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उदयपुर और लखनपुर में 8 से 14 जून तक चलेगा पारंपरिक शिल्प एवं कला प्रशिक्षण शिविर

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संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल के निर्देश पर सरगुजा संभाग में ‘आकार-2026’ का आयोजन

युवाओं को मिलेगा लोक कलाओं का प्रशिक्षण

रायपुर-  संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल के निर्देश पर छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, लोक कलाओं और पारंपरिक शिल्प के संरक्षण एवं संवर्धन के उद्देश्य से संस्कृति विभाग द्वारा “आकार-2026” पारंपरिक शिल्प एवं विविध कला प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया जा रहा है। यह शिविर 8 जून से 14 जून 2026 तक सरगुजा संभाग के उदयपुर और लखनपुर में आयोजित होगा। कार्यक्रम का उद्देश्य नई पीढ़ी को प्रदेश की लोक कला परंपराओं से जोड़ना तथा उनमें पारंपरिक शिल्प और कला के प्रति रुचि विकसित करना है।

14 पारंपरिक कला विधाओं का दिया जाएगा प्रशिक्षण 

संस्कृति विभाग द्वारा आयोजित इस विशेष प्रशिक्षण शिविर में प्रतिभागियों को नृत्य, नाटक, वाद्ययंत्र, चित्रकला, क्ले आर्ट, म्यूरल आर्ट, हस्तकढ़ाई, ड्राई फ्लावर आर्ट, कोरिया कला, रजवार मिट्टी चित्र, मेहंदी, मृदा शिल्प, गोदना कला और बांस शिल्प सहित कुल 14 पारंपरिक कला विधाओं का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इन विधाओं में प्रदेश के ख्यातिप्राप्त कलाकारों और पारंगत कला गुरुओं द्वारा प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा, जिससे प्रतिभागियों को कला के व्यावहारिक एवं तकनीकी पक्षों की जानकारी मिल सके।

प्रशिक्षण के लिए पंजीयन प्रक्रिया हो चुकी है 6 जून से प्रारंभ 

शिविर के अंतर्गत उदयपुर में प्रशिक्षण प्रतिदिन सुबह 8 बजे से 11 बजे तक शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय परिसर में आयोजित होगा, जबकि लखनपुर में पीएमश्री स्कूल परिसर में शाम 5 बजे से रात 8 बजे तक प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण के लिए पंजीयन प्रक्रिया 6 जून से प्रारंभ हो चुकी है और इच्छुक प्रतिभागी निर्धारित शुल्क जमा कर इसमें भाग ले सकते हैं।

विलुप्तप्राय और लोक जीवन से जुड़ी कला विधाओं को संरक्षित करना

“आकार-2026” का उद्देश्य केवल पारंपरिक कलाओं का प्रशिक्षण देना नहीं, बल्कि प्रदेश की विलुप्तप्राय और लोक जीवन से जुड़ी कला विधाओं को संरक्षित करना भी है। प्रशिक्षण के माध्यम से युवा कलाकारों को अनुभवी गुरुओं के मार्गदर्शन में सीखने का अवसर मिलेगा, जिससे वे अपनी प्रतिभा को निखार सकेंगे और भविष्य में स्वरोजगार के नए अवसर भी प्राप्त कर सकेंगे। प्रशिक्षण शिविर के लिए पंजीयन शुल्क मात्र 100 रुपये निर्धारित किया गया है। दिव्यांग एवं अनाथ बच्चों को शुल्क में विशेष छूट प्रदान की जाएगी।

छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम 

प्रशिक्षण पूर्ण होने के बाद प्रतिभागियों द्वारा तैयार कलाकृतियों की प्रदर्शनी आयोजित की जाएगी तथा उन्हें प्रमाण-पत्र भी प्रदान किए जाएंगे। इस प्रकार के आयोजन प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने के साथ-साथ युवा पीढ़ी में लोक कला और शिल्प परंपराओं के प्रति जागरूकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। “आकार-2026” न केवल कला प्रशिक्षण का मंच बनेगा, बल्कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत को नई ऊर्जा और नई पीढ़ी तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम भी साबित होगा।

वेबसाइट www.cgculture.in से आवेदन पत्र का प्रारूप डाउनलोड किया जा सकता है। ई-मेल sanskriti.rajbhasha@gmail.com एवं वेबसाइट www.cgculture.in से प्रशिक्षण  से संबंधित जानकारी प्राप्त की जा सकती है। अन्य जानकारी हेतु अनूप किंडो प्रभारी अधिकारी आकार से मोबाइल नंबर 77730-49560 और संचालनालय संस्कृति विभाग रायपुर के टेलीफोन नंबर 0771-2995629 और 0771-2537404 पर कार्यालयीन समय पर संपर्क कर सकते हैं।

पीएम विश्वकर्मा योजना के कारीगरों को ऑनलाइन बाजार तक पहुँच के लिए अमेज़न के साथ समझौते के माध्यम से सशक्त बनाया गया

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सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME) मंत्रालय ने Amazon Seller Services Private Ltd. के साथ एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं, जिससे PM विश्वकर्मा योजना में पंजीकृत कारीगरों को ऑनलाइन बाजार तक पहुँच प्राप्त होगी, उनके उत्पादों की दृश्यता बढ़ेगी और पूरे भारत में ग्राहक आधार का विस्तार होगा। यह MoU निर्माण भवन, नई दिल्ली में MSME विकास आयुक्त कार्यालय और Amazon टीम द्वारा किया गया।

PM विश्वकर्मा योजना, जिसे 17 सितंबर 2023 को लॉन्च किया गया था, कारीगरों को समग्र सहायता प्रदान करती है। यह योजना कौशल प्रशिक्षण और आधुनिक उपकरणों के माध्यम से उत्पाद की गुणवत्ता सुधारने, बाज़ार पहुंच बढ़ाने, ऋण तक पहुँच सुनिश्चित करने और गुरु-शिष्य परंपरा के तहत पारंपरिक कौशल को सशक्त बनाने पर केंद्रित है।

इस साझेदारी के तहत:

  • Amazon योग्य विश्वकर्मा कारीगरों को अपने ऑनलाइन मार्केटप्लेस पर ऑनबोर्ड करेगा।

  • MoMSME आवश्यक अनुमतियों, पंजीकरण और स्पष्टताओं में सहायता प्रदान करेगा।

  • Amazon के करिगर पहल के माध्यम से हस्तशिल्प उत्पादों की दृश्यता और डिजिटलीकरण को मजबूत किया जाएगा।

यह सहयोग पारंपरिक कारीगरों की उपस्थिति को डिजिटल ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर बढ़ाने, उनके उत्पादों को राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर प्रदर्शित करने, और Viksit Bharat और Atmanirbhar Bharat की दृष्टि को साकार करने में महत्वपूर्ण कदम है।

PM विश्वकर्मा योजना के लाभार्थी 10 दिसंबर 2025 को नई दिल्ली में आयोजित Amazon Smbhav Summit 2025 में भी शामिल हुए, जहां उन्होंने पहल के बारे में जानकारी प्राप्त की और कारीगरों से जुड़ने के अवसरों का पता लगाया।

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