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साधना से सफलता : शिक्षक की पहल से अनेक मंदिरों का हुआ जीर्णोद्धार व निर्माण

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शिक्षक महेंद्र कुमार पटेल बताते हैं कि धार्मिक आस्था का संस्कार उन्हें अपने पिता स्व. शिवचरण पटेल से मिला है। उनके पिता प्रतिदिन भगवान शिव की पूजा-अर्चना किए बिना अन्न ग्रहण नहीं करते थे। उन्होंने अपने जीवनकाल में अपनी मेहनत की कमाई से गांव में यज्ञ कराया और ग्राम देवी मां महामाया मंदिर का दो बार जीर्णोद्धार कराया। वही संस्कार उनके पुत्र महेंद्र पर पड़ा।

वर्ष 2016-17 में गांव के प्रसिद्ध व्याख्याकार जगदीश प्रसाद साहू ने लाफिनकला में राम मंदिर निर्माण की बात कही। इस पर महेंद्र ने बिना देरी किए अपने पिता स्व. शिवचरण पटेल की स्मृति में सबसे पहले 21 हजार रुपये मंदिर निर्माण के लिए देने की घोषणा ग्रामीणों के समक्ष की और मंदिर निर्माण की कामना को लेकर प्रतिदिन भगवान श्रीराम-सीता की आराधना शुरू कर दी। साथ ही गांव में जनसहयोग जुटाना प्रारंभ किया।

एक-दो वर्षों में ही लाखों रुपये का जनसहयोग मिला और अयोध्या में मंदिर बनने से पूर्व ही अपने गांव में राम मंदिर निर्माण का संकल्प लिया गया। ग्रामीणों के सहयोग से वर्ष 2021 में करीब 21 लाख रुपये की लागत से भव्य श्रीराम-जानकी मंदिर बनकर तैयार हो गया, जो आज जन-आस्था का केंद्र है।

इस दौरान मंत्रालय में धर्मस्व शाखा में पदस्थ लोकेश्वर साहू के मार्गदर्शन में और स्थानीय विधायक के सहयोग से उन्होंने धर्मस्व विभाग से संपर्क कर मंदिर निर्माण से पहले ही 5 लाख रुपये की लागत से आहाता निर्माण की स्वीकृति करा ली।

सिलसिला यहीं नहीं रुका। महेंद्र ने अपने पिता के आराध्य ग्राम देवता अंकोलिया बाबा मंदिर के जीर्णोद्धार की योजना बनाई और लोकेश्वर साहू के दिशा-निर्देश पर 5 लाख रुपये की शासकीय स्वीकृति कराकर जीर्णोद्धार करा लिया। इसके पश्चात पुरातात्विक नगरी सिरपुर में धर्मशाला निर्माण का प्रयास किया और वहां भी 5 लाख रुपये की धर्मशाला की स्वीकृति कराकर निर्माण कराया। जहां धर्मशाला बनी है वह स्थल बौद्ध विहार से लगा होने के कारण निर्माण में काफी अड़चनें आईं। इस चुनौतीपूर्ण कार्य के लिए तत्कालीन संसदीय सचिव एवं विधायक विनोद सेवनलाल चंद्राकर द्वारा उन्हें विशेष रूप से सम्मानित किया गया।

कोविड-19 के दौरान लॉकडाउन में जब शिक्षक महेंद्र ने धार्मिक नगरी आरंग में खुले में रखे प्राचीन शिवलिंगों को देखा, तो मन में विचार आया कि जनसहभागिता से इन शिवालयों का जीर्णोद्धार कराया जाए। इसी बीच वे पीपला ग्रुप से जुड़े और सदस्यों के समक्ष जीर्णोद्धार का प्रस्ताव रखा। भगवान शिव की कृपा से आरंग नगर के चार प्राचीन शिवालयों का जीर्णोद्धार हो गया।

वहीं अपने गृह ग्राम लाफिनकला में तालाब के बीचों-बीच शिव मंदिर निर्माण की पहल करते हुए उन्होंने स्वयं 1 लाख रुपये का दान दिया और प्रतिदिन द्वादश ज्योतिर्लिंगों की आराधना प्रारंभ की। उनके मंझले भाई नेतन पटेल के नेतृत्व में ग्रामीणों के सहयोग से करीब 21-22 लाख रुपये की लागत से द्वादश ज्योतिर्लिंग मंदिर का निर्माण कार्य प्रगति पर है। इसके अलावा वे ग्राम रीवा में निर्माणाधीन मां चंडिका मंदिर और पांडुका सिरकट्टी में बने भव्य श्रीराम मंदिर निर्माण में भी सहभागी रहे हैं।

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