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भारत का गौरव: दीपावली अब यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर सूची में शामिल

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दीपावली, प्रकाश का पर्व, अब यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर (Intangible Cultural Heritage of Humanity) सूची में शामिल हो गया है। यह ऐतिहासिक घोषणा 8 से 13 दिसंबर 2025 के दौरान दिल्ली के लाल किले में आयोजित 20वें यूनेस्को इंटरगवर्नमेंटल कमेटी सत्र में की गई। यह सूची में शामिल होने वाला भारत का 16वां तत्व है। इस निर्णय में 194 सदस्य देशों के प्रतिनिधि, अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ और यूनेस्को के वैश्विक नेटवर्क के प्रतिनिधि उपस्थित थे। दीपावली, जो पीढ़ियों से समुदायों द्वारा जीवंत रूप में मनाई जाती है, सामाजिक एकता को बढ़ावा देती है और विकास में योगदान देती है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यूनेस्को की इस मान्यता का स्वागत करते हुए कहा कि दीपावली भारत की संस्कृति और जीवन मूल्यों से गहरे जुड़ा हुआ है और यह हमारी सभ्यता की आत्मा का प्रतीक है।

यूनेस्को की प्रतिनिधि सूची में किसी भी तत्व को शामिल करने के लिए संबंधित राज्यों को नामांकन दस्तावेज़ प्रस्तुत करना होता है। प्रत्येक देश दो साल में एक तत्व का नामांकन कर सकता है। भारत ने 2024–25 चक्र में ‘दीपावली’ का नामांकन किया।

दीपावली केवल वार्षिक उत्सव नहीं है, बल्कि यह करोड़ों लोगों के भावनात्मक और सांस्कृतिक जीवन में बसी एक जीवंत परंपरा है। दीपों की रोशनी से जगमगाते शहरों, गांवों और प्रवासी घरों में यह त्योहार खुशियों, नवीनीकरण और सामाजिक मेलजोल का संदेश फैलाता है।

यूनेस्को ने 17 अक्टूबर 2003 को पेरिस में अपनी 32वीं आम सभा में अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर (ICH) की सुरक्षा हेतु 2003 कन्वेंशन को अपनाया। इसका उद्देश्य जीवंत सांस्कृतिक परंपराओं, मौखिक प्रथाओं, प्रदर्शन कला, सामाजिक रीति-रिवाज, ज्ञान प्रणाली और हस्तकला को वैश्वीकरण और सामाजिक परिवर्तनों से होने वाले संकट से सुरक्षित करना है।

दीपावली का मूल दर्शन समृद्धि, नवीनीकरण और सभी के लिए सौभाग्य मनाने पर आधारित है। यह विविधताओं में एकता का संदेश देती है। घरों, गलियों और मंदिरों को अनगिनत दीपों से सजाया जाता है, जो अंधकार पर प्रकाश और अधर्म पर धर्म की विजय का प्रतीक हैं। बाजार रंग-बिरंगे वस्त्रों और कारीगरी से जगमगाते हैं। शाम होते ही आकाश में आतिशबाजी का भव्य दृश्य देखने को मिलता है।

दीपावली की प्रमुख कथाएँ:

  • रामायण: यह पर्व भगवान राम, सीता और लक्ष्मण के अयोध्या लौटने और रावण पर विजय के उपलक्ष्य में मनाया जाता है।

  • महाभारत: पांडवों के वनवास से लौटने की खुशी में दीपावली मनाई जाती है।

  • नरक चतुर्दशी: भगवान कृष्ण की नरकासुर पर विजय का प्रतीक।

  • जैन धर्म: भगवान महावीर का निर्वाण दिवस।

  • त्रिपुरासुर वध: भगवान शिव की त्रिपुरासुर पर विजय।

  • राजा बाली का स्वागत (महाराष्ट्र), काली पूजा (बंगाल, ओडिशा, असम) और गोवर्धन/अन्नकूट (कृष्ण की कथा)

दीपावली में लोग रंगोली बनाते हैं, मिठाइयाँ बनाते हैं, घर सजाते हैं, पूजा-अर्चना करते हैं, उपहार बदलते हैं और सामुदायिक आयोजन करते हैं। यह त्योहार सामाजिक एकता, नवाचार और संस्कृति के संरक्षण का प्रतीक है।

पाँच दिवसीय उत्सव:

  1. धनतेरस: नई चीज़ों की खरीद और समृद्धि का प्रतीक।

  2. नरक चतुर्दशी: नकारात्मकता दूर करने के लिए दीप जलाना।

  3. मुख्य दिन – लक्ष्मी-गणेश पूजा: घरों में दीपों और रंगोली से सजावट।

  4. पंचमी: मित्रों और परिवार से मिलना, उपहार देना।

  5. भाई दूज: भाई-बहन के रिश्तों का उत्सव।

दीपावली ग्रामीण समुदायों के जीवन और कृषि चक्र को सम्मान देती है। कुम्हार, दीपक निर्माता, सजावटकर्ता, फूल विक्रेता, मिठाई निर्माता, जौहरी, कारीगर और छोटे व्यवसाय इस त्योहार में अपनी कला और कारीगरी के माध्यम से आर्थिक योगदान करते हैं। यह त्योहार दान, उदारता और खाद्य सुरक्षा को भी बढ़ावा देता है।

हाल के वर्षों में दीपावली उत्सवों में पर्यावरणीय जागरूकता भी महत्वपूर्ण हुई है। सरकार ने “ग्रीन क्रैकर्स” और अभियान जैसे स्वच्छ दीवाली और शुभ दीवाली के माध्यम से पारंपरिक त्योहार को पर्यावरण-हितैषी बनाने का प्रयास किया।

दीपावली का सांस्कृतिक पारिस्थितिकी तंत्र गरीबी उन्मूलन, लिंग समानता, सामाजिक कल्याण और शिक्षा जैसे सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) में योगदान देता है।

भारत के विभिन्न हिस्सों, प्रवासियों और समुदायों से प्राप्त समर्थन और अनुभवों के आधार पर, दीपावली को यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर सूची में शामिल किया गया। यह सम्मान उन लाखों लोगों को समर्पित है जो इसे श्रद्धा और निष्ठा के साथ मनाते हैं, और उन कारीगरों को जिन्होंने इसे जीवित रखा।

दीपावली विश्व को यह संदेश देती है कि भारत की सांस्कृतिक विरासत केवल याद की गई नहीं, बल्कि जिया और आगे बढ़ाया गया है।


मुख्यमंत्री साय से अखिल भारतीय रामनामी महासभा के प्रतिनिधियों ने की सौजन्य भेंट

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रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से मंत्रालय महानदी भवन स्थित मुख्यमंत्री सचिवालय में अखिल भारतीय रामनामी महासभा के प्रतिनिधि मंडल ने सौजन्य भेंट की। उन्होंने सक्ती जिले के ग्राम नंदेली में 29 दिसंबर को आयोजित होने वाले रामनामी मेला एवं संत समागम में मुख्यमंत्री साय को आमंत्रित किया।मुख्यमंत्री साय ने आमंत्रण के लिए महासभा के पदाधिकारियों का आभार व्यक्त किया और उन्हें शुभकामनाएँ दीं। 

इस अवसर पर अखिल भारतीय रामनामी महासभा की अध्यक्ष सेत बाई रामनामी, महासचिव गुला राम रामनामी सहित रामनामी संप्रदाय से जुड़े अनेक सदस्य उपस्थित थे।

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