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डिजिटलीकरण इस्पात उद्योग के भविष्य की आधारशिला : एच. डी. कुमारस्वामी

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केंद्रीय इस्पात एवं भारी उद्योग मंत्री एच. डी. कुमारस्वामी ने बुधवार को कहा कि भारत के इस्पात उद्योग के लिए डिजिटलीकरण अब कोई विकल्प नहीं रह गया है, बल्कि यह उसके दीर्घकालिक अस्तित्व और विकास की आधारशिला बन चुका है। उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बने रहने के लिए इस्पात क्षेत्र को नई और उन्नत तकनीकों को अपनाना ही होगा।

नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित "इस्पात क्षेत्र में डिजिटलीकरण पर चिंतन शिविर 2026" को संबोधित करते हुए कुमारस्वामी ने कहा कि भविष्य में इस्पात उद्योग की सफलता केवल उत्पादन क्षमता से नहीं मापी जाएगी, बल्कि इस बात से तय होगी कि वह कितना बुद्धिमान, परस्पर जुड़ा हुआ और आँकड़ों पर आधारित विनिर्माण तंत्र विकसित कर पाता है।

उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के "विकसित भारत 2047" के संकल्प का उल्लेख करते हुए कहा कि इस्पात क्षेत्र भारत के आर्थिक परिवर्तन का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है। यह क्षेत्र आधारभूत संरचना निर्माण, विनिर्माण, नवीकरणीय ऊर्जा, शहरीकरण, परिवहन तथा रक्षा उत्पादन को गति प्रदान करता है।

मंत्री ने कहा कि "इस्पात राष्ट्र निर्माण की रीढ़ है।" उन्होंने बताया कि भारत वर्ष 2018 से लगातार विश्व का दूसरा सबसे बड़ा इस्पात उत्पादक देश बना हुआ है, जबकि कई विकसित देशों में इस्पात की मांग धीमी बनी हुई है।

उन्होंने कहा कि वित्तीय वर्ष 2021-22 से भारत में कच्चे इस्पात का उत्पादन औसतन लगभग 8 प्रतिशत प्रतिवर्ष की दर से बढ़ा है। वहीं तैयार इस्पात की खपत में लगभग 13 प्रतिशत वार्षिक वृद्धि दर्ज की गई है, जो देश में बढ़ती औद्योगिक गतिविधियों और मजबूत घरेलू मांग का संकेत है।

कुमारस्वामी ने सरकार के दीर्घकालिक लक्ष्य का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत वर्ष 2030 तक अपनी इस्पात उत्पादन क्षमता को 30 करोड़ टन तथा वर्ष 2035 तक 40 करोड़ टन तक बढ़ाना चाहता है। हालांकि उन्होंने कहा कि इन लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए कच्चे माल की उपलब्धता, उत्पादन दक्षता, कार्बन उत्सर्जन में कमी, आधुनिकीकरण तथा निर्यात प्रतिस्पर्धा जैसी चुनौतियों का समाधान करना आवश्यक होगा।

उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), मशीन अधिगम, औद्योगिक इंटरनेट ऑफ थिंग्स, डिजिटल प्रतिरूप, रोबोटिक्स और उन्नत आँकड़ा विश्लेषण जैसी आधुनिक तकनीकें विश्वभर में इस्पात उद्योग का स्वरूप बदल रही हैं। भारत को भी इन तकनीकों को बड़े पैमाने पर अपनाना चाहिए।

मंत्री ने कहा कि डिजिटलीकरण और स्वचालन के माध्यम से उत्पादन क्षमता बढ़ाई जा सकती है, ऊर्जा की खपत को बेहतर ढंग से नियंत्रित किया जा सकता है, लागत कम की जा सकती है तथा मशीनों की खराबी का पहले से अनुमान लगाकर समय रहते मरम्मत की जा सकती है। इससे उत्पादन में अनावश्यक रुकावटें कम होंगी, मानवीय त्रुटियों में कमी आएगी और कार्यस्थल की सुरक्षा भी बेहतर होगी।

चिंतन शिविर में कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित खनन समाधान, इस्पात संयंत्रों के डिजिटल रूपांतरण, PM Gati Shakti, उद्योग 4.0 के अनुप्रयोगों तथा उनके व्यावसायिक लाभों से संबंधित विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई। इस कार्यक्रम में अनेक नवाचार आधारित नई कंपनियों, उद्योग प्रतिनिधियों तथा प्रौद्योगिकी विशेषज्ञों ने भी भाग लिया।

कुमारस्वामी ने विश्वास व्यक्त किया कि इस सम्मेलन से प्राप्त सुझाव और निष्कर्ष भारत के इस्पात उद्योग को अधिक बुद्धिमान, पर्यावरण अनुकूल, कुशल तथा वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने में सहायक सिद्ध होंगे। उन्होंने कहा कि यह प्रयास आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान देगा।

यह सम्मेलन Ministry of Steel के तत्वावधान में आयोजित किया गया था। इसमें Steel Authority of India Limited, National Mineral Development Corporation तथा MOIL Limited सहित प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्र की इस्पात कंपनियों के अध्यक्ष, प्रबंध निदेशक, वरिष्ठ अधिकारी, उद्योग जगत के प्रतिनिधि, नवाचार आधारित उद्यमी और तकनीकी विशेषज्ञ शामिल हुए।

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