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टीडीबी ने एयरोस्पेस, रक्षा और ईवी चार्जिंग कनेक्टरों के स्वदेशी व्यावसायीकरण हेतु टीआईईए कनेक्टर्स को दिया समर्थन

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भारत को उन्नत विनिर्माण और रणनीतिक प्रौद्योगिकियों का वैश्विक केंद्र बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) के अंतर्गत प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड ने बेंगलुरु स्थित TIEA Connectors Pvt. Ltd. को “एयरोस्पेस, रक्षा एवं इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए एयरबोर्न कनेक्टर्स और चार्जिंग कनेक्टर्स के व्यावसायीकरण” परियोजना के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की है।

इस परियोजना का उद्देश्य एयरोस्पेस, रक्षा, अंतरिक्ष और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी जैसे रणनीतिक एवं उभरते क्षेत्रों के लिए उच्च-विश्वसनीयता (High-Reliability) वाले विद्युत इंटरकनेक्ट सिस्टम के डिजाइन और निर्माण में भारत की स्वदेशी क्षमताओं को सुदृढ़ करना है।

विद्युत कनेक्टर आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक एवं इलेक्ट्रोमैकेनिकल प्रणालियों के अत्यंत महत्वपूर्ण घटक हैं, जो कठिन परिचालन परिस्थितियों में भी ऊर्जा, सिग्नल और डेटा के निर्बाध संचार को सुनिश्चित करते हैं। एयरोस्पेस, रक्षा और अंतरिक्ष जैसे क्षेत्रों में इनकी विश्वसनीयता और सुरक्षा अत्यंत महत्वपूर्ण होती है, क्योंकि इन्हें अत्यधिक कंपन, झटकों, तापमान और पर्यावरणीय दबावों के बीच कार्य करना पड़ता है।

टीआईईए द्वारा विकसित तकनीक उन्नत कंपन-प्रतिरोधी (Vibration-Resistant) संपर्क संरचना पर आधारित है, जो अत्यधिक गतिशील परिस्थितियों में भी स्थिर विद्युत प्रदर्शन सुनिश्चित करती है। इसमें एक स्वामित्वयुक्त (Proprietary) मल्टी-पॉइंट इलास्टिक कॉन्टैक्ट मैकेनिज्म का उपयोग किया गया है, जो संपर्क स्थिरता बढ़ाने, विद्युत प्रतिरोध कम करने और तीव्र कंपन के दौरान भी सिग्नल बाधित होने से रोकने में सक्षम है।

यह तकनीक 100G तक के कंपन स्तर पर भी विश्वसनीय विद्युत संपर्क बनाए रखने में सक्षम है, जिससे यह मिशन-क्रिटिकल एयरोस्पेस, रक्षा और अंतरिक्ष अनुप्रयोगों के लिए उपयुक्त बनती है। इन कनेक्टरों का निर्माण उच्च-प्रदर्शन बेरीलियम कॉपर (BeCu) मिश्रधातु से किया जाता है और इनमें विशेष लॉकिंग मैकेनिज्म लगाए गए हैं ताकि कठोर परिस्थितियों में भी सुरक्षित एवं स्थायी विद्युत संपर्क बना रहे।

रणनीतिक उपयोगों के लिए इन कनेक्टरों पर चांदी और सोने की प्लेटिंग भी की जाती है, जिससे बेहतर चालकता, जंग-प्रतिरोध और दीर्घकालिक विश्वसनीयता सुनिश्चित होती है।

यह परियोजना भारत सरकार की ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल और रक्षा, एयरोस्पेस तथा उन्नत विनिर्माण क्षेत्रों में महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों के स्वदेशीकरण के लक्ष्य के अनुरूप है। कंपनी ने उत्पाद डिजाइन, इंजीनियरिंग, टूलिंग, प्रोटोटाइपिंग, परीक्षण और विनिर्माण तक की संपूर्ण क्षमताएं देश में विकसित की हैं, जिससे आयातित तकनीकों पर निर्भरता कम होगी।

यह तकनीक भारत के तेजी से बढ़ते इलेक्ट्रिक वाहन (EV) क्षेत्र की आवश्यकताओं को भी पूरा करेगी और मजबूत एवं विश्वसनीय चार्जिंग कनेक्टर समाधान उपलब्ध कराएगी। इससे घरेलू आपूर्ति श्रृंखला मजबूत होगी, तकनीकी आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलेगा और उच्च-मूल्य इलेक्ट्रॉनिक घटकों के क्षेत्र में वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता विकसित होगी।

इस अवसर पर टीडीबी के सचिव राजेश कुमार पाठक ने कहा कि एयरोस्पेस, रक्षा, अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी में भारत की बढ़ती क्षमताओं के लिए स्वदेशी उच्च-प्रदर्शन घटकों का विकास अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि टीडीबी रणनीतिक और उच्च-विकास वाले क्षेत्रों के लिए वैश्विक स्तर की तकनीक विकसित करने वाले भारतीय उद्यमों को समर्थन देने के लिए प्रतिबद्ध है।

टीआईईए कनेक्टर्स के प्रवर्तकों ने टीडीबी के सहयोग के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इससे कंपनी को अपनी स्वदेशी कनेक्टर तकनीकों के व्यावसायीकरण में तेजी लाने और एयरोस्पेस, रक्षा, अंतरिक्ष, इलेक्ट्रिक वाहन तथा औद्योगिक बाजारों की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए विनिर्माण क्षमता का विस्तार करने में सहायता मिलेगी।


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