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युवा संगम चरण-VI: हरियाणा के विद्यार्थियों का त्रिपुरा दौरा, सांस्कृतिक और शैक्षणिक आदान-प्रदान को मिला बढ़ावा

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त्रिपुरा के राज्यपाल इंद्र सेना रेड्डी नल्लू ने 26 मई 2026 को अगरतला स्थित लोक भवन में हरियाणा के छात्रों के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की। यह प्रतिनिधिमंडल ‘युवा संगम चरण-VI’ कार्यक्रम के तहत त्रिपुरा के दौरे पर आया हुआ था।

छात्रों का स्वागत और अनुभव

यह प्रतिनिधिमंडल, जिसका नेतृत्व राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, कुरुक्षेत्र ने किया, सबसे पहले राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, अगरतला पहुंचा, जहां उनका गर्मजोशी से स्वागत किया गया।

राज्यपाल से मुलाकात के दौरान छात्रों ने त्रिपुरा की प्रशासनिक व्यवस्था, शासन की प्रमुख पहल और विकास प्राथमिकताओं के बारे में जानकारी प्राप्त की। इस बातचीत से उन्हें राज्य की सांस्कृतिक विविधता और संस्थागत ढांचे को समझने का अवसर मिला।

सांस्कृतिक और शैक्षणिक भ्रमण

कार्यक्रम के तहत छात्रों ने त्रिपुरा के कई ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और प्रशासनिक स्थलों का दौरा किया। उन्होंने राज्य की समृद्ध परंपराओं, विरासत और विकास यात्रा को नजदीक से जाना।

इसके अलावा, छात्रों ने त्रिपुरा के प्रसिद्ध मंदिरों का भी दर्शन किया, जहां उन्हें राज्य की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक धरोहर का अनुभव हुआ।

‘युवा संगम’ पहल

Yuva Sangam Phase VI की शुरुआत उच्च शिक्षा विभाग, शिक्षा मंत्रालय द्वारा की गई है। इसका उद्देश्य राष्ट्रीय एकता, सांस्कृतिक सद्भाव और भावनात्मक एकीकरण को बढ़ावा देना है।

यह कार्यक्रम 22 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के बीच युवाओं के आदान-प्रदान के माध्यम से भारत की विविधता, नवाचार और राष्ट्र निर्माण की भावना को मजबूत करने पर केंद्रित है।

त्रिपुरा के उदयपुर में क्रेडिट आउटरीच कार्यक्रम: 4,577 लाभार्थियों को ₹105.40 करोड़ के ऋण वितरित

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26 मई 2026 को त्रिपुरा के गोमती जिले के उदयपुर में एक क्रेडिट आउटरीच कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसकी अध्यक्षता वित्तीय सेवा विभाग (DFS), वित्त मंत्रालय के सचिव एम. नगराजू ने की।

इस कार्यक्रम के दौरान उदयपुर में विभिन्न बैंकों द्वारा 4,577 लाभार्थियों को ₹105.40 करोड़ के ऋण वितरित किए गए। NABARD और SIDBI ने विभिन्न परियोजनाओं के लिए ₹2 करोड़ से अधिक की मंजूरी की घोषणा की। बैंकों ने स्कूलों और आंगनवाड़ियों के बुनियादी ढांचे के सुधार के लिए CSR गतिविधियों के तहत भी सहायता स्वीकृत की। MSME क्षेत्र को बढ़ावा देने और क्षेत्रीय उधारकर्ताओं को समर्थन देने के लिए उदयपुर में SIDBI की एक क्लस्टर डेवलपमेंट शाखा का उद्घाटन किया गया, जबकि DFS द्वारा “Financial Inclusion 2.0 Vision Document” भी जारी किया गया।

