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भारत सरकार ने टेक्सटाइल सेक्टर में अनुसंधान और नवाचार के लिए Tex-RAMPS योजना को दी मंजूरी

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भारत सरकार ने टेक्सटाइल सेक्टर में अनुसंधान, नवाचार और प्रतिस्पर्धात्मकता को मजबूत करने के उद्देश्य से टेक्सटाइल फोकस्ड रिसर्च, असेसमेंट, मॉनिटरिंग, प्लानिंग और स्टार्ट-अप (Tex-RAMPS) योजना को मंजूरी दी है।

इस योजना के लिए कुल 305 करोड़ रुपये का बजट FY 2025-26 से FY 2030-31 तक रखा गया है और इसे केंद्रीय क्षेत्रीय योजना के रूप में लागू किया जाएगा, जिसे पूरी तरह से वस्त्र मंत्रालय द्वारा वित्तपोषित किया जाएगा।

वस्त्र मंत्रालय के केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा कि Tex-RAMPS योजना अनुसंधान, डेटा और नवाचार को एक साथ लाकर भारत के टेक्सटाइल सेक्टर को सशक्त बनाएगी और इसे वैश्विक स्तर पर स्थिरता, तकनीक और प्रतिस्पर्धात्मकता में अग्रणी बनाएगी।

Tex-RAMPS की मुख्य विशेषताएँ:

  1. अनुसंधान और नवाचार: स्मार्ट टेक्सटाइल, सततता, प्रक्रिया दक्षता और उभरती तकनीकों में उन्नत अनुसंधान को बढ़ावा देना।

  2. डेटा, विश्लेषण और डायग्नोस्टिक्स: रोजगार मूल्यांकन, आपूर्ति श्रृंखला मानचित्रण और इंडिया-साइज़ अध्ययन जैसे मजबूत डेटा सिस्टम का निर्माण।

  3. इंटीग्रेटेड टेक्सटाइल्स स्टैटिस्टिकल सिस्टम (ITSS): संरचित निगरानी और रणनीतिक निर्णय लेने के लिए रियल-टाइम डेटा और विश्लेषण प्लेटफार्म।

  4. क्षमता विकास और ज्ञान पारिस्थितिकी तंत्र: राज्य स्तर की योजना, सर्वश्रेष्ठ प्रथाओं का प्रसार, कार्यशालाएँ और क्षेत्रीय कार्यक्रम आयोजित करना।

  5. स्टार्ट-अप और नवाचार समर्थन: इनक्यूबेटर, हैकाथॉन और अकादमी-इंडस्ट्री सहयोग के माध्यम से उच्च-मूल्य वाले टेक्सटाइल स्टार्टअप और उद्यमिता को प्रोत्साहित करना।

अपेक्षित परिणाम:

  • वैश्विक बाजार में भारत की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाना

  • अनुसंधान और नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करना

  • डेटा-आधारित नीति निर्माण में सुधार

  • रोजगार सृजन के अवसर प्रदान करना

  • राज्यों, उद्योग, अकादमी और सरकारी संस्थानों के बीच गहन सहयोग को बढ़ावा देना

Tex-RAMPS योजना भारत के टेक्सटाइल सेक्टर को भविष्य के लिए सक्षम, लचीला और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

स्वदेशी तकनीक से बना भारत का गर्व: राष्ट्रीय तकनीकी वस्त्र मिशन के तहत विकसित तीन अत्याधुनिक ऊष्मा परीक्षण उपकरण

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राष्ट्रीय तकनीकी वस्त्र मिशन (NTTM), जो वस्त्र मंत्रालय की एक पहल है, ने सुरक्षात्मक वस्त्रों की संवहनीय (Convective), विकिरणीय (Radiant) और संपर्कीय (Conductive) ऊष्मा प्रतिरोध क्षमता जांचने के लिए तीन स्वदेशी उपकरण विकसित करने में सफलता प्राप्त की है। यह अभिनव परियोजना उत्तरी भारत वस्त्र अनुसंधान संघ (NITRA) द्वारा विकसित की गई है और भारत के तकनीकी वस्त्र क्षेत्र में आत्मनिर्भर परीक्षण क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

