Media24Media.com: #TraditionalArts

Responsive Ad Slot


 

Showing posts with label #TraditionalArts. Show all posts
Showing posts with label #TraditionalArts. Show all posts

लोक कलाओं के संरक्षण और कलाकारों के आर्थिक सशक्तीकरण की दिशा में संस्कृति विभाग की महत्वपूर्ण पहल

No comments Document Thumbnail

मुख्यमंत्री लोक कलाकार प्रोत्साहन योजना-2026 के लिए आवेदन आमंत्रित

चयनित कलाकारों को मिलेंगे प्रतिवर्ष 12 से 24 हजार रुपये तक प्रोत्साहन राशि

रायपुर- छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक कला एवं सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण, संवर्धन और कलाकारों को आर्थिक संबल प्रदान करने के उद्देश्य से संस्कृति एवं राजभाषा संचालनालय द्वारा मुख्यमंत्री लोक कलाकार प्रोत्साहन योजना-2026 के अंतर्गत प्रदेश के लोक कलाकारों से प्रविष्टियां आमंत्रित की गई हैं। योजना का उद्देश्य पारंपरिक लोक कलाओं को संरक्षित एवं प्रोत्साहित करना, कलाकारों का सम्मान बढ़ाना तथा कला दलों के सतत विकास को नई गति प्रदान करना है।

योजना के अंतर्गत नृत्य-संगीत, लोक नाट्य, लोकगाथा, छत्तीसगढ़ी गीतकार, वाद्ययंत्र वादक, शिल्प कलाकार, छत्तीसगढ़ी पाक कला (पारंपरिक व्यंजन) तथा छत्तीसगढ़ी सौंदर्यकला (श्रृंगार) से जुड़े कलाकार आवेदन कर सकते हैं। आवेदन निर्धारित प्रारूप में पंजीकृत डाक के माध्यम से भेजे जाएंगे। आवेदन प्रपत्र विभाग की वेबसाइट www.cgculture.in पर उपलब्ध हैं तथा संस्कृति एवं राजभाषा संचालनालय, नया रायपुर स्थित कार्यालय से भी प्राप्त किए जा सकते हैं।

योजना के तहत पात्र कलाकारों का चिन्हारी पोर्टल में पंजीयन अनिवार्य होगा। चयनित कलाकारों को प्रतिवर्ष न्यूनतम 12 हजार रुपये से अधिकतम 24 हजार रुपये तक की प्रोत्साहन राशि ई-पेमेंट के माध्यम से प्रदान की जाएगी। यह राशि एक वित्तीय वर्ष में एक बार प्रदान की जाएगी।

योजना का लाभ केवल ऐसे कलाकारों को मिलेगा जिनकी सभी स्रोतों से वार्षिक आय 96 हजार रुपये से अधिक नहीं है। इसके लिए सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी आय प्रमाण-पत्र संलग्न करना अनिवार्य होगा। आवेदन के साथ बैंक खाते का विवरण, आईएफएससी कोड तथा पैन कार्ड की छायाप्रति भी प्रस्तुत करनी होगी।

प्रविष्टियां भेजने का पता –

संचालक, संस्कृति एवं राजभाषा संचालनालय,

छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल, व्यावसायिक परिसर,

द्वितीय तल, सेक्टर-27, नया रायपुर, अटल नगर (छत्तीसगढ़) – 492018

प्रविष्टियां प्राप्त होने की अंतिम तिथि 31 अगस्त 2026 निर्धारित की गई है। आवेदन भेजते समय लिफाफे पर "मुख्यमंत्री लोक कलाकार प्रोत्साहन योजना-2026" स्पष्ट रूप से अंकित करना आवश्यक होगा। प्राप्त प्रविष्टियों का परीक्षण समिति द्वारा किया जाएगा तथा समिति का निर्णय अंतिम एवं मान्य होगा।

मुख्यमंत्री लोक कलाकार प्रोत्साहन योजना प्रदेश की समृद्ध लोक कला परंपराओं के संरक्षण, कलाकारों के सम्मान और आर्थिक सशक्तीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। इसके माध्यम से लोक कलाकारों को न केवल आर्थिक सहयोग मिलेगा, बल्कि अपनी कला को व्यापक पहचान दिलाने और सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का अवसर भी प्राप्त होगा।

छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत को मिलेगा मंच, वार्षिक आयोजनों के लिए कलाकारों से आवेदन आमंत्रित

