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सोमनाथ स्वाभिमान पर्व 2026: सहस्राब्दी की दृढ़ता, आस्था और भारत के सभ्यतागत आत्मसम्मान का उत्सव

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 मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • सोमनाथ स्वाभिमान पर्व (8–11 जनवरी 2026) महमूद ग़ज़नवी द्वारा 1026 में सोमनाथ मंदिर पर हुए प्रथम आक्रमण के 1,000 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आयोजित।

  • यह पर्व भारत की सभ्यतागत दृढ़ता, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत का उत्सव है।

  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 10–11 जनवरी 2026 को सोमनाथ में प्रमुख स्मरणीय कार्यक्रमों में भाग लेंगे।

  • सोमनाथ मंदिर में प्रतिवर्ष 92–97 लाख श्रद्धालु दर्शन करते हैं।

  • महिला सहभागिता: सोमनाथ ट्रस्ट के 906 कर्मचारियों में 262 महिलाएं; कुल मिलाकर लगभग 363 महिलाओं को रोजगार, जिससे प्रतिवर्ष लगभग ₹9 करोड़ की आय सृजित होती है।

परिचय

“सौराष्ट्रे सोमनाथं च श्रीशैले मल्लिकार्जुनम्।
उज्जयिन्यां महाकालम् ओंकारममलेश्वरम्॥”

द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्र का यह श्लोक सोमनाथ को बारह ज्योतिर्लिंगों में प्रथम स्थान देता है, जो भारत की आध्यात्मिक भूगोल में इसके केंद्रीय महत्व को दर्शाता है। गुजरात के वेरावल के समीप प्रभास पाटन में स्थित सोमनाथ केवल एक उपासना स्थल नहीं, बल्कि भारत की अखंड सभ्यतागत निरंतरता का जीवंत प्रतीक है।

स्वाभिमान पर्व: सामूहिक गौरव की राष्ट्रीय अभिव्यक्ति

सोमनाथ स्वाभिमान पर्व 8 से 11 जनवरी 2026 तक आयोजित किया जा रहा है, जो 1026 में हुए प्रथम आक्रमण के एक सहस्राब्दी पूर्ण होने का राष्ट्रीय स्मरण है। यह आयोजन विनाश की स्मृति नहीं, बल्कि आस्था, पुनर्निर्माण और आत्मसम्मान का उत्सव है।
देवी अहिल्याबाई होलकर जैसे असंख्य भक्तों के संकल्प से हर बार सोमनाथ का पुनर्निर्माण हुआ—यही इसकी अमर पहचान है।

वर्ष 2026, 11 मई 1951 को स्वतंत्रता के बाद पुनर्निर्मित सोमनाथ मंदिर के उद्घाटन के 75 वर्ष भी पूर्ण करता है। इन दोनों ऐतिहासिक पड़ावों ने स्वाभिमान पर्व की आधारशिला रखी है।

चार दिनों में 72 घंटे का अखंड ओंकार जप, भजन-संकीर्तन, आध्यात्मिक प्रवचन और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं—जो एकता, आस्था और राष्ट्रीय स्मृति का प्रतीक हैं।

ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य: सहस्राब्दी की दृढ़ता

प्रभास तीर्थ का संबंध चंद्रदेव और भगवान शिव की उपासना से है। परंपरा के अनुसार, चंद्रदेव ने यहीं शिव की आराधना कर अपने श्राप से मुक्ति पाई।
जनवरी 1026 में महमूद ग़ज़नवी के आक्रमण के बाद भी सोमनाथ का अस्तित्व लोकचेतना में अमिट रहा। विनाश और पुनर्निर्माण का यह चक्र विश्व इतिहास में अद्वितीय है।

12 नवंबर 1947 (दीपावली) को सरदार वल्लभभाई पटेल ने सोमनाथ के पुनर्निर्माण का संकल्प लिया। 11 मई 1951 को राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद की उपस्थिति में मंदिर का पुनः उद्घाटन हुआ—यह भारत के सभ्यतागत आत्मसम्मान की पुनर्स्थापना थी।