NTTM द्वारा प्रायोजित इस परियोजना का शीर्षक “Indigenously Developed State of the Art Instruments to Test Convective, Radiant, and Conductive Properties of Protective Textiles” है, जिसके तहत तीन अत्याधुनिक परीक्षण प्रणालियों का विकास किया गया है —

  • Convective Heat Tester (ISO 9151)


  • Radiant Heat Tester (ISO 6942)


  • Contact (Conductive) Heat Tester (IS 12127)


ये उपकरण अग्निशामक परिधानों, औद्योगिक सुरक्षात्मक वस्त्रों और रक्षा अनुप्रयोगों में प्रयुक्त सामग्रियों की ऊष्मा प्रतिरोध क्षमता का मूल्यांकन करने में सक्षम हैं, जहाँ ऊष्मा से सुरक्षा अत्यंत महत्वपूर्ण होती है।

इन उपकरणों को पूरी तरह से स्वदेशी डिज़ाइन और तकनीक के माध्यम से विकसित किया गया है। ये प्रदर्शन के लिहाज से आयातित उपकरणों के बराबर हैं, लेकिन लागत में काफी सस्ते हैं — जहाँ आयातित मॉडलों की कीमत ₹15–40 लाख तक होती है, वहीं ये स्वदेशी उपकरण केवल ₹5–10 लाख की लागत में उपलब्ध हैं। कम कीमत और त्वरित उपलब्धता के कारण अब अधिक संस्थान और उद्योग उच्च गुणवत्ता वाले परीक्षण का लाभ उठा सकेंगे।

इस तकनीक को वाणिज्यिक उपयोग के लिए गाजियाबाद स्थित एम/एस एशियन टेस्ट इक्विपमेंट प्रा. लि. को स्थानांतरित किया गया है, जो “मेक इन इंडिया” पहल के अनुरूप है। ये उपकरण पहले ही कानपुर स्थित एम/एस ऐस इन्कॉर्पोरेशन और सीएफईईएस, डीआरडीओ, दिल्ली में स्थापित और प्रमाणित किए जा चुके हैं, तथा अब ट्रेड इंडिया, इंडियामार्ट, और अलीबाबा जैसे प्लेटफॉर्म्स पर वाणिज्यिक रूप से उपलब्ध हैं।

स्वदेशी उपकरणों की उपलब्धता के बाद परीक्षण की अवधि लगभग 30 दिनों से घटकर केवल 3–5 दिन रह गई है और परीक्षण लागत भी ₹25,000–₹40,000 प्रति सैंपल से घटकर ₹6,000–₹10,000 रह गई है, जिससे भारतीय निर्माताओं और अनुसंधान संस्थानों के लिए परीक्षण सुविधा अधिक सुलभ हो गई है।

सीएफईईएस, डीआरडीओ जैसी संस्थाओं ने इन उपकरणों के प्रदर्शन पर संतोष व्यक्त किया है। NITRA के अनुसार, इन उपकरणों को आयातित प्रणालियों के दीर्घकालीन अनुभव और फील्ड स्टडी के आधार पर विकसित किया गया है ताकि वैश्विक मानकों के अनुरूप प्रदर्शन सुनिश्चित किया जा सके और तकनीकी आत्मनिर्भरता को बढ़ावा दिया जा सके।

NTTM द्वारा वित्तपोषित इस परियोजना की सफल पूर्णता भारत के तकनीकी वस्त्र क्षेत्र में बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण योगदान है। यह परियोजना नवाचार, स्थिरता और आत्मनिर्भरता को प्रोत्साहित करने के राष्ट्रीय दृष्टिकोण के अनुरूप है।

