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दिल्ली में सड़क अवसंरचना और डी-कंजेशन योजनाओं की समीक्षा, ‘विकसित दिल्ली’ के लक्ष्य पर जोर

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केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग तथा कॉर्पोरेट कार्य राज्य मंत्री हर्ष मल्होत्रा ने दिल्ली में प्रमुख सड़क अवसंरचना परियोजनाओं की प्रगति, यातायात भीड़ कम करने की रणनीतियों तथा विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय से जुड़े मुद्दों की समीक्षा के लिए एक बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में पश्चिमी दिल्ली की सांसद कमलजीत सेहरावत, दिल्ली के मुख्य सचिव, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के सचिव तथा आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय, राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI), दिल्ली सरकार, दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA), दिल्ली पुलिस, दिल्ली जल बोर्ड (DJB), दिल्ली परिवहन विभाग और अन्य संबंधित एजेंसियों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।


चर्चा की शुरुआत करते हुए हर्ष मल्होत्रा ने कहा कि देश की राजधानी होने के नाते दिल्ली को आधुनिक, सुरक्षित, सुगम और पर्यावरण–अनुकूल गतिशीलता प्रणालियों के माध्यम से “विकसित भारत” की भावना को प्रतिबिंबित करना चाहिए।

उन्होंने दोहराया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का दृष्टिकोण दिल्ली को एक आदर्श शहर के रूप में विकसित करना है—जो भीड़–मुक्त, बेहतर रूप से जुड़ा हुआ और भविष्य के लिए तैयार हो, साथ ही नागरिकों और यात्रियों के जीवन स्तर में सुधार लाए।

मल्होत्रा ने कहा कि “विकसित दिल्ली”—जो भीड़–मुक्त, जुड़ी हुई और नागरिक–केंद्रित हो—चार स्तंभों पर आधारित है:

  1. भविष्य की मांग का पूर्वानुमान लगाने वाली अवसंरचना, न कि केवल वर्तमान यातायात पर प्रतिक्रिया करने वाली।

  2. एकीकृत योजना—राजमार्गों को शहरी सड़कों, सार्वजनिक परिवहन और लॉजिस्टिक्स कॉरिडोर से जोड़ना।

  3. सतत गतिशीलता—उत्सर्जन में कमी और स्वच्छ प्रौद्योगिकियों को प्रोत्साहन।

  4. लोगों को प्राथमिकता देने वाला डिजाइन—सुरक्षा, पहुंच और सुविधा पर विशेष जोर।

मंत्री ने UER-II के साथ बनने वाली द्वितीयक सर्विस सड़कों की समीक्षा की, जो आस-पास के गांवों और बस्तियों की कनेक्टिविटी को बेहतर बनाएंगी। अधिकारियों ने बताया कि यह परियोजना वर्तमान में डीपीआर (विस्तृत परियोजना रिपोर्ट) चरण में है। स्थानीय नागरिकों की पहुंच, सुरक्षा और सर्विस सड़कों को कॉलोनियों, वाणिज्यिक क्षेत्रों और संस्थागत परिसरों से जोड़ने से जुड़ी चिंताओं को ध्यान में रखते हुए मंत्री ने DDA को त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए। उन्होंने आश्वासन दिया कि NHAI, कार्यान्वयन एजेंसी के रूप में, अपने दायित्व समयबद्ध रूप से पूरे करेगी। साथ ही, NHAI और DDA को आपसी समन्वय के साथ आसपास के क्षेत्रों में कनेक्टिविटी तेज़ी से बढ़ाने के निर्देश दिए।

मंत्री हर्ष मल्होत्रा और सांसद कमलजीत सेहरावत ने UER-II के खुलने के बाद द्वारका उप-नगर में बढ़ी यातायात भीड़ पर भी ध्यान दिया। यद्यपि UER-II का निर्माण DDA मास्टर प्लान के अनुरूप किया गया है, लेकिन आंतरिक कॉलोनियों और सेक्टरों में यातायात के उचित वितरण के लिए त्वरित योजना और क्रियान्वयन की आवश्यकता बताई गई।

