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महासमुंद में ₹120 करोड़ के खैर तस्करी नेटवर्क का खुलासा, फर्जी NOC और 8 शेल कंपनियों से चल रहा था कथित कारोबार

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महासमुंद- छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में खैर लकड़ी की कथित अंतरराज्यीय तस्करी के एक बड़े नेटवर्क का पुलिस ने खुलासा किया है। पुलिस जांच के अनुसार, यह नेटवर्क पिछले करीब दो वर्षों से ओडिशा से हिमाचल प्रदेश तक फैला हुआ था और इस दौरान ₹120 करोड़ से अधिक मूल्य की खैर लकड़ी के कथित अवैध कारोबार के प्रमाण मिले हैं। जांच में फर्जी वन दस्तावेज, नकली इनवॉयस, शेल कंपनियों और संदिग्ध बैंक खातों के इस्तेमाल की जानकारी सामने आई है।

23,350 किलो खैर लकड़ी से शुरू हुई जांच

मामला उस समय सामने आया जब 17 जून 2026 को महासमुंद जिले में एक ट्रक को रोका गया। ट्रक में करीब 23,350 किलोग्राम खैर लकड़ी लदी थी। पुलिस और वन विभाग की जांच में परिवहन से जुड़े दस्तावेजों में कथित गड़बड़ी सामने आई। अधिकारियों के अनुसार, ट्रक के पास मौजूद नेशनल ट्रांजिट पास सिस्टम (NTPS) से संबंधित NOC/क्लीयरेंस दस्तावेज फर्जी पाए गए।

इसके बाद पुलिस ने मामले की तकनीकी और वित्तीय जांच शुरू की, जिसमें कथित तौर पर नेटवर्क के कई राज्यों तक फैले होने के संकेत मिले।

8 शेल कंपनियों के जरिए कागजों में दिखाया जाता था वैध कारोबार

पुलिस के मुताबिक, खैर लकड़ी के कथित अवैध कारोबार को कागजों पर वैध दिखाने के लिए 8 शेल कंपनियों का इस्तेमाल किया जाता था। इन कंपनियों के माध्यम से फर्जी इनवॉयस तैयार किए जाने की बात जांच में सामने आई है। इसके अलावा 10 से अधिक संदिग्ध/म्यूल बैंक खातों के इस्तेमाल की भी जांच की जा रही है।

जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इन कंपनियों और बैंक खातों के जरिए रकम का लेन-देन किस तरह किया जाता था और नेटवर्क से जुड़े अन्य लोग कौन-कौन हैं।

ओडिशा से हिमाचल तक फैला था नेटवर्क

पुलिस की जांच के अनुसार, कथित तस्करी का नेटवर्क ओडिशा से शुरू होकर छत्तीसगढ़ होते हुए दूसरे राज्यों तक फैला था और खैर की लकड़ी को हिमाचल प्रदेश स्थित कत्था निर्माण इकाइयों तक पहुंचाने की बात सामने आई है। खैर के पेड़ की लकड़ी का उपयोग कत्था (catechu) बनाने में किया जाता है, जिसका इस्तेमाल पान में व्यापक रूप से होता है। 

50 टन से ज्यादा खैर लकड़ी जब्त होने का दावा

जांच के दौरान अलग-अलग स्थानों पर की गई कार्रवाई में पुलिस ने 50 टन से अधिक खैर लकड़ी जब्त करने और कुल 12 लोगों की गिरफ्तारी किए जाने की जानकारी दी है। यह कार्रवाई कई राज्यों में की गई छापेमारी से जुड़ी बताई गई है। हालांकि, मामले में गिरफ्तार आरोपियों और नेटवर्क की भूमिका को लेकर जांच अभी जारी है।

दो फर्म संचालक भी गिरफ्तार

महासमुंद पुलिस ने हाल में कथित तौर पर फर्जी इनवॉयस उपलब्ध कराने वाले दो फर्म संचालकों—पारितोष मिश्रा और अखिलेश सिंघल—को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार दोनों को 14 सितंबर को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेजा गया। 

पुलिस का आरोप है कि इन फर्मों का इस्तेमाल खैर लकड़ी के कथित अवैध कारोबार को दस्तावेजों के जरिए वैध दिखाने में किया जाता था।

मुख्य आरोपी के ठिकाने से ₹81 लाख नकद बरामद

जांच के दौरान पुलिस ने कथित मुख्य आरोपी मनीष अग्रवाल से जुड़े ठिकाने पर भी कार्रवाई की। 7 सितंबर को की गई तलाशी में पुलिस ने ₹81 लाख नकद बरामद करने की जानकारी दी है। पुलिस रकम के स्रोत और कथित तस्करी नेटवर्क से उसके संबंधों की जांच कर रही है। 

वित्तीय नेटवर्क की भी जांच

पुलिस अब केवल लकड़ी की तस्करी तक सीमित न रहकर कथित पूरे वित्तीय नेटवर्क की जांच कर रही है। शेल कंपनियों, फर्जी इनवॉयस और बैंक खातों के माध्यम से हुए लेन-देन को खंगाला जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार, मामले में शामिल अन्य संदिग्धों की भूमिका और कथित नेटवर्क की पूरी श्रृंखला का पता लगाने के लिए जांच जारी है।

वन संपदा की सुरक्षा को लेकर भी चिंता

खैर के पेड़ों की अवैध कटाई और तस्करी का मामला केवल आर्थिक अपराध तक सीमित नहीं है। इससे वन संपदा और स्थानीय पारिस्थितिकी पर भी असर पड़ सकता है। इस मामले में फर्जी वन दस्तावेजों के इस्तेमाल की जांच ने वन उत्पादों के परिवहन की निगरानी और दस्तावेजी सत्यापन को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं।

पुलिस के अनुसार जांच अभी जारी है। ₹120 करोड़ के कथित कारोबार, आरोपियों की भूमिका और नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों के संबंध में अंतिम तस्वीर जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी। ऊपर बताए गए आरोप पुलिस जांच और मीडिया रिपोर्टों पर आधारित हैं; इन्हें अदालत द्वारा सिद्ध तथ्य नहीं माना जाना चाहिए।


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