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जशपुर जिले के शासकीय विद्यालयों में डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने नई पहल

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मुख्यमंत्री की मौजूदगी में जिला प्रशासन, एसईसीएल एवं ईडीसीआईएल के बीच हुआ एमओयू

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की मौजूदगी में आज बगिया में जशपुर जिले के शासकीय विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण एवं आधुनिक शिक्षण सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण समझौते पर हस्ताक्षर हुआ। विद्यालयों में डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए जिला प्रशासन जशपुर, एसईसीएल एवं ईडीसीआईएल के मध्य त्रिपक्षीय एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए। इस अवसर पर जिला प्रशासन की ओर से कलेक्टर रोहित व्यास, एसईसीएल की ओर से जनरल मैनेजर सी. एम. वर्मा तथा ईडीसीआईएल की ओर से प्रोजेक्ट डायरेक्टर विकास सहरावत ने एमओयू पर हस्ताक्षर किए।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि आधुनिक तकनीक के माध्यम से शिक्षा को रोचक एवं प्रभावी बनाना समय की आवश्यकता है, ताकि ग्रामीण एवं दूरस्थ अंचलों के बच्चों को भी शहरों के समान बेहतर शैक्षणिक संसाधन उपलब्ध कराए जा सके। उन्होंने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि इससे विद्यार्थियों में नवाचार, जिज्ञासा एवं तकनीकी दक्षता का विकास होगा, जो उनके उज्ज्वल भविष्य की मजबूत नींव बनेगा। 

एमओयू के तहत जशपुर जिले के चयनित शासकीय विद्यालयों में चरणबद्ध रूप से इंटरएक्टिव पैनल स्थापित किए जाएंगे। इन उपकरणों के माध्यम से शिक्षक डिजिटल कंटेंट, वीडियो, प्रेजेंटेशन एवं ई-लर्निंग संसाधनों का उपयोग कर कक्षाओं को अधिक रोचक, सरल एवं प्रभावी बना सकेंगे। साथ ही एमओयू में इंटरएक्टिव पैनल की स्थापना के साथ-साथ उनके प्रशिक्षण, संचालन एवं नियमित मेंटेनेंस के प्रावधान भी शामिल किए गए हैं, ताकि उपकरणों का सतत एवं प्रभावी उपयोग सुनिश्चित हो सके। 

इस परियोजना के लिए एसईसीएल द्वारा सीएसआर मद से 5 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की गई है, जिसके अंतर्गत जिले के शासकीय विद्यालयों में 206 इंटरएक्टिव पैनल लगाए जाएंगे। इस पहल से जिले के सैकड़ों विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण डिजिटल शिक्षा की सुविधा प्राप्त होगी। कलेक्टर रोहित व्यास ने एसईसीएल एवं ईडीसीआईएल के सहयोग के लिए आभार व्यक्त करते हुए विश्वास जताया कि इस परियोजना से विद्यार्थियों के शैक्षणिक स्तर में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिलेगा।

स्कूलिंग में डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए सरकार की पहल

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भारत सरकार ने विभिन्न क्षेत्रों में जीवन और शिक्षा की सुविधा (Ease of Living & Schooling) को बढ़ावा देने के लिए कई विधायी, नीति और संस्थागत सुधारों की पहल की है।

एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में, विद्यालय शिक्षा और साक्षरता विभाग, शिक्षा मंत्रालय ने राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों (UTs) और अन्य संबंधित हितधारकों को पत्र लिखकर यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) को स्कूलों में अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया है। इसका उद्देश्य स्कूल प्रशासनिक प्रक्रियाओं को आधुनिक बनाना, विशेषकर स्कूलों में वित्तीय लेन-देन से संबंधित कार्यों को सरल और पारदर्शी बनाना है।

UPI, मोबाइल वॉलेट और नेट बैंकिंग जैसी डिजिटल भुगतान प्रणालियों की व्यापक और बढ़ती पहुँच का लाभ उठाते हुए, विभाग ने सभी राज्यों, UTs और मंत्रालय के अंतर्गत स्वायत्त निकायों जैसे NCERT, CBSE, KVS, NVS को यह सुझाव दिया है कि वे स्कूलों में प्रवेश और परीक्षा शुल्क की डिजिटल माध्यम से वसूली के लिए सुरक्षित और पारदर्शी तरीके अपनाएँ।

पत्र में कहा गया है कि नकद-आधारित भुगतान से डिजिटल भुगतान में संक्रमण करने के कई फायदे हैं। यह अभिभावकों और छात्रों के लिए सुविधाजनक, पारदर्शी और घर से भुगतान करने योग्य विकल्प उपलब्ध कराता है, जिससे उन्हें स्कूल आने की आवश्यकता नहीं होती।

विभाग ने राज्यों और UTs को इसी दिशा में कदम उठाने के लिए प्रोत्साहित किया है और कहा कि स्कूलों में डिजिटल भुगतान की ओर बढ़ना सरकारी डिजिटल परिवर्तन के व्यापक लक्ष्य के अनुरूप एक महत्वपूर्ण कदम होगा। इससे सभी हितधारकों की वित्तीय साक्षरता बढ़ेगी और डिजिटल लेन-देन की दुनिया खुल जाएगी।

यह पहल विकसित भारत 2047 के विज़न को साकार करने में महत्वपूर्ण योगदान देगी — एक डिजिटल रूप से सशक्त, समावेशी और नागरिक-केंद्रित शिक्षा प्रणाली की दिशा में।


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