मंत्री ने DDA, नगर निगम दिल्ली (MCD), लोक निर्माण विभाग (PWD) और अन्य हितधारकों को निर्देश दिए कि वे द्वारका उप-नगर में भीड़ कम करने के लिए सभी संभावित विकल्पों पर विचार करें—जैसे आंतरिक सड़कों से होकर गुजरने वाले यातायात का विचलन, हवाई अड्डे और गुरुग्राम कॉरिडोर से बेहतर संपर्क, मेट्रो और सार्वजनिक परिवहन के साथ बेहतर एकीकरण तथा बुद्धिमान यातायात प्रबंधन प्रणालियों को अपनाना।

मंत्री ने दिल्ली के उन तीन प्रमुख सड़क कॉरिडोरों की भी समीक्षा की, जिन्हें रखरखाव, मरम्मत और चौड़ीकरण के लिए PWD से NHAI को सौंपा गया है। ये तीन मार्ग—मथुरा रोड (आश्रम से बदरपुर बॉर्डर), ओल्ड दिल्ली–रोहतक रोड (पंजाबी बाग से टिकरी बॉर्डर) और महरौली–गुरुग्राम रोड (महरौली से गुरुग्राम शहर)—कुल 33 किमी लंबे हैं और दिल्ली को पड़ोसी क्षेत्रों से जोड़ने वाले महत्वपूर्ण मार्ग हैं। मंत्री ने परियोजनाओं को निर्धारित समय-सीमा में पूरा करने के निर्देश दिए।

मंत्री ने दिल्ली डी-कंजेशन प्लान की भी समीक्षा की और कार्यों में तेजी लाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि डी-कंजेशन केवल यातायात कम करने तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे वाहन उत्सर्जन में कमी, यात्रा समय और लॉजिस्टिक्स लागत में कमी, सड़क सुरक्षा में सुधार और आर्थिक उत्पादकता में वृद्धि होती है।

दिल्ली डी-कंजेशन प्लान के प्रमुख घटकों में शामिल हैं:

  • दिल्ली–अमृतसर–कटरा एक्सप्रेसवे (NE-5) का KMPE से UER-II (NH-344M) तक विस्तार, जिससे UER-II और द्वारका एक्सप्रेसवे के माध्यम से दिल्ली, गुरुग्राम और कटरा के बीच सीधा संपर्क मिलेगा।

  • UER-II (NH-344M) का अलीपुर के पास से दिल्ली–देहरादून एक्सप्रेसवे (NH-709B) तक विस्तार, जो NH-44/दिल्ली आउटर–इनर रिंग रोड के लिए बाईपास का कार्य करेगा।

  • द्वारका एक्सप्रेसवे (शिव मूर्ति, महिपालपुर के पास) से नेल्सन मंडेला मार्ग, वसंत कुंज तक सड़क सुरंग का निर्माण, जिससे यातायात का सुगम प्रवाह सुनिश्चित होगा।

मंत्री ने केंद्रीय सड़क अवसंरचना निधि (CRIF) और सेतु बंधन योजना के तहत स्वीकृत परियोजनाओं की प्रगति, धन आवंटन और कार्यान्वयन की भी समीक्षा की। अधिकारियों ने बताया कि कई परियोजनाएं पूर्णता के निकट हैं। मंत्री ने सभी स्वीकृत परियोजनाओं को समयबद्ध रूप से पूरा करने के निर्देश दिए।

बैठक में DDA, NHAI, PWD, दिल्ली पुलिस, दिल्ली जल बोर्ड, दिल्ली परिवहन विभाग, IGL के बीच लंबित अन्य मुद्दों—जैसे भूमि हस्तांतरण और राइट-ऑफ-वे स्वीकृतियां—पर भी विस्तार से चर्चा हुई। इन मुद्दों के शीघ्र समाधान को परियोजनाओं की समय-सीमा बनाए रखने के लिए आवश्यक बताया गया।

मंत्री ने सभी एजेंसियों को स्वीकृतियों के लिए समयबद्ध दृष्टिकोण अपनाने के निर्देश दिए। सभी एजेंसियों ने निरंतर समन्वय बनाए रखने और लंबित मामलों को शीघ्र निर्णय के लिए उच्च स्तर पर उठाने पर सहमति जताई।

दिल्ली के मुख्य सचिव ने कहा कि समन्वित और समयबद्ध क्रियान्वयन से ही नागरिकों को वास्तविक लाभ मिलेगा। उन्होंने दिल्ली सरकार की ओर से पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया।

