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मुख्यमंत्री साय ने सक्ती में वेदांता पावर प्लांट हादसे पर जताया गहरा शोक, जांच के दिए निर्देश

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रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सक्ती जिले के सिंघीतराई स्थित वेदांता पावर प्लांट में बॉयलर फटने से हुई दुर्घटना पर  गहरा दुःख व्यक्त किया है। उन्होंने इस घटना को अत्यंत पीड़ादायक और हृदय विदारक बताते हुए मृतकों के प्रति श्रद्धांजलि अर्पित की तथा शोक संतप्त परिजनों के प्रति अपनी गहरी संवेदनाएँ प्रकट की हैं।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि इस दुर्घटना में श्रमिकों के निधन एवं कई लोगों के घायल होने का समाचार अत्यंत व्यथित करने वाला है। उन्होंने ईश्वर से प्रार्थना की कि दिवंगत आत्माओं को शांति प्रदान करें तथा उनके परिजनों को इस असहनीय दुःख को सहने की शक्ति दें।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि घटना की सूचना मिलते ही जिला प्रशासन को तत्काल मौके पर पहुंचकर राहत एवं बचाव कार्य प्रारंभ करने के निर्देश दिए गए हैं। वर्तमान में प्रशासन की निगरानी में तेजी से राहत कार्य संचालित किया जा रहा है और घायलों को त्वरित एवं समुचित चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है।

उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया है कि सभी घायलों के उपचार में किसी प्रकार की कमी न हो तथा आवश्यकतानुसार बेहतर चिकित्सा सुविधाएं सुनिश्चित की जाएं। साथ ही, उन्होंने घायलों के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना की है।

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि इस दुर्घटना की गहन और निष्पक्ष जांच कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि जांच में जो भी दोषी पाए जाएंगे, उनके विरुद्ध सख्त से सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए हैं कि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सभी आवश्यक सुरक्षा उपायों की समीक्षा की जाए और औद्योगिक इकाइयों में सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए।

वेदांता पावर प्लांट में बॉयलर दुर्घटना: 9लोगों की मौत, घायलों का इलाज जारी

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जिला प्रशासन की त्वरित कार्रवाई से वेदांता प्लांट हादसे में हालात नियंत्रण में

कलेक्टर ने मजिस्ट्रियल जांच के दिए आदेश

सक्ती- जिला सक्ती के ग्राम सिंघीतराई स्थित वेदांता पावर प्लांट में भीषण बॉयलर दुर्घटना सामने आई है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार लगभग कई लोग घायल हुए हैं। घटना की सूचना मिलते ही जिला प्रशासन ने तत्परता, समन्वय और संवेदनशीलता से राहत एवं बचाव कार्य तेज़ी से प्रारंभ कर दिया। 

कलेक्टर अमृत विकास तोपनो एवं पुलिस अधीक्षक प्रफुल्ल कुमार ठाकुर तत्काल घटनास्थल पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया और मौके पर ही राहत एवं बचाव कार्यों का नेतृत्व किया। प्रशासन द्वारा एम्बुलेंस, चिकित्सा दल एवं अन्य आवश्यक संसाधनों को तत्काल सक्रिय करते हुए घायलों को प्राथमिकता के आधार पर अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका समुचित उपचार जारी है।

घटना की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर द्वारा मजिस्ट्रियल जांच के आदेश जारी कर दिए गए हैं। संबंधित विभागों को निर्देशित किया गया है कि दुर्घटना के प्रत्येक पहलू की गहन एवं  जांच कर शीघ्र रिपोर्ट प्रस्तुत करें, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।

कलेक्टर ने कहा कि “घटना की जानकारी मिलते ही प्रशासन की पूरी टीम तत्काल सक्रिय हो गई। प्राथमिकता के आधार पर घायलों को सुरक्षित अस्पताल पहुंचाया गया है। सभी को बेहतर से बेहतर उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है। घटना की जांच के लिए मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दे दिए गए हैं।

पुलिस अधीक्षक प्रफुल्ल कुमार ठाकुर ने बताया कि राहत एवं बचाव कार्य लगातार जारी है। घायलों को तेजी से अस्पताल पहुंचाया जा रहा है और स्थिति पर सतत निगरानी रखी जा रही है। प्रशासन पूरी मुस्तैदी से कार्य कर रहा है। जिला प्रशासन द्वारा निरंतर मॉनिटरिंग करते हुए यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि राहत एवं उपचार कार्यों में किसी प्रकार की कमी न हो। सभी संबंधित अधिकारियों को अलर्ट मोड में रखते हुए समन्वित प्रयास किए जा रहे हैं।