No comments Document Thumbnail

15 जुलाई तक कर सकते हैं आवेदन, शास्त्रीय संगीत, लोककला, नाट्य एवं वाद्ययंत्र प्रस्तुतियों के लिए होगा चयन

रायपुर- छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं को नई पहचान देने और लोक एवं शास्त्रीय कलाओं को व्यापक मंच उपलब्ध कराने के उद्देश्य से संचालनालय संस्कृति एवं राजभाषा, छत्तीसगढ़ ने वर्ष 2026-27 के वार्षिक सांस्कृतिक आयोजनों के लिए कलाकारों एवं    सांस्कृतिक दलों से आवेदन आमंत्रित किए हैं। विभाग द्वारा आयोजित इन प्रतिष्ठित आयोजनों के माध्यम से प्रदेश के प्रतिभाशाली कलाकारों को अपनी कला का प्रदर्शन करने का अवसर मिलेगा, वहीं विलुप्त होती लोक परंपराओं के संरक्षण और संवर्धन को भी नई गति मिलेगी।

संस्कृति विभाग प्रतिवर्ष प्रदेशभर में विभिन्न सांस्कृतिक आयोजनों का आयोजन करता है, जिनमें शास्त्रीय संगीत, शास्त्रीय नृत्य, लोकसंगीत, लोकनृत्य, नाट्य प्रस्तुतियां तथा पारंपरिक वाद्ययंत्रों की प्रस्तुतियां शामिल रहती हैं। इसी क्रम में वर्ष 2026-27 के लिए पावस प्रसंग (शास्त्रीय संगीत एवं नृत्य), रंगतरंग वाद्ययंत्र संगम, रंगपरब नाट्य श्रृंखला तथा लोकरंग पर्व के लिए कलाकारों का चयन किया जाएगा।

विशेष रूप से लोकरंग पर्व के अंतर्गत छत्तीसगढ़ की पारंपरिक लोककलाओं एवं लोकविधाओं से जुड़े कलाकारों को प्राथमिकता दी जाएगी। इसके लिए भरथरी, पंडवानी, ढोलामारू, लोरिकचंदा, नाचा, गम्मत, सुआ, करमा, पंथी, बांसगीत, देवारगीत, ददरिया, जसगीत, संस्कार गायन सहित अन्य पारंपरिक लोकविधाओं में दक्ष कलाकार आवेदन कर सकते हैं। इन आयोजनों का उद्देश्य प्रदेश की  लोक-सांस्कृतिक धरोहर को नई पीढ़ी तक पहुंचाना और कलाकारों को सशक्त मंच उपलब्ध कराना है।

आवेदन करने वाले कलाकारों एवं सांस्कृतिक दलों का चिन्हारी पंजीकरण होना आवश्यक है तथा समूह प्रस्तुति के इच्छुक कलाकार निर्धारित प्रारूप में आवेदन प्रस्तुत कर सकते हैं। आवेदन संचालनालय संस्कृति एवं राजभाषा, द्वितीय तल, छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल व्यवसायिक परिसर, सेक्टर-27, नवा रायपुर स्थित कार्यालय में जमा किए जा सकते हैं। निर्धारित ई-मेल Sanskriti.rajbhasha@gmail.com के माध्यम से भी आवेदन भेजने की सुविधा उपलब्ध कराई गई है।

संस्कृति विभाग ने आवेदन प्रस्तुत करने की अंतिम तिथि 15 जुलाई 2026 निर्धारित की है। विभाग ने प्रदेश के पात्र कलाकारों एवं सांस्कृतिक दलों से निर्धारित समय-सीमा के भीतर आवेदन प्रस्तुत कर इन महत्वपूर्ण सांस्कृतिक आयोजनों में सहभागिता सुनिश्चित करने तथा छत्तीसगढ़ की गौरवशाली सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने की अपील की है।

22 अप्रैल को गढ़ रीवा में आयोजित होगा 'लोरिक-चंदा' लोकनाट्य महोत्सव

No comments Document Thumbnail

नवा रायपुर/आरंग- छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और लोकगाथाओं में रची-बसी 'लोरिक चंदा' (चंदैनी लोकनाट्य) विधा को संरक्षण देने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। ऐतिहासिक ग्राम गढ़ रीवा में आगामी 22 अप्रैल को एक भव्य 'लोरिक चंदा लोकनाट्य महोत्सव' का आयोजन किया जाएगा। यह पहल दम तोड़ती लोक कला को नई ऊर्जा देने और युवा पीढ़ी तक पहुँचाने के उद्देश्य से की जा रही है।

