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डिजिटल इंडिया BHASHINI और सर्वे ऑफ इंडिया के बीच टोपोनिमी (भू-नाम) के लिए AI आधारित सहयोग

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डिजिटल इंडिया BHASHINI डिवीजन (DIBD), इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने 20 जनवरी 2026 को सर्वे ऑफ इंडिया (SoI) के साथ एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए। इस सहयोग का उद्देश्य AI आधारित भाषण और भाषा प्रौद्योगिकियों का उपयोग कर भौगोलिक स्थान नामों (टोपोनिमी) के डिजिटाइजेशन, ट्रांसक्रिप्शन और मानकीकरण को सुदृढ़ करना है। यह पहल नेशनल जियोस्पेशियल पॉलिसी, 2022 के अनुरूप सटीक, बहुभाषी और मानकीकृत टोपोनिमी डेटासेट के निर्माण को मजबूत करेगी।

सर्वे ऑफ इंडिया की भूमिका और सहयोग का महत्व

सर्वे ऑफ इंडिया, देश की राष्ट्रीय एजेंसी होने के नाते, भौगोलिक नामों के मानकीकरण और रखरखाव के लिए जिम्मेदार है। यह स्थानीय भाषाओं में स्थान नामों को इकट्ठा करने के लिए बड़े पैमाने पर फील्ड सर्वेक्षण करता है और उन्हें राष्ट्रीय मानचित्र प्रणालियों में समेकित करता है।

इस सहयोग के तहत BHASHINI की speech-to-text और भाषा प्रसंस्करण क्षमताओं का उपयोग करके, स्थान नामों की बड़ी मात्रा में ऑडियो रिकॉर्डिंग को संरचित डिजिटल टेक्स्ट में परिवर्तित किया जाएगा। इससे 16 लाख से अधिक स्थानों को कवर करने वाले व्यापक और मान्य टोपोनिमी डेटाबेस के निर्माण में मदद मिलेगी।

राष्ट्रीय भू-नाम सूचना प्रणाली (NGNIS) का विकास

यह सहयोग नेशनल जियोग्राफिकल नेम इन्फॉर्मेशन सिस्टम (NGNIS) के विकास को भी समर्थन देगा। फील्ड में एकत्र किए गए ऑडियो डेटा को:

  • स्थानीय भाषा लिपियों में

  • देवनागरी में

  • रोमन में

  • अन्य प्रारूपों में

परिवर्तित करने की प्रक्रिया को तेज, सटीक और बड़े पैमाने पर किया जाएगा। इससे राष्ट्रीय मानचित्रों, डिजिटल प्लेटफॉर्मों और सरकारी प्रणालियों में एकरूपता सुनिश्चित होगी।

उच्च गुणवत्ता वाले टोपोनिमी डेटा का निर्माण

यह पहल स्थान नामों के ऑडियो दस्तावेज़ीकरण को मजबूत करेगी, जिससे सही उच्चारण और स्थानीय भाषाई विविधताओं का संरक्षण संभव होगा। साथ ही, सर्वे ऑफ इंडिया टोपोनिमी मैनुअल और BIS कोड ऑफ प्रैक्टिस के अनुरूप मानकीकरण को भी सुनिश्चित किया जाएगा।

इससे ओपन सीरीज मैप्स, सरकारी प्लेटफॉर्म और सार्वजनिक जानकारी प्रणालियों में उपयोग होने वाले स्थान नामों के डेटासेट की विश्वसनीयता बढ़ेगी।

भाषा AI से राष्ट्रीय डिजिटल ढांचे को सशक्त बनाना

इस साझेदारी के माध्यम से Digital India BHASHINI Division अपनी भाषण और भाषा AI क्षमताओं को डेटा निर्माण, एनोटेशन और सत्यापन कार्यप्रणाली में उपयोग करेगा, जिससे मानव भाषण को बड़े पैमाने पर उच्च गुणवत्ता वाले जियोस्पेशियल भाषा डेटासेट में परिवर्तित किया जा सके।

यह सहयोग यह भी दर्शाता है कि भाषा AI को राष्ट्रीय डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे में एकीकृत करना कितना महत्वपूर्ण है, विशेषकर तब जब भाषाई सटीकता सेवा वितरण और निर्णय-निर्माण के लिए आवश्यक हो।

परिणाम और उद्देश्य

यह MoU भारत के जियोस्पेशियल इकोसिस्टम को मजबूत करने में भाषा प्रौद्योगिकी की भूमिका को और पुष्ट करता है। यह सुनिश्चित करेगा कि विभिन्न क्षेत्रों और बोलियों के स्थान नाम सटीक रूप से कैप्चर, संरक्षित और मानकीकृत हों, जो कि शासन, आपदा प्रबंधन, अवसंरचना योजना और नागरिक सेवाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।