31 अक्टूबर 2001 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 1951 के 50 वर्ष पूर्ण होने के कार्यक्रम में भाग लिया, जिसमें सरदार पटेल, के. एम. मुंशी सहित पुनर्निर्माण के अग्रदूतों के योगदान को स्मरण किया गया।

सोमनाथ मंदिर: वैभव, आस्था और जीवंत धरोहर

सोमनाथ आदि ज्योतिर्लिंग है। मंदिर परिसर में गर्भगृह, सभामंडप और नृत्यमंडप हैं। 150 फीट ऊँचा शिखर, 10 टन का कलश, 27 फीट का ध्वजदंड, 1,666 स्वर्ण-कलश और 14,200 ध्वज इसकी भव्यता दर्शाते हैं।

वार्षिक दर्शन संख्या 92–97 लाख; बिल्व पूजा में 13.77 लाख से अधिक श्रद्धालु; महाशिवरात्रि 2025 में 3.56 लाख दर्शनार्थी।
2003 में शुरू और 2017 में उन्नत लाइट एंड साउंड शो ने पिछले तीन वर्षों में 10 लाख से अधिक दर्शक आकर्षित किए।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (श्री सोमनाथ ट्रस्ट के अध्यक्ष) के नेतृत्व में प्रशासनिक सुधार, अवसंरचना उन्नयन और धरोहर संरक्षण से सोमनाथ एक नए पुनरुत्थान चरण में प्रवेश कर चुका है।

आध्यात्मिक वातावरण और पदयात्रा

पर्व से पूर्व गिरनार तीर्थक्षेत्र सहित संतों ने शंख चौक से सोमनाथ मंदिर तक पदयात्रा की। डमरू, पारंपरिक वाद्य, सिद्धिविनायक ढोल समूह के 75 वादकों की गूंज और “हर हर महादेव” के जयघोष से वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से भर गया।

महिला सशक्तिकरण और सतत विकास

2018 में “स्वच्छ आइकॉनिक प्लेस” घोषित सोमनाथ में—

  • पुष्प अपशिष्ट से वर्मी-कम्पोस्ट (1,700 बिल्व वृक्ष)

  • प्लास्टिक से पावर ब्लॉक्स (मासिक 4,700)

  • वर्षा जल संचयन (मासिक 30 लाख लीटर)

  • मियावाकी वन (7,200 वृक्ष; वार्षिक ~93,000 किग्रा CO₂ अवशोषण)

  • शुद्ध अभिषेक जल से सोमगंगाजल (दिसंबर 2024 तक 1.13 लाख परिवार)

महिला रोजगार: 906 में 262 महिलाएं; बिल्व वन पूर्णतः महिलाओं द्वारा संचालित; प्रसाद व भोजन सेवाओं में व्यापक सहभागिता—कुल 363 महिलाएं, वार्षिक आय ~₹9 करोड़।

प्रधानमंत्री का दौरा और कार्यक्रम

10 जनवरी 2026: प्रधानमंत्री ओंकार मंत्र जप (72 घंटे के अखंड जप में सहभाग), ड्रोन शो।
11 जनवरी 2026: शौर्य यात्रा का नेतृत्व, दर्शन-पूजन और जनसभा को संबोधन—जहाँ सोमनाथ के सभ्यतागत महत्व, स्वाभिमान पर्व और आस्था-संकल्प का संदेश देंगे।

निष्कर्ष

सोमनाथ स्वाभिमान पर्व भारत के सभ्यतागत आत्मविश्वास की पुनर्पुष्टि है—विनाश पर दृढ़ता, भय पर आस्था की विजय। सौराष्ट्र के तट पर स्थित सोमनाथ विश्वभर के भारतीयों को स्मरण कराता है कि धर्म, एकता और आत्मसम्मान पर आधारित आस्था शाश्वत है।

