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भारत–ऑस्ट्रेलिया कौशल और शिक्षा सहयोग: 3rd AIESC बैठक में भविष्य के लिए कौशल और खेल अर्थव्यवस्था पर सहमति

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नई दिल्ली में आयोजित 3rd ऑस्ट्रेलिया–भारत शिक्षा और कौशल परिषद (AIESC) की बैठक के दौरान भारत और ऑस्ट्रेलिया ने कौशल विकास, कार्यबल गतिशीलता और तेजी से बढ़ती खेल अर्थव्यवस्था में सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए सार्थक द्विपक्षीय संवाद किया। इस बैठक की सह-अध्यक्षता कौशल विकास और उद्यमिता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) जयंत चौधरी और ऑस्ट्रेलिया के शिक्षा एवं कौशल मंत्री एंड्रयू जाइल्स MP ने की।

बैठक में भारत–ऑस्ट्रेलिया संबंधों की मजबूत प्रगति को मान्यता दी गई और यह सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया कि इस गतिशीलता को कुशल पेशेवरों के लिए सुव्यवस्थित मार्गों में बदल दिया जाए। दोनों पक्षों ने योग्यता की पारस्परिक मान्यता (Mutual Recognition of Qualifications – MRQ) तंत्र को तेजी से लागू करने और ब्रिज कोर्स विकसित करने पर सहमति व्यक्त की, ताकि कौशल और योग्यता का सामंजस्य स्थापित हो और कार्यबल की गतिशीलता सहज हो सके। विशेष रूप से उन्नत निर्माण क्षेत्र में वैश्विक मानकों के अनुरूप कुशल कार्यकर्ताओं को तैयार करने पर ध्यान केंद्रित किया गया।

बैठक के दौरान भारत की 2030 कॉमनवेल्थ गेम्स की बोली और ऑस्ट्रेलिया के 2032 ब्रिस्बेन ओलंपिक एवं पैरालंपिक की मेजबानी से उत्पन्न रणनीतिक अवसरों पर चर्चा हुई। खेल और शारीरिक स्वास्थ्य क्षेत्र को रोजगार सृजन और भारत के GDP में लगभग 2% योगदान देने वाली ‘सूर्योदय’ उद्योग के रूप में मान्यता दी गई। ऑस्ट्रेलिया की खेल प्रबंधन और खेल तकनीक में वैश्विक नेतृत्व को भारत के तेजी से बढ़ते खेल निर्माण और गिग अर्थव्यवस्था क्षेत्र के साथ पूरक माना गया।

इसके अतिरिक्त, भारत के ITI और राष्ट्रीय कौशल प्रशिक्षण संस्थान (NSTI) और ऑस्ट्रेलिया के TAFE नेटवर्क के बीच सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया गया। साझेदारी का कार्य खनन, डिजिटल एवं आईटी कौशल, आतिथ्य, हरित रोजगार, नवीकरणीय ऊर्जा और लॉजिस्टिक्स सहित विभिन्न क्षेत्रों में होगा।

जयंत चौधरी ने भारत की Skilling for AI Readiness (SOAR) पहल के तहत भविष्य-उन्मुख कौशल को बढ़ावा देने पर जोर दिया और डिजिटल अपनाने के लिए नैतिक ढांचे और मानकों पर सहयोग की आवश्यकता को रेखांकित किया। उन्होंने भारत–ऑस्ट्रेलिया वार्षिक कौशल बैठक आयोजित करने का प्रस्ताव रखा, जो भारत और ऑस्ट्रेलिया में बारी-बारी से आयोजित की जाएगी। यह प्लेटफार्म कौशल के मानकीकरण, संस्थागत साझेदारी और प्रशिक्षण पारिस्थितिकी तंत्र को उद्योग की आवश्यकताओं के अनुरूप बनाए रखने में मदद करेगा।

एंड्रयू जाइल्स ने भारत के साथ साझेदारी की सराहना करते हुए कहा कि कौशल सहयोग दोनों देशों के लोगों के लिए साझा समृद्धि और मापनीय प्रभाव सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

बैठक में MSDE, DG Training, NCVET, NSDC और ऑस्ट्रेलिया के शिक्षा एवं कौशल एजेंसियों के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।

बैठक का समापन उच्च-स्तरीय जुड़ाव बनाए रखने, सहयोगी मॉडल को तेज़ी से लागू करने और दोनों देशों में भविष्य-तैयार कौशल पारिस्थितिकी तंत्र को सशक्त बनाने की साझा प्रतिबद्धता के साथ हुआ।

SportEdge Meerut: मेरठ को भारत का मॉडल स्पोर्ट्स हब बनाने की पहल

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भारत की खेल अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने और समावेशी विकास को सशक्त बनाने के लिए, कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय (MSDE) ने स्पोर्ट्स, फिजिकल एजुकेशन, फिटनेस और लेजर स्किल्स काउंसिल (SPEFL-SC) तथा ब्रिटिश एशियन ट्रस्ट (BAT) के सहयोग से “SportEdge Meerut” कार्यशाला का सफल आयोजन किया। यह पहल मेरठ को भारत का मॉडल स्पोर्ट्स हब बनाने के उद्देश्य से खेल और उद्यमिता विकास के लिए शुरू की गई है।

