Media24Media.com: #SpiritualDiplomacy

Responsive Ad Slot


 

Showing posts with label #SpiritualDiplomacy. Show all posts
Showing posts with label #SpiritualDiplomacy. Show all posts

श्रीलंका में पवित्र देवनीमोरी अवशेषों का भव्य प्रदर्शन, भारत–श्रीलंका के आध्यात्मिक संबंध और सुदृढ़

No comments Document Thumbnail

भगवान बुद्ध के पवित्र देवनीमोरी अवशेषों का श्रीलंका में आगमन और उनका सार्वजनिक प्रदर्शन आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और सभ्यतागत दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण क्षण है। यह आयोजन भारत और श्रीलंका के बीच साझा बौद्ध विरासत पर आधारित गहरे और ऐतिहासिक संबंधों को और सुदृढ़ करता है।

पवित्र अवशेष भारतीय वायुसेना के विशेष विमान से श्रीलंका लाए गए, जहाँ उन्हें भारत–श्रीलंका के स्थापित प्रोटोकॉल के अनुरूप पूर्ण राजकीय सम्मान प्रदान किया गया। इस अवसर पर गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत और गुजरात के उपमुख्यमंत्री हर्ष सांघवी के नेतृत्व में एक उच्चस्तरीय भारतीय प्रतिनिधिमंडल अवशेषों के साथ उपस्थित रहा। प्रतिनिधिमंडल में वरिष्ठ बौद्ध भिक्षु, सरकारी अधिकारी और अन्य विशिष्ट गणमान्य व्यक्ति भी शामिल थे।

यह प्रदर्शनी माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा अप्रैल 2025 में श्रीलंका की राजकीय यात्रा के दौरान की गई घोषणा के अनुरूप आयोजित की गई है, जो भारत की श्रीलंका के साथ आध्यात्मिक और सांस्कृतिक संबंधों को और गहरा करने की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। उस यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री ने अनुराधापुरा में सेक्रेड सिटी कॉम्प्लेक्स परियोजना के विकास के लिए अनुदान सहायता की भी घोषणा की थी, जो वर्ष 2020 में बौद्ध संबंधों को बढ़ावा देने के लिए घोषित 15 मिलियन अमेरिकी डॉलर के अनुदान के अतिरिक्त है।

पवित्र देवनीमोरी अवशेषों की प्रदर्शनी का उद्घाटन 4 फरवरी 2026 को कोलंबो स्थित प्रतिष्ठित गंगारामया मंदिर में श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुर कुमार दिसानायके द्वारा किया गया। इस अवसर पर भारतीय पक्ष से गुजरात के राज्यपाल और उपमुख्यमंत्री भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम में गंगारामया मंदिर के मुख्य महंत वेनेरेबल डॉ. किरिंदे असाजी थेरो की गरिमामयी उपस्थिति रही।

इस समारोह में श्रीलंका सरकार के कई वरिष्ठ मंत्री भी शामिल हुए, जिनमें बौद्ध शासन, धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्य मंत्री डॉ. हिनिदुमा सुनील सेनेवी, स्वास्थ्य एवं जनसंचार मंत्री डॉ. नलिंदा जयतिस्सा, तथा सार्वजनिक प्रशासन, प्रांतीय परिषद और स्थानीय सरकार मंत्री प्रो. ए.एच.एम.एच. अबयरत्ना प्रमुख थे।

प्रदर्शनी के अंतर्गत गंगारामया मंदिर परिसर में दो विशेष प्रदर्शनियाँ—“अनअर्थिंग द सेक्रेड पिप्रहवा” और “सेक्रेड रेलिक एंड कल्चरल एंगेजमेंट ऑफ कंटेम्पररी इंडिया”—का भी उद्घाटन किया गया।

पवित्र अवशेषों का पारंपरिक धार्मिक विधियों के साथ स्वागत कर उन्हें गंगारामया मंदिर में स्थापित किया गया। यह प्रदर्शनी 5 फरवरी 2026 से आम जनता के दर्शन के लिए खुली रहेगी, जिससे श्रीलंका सहित विश्वभर के श्रद्धालु भगवान बुद्ध को नमन कर सकेंगे। अवशेषों का आगमन श्रीलंका के 78वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर हुआ, जिससे इस आयोजन का महत्व और भी बढ़ गया।

उल्लेखनीय है कि यह भारत के बाहर देवनीमोरी अवशेषों का पहला सार्वजनिक दर्शन है। इससे पहले भारत ने वर्ष 2012 में कपिलवस्तु अवशेषों और 2018 में सारनाथ अवशेषों की प्रदर्शनी श्रीलंका में आयोजित की थी।

पवित्र देवनीमोरी अवशेषों की यह प्रदर्शनी भगवान बुद्ध के शाश्वत संदेश—करुणा, शांति और अहिंसा—का जीवंत प्रतीक है और भारत–श्रीलंका के बीच गहरे सभ्यतागत संबंधों को प्रतिबिंबित करते हुए दोनों देशों के सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और जन-जन के संपर्क को और मजबूत करती है।


Don't Miss
© Media24Media | All Rights Reserved | Infowt Information Web Technologies.