प्रधानमंत्री द्वारा उद्धृत श्लोक—

“आदिनाथेन शर्वेण सर्वप्राणिहिताय वै।
आद्यतत्त्वान्यथानीयं क्षेत्रमेतन्महाप्रभम्॥
प्रभासितं महादेवि यत्र सिद्ध्यन्ति मानवाः॥”

अर्थ: आदिनाथ शिव ने समस्त प्राणियों के कल्याण हेतु प्रभास क्षेत्र को प्रकट किया—यह दिव्य प्रकाश से आलोकित भूमि मनुष्य को सिद्धि, पुण्य और मोक्ष प्रदान करती है।

सोमनाथ स्वाभिमान पर्व का शुभारंभ, प्रधानमंत्री मोदी ने किया राष्ट्र को संबोधित

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नई दिल्ली- प्रधानमंत्रीनरेंद्र मोदी ने आज सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के शुभारंभ पर देशवासियों को शुभकामनाएं दीं। इस अवसर पर उन्होंने सोमनाथ मंदिर के गौरवशाली इतिहास को स्मरण करते हुए कहा कि यह पर्व भारत की उस अमर सभ्यतागत चेतना का प्रतीक है, जिसने हजार वर्षों से अधिक समय तक हर आक्रमण और संकट के बावजूद अपनी आस्था और संस्कारों को जीवित रखा।


प्रधानमंत्री ने कहा कि जनवरी 1026 में सोमनाथ मंदिर पर पहला आक्रमण हुआ था। इसके बाद सदियों तक कई हमले हुए, लेकिन न तो करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था डगमगाई और न ही भारत की सांस्कृतिक आत्मा टूटी। उन्होंने कहा कि सोमनाथ का बार-बार पुनर्निर्माण भारत की अडिग इच्छाशक्ति और सभ्यतागत संकल्प का प्रमाण है।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा,

“सोमनाथ स्वाभिमान पर्व उन असंख्य भारत माता के सपूतों को स्मरण करने का अवसर है, जिन्होंने कभी अपने सिद्धांतों और मूल्यों से समझौता नहीं किया। समय चाहे कितना भी कठिन क्यों न रहा हो, उनका संकल्प अडिग और हमारी संस्कृति के प्रति निष्ठा अटूट रही।”

प्रधानमंत्री ने अपने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर सोमनाथ के अपने पूर्व दौरों की तस्वीरें साझा करते हुए नागरिकों से भी #SomnathSwabhimanParv हैशटैग के साथ अपनी स्मृतियां साझा करने का आह्वान किया।

उन्होंने 31 अक्टूबर 2001 को सोमनाथ में आयोजित ऐतिहासिक कार्यक्रम को भी याद किया, जब पुनर्निर्मित सोमनाथ मंदिर के उद्घाटन के 50 वर्ष पूरे होने का उत्सव मनाया गया था। गौरतलब है कि 1951 में मंदिर का पुनर्प्रतिष्ठा समारोह तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद की उपस्थिति में संपन्न हुआ था। इस पुनर्निर्माण में सरदार वल्लभभाई पटेल, के.एम. मुंशी और अन्य महान विभूतियों का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण रहा।

2001 के उस कार्यक्रम में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी, गृह मंत्री लालकृष्ण आडवाणी सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। यह वर्ष सरदार पटेल की 125वीं जयंती का भी प्रतीक था।

आगे की ओर देखते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि वर्ष 2026 में सोमनाथ मंदिर के पुनर्प्रतिष्ठा समारोह के 75 वर्ष पूरे होंगे। उन्होंने इसे केवल एक मंदिर के पुनर्निर्माण की वर्षगांठ नहीं, बल्कि भारत की उस अमर सभ्यतागत शक्ति का उत्सव बताया, जो पीढ़ी दर पीढ़ी देशवासियों को प्रेरणा देती रही है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि सोमनाथ स्वाभिमान पर्व राष्ट्र की एकता, सांस्कृतिक चेतना और आत्मगौरव को सुदृढ़ करने की प्रेरणा देता है।

“जय सोमनाथ!”



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