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IFFI 2025 में पहली बार रेड कार्पेट पर ‘Handloom Sarees in Motion: 70MM on Runway’ फैशन शो आयोजित

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अंतर्राष्ट्रीय फिल्म समारोह (IFFI) 2025 के रेड कार्पेट पर इस वर्ष एक अनोखा और पहली बार होने वाला अनुभव देखने को मिला, जहाँ वस्त्र मंत्रालय के हैंडलूम विभाग (DC Handlooms) ने सिनेमा, संस्कृति और कुट्योर (Couture) को एक साथ मंच पर उतारा।

यह फैशन शो “Handloom Sarees in Motion: 70MM on Runway” भारतीय हैंडलूम को समर्पित एक सामाजिक पहल थी।

दो बार प्रस्तुत किए गए इस 15 मिनट के भव्य फैशन शो ने दर्शकों को भारतीय सिनेमा की यात्रा पर ले जाते हुए, हर युग को एक सााड़ी के माध्यम से जीवंत किया। हर सेगमेंट में उस दौर की फिल्मों के संगीत का उपयोग किया गया, जिससे पूरा रेड कार्पेट नॉस्टेल्जिया, कला और साड़ी की कालातीत गरिमा से भर उठा।

1940 के शास्त्रीय अंदाज़ से लेकर 2020 के आधुनिक और एक्सपेरिमेंटल स्टाइल तक—भारतीय सिनेमा की सभी प्रसिद्ध झलकियाँ साड़ियों के माध्यम से प्रदर्शित की गईं। शो ने पुराने दौर की कोमल हीरोइनों, 70 के दशक की बेबाक शैली, 90 के रोमांटिक दौर और आज के ग्लैमरस युग की यादों को फिर से जीवंत किया।

40 से अधिक हैंडलूम साड़ियों का भव्य प्रदर्शन

शो में देशभर से आई 40 से अधिक साड़ियों को प्रदर्शित किया गया, जिनमें शामिल थीं:

  • तसर रेशम – छत्तीसगढ़

  • इकत पश्मीना – जम्मू-कश्मीर

  • बनारसी बुटीदार एवं मुबारकपुर लच्छा बुता – उत्तर प्रदेश

  • चंदेरी – मध्य प्रदेश

  • घीचा सिल्क – छत्तीसगढ़

  • वेंकटागिरी – आंध्र प्रदेश

  • कुथमपुल्ली – केरल

इसके अलावा कई साड़ियों पर राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त कलाकारों द्वारा हाथ से पेंट की गई कलाओं को भी प्रदर्शित किया गया, जिनमें शामिल थीं:

  • पिचवाई (राजस्थान)

  • पत्ताचित्र (ओडिशा)

  • वारली (महाराष्ट्र)

  • पेन-कलमकारी (आंध्र प्रदेश)

  • मधुबनी (बिहार)

  • गोंड एवं भील कला (झारखंड/मध्य प्रदेश)

सम्मानित अतिथियों के वक्तव्य

एनएफडीसी के प्रबंध निदेशक प्रकाश मगदुम ने कहा:

“IFFI रचनात्मकता का उत्सव है। इस वर्ष मुख्य रेड कार्पेट पर हैंडलूम आधारित फैशन शो ने भारत की सांस्कृतिक गहराई और सिनेमा व शिल्प कौशल के अद्भुत संगम को दर्शाया।”

हैंडलूम विकास आयुक्त डॉ. एम बीना ने कहा:

“साड़ी केवल परिधान नहीं बल्कि दर्शन है—कला का, ग्रामीण जीवन का, परंपरा का। IFFI के माध्यम से हमने वैश्विक दर्शकों के सामने भारत के बुनकरों और कलाओं की विरासत को प्रस्तुत किया है।”


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