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अबूझमाड़ में फैल रही है शिक्षा की रौशनी

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आज़ादी के बाद पहली बार अबूझमाड़ के अति दूरस्थ गांव कारकाबेड़ा में खुला नया प्राथमिक स्कूल

 नदी-नाले और पहाड़ पार कर 5 घंटे पैदल चलकर अधिकारियों ने कराया दाखिला

रायपुर- देश के गृह मंत्री अमित शाह के कुशल नेतृत्व एवं मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के सुशासन में छत्तीसगढ़ का अबूझमाड़ क्षेत्र अब नक्सलवाद के अंधेरे से निकलकर शिक्षा की नई रोशनी की ओर बढ़ रहा है। इसका सबसे सुखद और ऐतिहासिक परिणाम नारायणपुर जिले के अति दूरस्थ ग्राम कारकाबेड़ा में देखने को मिला है, जहां आजादी के बाद पहली बार किसी स्कूल की स्थापना हुई है। कभी नक्सलियों का गढ़ रहे इस इलाके में अब बच्चों को बंदूक की जगह कलम और किताबें मिल रही हैं।

जनसमस्या शिविर से खुला विकास का रास्ता

​हाल ही में अबूझमाड़ के सुदूर क्षेत्र कोड़ेनार में एक जनसमस्या निवारण शिविर का आयोजन किया गया था। इस शिविर में कारकाबेड़ा के ग्रामीणों ने अपने बच्चों के भविष्य के लिए गांव में ही स्कूल खोलने की पुरजोर मांग की थी। कलेक्टर  ने मामले की संवेदनशीलता और महत्ता को देखते हुए तत्परता दिखाई और जिला शिक्षा अधिकारी (DEO)  को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए।

​5 घंटे की पैदल यात्रा और सर्वे

​कलेक्टर के निर्देश पर शिक्षा विभाग की टीम ने सबसे पहले कारकाबेड़ा गांव का सर्वे किया, जिसमें 20 बच्चे प्राथमिक शिक्षा के योग्य पाए गए। इसके बाद खंड शिक्षा अधिकारी,खंड स्रोत समन्वयक, संकुल समन्वयक, सरपंच और शिक्षकों की संयुक्त टीम ने अदम्य साहस का परिचय दिया। यह टीम दुर्गम रास्तों, कई नदी-नालों और पहाड़ियों को पार करते हुए लगभग 5 घंटे की कठिन पैदल यात्रा कर कारकाबेड़ा पहुंची और नवीन प्राथमिक शाला का औपचारिक शुभारंभ किया।

मुफ्त गणवेश और शिक्षण सामग्री का वितरण

​स्कूल के पहले ही दिन बच्चों के चेहरों पर एक अलग ही चमक थी। जिला प्रशासन द्वारा स्कूल प्रारंभ होने के साथ ही सभी 20 बच्चों को ​निःशुल्क गणवेश,​पाठ्यपुस्तकें और स्लेट,पेंसिल, श्यामपट्ट (ब्लैकबोर्ड) तथा अन्य आवश्यक शैक्षणिक सामग्रियां उपलब्ध कराई गईं।

कारकाबेड़ा सरपंच रामूराम वड्डे ने कहा कि गांव में स्कूल खुलना हमारे लिए किसी सपने के सच होने जैसा है। अब हमारे बच्चों को पढ़ने के लिए जान जोखिम में डालकर दूर नहीं जाना पड़ेगा।

अतिथि शिक्षक की व्यवस्था,पड़ोसी गांवों को भी मिलेगा लाभ

​वर्तमान में इस स्कूल के सुचारू संचालन के लिए जिला प्रशासन द्वारा एक स्थानीय अतिथि शिक्षक की व्यवस्था की गई है। अधिकारियों के मुताबिक, आने वाले समय में कारकाबेड़ा के इस स्कूल का लाभ आसपास के अन्य दूरस्थ गांवों, जैसे मरकूड़ के बच्चों को भी मिलेगा।

नक्सलवाद के खात्मे के बाद अबूझमाड़ के इस अंदरूनी इलाके में स्कूल खुलना केवल एक प्रशासनिक उपलब्धि नहीं, बल्कि क्षेत्र में शिक्षा के विस्तार और शांति बहाली की दिशा में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है।