कार्यक्रम में वित्तीय समावेशन पर बोलते हुए सचिव (DFS) ने कहा कि वित्तीय समावेशन केवल बैंक खाते खोलने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य लोगों के जीवन में वास्तविक परिवर्तन लाना है। उन्होंने ऋण के उत्पादक उपयोग और उद्यमिता आधारित रोजगार सृजन के महत्व पर जोर दिया और लाभार्थियों से अपील की कि वे ऋण का सही उपयोग करें ताकि उनके खाते NPA (Non-Performing Assets) में न बदलें। उन्होंने यह भी कहा कि सरकारी और बैंकिंग योजनाओं के तहत सहायता प्राप्त करने वाले लाभार्थियों को व्यवहार्य आर्थिक गतिविधियाँ स्थापित करनी चाहिए और वित्तीय अनुशासन बनाए रखना चाहिए।

इस कार्यक्रम में त्रिपुरा के वित्त सचिव प्रशांत गोयल, SBI के MD अश्विनी कुमार तिवारी, PNB के ED एम. परमसिवम, NABARD के DMD जी. रावत सहित DFS, राज्य सरकार, जिला प्रशासन और बैंकों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

प्रधानमंत्री मोदी ने मणिपुर, मेघालय और त्रिपुरा के स्थापना दिवस पर दी शुभकामनाएं

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज पूर्वोत्तर भारत के तीन राज्यों—मणिपुर, मेघालय और त्रिपुरा—के स्थापना दिवस के अवसर पर वहां के लोगों को हार्दिक शुभकामनाएं दीं। उन्होंने क्षेत्र के सभी भाई-बहनों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए कहा कि अपने निरंतर प्रयासों के बल पर वे जीवन के हर क्षेत्र में सफलता प्राप्त करें।

प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर निरंतर परिश्रम और प्रगति की भावना को दर्शाने वाला एक संस्कृत सुभाषित भी साझा किया। यह श्लोक सतत प्रयास के महत्व को रेखांकित करता है और आगे बढ़ते रहने की प्रेरणा देता है।

साझा किया गया संस्कृत श्लोक है—

“चरैवेति चरैवेति चरन्वै मधु विन्दति।
सूर्यास्य पश्य श्रेमाणं न मामार न जीर्यति॥”

इस श्लोक का भावार्थ है कि जो व्यक्ति निरंतर आगे बढ़ता रहता है, वही प्रगति की मधुरता का अनुभव करता है। जैसे सूर्य बिना थके निरंतर प्रकाश देता रहता है, वैसे ही सतत परिश्रम से ही सफलता प्राप्त होती है।

प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर अपने संदेश में लिखा कि उत्तर पूर्व के ये तीनों राज्य आज अपना स्थापना दिवस मना रहे हैं और इस अवसर पर उन्होंने वहां के नागरिकों को ढेरों शुभकामनाएं दीं।

प्रधानमंत्री के इस संदेश से न केवल पूर्वोत्तर राज्यों के लोगों में उत्साह का संचार हुआ, बल्कि निरंतर प्रयास और विकास के पथ पर आगे बढ़ने की प्रेरणा भी मिली।

त्रिपुरा में PM-JANMAN के तहत 25 सड़क परियोजनाओं को मंजूरी

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ग्रामीण विकास मंत्रालय ने त्रिपुरा के लिए PM-JANMAN के रोड कनेक्टिविटी घटक के अंतर्गत 65.38 किमी लंबाई की 25 सड़क परियोजनाओं को 68.67 करोड़ रुपये के अनुमानित निवेश के साथ स्वीकृति दी है।

महत्वपूर्ण पहल:

  • राज्य के 30 पीवीटीजी (Particularly Vulnerable Tribal Groups) बस्तियों को हर मौसम में मिलने वाली सड़क कनेक्टिविटी प्रदान करेगी।

  • राज्य में रहने वाले पीवीटीजी समुदायों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति में सुधार लाएगी।

  • ग्रामीण क्षेत्रों में संपर्क बढ़ाकर दूरस्थ गांवों और नगर केंद्रों के बीच की दूरी कम करेगी।