 कैबिनेट मंत्री से मिला समर्थन 

​महोत्सव की तैयारियों के सिलसिले में आज मंगलवार को  ग्राम गढ़ रीवा के 73 वर्षीय सरपंच घसियाराम साहू, उपसरपंच सूरज साहू तथा पीपला वेलफेयर फाउंडेशन के प्रतिनिधि दूजेराम धीवर, महेन्द्र पटेल एवं प्रतीक कुमार टोंड्रे ने नवा रायपुर में कैबिनेट मंत्री गुरु खुशवंत साहेब से सौजन्य भेंट की।

​प्रतिनिधिमंडल ने मंत्री जी को महोत्सव का औपचारिक प्रस्ताव सौंपते हुए विस्तार से चर्चा की। प्रस्ताव पर हर्ष व्यक्त करते हुए मंत्री गुरु खुशवंत साहेब ने कहा कि "चंदैनी जैसी पारंपरिक विधाएं हमारी पहचान हैं। इन्हें विलुप्त होने से बचाने के लिए ग्राम स्तर पर किया जा रहा यह प्रयास मील का पत्थर साबित होगा।" उन्होंने इस आयोजन की सराहना करते हुए इसे भव्यता प्रदान करने के लिए प्रदेश के संस्कृति मंत्री को भी आमंत्रित करने का आश्वासन दिया।

जनसहयोग से सजेगा महोत्सव का मंच 

​ग्राम के सरपंच घसियाराम साहू ने जानकारी दी कि इस महोत्सव का आयोजन पूर्णतः जनसहयोग से ग्राम के बाजार चौक में किया जाएगा। आयोजन की रूपरेखा पीपला वेलफेयर फाउंडेशन द्वारा तैयार की जा रही है। महोत्सव के मुख्य आकर्षण के रूप में छत्तीसगढ़ की तीन सुप्रसिद्ध चंदैनी टीमों का चयन किया गया है, जो रात भर अपनी कला का प्रदर्शन करेंगी।

​ विशेषज्ञों का होगा जुटान 

​केवल प्रदर्शन ही नहीं, बल्कि इस विधा के वैचारिक पक्ष को समझने के लिए लोरिक चंदा (चंदैनी) के जानकारों और विशेषज्ञों को भी विशेष रूप से आमंत्रित किया जा रहा है। आयोजन को लेकर गढ़ रीवा सहित आसपास के क्षेत्रों में भारी उत्साह देखा जा रहा है। ग्रामीणों का मानना है कि इस तरह के आयोजनों से न केवल मनोरंजन होगा, बल्कि हमारी प्राचीन सांस्कृतिक गाथाओं का संरक्षण भी सुनिश्चित होगा।

संस्कृति को सहेजने गढ़ रीवा में होगा चंदैनी लोकनाट्य महोत्सव

No comments Document Thumbnail

महोत्सव को लेकर ग्रामीणों में जबरदस्त उत्साह 

आरंग-  ऐतिहासिक गढ़  रीवा गांव में चंदैनी लोकनाट्य महोत्सव के आयोजन को लेकर मंगलवार को बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता ग्राम के सरपंच घसियाराम साहू ने किया।

बैठक में ग्राम के प्रबुद्धजन, गणमान्य नागरिक और जनप्रतिनिधि शामिल हुए। सभी ने मिलकर महोत्सव के आयोजन पर चर्चा की और अपने विचार रखे।

इस अवसर पर सरपंच घसियाराम साहू, उपसरपंच सूरज साहू, वरिष्ठ नागरिक मेहत्तर राम साहू, संतोष साहू, हीराधर धीवर, हीरालाल धीवर तथा पीपला वेलफेयर फाउंडेशन के संयोजक महेन्द्र कुमार पटेल ने आयोजन की रूपरेखा, प्रचार-प्रसार और तैयारियों पर विस्तार से चर्चा की।

73 वर्षीय सरपंच घसियाराम साहू ने कहा कि गढ़ रीवा और आरंग क्षेत्र से जुड़ी लोरिक-चंदा  की गाथा को चंदैनी लोकनाट्य परंपरा आज विलुप्ति के कगार पर है। इसे सहेजने के लिए ग्रामीणों और पीपला वेलफेयर फाउंडेशन के सहयोग से महोत्सव आयोजित करने की तैयारी की जा रही है।