विशेष लेख-नक्सल मुक्त बीजापुर में विकास की नई दस्तक

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चार दशकों बाद फिर सजी पुजारी कांकेर और कोण्डापल्ली की साप्ताहिक बाजारें

बंद पड़े हाट-बाजारों में लौटी रौनक, आदिवासी अंचलों की अर्थव्यवस्था को मिला नया जीवन

रायपुर- कभी माओवाद के आतंक और भय के कारण वीरान पड़े बीजापुर जिले के सुदूर वनांचल अब विकास, विश्वास और नई उम्मीदों की मिसाल बनते जा रहे हैं। नक्सलवाद से मुक्ति के बाद जिले के अंदरूनी क्षेत्रों में सामान्य जनजीवन तेजी से पटरी पर लौट रहा है। इसका सबसे जीवंत उदाहरण उसूर ब्लॉक के आवापल्ली क्षेत्र अंतर्गत पुजारी कांकेर और कोण्डापल्ली के साप्ताहिक बाजार हैं, जहां लगभग चार दशकों बाद फिर से रौनक लौट आई है।

एक समय ऐसा था जब इन क्षेत्रों में भय और असुरक्षा के कारण ग्रामीणों की आवाजाही लगभग बंद हो चुकी थी। माओवाद के प्रभाव के चलते यहां के पारंपरिक साप्ताहिक बाजार पूरी तरह ठप पड़ गए थे। लेकिन अब नक्सल मुक्त वातावरण बनने के बाद बाजारों में फिर से चहल-पहल दिखाई देने लगी है। ग्रामीण, व्यापारी और आदिवासी बड़ी संख्या में यहां पहुंच रहे हैं, जिससे क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिली है।

बस्तर की पहचान हैं साप्ताहिक हाट-बाजार

बस्तर अंचल केवल अपनी प्राकृतिक सुंदरता और खनिज संपदा के लिए ही नहीं, बल्कि वनोपज आधारित समृद्ध परंपराओं के लिए भी देशभर में जाना जाता है। यहां के साप्ताहिक हाट-बाजार स्थानीय संस्कृति, सामाजिक जीवन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाते हैं।

बीजापुर जिला चारों ओर से घने वनांचलों से घिरा हुआ है, जहां आदिवासी समुदाय का जीवन जंगल और वनोपज पर आधारित है। इमली, महुआ, टोरा, चिरौंजी, तेंदू जैसी बहुमूल्य वनोपज यहां के लोगों की आय का प्रमुख स्रोत हैं। ग्रामीण इन उत्पादों का संग्रहण कर साप्ताहिक बाजारों में विक्रय करते हैं तथा बदले में दैनिक जरूरत की वस्तुएं खरीदते हैं।

इन बाजारों का महत्व केवल व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सामाजिक मेल-मिलाप, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और सामुदायिक जीवन का भी केंद्र होते हैं।

चार दशकों तक सन्नाटा, अब लौट रही जीवन की रफ्तार

उसूर ब्लॉक के पुजारी कांकेर और कोण्डापल्ली के साप्ताहिक बाजार कभी आसपास के अनेक गांवों की आर्थिक धुरी हुआ करते थे। लेकिन माओवादी गतिविधियों और असुरक्षा के माहौल ने इन बाजारों की रौनक छीन ली। धीरे-धीरे यहां व्यापार बंद हो गया और क्षेत्र आर्थिक रूप से प्रभावित होने लगा।

अब जब क्षेत्र पूरी तरह नक्सल मुक्त हो चुका है, तब वर्षों से बंद पड़े बाजारों में फिर से दुकानें सजने लगी हैं। ग्रामीण दूर-दराज के गांवों से बाजार पहुंच रहे हैं। महिलाएं वनोपज लेकर आ रही हैं तो छोटे व्यापारी दैनिक उपयोग की सामग्री बेचने पहुंच रहे हैं। बाजारों में फिर से स्थानीय बोली, पारंपरिक वेशभूषा और आदिवासी संस्कृति की जीवंत झलक दिखाई देने लगी है।

