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प्रोजेक्ट डॉल्फ़िन के तहत नदीय एवं मुहाना डॉल्फ़िन की दूसरी देशव्यापी जनसंख्या गणना का शुभारंभ

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प्रधानमंत्री द्वारा मार्च माह में गिर (गुजरात) में आयोजित राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड (NBWL) की बैठक में डॉल्फ़िन जनसंख्या आकलन के प्रथम चरण के परिणाम जारी किए जाने के पश्चात, देश में डॉल्फ़िन संरक्षण को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, भारत सरकार ने आज प्रोजेक्ट डॉल्फ़िन के अंतर्गत नदीय एवं मुहाना (एस्टुरीन) डॉल्फ़िन की दूसरी देशव्यापी जनसंख्या गणना का शुभारंभ उत्तर प्रदेश के बिजनौर से किया।

पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने पिछले वर्ष वन्यजीव सप्ताह के दौरान देहरादून में डॉल्फ़िन की अखिल भारतीय जनसंख्या गणना के द्वितीय चरण एवं उसकी मानक कार्यप्रणाली (प्रोटोकॉल) का शुभारंभ किया था। यह कार्यक्रम वन्यजीव संस्थान, भारत (WII), देहरादून द्वारा राज्य वन विभागों तथा सहयोगी संरक्षण संगठनों — डब्ल्यूडब्ल्यूएफ इंडिया, आराण्यक और वाइल्डलाइफ़ ट्रस्ट ऑफ इंडिया — के सहयोग से संचालित किया जा रहा है।

सर्वेक्षण के सुचारु संचालन और क्षेत्रीय क्षमता निर्माण सुनिश्चित करने के लिए कल बिजनौर में उत्तर प्रदेश के 13 जिलों के वन कर्मियों के लिए एक क्षेत्रीय प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की गई। सर्वेक्षण की प्रगति के साथ-साथ प्रत्येक 10–15 जिलों के लिए चरणबद्ध रूप से अतिरिक्त प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, ताकि मानकीकृत पद्धति का पालन सुनिश्चित हो सके।

सर्वेक्षण की शुरुआत 26 शोधकर्ताओं द्वारा तीन नौकाओं के माध्यम से की गई, जिसमें पारिस्थितिकीय एवं आवास संबंधी मानकों का संकलन किया जा रहा है। इसके साथ ही, पानी के भीतर ध्वनिक निगरानी के लिए हाइड्रोफोन जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है। प्रथम चरण में यह सर्वेक्षण बिजनौर से गंगा सागर तक गंगा नदी के मुख्य प्रवाह तथा सिंधु नदी को कवर करेगा। दूसरे चरण में ब्रह्मपुत्र नदी, गंगा की सहायक नदियाँ, सुंदरबन क्षेत्र तथा ओडिशा को शामिल किया जाएगा।

इस सर्वेक्षण में गंगा नदी डॉल्फ़िन के अतिरिक्त सिंधु नदी डॉल्फ़िन और इरावदी डॉल्फ़िन की स्थिति का भी आकलन किया जाएगा। साथ ही इनके आवास की दशा, संभावित खतरों तथा संरक्षण की दृष्टि से महत्त्वपूर्ण अन्य जलीय जीवों का भी मूल्यांकन किया जाएगा। यह पहल भारत की नदियों के पारिस्थितिकी तंत्र के लिए वैज्ञानिक साक्ष्यों पर आधारित संरक्षण योजना और नीतिगत निर्णयों को सशक्त बनाएगी।

पूर्ववर्ती राष्ट्रव्यापी सर्वेक्षण (2021–23) के अनुसार भारत में लगभग 6,327 नदीय डॉल्फ़िन दर्ज की गई थीं। इनमें गंगा, यमुना, चंबल, गंडक, घाघरा, कोसी, महानंदा और ब्रह्मपुत्र नदी प्रणालियों में पाई जाने वाली गंगा नदी डॉल्फ़िन तथा ब्यास नदी में सिंधु नदी डॉल्फ़िन की एक छोटी आबादी शामिल थी। सर्वाधिक डॉल्फ़िन उत्तर प्रदेश और बिहार में पाई गईं, इसके बाद पश्चिम बंगाल और असम का स्थान रहा, जो दीर्घकालिक डॉल्फ़िन संरक्षण के लिए गंगीय बेसिन के महत्व को रेखांकित करता है।

वर्तमान सर्वेक्षण में पूर्व की भांति ही मानकीकृत कार्यप्रणाली अपनाई जा रही है, किंतु इस बार नए नदी खंडों और क्षेत्रों को भी शामिल किया गया है। विशेष रूप से सुंदरबन और ओडिशा में इरावदी डॉल्फ़िन की गणना को शामिल कर इसका भौगोलिक विस्तार बढ़ाया गया है। इससे इस प्रजाति की अद्यतन जनसंख्या स्थिति, आवास की गुणवत्ता, संभावित खतरों का आकलन करने तथा प्रोजेक्ट डॉल्फ़िन के अंतर्गत बेहतर संरक्षण रणनीतियाँ विकसित करने में सहायता मिलेगी।


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