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ट्राइबल बिजनेस कॉन्क्लेव 2025: आदिवासी उद्यमिता को सशक्त बनाकर विकसित भारत की दिशा में कदम

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दूरदर्शिता और प्रेरणा के मार्गदर्शन में, जिन्होंने लगातार जनजातीय गौरव और वोकल फॉर लोकल को भारत के विकास के मुख्य स्तंभ बताया है, ट्राइबल बिजनेस कॉन्क्लेव 2025सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास” की भावना का प्रतीक है।

घटना की घोषणा:

17 अक्टूबर 2025 को आदि कर्मयोगी अभियान राष्ट्रीय सम्मेलन के दौरान, आदिवासी मामलों का मंत्रालय, संस्कृति मंत्रालय और उद्योग संवर्धन विभाग (DPIIT) के सहयोग से ट्राइबल बिजनेस कॉन्क्लेव 2025 की घोषणा की गई। यह कार्यक्रम 12 नवंबर 2025 को यशोभूमि, नई दिल्ली में आयोजित होगा। इस अवसर पर कॉन्क्लेव का लोगो, ब्रोशर और डिजिटल सामग्री भी जारी की गई, जो परंपरा, उद्यमिता और नवाचार के संगम का प्रतीक है।

मुख्य उद्देश्य:

  • आदिवासी उद्यमियों को सशक्त बनाना और उन्हें समावेशी, नवाचार-आधारित और सतत विकास के लिए प्रोत्साहित करना।

  • आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत @2047 के प्रधानमंत्री दृष्टिकोण को साकार करना।

  • आदिवासी उद्यमिता को राष्ट्रीय विकास की कहानी में केंद्रीय स्थान देना।

भगवान बिरसा मुंडा की विरासत का सम्मान:

2025 आदिवासी नेता भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती का वर्ष है। उनके आदर्श— निष्ठा, नवाचार और आत्मनिर्भरता— आज भी भारत की न्याय और प्रगति की दिशा में प्रेरणा का स्रोत हैं। कॉन्क्लेव उनके सांस्कृतिक ज्ञान और आधुनिक उद्यमिता के समन्वय का जश्न मनाता है।

संपूर्ण-सरकारी दृष्टिकोण:

कॉन्क्लेव का आयोजन आदिवासी मामलों का मंत्रालय, संस्कृति मंत्रालय और DPIIT संयुक्त रूप से कर रहे हैं। इसमें MSME, कौशल विकास एवं उद्यमिता, वस्त्र, DONER, MeitY, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग, कृषि और ग्रामीण विकास जैसे मंत्रालयों की सक्रिय भागीदारी शामिल है। राज्य सरकारों के सहयोग से स्थानीय उद्यमिता पारिस्थितिकी तंत्र को सुदृढ़ किया जा रहा है।

प्रमुख रणनीतिक साझेदार:

  • FICCI

  • PRAYOGI (PanIIT Alumni Reach for Gram Udyogi) Foundation

  • Startup India

ये साझेदार मानिटरिंग, निवेश और इनक्यूबेशन के लिए मजबूत मंच सुनिश्चित करते हैं।

कॉन्क्लेव की प्रमुख गतिविधियाँ:

  • Roots to Rise (पिचिंग सत्र): आदिवासी उद्यमियों के लिए निवेशकों, CSR नेताओं और सरकारी संस्थानों के सामने अपने व्यवसाय विचार पेश करने का अवसर।

  • Knowledge Sessions: वित्त, ब्रांडिंग, नवाचार और क्षमता निर्माण पर विशेषज्ञ पैनल और मास्टरक्लास।

  • CEO’s Forum: कौशल, स्थिरता, नवाचार और बाजार तक पहुंच पर नेतृत्व संवाद।

  • Exhibition & Pavilions: 100 से अधिक आदिवासी स्टार्टअप्स और माइक्रो-एंटरप्राइजेज का प्रदर्शन।

  • Buyer–Seller Meets: आदिवासी उत्पादकों और कॉर्पोरेट/सरकारी खरीदारों के बीच सीधे संपर्क और स्थायी साझेदारी।

लक्ष्य और प्रभाव:

  • आदिवासी उद्यमिता को मुख्यधारा में लाना।

  • स्थानीय उत्पादों के लिए ब्रांडिंग और बाजार तक पहुँच बढ़ाना।

  • सतत उद्यमिता विकास के लिए क्षमता निर्माण।

  • वित्त तक आसान पहुँच, बाजार लिंक और निवेश के अवसर खोलना।

  • परंपरागत ज्ञान और आधुनिक व्यवसायिक प्रथाओं का समन्वय करके वैश्विक मूल्य श्रृंखला से जोड़ना।

विकसित भारत @2047 की दिशा में:

कॉन्क्लेव यह दर्शाता है कि विकसित भारत @2047 की कहानी तब पूरी होगी जब जमीनी स्तर के नवप्रवर्तक और उद्यमी इसके केंद्र में होंगे। यह सुनिश्चित करता है कि भारत नवाचार, पहचान और प्रधानमंत्री के समावेशी, सतत और आत्मनिर्भर विकास के दृष्टिकोण के साथ नेतृत्व करने के लिए तैयार है।


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