पेट्रोलियम उद्योग में बड़ा बदलाव: श्रम संहिताओं से सुरक्षा और कल्याण को नई दिशा

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मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • ओएसएचडब्ल्यूसी कोड, 2020 (OSHWC Code) पेट्रोलियम यूनिट्स, रिफ़ाइनरी से लेकर फ़्यूल डिपो तक सभी को एक एकीकृत राष्ट्रीय सुरक्षा ढाँचे के अंतर्गत लाता है।

  • अनिवार्य मेडिकल सर्विलांस, कौशल-आधारित प्रशिक्षण व प्रमाणन, आधुनिक सुरक्षा मानक, और आपातकालीन तैयारी के माध्यम से श्रमिक सुरक्षा को और मजबूत किया गया है।

  • सोशल सिक्योरिटी कोड, 2020 ESIC कवरेज का विस्तार करता है और डिजिटल, सरल अनुपालन प्रक्रिया लागू करता है, जिससे पेट्रोलियम क्षेत्र में कल्याणकारी प्रावधानों और प्रशासन में सुधार होता है।

परिचय (Introduction)

भारत सरकार ने चार श्रम संहिताओं —

  1. व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य परिस्थितियाँ संहिता 2020 (OSHWC),

  2. सामाजिक सुरक्षा संहिता 2020,

  3. औद्योगिक संबंध संहिता 2020,

  4. वेतन संहिता 2019 —
    के माध्यम से श्रम क़ानूनों में ऐतिहासिक सुधार किए हैं।

ये सुधार औद्योगिक प्रतिष्ठानों में सुरक्षा, कार्य परिस्थितियों और सामाजिक सुरक्षा के लिए एक समग्र, समन्वित एवं आधुनिक ढाँचा स्थापित करते हैं। पेट्रोलियम उद्योग, जो उच्च-जोखिम वाले पदार्थों का संचालन करता है, इस एकीकृत ढाँचे से विशेष रूप से लाभान्वित होगा।

नई श्रम संहिताओं के लागू होने के साथ, पेट्रोलियम उद्योग विखंडित और निरीक्षक-प्रधान व्यवस्था से निकलकर एकीकृत, अनुपालन-उन्मुख और तकनीक-सक्षम प्रणाली की ओर बढ़ रहा है। यह संहिताएँ पेट्रोलियम के पूरे मूल्य-श्रृंखला — अपस्ट्रीम से डाउनस्ट्रीम तक — को कवर करती हैं।

पेट्रोलियम उद्योग के विनियामक ढाँचे में परिवर्तन

पेट्रोलियम उद्योग देश के सबसे खतरनाक एवं सुरक्षा-संवेदी क्षेत्रों में से है। यहाँ अत्यधिक ज्वलनशील हाइड्रोकार्बन, हाइड्रोजन सल्फ़ाइड जैसे विषैले गैस, बेंजीन वाष्प, LNG, LPG, उच्च तापमान वाले प्रोसेस फ्लुइड्स आदि लगातार संभाले जाते हैं, जिससे थर्मल रेडिएशन और एक्सपोज़र संबंधी बीमारियों का खतरा रहता है।

पहले सुरक्षा व्यवस्था का आधार मुख्यतः फ़ैक्टरी अधिनियम, 1948 पर था, जो आधुनिक पेट्रोलियम जोखिमों के लिए पर्याप्त नहीं था। इसमें:

  • सीमित मेडिकल निगरानी,

  • बिखरी हुई आपातकालीन आवश्यकताएँ,

  • धीमी और अप्रभावी प्रवर्तन प्रणाली,

  • कागज़-आधारित रिकॉर्ड,

  • बहु-विभागीय अनुमतियाँ

जैसी समस्याएँ थीं। पाइपलाइनों, रिटेल आउटलेट्स, स्टोरेज हब आदि के लिए अलग-अलग विभागों से अनुमतियाँ लेनी पड़ती थीं।

OSHWC कोड, 2020 के प्रमुख प्रावधान

OSHWC कोड, 2020 पेट्रोलियम उद्योग के लिए एकीकृत, जोखिम-आधारित और राष्ट्रीय सुरक्षा ढाँचा स्थापित करता है। सभी पेट्रोलियम यूनिट्स एक ही सुरक्षा प्रणाली के अंतर्गत आती हैं।