भारत–यूके टेक्निकल टेक्सटाइल्स साझेदारी : नवाचार, स्थिरता और नए अवसर

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भारत के वस्त्र मंत्रालय की सचिव नीलम शमी राव के नेतृत्व में एक उच्च-स्तरीय भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने यूनाइटेड किंगडम के मैनचेस्टर में आयोजित टेक्निकल टेक्सटाइल्स रोडशो में भारत की तकनीकी वस्त्र क्षेत्र में बढ़ती ताक़त का प्रदर्शन किया। इस प्रतिनिधिमंडल में मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी और मानव-निर्मित फाइबर, तकनीकी वस्त्र तथा अन्य प्रमुख क्षेत्रों के प्रतिनिधि, जिनमें TEXPROCIL भी शामिल था, मौजूद रहे। इसने भारत की मजबूत क्षमता और नवाचार-आधारित, टिकाऊ विकास के प्रति प्रतिबद्धता को रेखांकित किया।

सचिव का संबोधन — नवाचार, स्थिरता और CETA

मुख्य संबोधन में नीलम शमी राव ने कहा कि तकनीकी वस्त्र भारत के सबसे तेज़ी से बढ़ते क्षेत्रों में से एक हैं, जिन्हें अनुसंधान एवं विकास, उन्नत विनिर्माण और परिपत्र अर्थव्यवस्था (Circular Economy) की प्रथाओं से गति मिल रही है। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय तकनीकी वस्त्र मिशन (NTTM) के अंतर्गत भारत सतत विकास, ग्रीन मैन्युफैक्चरिंग और अपशिष्ट कम करने पर केंद्रित है, जिससे वैश्विक प्रतिस्पर्धा में दीर्घकालिक मजबूती मिलेगी।

उन्होंने कहा कि भारत–यूके Comprehensive Economic and Trade Agreement (CETA) एक “विन–विन फ्रेमवर्क” है — यूके को सुरक्षित और सतत स्रोत तथा तकनीकी साझेदारी का अवसर मिलेगा, जबकि भारत को बेहतर बाज़ार पहुंच, शुल्क में कटौती, मानकों की आपसी मान्यता और निवेशकों का विश्वास प्राप्त होगा। उन्होंने यूके के रिटेलर्स और औद्योगिक उपयोगकर्ताओं से भारत की किफायती और नवाचार-आधारित इकोसिस्टम के साथ मिलकर लचीली और सतत आपूर्ति श्रृंखलाएँ (supply chains) बनाने का आग्रह किया।

रणनीतिक सहभागिता

प्रतिनिधिमंडल ने मैनचेस्टर मेट्रोपॉलिटन यूनिवर्सिटी के मैनचेस्टर फ़ैशन इंस्टीट्यूट और ग्राफीन इंजीनियरिंग इनोवेशन सेंटर का दौरा किया, ताकि उन्नत सामग्री, सतत तकनीकी वस्त्र और परिपत्र फैशन मॉडल्स में सहयोग की संभावनाओं की खोज की जा सके।

भारत का तकनीकी वस्त्र निर्यात झलक (वित्त वर्ष 2024–25)

  • वैश्विक निर्यात: 2.92 बिलियन अमेरिकी डॉलर

  • प्रमुख श्रेणियाँ: पैकटेक (37.5%), इंडुटेक (28%)

  • यूके को निर्यात: 136 मिलियन अमेरिकी डॉलर (4.7% हिस्सा)

आगे की राह

यह दौरा भारत और यूके के बीच व्यापार के अधिक अवसर, संयुक्त उपक्रम, निवेश और तकनीकी साझेदारी को प्रोत्साहित करने की उम्मीद जगाता है। पीएम मित्रा मेगा टेक्सटाइल पार्क्स, उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजना और NTTM जैसी प्रमुख योजनाएँ विश्वस्तरीय अवसंरचना और अनुकूल कारोबारी माहौल तैयार कर रही हैं। CETA के अंतर्गत मिलने वाले बाज़ार पहुंच लाभों के साथ भारत 2030 तक अपने वस्त्र निर्यात को दोगुना करने की दिशा में अग्रसर है, और एक पारस्परिक रूप से लाभकारी, सतत और भविष्य-उन्मुख भारत–यूके वस्त्र व्यापार साझेदारी को मज़बूत कर रहा है।


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