आर्थिक आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते कदम

पुनः प्रारंभ हुए ये साप्ताहिक बाजार स्थानीय आदिवासी समुदाय के लिए आर्थिक संबल बनकर उभर रहे हैं। ग्रामीणों को अब अपने उत्पाद बेचने के लिए दूरस्थ क्षेत्रों पर निर्भर नहीं रहना पड़ रहा है। इससे समय और संसाधनों की बचत हो रही है तथा स्थानीय स्तर पर आय के नए अवसर भी बढ़ रहे हैं।

बाजारों के पुनर्जीवित होने से छोटे व्यापारियों, किसानों और वनोपज संग्राहकों को सीधा लाभ मिल रहा है। साथ ही क्षेत्र में परिवहन, छोटे व्यवसाय और अन्य आर्थिक गतिविधियों को भी गति मिल रही है।

शांति और विकास का नया प्रतीक बन रहा बीजापुर

बीजापुर में लौटती बाजार संस्कृति यह दर्शाती है कि शांति स्थापित होने पर विकास की संभावनाएं किस प्रकार तेजी से आकार लेती हैं। सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और बाजार जैसी मूलभूत सुविधाओं के विस्तार से अब वनांचल के गांव भी मुख्यधारा से जुड़ रहे हैं।

पुजारी कांकेर और कोण्डापल्ली के बाजारों में लौटती रौनक केवल व्यापार की वापसी नहीं, बल्कि विश्वास, सुरक्षा और समृद्ध भविष्य की वापसी का प्रतीक है। यह बदलता हुआ बीजापुर अब संघर्ष की नहीं, बल्कि विकास और आत्मनिर्भरता की नई कहानी लिख रहा है।

गृह मंत्री अमित शाह ने जनगणना-2027 के लिए डिजिटल टूल्स और मैस्कॉट “प्रगति” व “विकास” का किया अनावरण

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नई दिल्ली में गृह मंत्री अमित शाह ने जनगणना-2027 के लिए चार डिजिटल टूल्स का सॉफ्ट लॉन्च किया और आधिकारिक रूप से दो मैस्कॉट — “प्रगति” (महिला) और “विकास” (पुरुष) — का अनावरण किया। इस अवसर पर कई वरिष्ठ अधिकारी, जिनमें केंद्रीय गृह सचिव तथा भारत के रजिस्ट्रार जनरल और जनगणना आयुक्त भी उपस्थित थे।

जनगणना-2027 के लिए उन्नत डिजिटल प्लेटफॉर्म का विकास Centre for Development of Advanced Computing (C-DAC) द्वारा किया गया है, जिससे देशभर में गणना कार्य को सुगम और अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा।

केंद्र सरकार ने जनगणना 2027 आयोजित करने के अपने इरादे की औपचारिक घोषणा 16 जून 2025 को राजपत्र अधिसूचना जारी कर की थी। यह दुनिया की सबसे बड़ी जनगणना प्रक्रिया होगी और पहली बार इसे डिजिटल माध्यम से संचालित किया जाएगा। साथ ही पहली बार नागरिकों को सेल्फ-एन्यूमरेशन (Self-Enumeration) का विकल्प भी दिया जाएगा।

मैस्कॉट “प्रगति” और “विकास”

जनगणना-2027 के लिए लॉन्च किए गए मैस्कॉट “प्रगति” (महिला गणनाकर्मी) और “विकास” (पुरुष गणनाकर्मी) को जनगणना के मित्रवत और जनसुलभ प्रतीक के रूप में प्रस्तुत किया गया है। ये दोनों मैस्कॉट भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने के संकल्प में महिलाओं और पुरुषों की समान भागीदारी का भी प्रतीक हैं। इनके माध्यम से जनगणना से जुड़ी जानकारी, उद्देश्य और संदेश समाज के विभिन्न वर्गों तक प्रभावी और सरल तरीके से पहुँचाए जाएंगे।

चार डिजिटल टूल्स

जनगणना-2027 में पहली बार डिजिटल तकनीक का व्यापक उपयोग किया जाएगा। इस अवसर पर चार प्रमुख डिजिटल प्लेटफॉर्म लॉन्च किए गए—