1. अनिवार्य जोखिम आकलन और परिचालन अनुमोदन

  • जोखिम पहचान और HIRA आधारित अनुमोदन।

  • खतरनाक कार्य शुरू करने से पहले सरकारी अनुमति अनिवार्य।

  • भंडारण, परिवहन, संचालन आदि के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा मानक।

  • डिजिटल अनुपालन, जोखिम-आधारित निरीक्षण और आधुनिक सुरक्षा ऑडिट।

2. बेहतर श्रमिक सुरक्षा

  • जाँच केवल समय-समय पर नहीं, बल्कि

    • नियुक्ति-पूर्व,

    • आवधिक,

    • एक्सपोज़र के बाद मेडिकल परीक्षण अनिवार्य।

  • खतरनाक कार्य में लगे श्रमिकों के लिए वार्षिक मुफ्त स्वास्थ्य परीक्षण।

3. कौशल-आधारित प्रशिक्षण और आधुनिक सुरक्षा उपकरण

  • पेट्रोलियम/रसायन संभालने से पहले प्रमाणित प्रशिक्षण अनिवार्य।

  • सुरक्षा उपकरणों के मानक आधुनिक और बाध्यकारी बनाए गए।

  • सतत-प्रक्रिया संयंत्रों में 8 घंटे की शिफ़्ट सीमा लागू।

4. आपातकालीन तैयारी और श्रमिक अधिकार

  • ऑन-साइट इमरजेंसी प्लान अब कागज़ी औपचारिकता नहीं, बल्कि कानूनी रूप से लागू प्रणाली।

  • नियमित मॉक ड्रिल अनिवार्य।

  • श्रमिकों को खतरनाक कार्य से इनकार करने का अधिकार।

  • गर्भवती महिलाओं और किशोरों के लिए विशेष सुरक्षा प्रावधान।

5. निरीक्षण की बजाय सुविधा-आधारित प्रवर्तन

  • “इंस्पेक्टर-कम-फैसिलिटेटर” मॉडल।

  • एकल-खिड़की अनुमतियाँ और डिजिटल सबमिशन।

  • उद्योग-अनुकूल, पारदर्शी प्रवर्तन तंत्र।

सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 के प्रावधान

1. विस्तृत कल्याण लाभ

  • पेट्रोलियम क्षेत्र में अधिक कर्मियों को ESIC कवरेज।

  • चिकित्सा, चोट मुआवजा, विकलांगता लाभ, निर्भर लाभ, मातृत्व लाभ।

  • व्यावसायिक रोगों और दुर्घटनाओं के लिए संरक्षण।

2. पारदर्शिता और सरल अनुपालन

  • डिजिटल स्वास्थ्य व सामाजिक सुरक्षा रिकॉर्ड।

  • लाभों की पोर्टेबिलिटी और तेज़ वितरण।

निष्कर्ष

OSHWC कोड एक आधुनिक, एकीकृत, सक्रिय सुरक्षा प्रणाली बनाता है, जिससे:

  • पेट्रोलियम प्रतिष्ठान अधिक सुरक्षित,

  • आपातकालीन क्षमता मजबूत,

  • कार्यकर्ता अधिक स्वस्थ,

  • संचालन अधिक विश्वसनीय व वैश्विक मानकों के अनुरूप होते हैं।

वहीं, सामाजिक सुरक्षा संहिता व्यापक कल्याण और अनुपालन सुधार सुनिश्चित करती है।

दोनों संहिताएँ मिलकर पेट्रोलियम उद्योग की सुरक्षा प्रणाली को:

  • प्रतिक्रिया-आधारित से रोकथाम-आधारित,

  • जटिल से सरल,

  • कागज़ आधारित से डिजिटल,

  • निरीक्षक-प्रधान से गवर्नेंस-प्रधान

मॉडल में परिवर्तित करती हैं।

इन प्रावधानों का परिणाम है:

  • अधिक अनुशासित संचालन,

  • कुशल और स्वस्थ कार्यबल,

  • कम बाधाएँ और दुर्घटनाएँ,

  • उच्च उत्पादकता,

  • बेहतर वैश्विक अनुपालन।

सामूहिक रूप से, यह भारत के पेट्रोलियम क्षेत्र में मजबूत सुरक्षा संस्कृति और औद्योगिक स्थिरता का निर्माण करता है।


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