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पीएम मोदी का उज्बेकिस्तान दौरा, भारत-उज्बेकिस्तान संबंधों को नई मजबूती देने पर जोर

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इन दिनों उज्बेकिस्तान और किर्गिस्तान के चार दिवसीय दौरे पर हैं। शनिवार को ताशकंद पहुंचने पर उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शावकत मिर्जियोयेव ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। पीएम मोदी का उज्बेकिस्तान दौरा 29 और 30 अगस्त को है, जिसके बाद वे किर्गिस्तान जाएंगे और वहां शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे।

ताशकंद में पीएम मोदी और राष्ट्रपति मिर्जियोयेव के बीच व्यापार, ऊर्जा, सुरक्षा, डिजिटल कनेक्टिविटी और रणनीतिक सहयोग जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हो रही है। भारत का लक्ष्य मध्य एशिया के साथ अपने रणनीतिक और आर्थिक रिश्तों को और मजबूत करना है।

दिल्ली में फायर सेफ्टी नियम हुए सख्त

इसी बीच राजधानी दिल्ली में फायर सेफ्टी को लेकर नए नियम लागू किए गए हैं। दिल्ली सरकार ने Fire Service Rules में बदलाव करते हुए इमारतों की सुरक्षा के लिए कई नए प्रावधान जोड़े हैं। इनमें फायर इंजन के लिए कम से कम 6 मीटर का रास्ता, फायर लिफ्ट, सुरक्षित निकासी व्यवस्था, फायर और स्मोक बैरियर तथा अन्य सुरक्षा उपायों पर जोर दिया गया है।

सरकार का कहना है कि नए नियमों का उद्देश्य इमारतों में आग लगने की स्थिति में लोगों की सुरक्षा बढ़ाना और फायर सर्विस की पहुंच को बेहतर बनाना है।

आगे की नजर SCO समिट पर

पीएम मोदी के अगले चरण के दौरे में किर्गिस्तान में SCO शिखर सम्मेलन शामिल है। सम्मेलन में आतंकवाद, क्षेत्रीय सुरक्षा, कनेक्टिविटी और आर्थिक सहयोग जैसे मुद्दे प्रमुख रहेंगे। पीएम मोदी ने SCO के मंच से आतंकवाद, अलगाववाद और उग्रवाद के खिलाफ सहयोग बढ़ाने की बात कही है।

प्रधानमंत्री मोदी का मध्य एशिया दौरा भारत की रणनीतिक कूटनीति के लिहाज से अहम माना जा रहा है, वहीं दिल्ली में नए फायर सेफ्टी नियम राजधानी की इमारतों में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम हैं।

भारत-उज़्बेकिस्तान के संबंध ऐतिहासिक और सभ्यतागत विरासत पर आधारित: लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला

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लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि भारत और उज़्बेकिस्तान के बीच सदियों पुराने ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और सभ्यतागत संबंध हैं, जो दोनों देशों की स्थायी मित्रता की मजबूत नींव हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि बढ़ता राजनीतिक विश्वास, व्यापार एवं निवेश में विस्तार तथा लोगों के बीच बढ़ते संपर्क आने वाले वर्षों में द्विपक्षीय साझेदारी को और अधिक सशक्त बनाएंगे।


बिरला ने ये विचार उज़्बेकिस्तान के विदेश मंत्री महामहिम बख्तियोर सईदोव से संसद भवन में हुई मुलाकात के दौरान व्यक्त किए। दोनों नेताओं के बीच भारत–उज़्बेकिस्तान संबंधों, संसदीय सहयोग, व्यापार एवं निवेश, शिक्षा, संस्कृति तथा क्षेत्रीय और वैश्विक महत्व के विभिन्न मुद्दों पर व्यापक चर्चा हुई।

भारत की लोकतांत्रिक परंपराओं की सराहना

बिरला ने कहा कि भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है, जहां की संसदीय व्यवस्था देश की विविधता और जनता की आकांक्षाओं का प्रभावी प्रतिनिधित्व करती है। उन्होंने बताया कि 543 सदस्यीय लोकसभा देशभर के करोड़ों नागरिकों की आवाज़ का प्रतिनिधित्व करती है तथा भारत की बहुदलीय व्यवस्था सभी विचारों को समान अवसर प्रदान करती है।

उन्होंने यह भी जानकारी दी कि संसद वर्ष में तीन सत्रों में कार्य करती है और वर्तमान मानसून सत्र में राष्ट्रीय महत्व के अनेक विषयों पर गंभीर चर्चा जारी है।

भारत की विकास यात्रा और युवाओं की भूमिका

लोकसभा अध्यक्ष ने भारत की आधारभूत संरचना, डिजिटल नवाचार, प्रौद्योगिकी, कनेक्टिविटी, निवेश और व्यापार के क्षेत्र में हुई उल्लेखनीय प्रगति का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारतीय युवा वैश्विक स्तर पर नेतृत्वकारी भूमिका निभा रहे हैं तथा विश्व की प्रमुख विश्वविद्यालयों और संस्थानों के साथ सहयोग लगातार बढ़ रहा है।

उन्होंने मार्च 2026 में गठित भारत–उज़्बेकिस्तान संसदीय मैत्री समूह का उल्लेख करते हुए विश्वास जताया कि यह पहल दोनों देशों के बीच संसदीय संवाद को नई गति देगी और आर्थिक, शैक्षिक, सांस्कृतिक तथा जन-से-जन संबंधों को और मजबूत करेगी।

आईपीयू सम्मेलन की यादें साझा कीं

बिरला ने अप्रैल 2025 में ताशकंद में आयोजित अंतर-संसदीय संघ (IPU) की 150वीं महासभा में अपनी भागीदारी को याद करते हुए बताया कि इस दौरान उनकी मुलाकात उज़्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शावकत मिर्ज़ियोयेव, सीनेट की अध्यक्ष तंजिला नरबायेवा तथा विधानसभा अध्यक्ष नुरिद्दीन इस्माइलोव से हुई थी। उन्होंने कहा कि इन उच्चस्तरीय मुलाकातों ने दोनों देशों के संसदीय सहयोग को नई दिशा प्रदान की है।

उज़्बेकिस्तान ने भारत के साथ साझेदारी मजबूत करने की जताई प्रतिबद्धता

उज़्बेकिस्तान के विदेश मंत्री बख्तियोर सईदोव ने भारत के साथ राजनीतिक, आर्थिक और संसदीय सहयोग को और मजबूत करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने भारत की लोकतांत्रिक परंपराओं की सराहना करते हुए कहा कि विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र के संसदीय अनुभव से उज़्बेकिस्तान को महत्वपूर्ण सीख मिल सकती है।

उन्होंने व्यापार, निवेश, संयुक्त परियोजनाओं और उभरते क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए साझा दृष्टिकोण अपनाने पर जोर दिया और कहा कि दोनों देशों के बीच संसदीय सहयोग व्यापक रणनीतिक साझेदारी को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगा।

स्मृति प्रकाशन भेंट किया

इस अवसर पर विदेश मंत्री बख्तियोर सईदोव ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को उज़्बेकिस्तान द्वारा आयोजित आईपीयू की 150वीं महासभा पर आधारित एक विशेष स्मारक प्रकाशन भी भेंट किया।

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