समापन टिप्पणी में हर्ष मल्होत्रा ने “विकसित दिल्ली — डी-कंजेस्ट दिल्ली” के लक्ष्य को साकार करने के लिए साझेदारी में आगे बढ़ने का संकल्प दोहराया और सभी विभागों की रचनात्मक भागीदारी की सराहना करते हुए दिल्ली के अवसंरचना परिवर्तन में सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की प्रतिबद्धता को पुनः दोहराया।

रायपुर सहित प्रमुख शहरों में रेल संचालन क्षमता दोगुनी करने की ऐतिहासिक योजना

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छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर भी राष्ट्रीय स्तर की इस महत्वाकांक्षी योजना में शामिल

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा – यह निर्णय छत्तीसगढ़ के यात्रियों के लिए बड़ा तोहफ़ा, कनेक्टिविटी और आर्थिक गतिविधियाँ होंगी सुदृढ़

रायपुर- भारतीय रेलवे द्वारा अगले पाँच वर्षों में देश के 48 प्रमुख शहरों में रेलगाड़ियों की संचालन क्षमता को दोगुना करने की जो महत्वाकांक्षी योजना तैयार की गई है, उसमें छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर को भी शामिल किया गया है। इस निर्णय का स्वागत करते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि यह छत्तीसगढ़ के करोड़ों यात्रियों के लिए बड़ा तोहफ़ा है और इससे राज्य की कनेक्टिविटी, व्यापार, उद्योग तथा पर्यटन गतिविधियों को नया आयाम मिलेगा।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारतीय रेलवे का व्यापक आधुनिकीकरण हो रहा है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव द्वारा घोषित इस योजना से छत्तीसगढ़ जैसे उभरते हुए राज्य को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि रायपुर जंक्शन देश के प्रमुख रेल जंक्शनों में से एक है और यहाँ प्रतिदिन लाखों यात्री आवागमन करते हैं। संचालन क्षमता दोगुनी होने से लोगों को अधिक ट्रेनें, बेहतर आवृत्ति तथा कम भीड़भाड़ का लाभ मिलेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि रायपुर के साथ-साथ अन्य औद्योगिक और वाणिज्यिक नगरों के लिए भी यह योजना अत्यंत लाभकारी सिद्ध होगी। रेल संरचना के विस्तार से निवेश, रोजगार और लॉजिस्टिक्स की सुगमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। इससे राज्य की अर्थव्यवस्था को नई रफ्तार मिलेगी।

रेल मंत्रालय द्वारा जारी जानकारी के अनुसार वर्ष 2030 तक संचालन क्षमता दोगुनी करने के लिए मौजूदा टर्मिनलों पर अतिरिक्त प्लेटफार्म, पिट लाइन एवं स्टेबलिंग लाइन का निर्माण,

शहरी क्षेत्र और आसपास नए टर्मिनलों की स्थापना, सिग्नलिंग, यार्ड आधुनिकीकरण और मल्टीट्रैकिंग के माध्यम से अनुभागीय क्षमता में वृद्धि और मेगा कोचिंग कॉम्प्लेक्स एवं आधुनिक रखरखाव सुविधाओं का विकास किया जाएगा।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि रायपुर में इन सुविधाओं के विकसित होने से आम यात्रियों के साथ-साथ छात्रों, मरीजों, उद्योगपतियों और व्यापारियों सभी वर्गों को राहत मिलेगी। राज्य सरकार रेलवे मंत्रालय के साथ समन्वय स्थापित कर इस योजना को तेज गति से धरातल पर उतारने के लिए हर संभव सहयोग देगी।

उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आने वाले वर्षों में छत्तीसगढ़ देश के सर्वाधिक बेहतर रेल संपर्क वाले राज्यों में शामिल होगा और यह परिवर्तन “विकसित भारत @2047” के संकल्प को सशक्त करेगा।

उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ में 41 हजार करोड़ रूपए की लागत से रेलवे सुविधाओं के विस्तार का काम तेजी से चल रहा है, जिसमें रेल्वे ट्रैक का विस्तार, रेलवे लाईन का दोहरीकरण, रेलवे फ्लाई ओवर एवं ब्रिज आदि का निर्माण शामिल है। केंद्र सरकार ने इस साल के बजट में छत्तीसगढ़ राज्य में रेल्वे सुविधा के विकास के लिए  6925 करोड़ रूपए का प्रावधान किया है। इससे राज्य में रेल परियोजनाओं के कामों को तेजी से पूरा करने में मदद मिलेगी। 

छत्तीसगढ़ में रेलवे के उन्नयन और विकास के लिए 41,000 करोड़ रुपए के निवेश से नई रेल लाइनों, रेलवे फ्लाईओवर और अन्य बुनियादी सुविधाओं का तेजी से विस्तार किया जा रहा है। छत्तीसगढ़ राज्य में रेलवे का शत-प्रतिशत इलेक्ट्रिफिकेशन का काम पूरा हो गया है। 

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी और केंद्रीय रेलवे मंत्री अश्विनी वैष्णव जी को छत्तीसगढ़ की रेल कनेक्टिविटी को मजबूत करने के लिए धन्यवाद दिया है। उन्होंने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ को अभूतपूर्व रेल परियोजनाओं की सौगात मिली है। ये परियोजनाएं राज्य के विकास को नई ऊंचाइयों तक ले जाएंगी और जनता को बेहतर रेल सुविधाएं उपलब्ध होंगी।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार और केंद्र सरकार के बीच बेहतर समन्वय के कारण छत्तीसगढ़ में रेल नेटवर्क विस्तार की ऐतिहासिक पहल हो रही है। इससे यात्री सुविधाओं में सुधार के साथ-साथ औद्योगिक, खनिज और आर्थिक विकास को भी बढ़ावा मिलेगा। 

छत्तीसगढ़ में रेलवे नेटवर्क विस्तार से न केवल यात्री परिवहन बल्कि खनिज संपदा और औद्योगिक उत्पादों के निर्यात में तेजी आएगी। इससे राज्य में व्यापार और निवेश को बढ़ावा मिलेगा।छत्तीसगढ़ में रेलवे के दीर्घकालिक विकास के लिए रावघाट-जगदलपुर, धरमजयगढ़-लोहरदगा और खरसिया-नया रायपुर-परमलकसा जैसी कई नई रेल परियोजनाओं पर काम चल रहा है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा है कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ को ऐतिहासिक रेलवे बजट प्राप्त हुआ है। यह राज्य की अर्थव्यवस्था, औद्योगिक विकास और यात्री सुविधाओं को नया आयाम मिलेगा। उन्होंने इसके लिए केंद्र सरकार का आभार जताते हुए कहा है कि छत्तीसगढ़ सरकार इस विकास यात्रा को और आगे ले जाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

गौरतलब है कि रावघाट रेलवे लाइन के अन्तर्गत दल्लीराजहरा-अंतागढ़ (77 किमी) सेक्शन चालू, यात्री ट्रेनों का संचालन शुरू हो चुका है। रावघाट तक विस्तार कार्य प्रगति पर, जिससे भिलाई इस्पात संयंत्र को लौह अयस्क की आपूर्ति होगी और ग्रामीणों को किफायती यातायात सुविधा मिलेगी। इसी तरह के.के. रेल लाइन दोहरीकरण के अन्तर्गत 170 किमी में से 148 किमी का कार्य पूर्ण हो चुका है। इससे बस्तर और दंतेवाड़ा जिले की कनेक्टिविटी बेहतर होगी। आवागमन आसान और माल परिवहन सुविधाजनक हो सकेगा। 4021 करोड़ रूपए की लागत वाली डोंगरगढ़-कवर्धा-कटघोरा रेल लाइन परियोजना की लंबाई 295 किमी है। इसके निर्माण से खनिज परिवहन, यात्री सुविधाएं और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। कोरबा-अंबिकापुर नई रेल लाइन से सरगुजा क्षेत्र को नए विकास की दिशा मिलेगी। गढ़चिरौली-बीजापुर-बचेली 490 किमी लंबी परियोजना के सर्वेक्षण के लिए 12.25 करोड़ रुपए मंजूर हुए हैं। सरडेगा-भालुमुडा डबल लाइन से ओडिशा और छत्तीसगढ़ के बीच रेल कनेक्टिविटी बेहतर होगी।

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