फाउंडेशन के संयोजक महेन्द्र कुमार पटेल ने कहा कि अपनी संस्कृति को बचाने और आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी हम सभी की है। चंदैनी छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक परंपरा है, लेकिन आज इसकी कुछ ही टीमें सक्रिय रह गई हैं।

बैठक में सर्वसम्मति से तय किया गया कि 15 अप्रैल के बाद ग्राम रीवा में लोरिक-चंदा की प्रेमगाथा पर केंद्रित चंदैनी लोकनाट्य महोत्सव आयोजित किया जाएगा।

बैठक में घसियाराम साहू, सूरज साहू, संतोष कुमार साहू, मेहत्तर राम साहू, महेन्द्र कुमार पटेल, गोवर्धन साहू, प्रेमलाल साहू, हीराधर धीवर, वेद प्रकाश साहू, मनबोध साहू, रमेश चंद्राकर, बेनीराम साहू, अश्वनी चंद्राकर, अनिल साहू, हीरालाल धीवर, भागवत साहू, त्रिलोकीनाथ साहू, महेंद्र साहू, इंद्रपाल और फत्ते साहू सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे।

BRICS शेर्पा और सू-शेर्पा के लिए नई दिल्ली में भारतीय सांस्कृतिक संध्या का आयोजन

No comments Document Thumbnail

विदेश मंत्रालय (MEA) ने वस्त्र मंत्रालय के तहत विकास आयुक्त (हस्तशिल्प) कार्यालय के सहयोग से 10 फरवरी 2026 को राष्ट्रीय शिल्प संग्रहालय (NCM & HKA), नई दिल्ली में BRICS शेर्पा और सू-शेर्पा के लिए विशेष सांस्कृतिक संध्या का आयोजन किया। यह कार्यक्रम भारत की अध्यक्षता में 9–10 फरवरी 2026 को सफलतापूर्वक संपन्न पहले BRICS शेर्पा और सू-शेर्पा बैठक के बाद आयोजित किया गया। इस अवसर का उद्देश्य भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, पारंपरिक शिल्प और जीवंत परंपराओं जैसे कला, संगीत और व्यंजनों को प्रस्तुत करना था।

ब्राज़ील, रूस, चीन, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया, सऊदी अरब, UAE, ईरान और इंडोनेशिया के शेर्पा इसमें शामिल हुए। कार्यक्रम में BRICS सदस्य और साझेदार देशों के राजदूत और लगभग 30 विदेशी प्रतिनिधि भी उपस्थित रहे।

भारत के BRICS शेर्पा, सचिव (आर्थिक संबंध) ने कार्यक्रम की मेजबानी की, जबकि संयुक्त सचिव (बहुपक्षीय आर्थिक संबंध), भारत के BRICS सू-शेर्पा ने इसका समर्थन किया। भारतीय पक्ष में स्वास्थ्य मंत्रालय, DPIIT और राजस्व विभाग के सचिव और MEA तथा राष्ट्रीय शिल्प संग्रहालय के 30 अधिकारियों की टीम भी शामिल थी।

प्रतिनिधियों को संग्रहालय की दीर्घाओं का मार्गदर्शित दौरा कराया गया, जहां उन्हें भारत के विविध शिल्प, लोक कला और पारंपरिक प्रथाओं से परिचित कराया गया।

कार्यक्रम की विशेष झलक के रूप में संग्रहालय के कारीगरों द्वारा ब्लैक पॉटरी, चम्बा रुमाल, कलमकारी, लैक ब्रेसलेट और पपियेर माशे के स्टॉल लगाए गए। इन स्टॉलों में भारत के विभिन्न क्षेत्रों के पारंपरिक हस्तशिल्प और हथकरघा उत्पाद प्रदर्शित किए गए, जिनमें विदेशी प्रतिनिधियों ने गहरी रुचि दिखाई।

प्रतिनिधियों ने भारत के पारंपरिक कला और शिल्प को संरक्षित करने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कारीगरों को प्रोत्साहित करने के प्रयासों की सराहना की।



राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 2023-24 के राष्ट्रीय हस्तशिल्प पुरस्कार प्रस्तुत किए

