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पटेल समाज ने सब्जी वितरण कर दिया शाकाहार का संदेश,गृहमंत्री, सांसद, विधायक सहित गणमान्य नागरिकों ने की सराहना

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रायपुर- नगर घड़ी चौक रायपुर में सोमवार को शाकम्भरी जयंती के अवसर पर सब्जी दान कार्यक्रम का आयोजन किया गया। सब्जी वितरण करके शाकाहार का संदेश दिया गया।छत्तीसगढ़ मरार पटेल समाज के तत्वाधान में माता शाकंभरी के प्राक्टय दिवस के उपलक्ष्य में  आयोजित कार्यक्रम में गृहमंत्री विजय शर्मा, रायपुर लोकसभा सांसद बृजमोहन अग्रवाल, विधायक सुनील सोनी, ने शरीक होकर सब्जी वितरण किया।

इस अवसर पर गृहमंत्री विजय शर्मा ने शाकाहार को प्रोत्साहित करने में समाज की भूमिका की सराहना की। उन्होंने कहा कि परंपरागत सब्जी-भाजी की खेती के साथ-साथ सहकारिता के माध्यम से अपने कारोबार को आगे बढ़ाएं। उन्होंने सब्जी को सुरक्षित रखने के लिए कोल्ड स्टोरेज बनाने के लिए प्रेरित किया। 

समाज के जिलाध्यक्ष ईश्वर पटेल की मांग पर गृहमंत्री ने माता शाकंभरी की मूर्ति स्थापना की घोषणा की।इस अवसर पर सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि मरार पटेल समाज मिट्टी से जुड़ा समाज है।लोगो के लिए शाकाहार उत्पन्न करने का पुनित कार्य करते हैं। डाक्टर भी लोगो को फल सब्जी खाने को कहता है।इस तरह यह समाज सर्व समाज के लिए कार्य करता है।

वही रायपुर जिलाध्यक्ष ईश्वर पटेल ने बताया विगत 6 वर्षों से पटेल समाज द्वारा शाकम्भरी जयंती के अवसर पर नगर घड़ी चौक रायपुर में प्रसाद स्वरूप फल और सब्जी का वितरण किया जाता है।जिससे कि लोग  शाकाहार की ओर उन्मुख हो।इस मौके पर सभी जनप्रतिनिधियों और समाज प्रमुखों ने सभा को संबोधित किया।

इस मौके पर आयोजकों ने समाज के प्रतिभाशाली लोगों को सम्मानित किया। कार्यक्रम में प्रमुख रूप से परदेशी पटेल राजेन्द्र पटेल, पतिराम पटेल, ब्रम्ह देव पटेल, कृष्ण कुमार पाटिल,टीकम पटेल, समाजसेवी आनंदराम पत्रकारश्री,धमतरी राज अध्यक्ष सगुन पटेल,जामगांव राज अध्यक्ष कपिल पटेल,पिताम्बर पटेल, महेन्द्र पटेल, शेखर पटेल, दिलीप पटेल, वेदप्रकाश पटेल,देव पटेल सहित बड़ी संख्या समाज की लोगों की उपस्थिति रही।


उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने आचार्य हंसरत्न सुरिश्वरजी महाराज के 180 उपवास पारणा समारोह में शिरकत की

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भारत के उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने आज विज्ञान भवन, नई दिल्ली में जैन आचार्य हंसरत्न सुरिश्वरजी महाराज जी के अष्टम 180 उपवास पारणा समारोह में शिरकत की।

सभा को संबोधित करते हुए, उपराष्ट्रपति ने दिव्य तपस्वी आचार्य हंसरत्न सुरिश्वरजी महाराज के पवित्र महापरना में भाग लेने पर अपनी गहरी श्रद्धा व्यक्त की।

जैन धर्म, जो दुनिया के सबसे प्राचीन धर्मों में से एक है, के महत्वपूर्ण योगदान को उजागर करते हुए, राधाकृष्णन ने कहा कि इसके उपदेश — अहिंसा, सत्य, अपरिग्रह और अनेकांतवाद — ने भारत और विश्व पर स्थायी प्रभाव डाला है। उन्होंने कहा कि अहिंसा, जिसे महात्मा गांधी ने भारत के स्वतंत्रता संग्राम में अपनाया, आज भी वैश्विक शांति आंदोलनों को प्रेरित करता है। उपराष्ट्रपति ने यह भी बताया कि जैन धर्म का शाकाहार, प्राणियों के प्रति करुणा और सतत जीवन जीने का तरीका विश्वभर में पर्यावरणीय जिम्मेदारी का आदर्श माना जाता है।

अपने व्यक्तिगत अनुभव को साझा करते हुए, राधाकृष्णन ने कहा कि उन्होंने 25 साल पहले काशी यात्रा के दौरान शाकाहार अपनाया, और यह उन्हें विनम्रता, परिपक्वता और सभी प्राणियों के प्रति प्रेम का भाव विकसित करने में मदद करता है।

उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार के प्रयासों की सराहना की, जिनके तहत प्राकृत भाषा को ‘क्लासिकल भाषा’ का दर्जा दिया गया और ज्ञान भारत मिशन जैसी पहलों के माध्यम से जैन पांडुलिपियों का संरक्षण किया गया।

उपराष्ट्रपति ने तमिलनाडु में जैन धर्म के ऐतिहासिक प्रसार और तमिल संस्कृति पर इसके व्यापक प्रभाव पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि जैन धर्म ने संगम और पोस्ट-संगम काल में तमिल साहित्य में महत्वपूर्ण योगदान दिया है, जिसमें इलंगो अदिगल का सिलप्पाधिकरम और कोंगु वेलिर का पेरुंगथाई जैसी कृतियाँ शामिल हैं, जो अहिंसा, सत्य और त्याग के दार्शनिक और नैतिक आदर्शों को दर्शाती हैं। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि तिरुक्कुरल और संगम साहित्य पर जैन धर्म का प्रभाव दिखाई देता है।राधाकृष्णन ने तमिलनाडु में कई जैन मठों की उपस्थिति का भी उल्लेख किया, जो ऐतिहासिक रूप से शिक्षा के केंद्र रहे हैं।

राधाकृष्णन ने आचार्य हंसरत्न सुरिश्वरजी महाराज की प्रशंसा की, जिन्होंने दिखाया कि सच्ची शक्ति धन या पद में नहीं, बल्कि संयम, करुणा और अनुशासन में निहित है। उन्होंने आचार्य जी के “संस्कृति बचाओ, परिवार बचाओ, राष्ट्र बनाओ” अभियान की सराहना की, जो समाज को मूल्य बनाए रखने, परिवार मजबूत करने और राष्ट्र को सशक्त बनाने के लिए प्रेरित करता है।

आचार्य हंसरत्न सुरिश्वरजी महाराज एक सम्मानित जैन साधु हैं, जो अपने आध्यात्मिक अनुशासन और दीर्घकालिक तपस्या के लिए जाने जाते हैं। महापरना उनके 180 दिन के उपवास के औपचारिक समापन का प्रतीक है, जिसे उन्होंने आठवीं बार किया है। यह उनके समर्पण, अनुशासन और जैन धर्म तथा नैतिक मूल्यों के प्रचार के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है। यह आयोजन श्रद्धालुओं और व्यापक समुदाय के लिए विश्वास, आत्मसंयम और प्रेरणा का प्रतीक है।



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