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पीपला फाउंडेशन ने किया जलदान मिशन का शुभारंभ

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चार वर्षों से कर रहे हैं गौसेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य 

आरंग- दिन प्रतिदिन सूरज की तपिश बढ़ती जा रही है।मूक पशु पानी की तलाश में इधर-उधर भटकने लगे हैं।जिसे देखते हुए नगर के स्वयंसेवी संस्था पीपला वेलफेयर फाउंडेशन के सदस्यों ने रविवार को आरंग के श्री बागेश्वरनाथ महादेव गौ सेवा धाम में जलपात्र में जल डालकर जलदान मिशन का शुभारंभ किया। फाउंडेशन के अध्यक्ष दूजेराम धीवर और संयोजक महेन्द्र कुमार पटेल ने बताया लगातार बढ़ती गर्मी को देखते हुए इस बार अभी से ही जलपात्र रखा जा रहा है। पहले इस मिशन की शुरुआत 22 मार्च विश्व जल दिवस से किया जाता था।

वहीं जलपात्र की काफी मांग को देखते हुए जनसहयोग से इस बार एक हजार जलपात्र आरंग सहित महासमुंद, तुमगांव,नया रायपुर, तिल्दा, अभनपुर,रायपुर, मंदिर हसौद, धरसीवां, भिलाई दुर्ग सहित ग्रामीण क्षेत्रों में वितरण करने का लक्ष्य रखा है।इसी कड़ी में रविवार को फाउंडेशन ने दस जलपात्र तुमगांव पहुंचाया।जिसकी सर्वत्र सराहना हो  रही है। वहीं तीन जलपात्र आरंग के गौशाला के उपचार कक्ष के लिए प्रदान कर जलदान मिशन का शुभारंभ किया गया। ज्ञात हो कि यह संस्था विगत चार वर्षों से गर्मी में नगर व क्षेत्र में गौ माता के लिए जगह जगह जलपात्र रखकर लोगों को गौ सेवा के लिए प्रेरित और जागरूक कर रहे हैं। साथ ही इस मिशन को आगे बढ़ाने तन,मन,धन देकर जनमानस व गौ सेवकों से अपील किए हैं।इस अवसर पर फाउंडेशन के अध्यक्ष दूजेराम धीवर, संयोजक महेन्द्र कुमार पटेल,सदस्य हरीश दीवान, संदीप शर्मा,गौ सेवा धाम समिति से संतोष सोनी,नवीन गुप्ता, अमिताभ अग्रवाल, प्रहलाद लोधी, डाक्टर हिरऊ साहू उपस्थित रहे।


राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने दिए राष्ट्रीय जल पुरस्कार: जल संरक्षण में जनभागीदारी को बताया अनिवार्य

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भारत की राष्ट्रपति, द्रौपदी मुर्मु ने आज (18 नवंबर 2025) नई दिल्ली में आयोजित एक समारोह में छठे राष्ट्रीय जल पुरस्कार (National Water Awards) और जल संचय–जन भागीदारी पुरस्कार (Jal Sanchay–Jan Bhagidari Awards) प्रदान किए।

समारोह को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि मानव सभ्यता का इतिहास, नदी घाटियों, समुद्री तटों और विभिन्न जल स्रोतों के आसपास बसने का इतिहास है। भारत की परंपरा में नदियों, झीलों और जल स्रोतों को पूजनीय माना गया है। हमारे राष्ट्रगीत में बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय ने पहला शब्द लिखा है— ‘सुजलाम’—जिसका अर्थ है “प्रचुर जल संसाधनों से सम्पन्न।” यह दर्शाता है कि हमारे देश में जल का कितना महत्व है।

राष्ट्रपति ने कहा कि जल का कुशल उपयोग आज वैश्विक आवश्यकता है, और भारत में यह आवश्यकता और भी महत्वपूर्ण हो जाती है क्योंकि हमारी जनसंख्या की तुलना में जल संसाधन सीमित हैं। प्रति व्यक्ति जल उपलब्धता एक बड़ी चुनौती है। उन्होंने बताया कि जल चक्र पर जलवायु परिवर्तन का गहरा प्रभाव पड़ रहा है और ऐसे समय में सरकार और जनता दोनों को मिलकर जल सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए।



राष्ट्रपति ने खुशी व्यक्त की कि पिछले वर्ष शुरू की गई जल संचय–जन भागीदारी पहल के तहत 35 लाख से अधिक भूजल पुनर्भरण संरचनाएँ (groundwater recharge structures) बनाई जा चुकी हैं।

उन्होंने कहा कि सर्कुलर वाटर इकॉनमी (Circular Water Economy) मॉडल अपनाकर उद्योग और अन्य हितधारक जल संसाधनों का बेहतर उपयोग कर सकते हैं। कई औद्योगिक इकाइयों ने जल उपचार और पुनर्चक्रण के साथ शून्य तरल अपशिष्ट (Zero Liquid Discharge) का लक्ष्य भी हासिल कर लिया है, जो जल प्रबंधन और संरक्षण के लिए अत्यंत उपयोगी है।

राष्ट्रपति ने केंद्र और राज्य सरकारों, जिला प्रशासन, ग्राम पंचायतों और नगर निकायों के स्तर पर जल संरक्षण और व्यवस्थित प्रबंधन को प्राथमिकता देने पर जोर दिया। उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त की कि अनेक शैक्षणिक संस्थान, नागरिक समूह और गैर-सरकारी संगठन भी जल संरक्षण के प्रयासों में योगदान दे रहे हैं। उन्होंने किसानों और उद्यमियों को कम जल उपयोग में अधिक उत्पादन देने वाली आधुनिक तकनीक अपनाने की सलाह दी।



राष्ट्रपति ने कहा कि प्रत्येक नागरिक को समझना चाहिए कि हम जल जैसे अनमोल संसाधन का उपयोग कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि आदिवासी समुदाय जल सहित सभी प्राकृतिक संसाधनों को अत्यंत सम्मान के साथ देखते हैं—यह सोच सभी नागरिकों की जीवनशैली का हिस्सा होनी चाहिए। उन्होंने व्यक्तिगत और सामूहिक रूप से जल संरक्षण के प्रति सतर्क रहने और जन-जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि जल संरक्षण तभी संभव है जब हर व्यक्ति, परिवार, समाज और सरकार मिलकर काम करे।

अंत में राष्ट्रपति ने कहा कि राष्ट्रीय जल पुरस्कारों का उद्देश्य लोगों में जल के महत्व के प्रति जागरूकता बढ़ाना और उन्हें सर्वोत्तम जल उपयोग प्रथाएँ अपनाने के लिए प्रेरित करना है। जल संचय–जन भागीदारी पहल सामुदायिक सहभागिता से भूजल पुनर्भरण के विविध, स्केलेबल और अनुकरणीय मॉडल विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।





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