No comments Document Thumbnail

भारत की राष्ट्रपति, द्रौपदी मुर्मू, ने आज (9 दिसंबर, 2025) नई दिल्ली में 2023 और 2024 के राष्ट्रीय हस्तशिल्प पुरस्कार प्रस्तुत किए।

इस अवसर पर राष्ट्रपति ने कहा कि कला हमारे अतीत की यादों, वर्तमान के अनुभवों और भविष्य की आकांक्षाओं को दर्शाती है। प्राचीन काल से ही मनुष्य अपने भावनाओं को चित्रकला या मूर्तिकला के माध्यम से व्यक्त करता रहा है। कला लोगों को संस्कृति से जोड़ती है और एक-दूसरे के साथ संबंध स्थापित करती है।

राष्ट्रपति ने कहा कि यदि हमारी सदियों पुरानी हस्तशिल्प परंपरा जीवंत और संरक्षित रही है, तो यह हमारे कलाकारों की पीढ़ी-दर-पीढ़ी प्रतिबद्धता के कारण संभव हुआ है। हमारे कारीगरों ने अपने कला और परंपराओं को समय के साथ ढालते हुए मूल आत्मा को जीवित रखा। उन्होंने अपने प्रत्येक कला-निर्माण में देश की मिट्टी की खुशबू को संरक्षित किया है।

राष्ट्रपति ने कहा कि हस्तशिल्प केवल हमारी सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा नहीं है, बल्कि यह आजीविका का भी महत्वपूर्ण स्रोत है। इस क्षेत्र में देश में 3.2 मिलियन से अधिक लोग कार्यरत हैं। ध्यान देने योग्य बात है कि इस क्षेत्र में रोजगार और आय प्राप्त करने वाले अधिकांश लोग ग्रामीण या दूरदराज के क्षेत्रों में रहते हैं। यह क्षेत्र रोजगार और आय को विकेंद्रीकृत करके समावेशी विकास को बढ़ावा देता है।

राष्ट्रपति ने कहा कि हस्तशिल्प का संवर्धन सामाजिक सशक्तिकरण के लिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि इस क्षेत्र ने परंपरागत रूप से कमजोर वर्गों के लोगों का समर्थन किया है। हस्तशिल्प न केवल कारीगरों को आजीविका का साधन प्रदान करता है, बल्कि उनकी कला उन्हें समाज में मान्यता और सम्मान भी देती है। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र का विकास महिलाओं के सशक्तिकरण को भी मजबूत करेगा, क्योंकि इस क्षेत्र में कार्यरत कर्मचारियों का 68 प्रतिशत हिस्सा महिलाएं हैं।

राष्ट्रपति ने कहा कि हस्तशिल्प उद्योग की सबसे बड़ी ताकत इसकी स्थानीय और प्राकृतिक संसाधनों पर निर्भरता है। यह उद्योग पर्यावरण के अनुकूल है और इसका कार्बन फुटप्रिंट कम है। आज पर्यावरण-अनुकूल और सतत जीवनशैली की वैश्विक आवश्यकता पर जोर दिया जा रहा है। ऐसे परिप्रेक्ष्य में, यह क्षेत्र सततता में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है।

राष्ट्रपति यह देखकर प्रसन्न हुईं कि GI टैग भारतीय हस्तशिल्प उत्पादों की पहचान को दुनिया भर में मजबूत कर रहा है। उन्होंने सभी हितधारकों से अपने अद्वितीय उत्पादों के लिए GI टैग प्राप्त करने का प्रयास करने का आग्रह किया। उनका कहना था कि GI टैग उनके उत्पादों को एक विशेष पहचान देगा और राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनकी विश्वसनीयता बढ़ाएगा। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट (ODOP) पहल हमारे क्षेत्रीय हस्तशिल्प उत्पादों की अंतरराष्ट्रीय पहचान को मजबूत कर रही है।

राष्ट्रपति ने कहा कि पीढ़ियों से संग्रहित कारीगरों के ज्ञान, समर्पण और मेहनत के बल पर, भारतीय हस्तशिल्प उत्पादों ने विश्व स्तर पर अपनी पहचान बनाई है। उन्होंने कहा कि भारतीय हस्तशिल्पों की मांग में अत्यधिक वृद्धि की संभावना है। उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र युवा उद्यमियों और डिजाइनरों के लिए उत्कृष्ट अवसर प्रदान करता है ताकि वे अपने उद्यम स्थापित कर सकें।


Don't Miss
© Media24Media | All Rights Reserved | Infowt Information Web Technologies.