1. Houselisting Block Creator (HLBC) Web Application

यह वेब-मैप आधारित एप्लिकेशन चार्ज अधिकारियों को सैटेलाइट इमेजरी की सहायता से डिजिटल रूप में हाउस-लिस्टिंग ब्लॉक बनाने की सुविधा देगा, जिससे पूरे देश में भौगोलिक कवरेज मानकीकृत किया जा सकेगा।

2. HLO Mobile Application

यह एक सुरक्षित ऑफलाइन मोबाइल एप्लिकेशन है, जिसके माध्यम से गणनाकर्मी घर-घर जाकर हाउस-लिस्टिंग डेटा एकत्र कर सर्वर पर अपलोड करेंगे। यह ऐप केवल CMMS पोर्टल पर पंजीकृत गणनाकर्मियों द्वारा ही उपयोग किया जा सकेगा और यह Android तथा iOS दोनों प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध होगा। ऐप 16 क्षेत्रीय भाषाओं में संचालित किया जा सकेगा।

3. Self-Enumeration (SE) Portal

पहली बार नागरिकों को सेल्फ-एन्यूमरेशन की सुविधा दी जा रही है, जिसके तहत परिवार का कोई पात्र सदस्य घर से ही ऑनलाइन अपनी जानकारी दर्ज कर सकेगा। सफलतापूर्वक जानकारी दर्ज करने पर एक Self-Enumeration ID (SE ID) उत्पन्न होगी, जिसे बाद में गणनाकर्मी सत्यापित करेंगे।

4. Census Management and Monitoring System (CMMS) Portal

यह एक केंद्रीकृत वेब-आधारित प्लेटफॉर्म है, जिसके माध्यम से जनगणना से जुड़ी सभी गतिविधियों की योजना, प्रबंधन और निगरानी की जाएगी। जिला, उप-जिला और राज्य स्तर के अधिकारी इस डैशबोर्ड के माध्यम से रियल-टाइम में प्रगति और फील्ड प्रदर्शन की निगरानी कर सकेंगे।

दो चरणों में होगी जनगणना

जनगणना-2027 को दो चरणों में आयोजित किया जाएगा—

पहला चरण: हाउस-लिस्टिंग और हाउसिंग जनगणना (HLO)

इस चरण में घरों की स्थिति और घरेलू सुविधाओं से संबंधित जानकारी एकत्र की जाएगी। इसकी अधिसूचना 7 जनवरी 2026 को जारी की गई थी। यह सर्वेक्षण 1 अप्रैल 2026 से 30 सितंबर 2026 के बीच राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों द्वारा निर्धारित 30-दिवसीय अवधि में किया जाएगा। इसके पहले 15 दिनों की वैकल्पिक सेल्फ-एन्यूमरेशन अवधि भी होगी।

दूसरा चरण: जनसंख्या गणना (Population Enumeration)

यह चरण पूरे भारत में फरवरी 2027 में आयोजित होगा। वहीं लद्दाख और जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश तथा उत्तराखंड के हिमाच्छादित क्षेत्रों में यह प्रक्रिया सितंबर 2026 में की जाएगी। इस चरण में जाति से संबंधित प्रश्न भी शामिल किए जाएंगे।

जनगणना-2027 के लिए देशभर में 30 लाख से अधिक गणनाकर्मी, पर्यवेक्षक और अन्य अधिकारी तैनात किए जाएंगे, जो मोबाइल एप्लिकेशन के माध्यम से घर-घर जाकर डेटा संग्रह करेंगे।

सरकार का मानना है कि तकनीक और समावेशिता का यह संयोजन जनगणना-2027 को अधिक सटीक, सुरक्षित और व्यापक बनाएगा।

जनगणना-2027 की संदर्भ तिथि अधिकांश राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के लिए 1 मार्च 2027 को 00:00 बजे होगी, जबकि लद्दाख और हिमाच्छादित क्षेत्रों के लिए यह 1 अक्टूबर 2026 को 00:00 बजे निर्धारित की गई है।

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