनोज कुमार पिंगुआ, पुलिस महानिदेशक अरुण देव गौतम और मुख्यमंत्री के सचिव राहुल भगत सहित अन्य अधिकारी व जनप्रतिनिधिगण उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री के निर्देश पर एक दशक बाद हो रही नगर सैनिकों की भर्ती

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रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देश पर लगभग एक दशक बाद नगर सैनिकों के पदों पर भर्ती की कार्यवाही शुरू हो गई है। बिलासपुर राजस्व संभाग के जिलों के लिए 465 पदों पर भर्ती की जाएगी। भरनी परसदा स्थित अग्निशमन एवं एसडीआरएफ मैदान पर आगामी 16 सितम्बर से 1 अक्टूबर तक भर्ती की कार्यवाही संपन्न होगी। नगर सैनिकों के 465 पदों के लिए लगभग 21 हजार उम्मीदवारों ने आवेदन किए हैं। बिलासपुर के कलेक्टर अवनीश शरण और पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह ने आज भरनी परसदा स्थित अग्निशमन एवं एसडीआरएफ मैदान का निरीक्षण कर संबंधित अधिकारियों को आवश्यक तैयारियां सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवाओं के डीआईजी एस.के. ठाकुर ने बताया कि स्वीकृत 465 पदों में से 200 पद नगर सैनिकों के और 265 पद महिला छात्रावासों में महिला नगर सैनिकों के हैं। प्रतिदिन लगभग 1500 उम्मीदवारों की दक्षता परीक्षा मैदान में होगी। दक्षता परीक्षा 100 अंकों की होगी। पुरूष उम्मीदवारों के लिए 100 मीटर दौड़, 800 मीटर दौड़, लम्बी कूद और ऊंची कूद होगी। महिला उम्मीदवारों के लिए 100 मीटर दौड़ को छोड़कर शेष तीनों प्रतियोगिताएं होंगी। नगर सैनिकों के 200 पदों में से बिलासपुर जिले के लिए 75 पद तथा मुंगेली, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही, रायगढ़, कोरबा और जांजगीर-चांपा जिले के लिए 25-25 पद शामिल हैं। सभी उम्मीदवारों को तिथिवार कॉल-लेटर जारी कर दिया गया है। दक्षता परीक्षण के दौरान उम्मीदवारों को जाति प्रमाण पत्र, निवास प्रमाण पत्र, रोजगार कार्यालय पंजीयन, एनसीसी-सी सर्टिफिकेट, हैवी वाहन ड्राइविंग लाइसेंस, संभाग स्तरीय या उच्च स्तर की खेलकूद प्रतियोगिता प्रमाण पत्र के साथ पहुंचना होगा।

बिलासपुर के कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक ने आज भरनी परसदा स्थित अग्निशमन एवं एसडीआरएफ मैदान का निरीक्षण कर तैयारियों का जायजा लिया और संबंधित अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी। उन्होंने भर्ती मैदान के समतलीकरण, मैदान की घेराबंदी एवं बैरिकेडिंग, विभिन्न इवेन्ट्स के लिए जरूरी व्यवस्था, मेडिकल टीम, पेयजल, कूड़ादान, चलित शौचालय, भर्ती मैदान एवं उसके आसपास कानून-व्यवस्था तथा यातायात के लिए आवश्यक इंतजाम करने के निर्देश दिए। डीएफओ सत्यदेव शर्मा और जिला पंचायत के सीईओ रामप्रसाद चौहान भी इस दौरान मौजूद थे।मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देश पर लगभग एक दशक बाद नगर सैनिकों के पदों पर भर्ती की कार्यवाही शुरू हो गई है।