राष्ट्रीय कार्यशाला: “भौगोलिक सूचना मिशन – विकसित भारत का सशक्तकर्ता” आयोजित

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भारतीय सर्वेक्षण विभाग, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, 17 दिसंबर 2025 को राष्ट्रीय कार्यशाला: “भौगोलिक सूचना मिशन: विकासित भारत का सशक्तकर्ता” का आयोजन यशोभूमि, सेक्टर 25, द्वारका, नई दिल्ली में कर रहा है। यह राष्ट्रीय कार्यशाला नीति निर्माता, तकनीकी विशेषज्ञ, उद्योग नेता और क्षेत्र विशेषज्ञों को एक मंच पर लाएगी ताकि भारत के भौगोलिक सूचना भविष्य को आकार देने वाली नवाचारों पर विचार-विमर्श किया जा सके।

उद्घाटन और मुख्य अतिथि

इस कार्यशाला का उद्घाटन डॉ. जितेंद्र सिंह, राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय, पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय और कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन मंत्रालय द्वारा किया जाएगा। वे मुख्य अतिथि के रूप में इस कार्यक्रम की गरिमा बढ़ाएंगे।
डॉ. जितेंद्र सिंह सरकार की भौगोलिक क्षमता को बढ़ाने और इस तेजी से विकसित हो रहे क्षेत्र की पूरी संभावनाओं को साकार करने के लिए सहयोगात्मक प्रयासों की आवश्यकता पर जोर देंगे।

राष्ट्रीय भौगोलिक सूचना मिशन

राष्ट्रीय भौगोलिक सूचना मिशन, जिसे संघीय बजट 2025-26 में घोषित किया गया था, सरकार की यह प्रतिबद्धता दर्शाता है कि उन्नत भौगोलिक तकनीकों को शहरी नियोजन, पर्यावरण निगरानी और अवसंरचना विकास जैसे प्रमुख क्षेत्रों में एकीकृत किया जाएगा।

यह कार्यशाला विकसित भारत 2047 की राष्ट्रीय दृष्टि को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिसमें भौगोलिक अवसंरचना को सुदृढ़ करने और विभिन्न क्षेत्रों में आधुनिक तकनीकों के एकीकरण पर विचार-विमर्श किया जाएगा।

कार्यशाला के मुख्य विषय

कार्यशाला में गहन सत्र होंगे जो भौगोलिक प्राथमिकताओं के व्यापक स्पेक्ट्रम को कवर करेंगे। प्रमुख फोकस क्षेत्र:

  • राष्ट्रीय ज्योडेटिक संदर्भ फ्रेम का आधुनिकीकरण और सुदृढ़ीकरण

  • भौगोलिक डेटा और मानचित्रण अवसंरचना का सुदृढ़ीकरण

  • भौगोलिक ढांचे को एकसमान बनाने में मानकों की भूमिका

  • भौगोलिक क्षेत्र में तकनीकी प्रगति के साथ कदम मिलाना

इन सत्रों के माध्यम से हितधारक उभरती हुई संभावनाओं को संबोधित कर पाएंगे, वैश्विक मानकों के अनुसार भौगोलिक प्रथाओं को संरेखित करेंगे और भविष्य-सक्षम तकनीकों को अपनाने की गति तेज करेंगे।

विशेषज्ञ डेटा अधिग्रहण, प्रोसेसिंग, विश्लेषण और उभरती डिजिटल तकनीकों के उपयोग जैसे क्षेत्रों में तेजी से हो रही तकनीकी प्रगति के साथ कदम मिलाने के तरीकों पर भी विचार करेंगे।

उद्देश्य और महत्व

यह पहल भारतीय सर्वेक्षण विभाग की प्रतिबद्धता को दर्शाती है कि एक मजबूत, मानकीकृत और भविष्य-सक्षम भौगोलिक सूचना इकोसिस्टम तैयार किया जाए, जो देश की विकास आवश्यकताओं का समर्थन कर सके।
सरकारी एजेंसियों, उद्योग हितधारकों और तकनीकी विशेषज्ञों को एक साथ लाकर, यह कार्यशाला भारत के भौगोलिक मिशन को गति देने और विभिन्न क्षेत्रों में सूचित निर्णय लेने को बढ़ावा देने का लक्ष्य रखती है।

यह कार्यक्रम भौगोलिक सूचना समुदाय के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होने का वादा करता है, और हम यशोभूमि, नई दिल्ली में सरकारी एजेंसियों, उद्योग हितधारकों और तकनीकी विशेषज्ञों का स्वागत करने के लिए उत्सुक हैं।


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