मुख्य उद्देश्य और पहल

SportEdge Meerut का उद्देश्य मेरठ की खेल विरासत का लाभ उठाकर आर्थिक विकास को बढ़ावा देना, कौशल आधारित आजीविका के अवसर पैदा करना और स्थानीय प्रतिभा, विशेष रूप से महिलाओं और युवाओं को सशक्त बनाना है। SPEFL-SC इस कार्यक्रम को सेक्टरल कौशल आवश्यकताओं, उद्योग साझेदारियों और मानकों के अनुरूप विकसित करने में मुख्य भूमिका निभाएगा, जबकि MSDE केंद्रीय और राज्य मंत्रालयों, उद्योग निकायों और खेल संघों के साथ समन्वय सुनिश्चित करेगा।

कार्यशाला में भागीदारी

कार्यशाला में सरकार, उद्योग, वित्त और विकास क्षेत्रों के विभिन्न हितधारकों ने भाग लिया। इसमें एशियाई विकास बैंक (ADB), विश्व बैंक, ONGC फाउंडेशन, माइक्रोसॉफ्ट, अमेरिकन इंडिया फाउंडेशन और SBI फाउंडेशन सहित कई प्रतिष्ठित संस्थाओं के प्रतिनिधि शामिल थे। उन्होंने SportEdge Meerut के महत्व और इसे एक राष्ट्रीय मॉडल के रूप में विकसित करने के अवसरों पर विचार-विमर्श किया।

मेरठ: भारत की खेल अर्थव्यवस्था का इंजन

मेरठ भारत के सबसे बड़े खेल सामान निर्माण क्लस्टरों में से एक है और उत्तर प्रदेश के “वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट” (ODOP) पहल के तहत प्रमुख जिला है। यह जिला राज्य की अर्थव्यवस्था में लगभग ₹1,500 करोड़ का योगदान करता है और भारत के खेल सामान निर्यात में 40% से अधिक हिस्सा रखता है। क्लस्टर में 3 लाख से अधिक कारीगर, महिला कार्यकर्ता और छोटे उद्यमी कार्यरत हैं।

SportEdge Meerut के माध्यम से इस पारंपरिक कौशल और उत्पादन क्षमता को वैश्विक मानक के स्तर पर ले जाने और नवाचार, ब्रांडिंग, मार्केटिंग और सतत उद्यमिता के लिए सशक्त बनाने का लक्ष्य है।

नेतृत्व और दृष्टि

कौशल विकास और उद्यमिता राज्यमंत्री जयंत चौधरी ने कहा:

“मैं SportEdge Meerut के तहत मेरठ स्पोर्ट्स हब विकास मॉडल की घोषणा करते हुए प्रसन्न हूँ। यह पहल खेल, कौशल और उद्यमिता को एक एकीकृत विकास इंजन में बदलने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। खेल केवल जीतने के लिए नहीं हैं, बल्कि जीवन कौशल हैं जो चरित्र निर्माण, अनुशासन और नए अवसरों के द्वार खोलते हैं।”

संस्थागत सहयोग और वैश्विक दृष्टिकोण

MSDE की सचिव देबाश्री मुखर्जी ने कहा:

“SportEdge Meerut पहल के माध्यम से हम नीति, उद्योग और लोगों को जोड़कर इस पारंपरिक क्लस्टर को कौशल, खेल और सतत विकास के वैश्विक प्रतीक में बदलना चाहते हैं। जब खेल आजीविका और उद्यमिता का माध्यम बनते हैं, तो हम केवल चैंपियनों को नहीं बनाते, बल्कि एक मजबूत और आत्मनिर्भर भारत का निर्माण करते हैं।”

उद्योग की दृष्टि और अगले कदम

उद्योग विशेषज्ञों ने R&D, डिज़ाइन नवाचार और तकनीकी एकीकरण पर जोर दिया। उन्होंने खेल इंजीनियरिंग, उपकरण डिजाइन और सामग्री विज्ञान में अनुसंधान को बढ़ावा देने, उत्पाद डिज़ाइन और IP निर्माण में नवाचार, और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए गुणवत्ता मानकों को मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया।

अगले चरण में MSDE, SPEFL-SC और BAT स्थानीय सरकार, उद्योग और वित्तीय भागीदारों के साथ परामर्श करके कार्यान्वयन ढांचा तैयार करेंगे और उसके पश्चात औपचारिक समझौता पत्र (MoU) पर हस्ताक्षर होंगे।

उद्देश्य

SportEdge Meerut का लक्ष्य राष्ट्रीय स्तर पर खेल और उद्यमिता आधारित विकास का मॉडल बनाना है, जो दिखाए कि स्थानीय ताकतें, कौशल विकास और वैश्विक सहयोग मिलकर समुदायों और अर्थव्यवस्था के लिए परिवर्तनकारी अवसर खोल सकती हैं।

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