बिलासपुर राजस्व संभाग के जिलों के लिए 465 पदों पर भर्ती की जाएगी। भरनी परसदा स्थित अग्निशमन एवं एसडीआरएफ मैदान पर आगामी 16 सितम्बर से 1 अक्टूबर तक भर्ती की कार्यवाही संपन्न होगी। नगर सैनिकों के 465 पदों के लिए लगभग 21 हजार उम्मीदवारों ने आवेदन किए हैं। बिलासपुर के कलेक्टर अवनीश शरण और पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह ने आज भरनी परसदा स्थित अग्निशमन एवं एसडीआरएफ मैदान का निरीक्षण कर संबंधित अधिकारियों को आवश्यक तैयारियां सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवाओं के डीआईजी एस.के. ठाकुर ने बताया कि स्वीकृत 465 पदों में से 200 पद नगर सैनिकों के और 265 पद महिला छात्रावासों में महिला नगर सैनिकों के हैं। प्रतिदिन लगभग 1500 उम्मीदवारों की दक्षता परीक्षा मैदान में होगी। दक्षता परीक्षा 100 अंकों की होगी। पुरूष उम्मीदवारों के लिए 100 मीटर दौड़, 800 मीटर दौड़, लम्बी कूद और ऊंची कूद होगी। महिला उम्मीदवारों के लिए 100 मीटर दौड़ को छोड़कर शेष तीनों प्रतियोगिताएं होंगी। नगर सैनिकों के 200 पदों में से बिलासपुर जिले के लिए 75 पद तथा मुंगेली, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही, रायगढ़, कोरबा और जांजगीर-चांपा जिले के लिए 25-25 पद शामिल हैं। सभी उम्मीदवारों को तिथिवार कॉल-लेटर जारी कर दिया गया है। दक्षता परीक्षण के दौरान उम्मीदवारों को जाति प्रमाण पत्र, निवास प्रमाण पत्र, रोजगार कार्यालय पंजीयन, एनसीसी-सी सर्टिफिकेट, हैवी वाहन ड्राइविंग लाइसेंस, संभाग स्तरीय या उच्च स्तर की खेलकूद प्रतियोगिता प्रमाण पत्र के साथ पहुंचना होगा।

बिलासपुर के कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक ने आज भरनी परसदा स्थित अग्निशमन एवं एसडीआरएफ मैदान का निरीक्षण कर तैयारियों का जायजा लिया और संबंधित अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी। उन्होंने भर्ती मैदान के समतलीकरण, मैदान की घेराबंदी एवं बैरिकेडिंग, विभिन्न इवेन्ट्स के लिए जरूरी व्यवस्था, मेडिकल टीम, पेयजल, कूड़ादान, चलित शौचालय, भर्ती मैदान एवं उसके आसपास कानून-व्यवस्था तथा यातायात के लिए आवश्यक इंतजाम करने के निर्देश दिए। डीएफओ  सत्यदेव शर्मा और जिला पंचायत के सीईओ रामप्रसाद चौहान भी इस दौरान मौजूद थे।

दीपावली पर्व पर फटाका व्यवसायियों के लिए गाइडलाइन जारी

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जांजगीर-चांपा। आगामी दीपावली पर्व में फटाका व्यवसायियों के लिए जिला अग्निशमन अधिकारी एवं जिला सेनानी नगर सेना द्वारा आम जनता की रक्षा हेतु अग्निनिरोधक पंडाल लगाने की अपील करते हुए गाइडलाइन जारी किया गया है। जिला अग्निशमन अधिकारी एवं जिला सेनानी नगर सेना जारी गाइडलाइन में किसी भी दशा में पंडाल 03 मीटर से कम ऊंचाई में न लगाया जाये। पंडाल बनाने में सिन्थेटिक सामग्री से बने कपड़े या रसी का प्रयोग न किया जाये। पंडाल के चारों तरफ 04-05 मीटर खुला स्थान होना चाहिए, जिससे लोग सुरक्षित बाहर निकल सके। पंडाल बिजली की लाईन के नीचे किसी भी दशा में न लगाया जाये।



कोई भी पंडाल रेल्वे लाईन, बिजली के सब स्टेशन, चिमनी या भट्टी से कम से कम 15 मीटर दूर लगाया जाये। बाहर निकलने का गेट 05 मीटर से कम चौड़ा न हो और अगर रास्ता मेहराब दार (आर्य) बनाया जाए तो भूमि तल से मेहराब (आर्य) की उँचाई 05 मीटर से कम नहीं होना चाहिए। बाहर निकलने के कम से कम दो रास्ते होने चाहिए। जहाँ तक संभव हो सके दोनो रास्ते एक दूसरे के विपरित दिशा में हो। बाहर निकलने के गेट समुचित संख्या में उचित तरीका से बनाये जायें ताकि किसी भी दशा में पंडाल के किसी भी स्थान से किसी व्यक्ति को बाहर निकलने हेतु 15 मीटर से अधिक दूरी न तय करनी पड़े।  कुर्सियाँ दोनों किनारे से 1.2 मीटर जगह छोडकर लगाई जावे व बाहर कुर्सियों के बाद 1.5 मीटर की जगह छोड़ी जाये एवं इस के बाद पुनः 12 कुर्सियां लगाई जा सकती है।