  • क्षेत्र में आर्थिक विकास, व्यापार और वाणिज्य को बढ़ावा देगी।

  • स्वास्थ्य सेवाएँ, शिक्षा और बाज़ार जैसी आवश्यक सुविधाओं तक बेहतर पहुंच सुनिश्चित करेगी।

  • रोज़गार के अवसर सृजित करेगी और स्थानीय अर्थव्यवस्थाओं को मजबूत करेगी।

  • समृद्ध पूर्वोत्तर और विकसित भारत (विकसित भारत) की सरकार की दृष्टि को साकार करने में योगदान देगी।

PM-JANMAN के अंतर्गत बनने वाली ये परियोजनाएँ क्षेत्र पर परिवर्तनकारी प्रभाव डालेंगी। ये न केवल उत्तर-पूर्वी क्षेत्र के जनजातीय समूहों की वृद्धि और समृद्धि में योगदान देंगी बल्कि समावेशी विकास के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को भी मजबूत करेंगी।


“साइबर भारत सेतु” पहल के तहत त्रिपुरा में राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा अभ्यास और त्रिपुरा साइबर सुरक्षा नीति 2025 का शुभारंभ

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त्रिपुरा सरकार के सूचना प्रौद्योगिकी निदेशालय (DIT) ने भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के अधीन इंडियन कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम (CERT-In) के सहयोग से “साइबर भारत सेतु: ब्रिजिंग स्टेट्स, सिक्योरिंग भारत” शीर्षक से राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा अभ्यास (National Cybersecurity Exercise) का आयोजन किया है।

यह दो दिवसीय कार्यशाला 11 और 12 नवम्बर 2025 को प्रज्ञा भवन, अगरतला में आयोजित की जा रही है, जिसका उद्देश्य राज्य की साइबर जागरूकता, तत्परता और प्रतिक्रिया क्षमताओं को मजबूत करना है।

कार्यशाला का मुख्य फोकस विशेषज्ञ-निर्देशित प्रशिक्षण, हैंड्स-ऑन ड्रिल्स, और सिम्युलेटेड परिदृश्य-आधारित अभ्यासों के माध्यम से साइबर रेजिलिएंस (Cyber Resilience) को सुदृढ़ करना है। इस कार्यक्रम का उद्घाटन भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी सचिव एस. कृष्णन ने किया। इस अवसर पर त्रिपुरा के मुख्य सचिव जे. के. सिन्हा (IAS), पुलिस महानिदेशक अनुराग (IPS), सूचना प्रौद्योगिकी सचिव किरण गिट्टे (IAS), सीईआरटी-इन के महानिदेशक डॉ. संजय बहल, तथा त्रिपुरा के सूचना प्रौद्योगिकी निदेशक जेया रघुल गेशन बी (IFS) सहित अन्य विशिष्ट गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

इस अभ्यास में त्रिपुरा सरकार के सचिव, विभागाध्यक्ष, वरिष्ठ अधिकारी, विभिन्न विभागों के आईटी नोडल अधिकारी, पुलिस अधिकारी, बैंक अधिकारी, तकनीकी संस्थानों के प्रतिनिधि, विश्वविद्यालयों और कॉलेजों के छात्र, तथा अन्य राज्य स्तरीय हितधारक शामिल हुए।

सीईआरटी-इन के अधिकारियों — अशुतोष बहुगुणा (सीनियर साइंटिस्ट एवं टीम लीड, साइबर सिक्योरिटी एश्योरेंस ग्रुप), शशांक गुप्ता (साइंटिस्ट) और मोहित कटारिया (साइंटिस्ट) — ने ज्ञानवर्धक सत्रों का संचालन किया और इंटरैक्टिव वर्कशॉप्स आयोजित कीं।