कुर्सियों को 10 कतारों के बाद 1.5 मीटर की जगह (गैन्गवे) छोड़ी जाये। कुर्सियों को कम से कम 04-04 के समूह में नीचे से बांध कर जमीन में लोहे की छड़ गाड़कर स्थिर कर दिया जाये जिससे भगदड़ के समय वह कुर्सियों अब्यवस्थित होकर बाहर निकलने के मार्गों को अवरुद्ध न कर सके। तारों के जोड़ किसी भी दशा में खुले नही होना चाहिए। जहाँ तक संभव हो पोर्सलीन कनेक्टरों का प्रयोग करना चाहिए। इमरजेंसी लाईट की व्यवस्था होनी चाहिए। विद्युत का कोई भी सर्किट, बल्ब, ट्यूब लाईट आदि पंडाल के किसी भी भाग से कम से कम 15 से.मी. दूर होना चाहिए। हैलोजन लाईट का प्रयोग किसी भी दशा में पंडाल या अस्थाई निर्माण के अंदर में नही किया जाना चाहिए। 

पंडाल के अन्दर किसी भी दशा में भट्ठी का प्रयोग नहीं किया जाना चाहिए। अगर करना ही पड़े तो टीन शेड लगाकर किया जाये जो पंडाल से अलग हो। यदि हवन कुंड का प्रयोग अति आवश्यक हो तो उस स्थल एवं आस पास जि सुरक्षा से संबंधित निर्धारित मानकों का अनुपालन सुनिश्चित करेंगे। पंडाल अग्नि सुरक्षा हेतु 0.75 लीटर पानी प्रति वर्गमीटर स्थान हेतु ड्रम या बाल्टियों में सुरक्षित रखा जाये व इसका प्रयोग अग्निशमन के अतिरिक्त किसी अन्य कार्य में न किया जाये। कुल पानी की आधी मात्रा पंडाल के अन्दर व आधी पंडाल के बाहर रखी जाये। 

प्रत्येक 50 वर्गमीटर जगह हेतु कम से कम 02 बाल्टी पानी व प्रत्येक 100/ वर्गमीटर स्थान हेतु फायर एक्सटिंग्यूशर (9 लीटर क्षमता का वाटर आईप) अग्नि सुरक्षा हेतु उपलब्ध रखा जाये। स्विच गेयर, मेन मीटर और स्टेज के पास विद्युत की आग हेतु एक कार्बन डाई आक्साईड गैस एक्सटिंग्यूशर या ड्राई केमिकल पाउडर एक्सटिंग्यूशर उचित मानक क्षमता के लगाये जाये। आतिशबाजी का प्रयोग पंडाल के निकट अथवा अन्दर न करें। पंडाल के अन्दर तथा भीतर धुम्रपान न करें। पंडाल में प्रयोग आने वाले कपड़ों को अग्नि निरोधक घोल से उपचारित करें। बहुत बड़े पंडाल व अस्थाई निर्माण के पूर्व अग्निशमन विभाग को सूचित कर उनसे सुझाव प्राप्त करें।

अग्नि निरोधक घोल हेतु सामग्री बनाने का तरीका एवं उपलब्धता –

अमोनियम सल्फेट - 4 भाग, अमोनियम कार्बोनेट - 2 भाग, बोरैक्स - 1 भाग, बोरिक एसिड - 1 भाग, एलम- 2 भाग और पानी 35 भाग। निर्धारित अनुपात में सभी सामग्रियों को मिलाकर घोल बनाना है। घोल बनाने के बाद पंडाल के कपड़ों को उक्त घोल में भीगने हेतु छोड़ देना चाहिए। कण्डा के पूर्ण रूप से भीगने के बाद उसे सुखाकर पंडाल बनाना है। ऐसे पंडाल में आग मुश्किल से लगता है। अगर आग लग भी जाता है तो कपड़ा काफी धीरे-धीरे बिना फ्लेम का जलता है। कपड़ा सिंकुड़ जाता है। उपरोक्त सभी समान केमिकल के दूकान में 500 ग्राम के पैकेट में प्राप्त किया जा सकता है।

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