“साइबर भारत सेतु” पहल का उद्देश्य एक साइबर रेजिलिएंट भारत का निर्माण करना है — जो राज्यों के बीच साइबर क्षमताओं को जोड़ते हुए, नवाचार को प्रोत्साहित करे और प्रोएक्टिव डिफेंस व प्रतिक्रिया रणनीतियों को बढ़ावा दे। यह पहल क्षमता निर्माण (capacity building), इंटेलिजेंस साझेदारी (intelligence sharing) और संयोजित प्रयासों (coordinated efforts) के माध्यम से भारत की डिजिटल अवसंरचना, अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा को सशक्त बनाने पर केंद्रित है।

अभ्यास में उन्नत सत्रों और सिम्युलेशन-आधारित गतिविधियों को शामिल किया गया है, जिनके माध्यम से प्रतिभागी संगठनों की साइबर सुरक्षा तत्परता और घटना प्रबंधन क्षमताओं में व्यावहारिक सुधार लाने का लक्ष्य रखा गया है।

इस अवसर पर त्रिपुरा साइबर सुरक्षा नीति 2025 (Tripura Cyber Security Policy 2.0 - TCSP 2.0) का शुभारंभ भी किया गया। इस नीति का लोकार्पण एस. कृष्णन, सचिव, MeitY, भारत सरकार द्वारा, मुख्य सचिव जे. के. सिन्हा, पुलिस महानिदेशक अनुराग, आईटी सचिव किरण गिट्टे, सीईआरटी-इन के महानिदेशक डॉ. संजय बहल तथा आईटी निदेशक जेया रघुल गेशन बी की उपस्थिति में किया गया।

TCSP 2.0 का उद्देश्य बदलते साइबर खतरों का सामना करते हुए एक लचीला (resilient), अनुकूलनीय (adaptive) और नागरिक-केंद्रित (citizen-centric) साइबर पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण करना है। यह नीति राज्य की आईटी एवं आईसीटी प्रणालियों की सुरक्षा, संस्थागत तंत्र को मजबूत करने, क्षमता निर्माण को बढ़ावा देने और सार्वजनिक-निजी क्षेत्रों के बीच सहयोग को प्रोत्साहित करने के लिए एक दिशानिर्देश ढांचा (guiding framework) के रूप में कार्य करेगी।

वर्ष 2024 में अक्टूबर माह को राज्यभर में राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा जागरूकता माह (National Cyber Security Awareness Month - NCSAM) के रूप में मनाया गया था। इसके अंतर्गत अनेक जागरूकता और क्षमता निर्माण कार्यक्रम आयोजित किए गए थे।

उसकी सफलता और प्रभाव को ध्यान में रखते हुए तथा TCSP 2.0 की भावना के अनुरूप, त्रिपुरा साइबर सुरक्षा जागरूकता माह 2025 (TCSAM 2025) अभियान की शुरुआत “साइबर जागृत त्रिपुरा” (Cyber Jagrit Tripura) थीम के तहत की गई। इसका शुभारंभ भारत सरकार के MeitY सचिव  एस. कृष्णन ने अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में किया।

इस अवसर पर TCSAM 2025 का मैस्कॉट “रक्षा मित्र” (Raksha Mitra) भी लॉन्च किया गया, जिसका उद्देश्य राज्यभर में साइबर सुरक्षा जागरूकता को व्यापक रूप से फैलाना है।

TCSAM 2025, एक महीने लंबा अभियान होगा, जिसे सूचना प्रौद्योगिकी निदेशालय, त्रिपुरा सरकार अन्य हितधारकों के सहयोग से आयोजित करेगा। इस दौरान राज्य भर में जनता, विद्यार्थियों और सरकारी कर्मचारियों के बीच साइबर स्वच्छता (cyber hygiene) और जागरूकता को सुदृढ़ करने के लिए कई प्रशिक्षण एवं जागरूकता गतिविधियाँ आयोजित की जाएंगी।

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