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रक्षा कार्यालय परिसर, अफ्रीका एवेन्यू में अत्याधुनिक मल्टी-लेवल कार पार्किंग सुविधा का उद्घाटन

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नई दिल्ली- रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने आज नई दिल्ली के अफ्रीका एवेन्यू स्थित रक्षा कार्यालय परिसर में नवनिर्मित मल्टी-लेवल कार पार्किंग सुविधा का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि सरकार का संकल्प शहरी अवसंरचना का विकास एवं उन्नयन कर नागरिकों को विश्वस्तरीय सुविधाएं उपलब्ध कराना है।

उन्होंने कहा कि यह परियोजना कार्यालय परिसर में पार्किंग की समस्या के समाधान की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। महानगरों में भूमि की कमी को देखते हुए आधुनिक तकनीकों का उपयोग ही अवसंरचनात्मक चुनौतियों का प्रभावी समाधान है। ऐसी पहलें न केवल कार्यस्थल की दक्षता बढ़ाती हैं, बल्कि पारंपरिक व्यवस्था से आधुनिक और उन्नत तकनीकों की ओर संक्रमण को भी प्रोत्साहित करती हैं।

रक्षा राज्य मंत्री ने परियोजना को निर्धारित समय सीमा में पूरा करने के लिए केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (CPWD) की सराहना की। उन्होंने सीपीडब्ल्यूडी द्वारा निर्मित एमपी फ्लैट्स, कर्तव्य भवन और एग्जीक्यूटिव एन्क्लेव जैसी इमारतों की गुणवत्ता, सुविधा और आकर्षक डिजाइन की भी प्रशंसा की।

यह 14 मंजिला मल्टी-लेवल कार पार्किंग अत्याधुनिक पूरी तरह स्वचालित रोबोटिक (डॉली) तकनीक से सुसज्जित है। इसका उद्देश्य उपलब्ध भूमि का अधिकतम उपयोग करते हुए अधिक से अधिक पार्किंग क्षमता विकसित करना है।

इस परियोजना की प्रमुख विशेषताएं निम्नलिखित हैं:

  • पूरी तरह स्वचालित रोबोटिक (डॉली) आधारित पार्किंग प्रणाली।

  • पारंपरिक पार्किंग की तुलना में 60 प्रतिशत अधिक स्थान उपयोग दक्षता।

  • परियोजना की कुल लागत 45 करोड़ रुपये।

  • सीसीटीवी निगरानी एवं आधुनिक अग्नि सुरक्षा प्रणाली से सुसज्जित।

  • लिफ्ट लॉबी में वाहन प्रवेश के बाद न्यूनतम मानवीय हस्तक्षेप।

  • पार्किंग प्रक्रिया के दौरान वाहनों से शून्य उत्सर्जन (Zero Vehicle Emissions) सुनिश्चित।

इस अवसर पर रक्षा राज्य मंत्री ने कहा कि आधुनिक तकनीक आधारित ऐसी परियोजनाएं शहरी अवसंरचना को अधिक सक्षम, सुरक्षित और पर्यावरण-अनुकूल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।

राष्ट्रीय राजमार्गों के रखरखाव में तकनीक का बड़ा कदम, एनएचएआई ने शुरू की स्वचालित गड्ढा मरम्मत और यांत्रिक सफाई व्यवस्था

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नई दिल्ली- भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने राष्ट्रीय राजमार्गों और एक्सप्रेसवे के रखरखाव को अधिक प्रभावी, तेज और गुणवत्तापूर्ण बनाने के लिए कई तकनीक-आधारित पहल शुरू की हैं। इसके तहत शहरी और विकसित क्षेत्रों में ड्रेनेज सिस्टम की यांत्रिक सफाई तथा स्वचालित गड्ढा भराई, कॉम्पैक्टिंग एवं पैचिंग मशीनों और यांत्रिक सड़क सफाई मशीनों के उपयोग संबंधी व्यापक दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।

इन पहलों का उद्देश्य आधुनिक तकनीकों, निवारक रखरखाव उपायों और अनुबंधीय दायित्वों के सख्त पालन के माध्यम से राष्ट्रीय राजमार्गों के रखरखाव की गुणवत्ता और दक्षता में सुधार करना है। इससे सड़कों की गुणवत्ता बेहतर होगी, टिकाऊपन बढ़ेगा और यात्रियों को अधिक सुरक्षित एवं सुगम यात्रा अनुभव मिलेगा।

मानसून से पहले ड्रेनेज सफाई पर विशेष जोर

आगामी मानसून को ध्यान में रखते हुए एनएचएआई ने राष्ट्रीय राजमार्गों और एक्सप्रेसवे के शहरी क्षेत्रों में लाइनिंग युक्त नालियों की यांत्रिक सफाई अनिवार्य कर दी है। इसके लिए हाई-फ्लो सुपर सक्शन एवं जेटिंग यूनिट, हाइड्रोलिक ग्रैब मशीन और डी-वाटरिंग पंप सेट जैसे उन्नत उपकरणों का उपयोग किया जाएगा।

इन मशीनों की सहायता से जल निकासी, जमी हुई गाद को ढीला करना, कीचड़ का सक्शन तथा भारी मलबे को हटाने जैसे कार्य तेजी और प्रभावी ढंग से किए जा सकेंगे। भविष्य के रखरखाव अनुबंधों में इस व्यवस्था को अनिवार्य प्रावधान के रूप में शामिल किया जाएगा।

स्वचालित गड्ढा मरम्मत मशीनों से होगा त्वरित सुधार

एनएचएआई ने प्रदर्शन-आधारित रखरखाव अनुबंधों (PBMC) के तहत ऑटोमैटिक पॉटहोल फिलिंग, कॉम्पैक्टिंग एवं पैचिंग मशीनों तथा मैकेनाइज्ड रोड स्वीपिंग मशीनों की तैनाती के लिए भी दिशा-निर्देश जारी किए हैं।

इन मशीनों के उपयोग से सड़कों पर गड्ढों की मरम्मत तेज गति से होगी, रखरखाव प्रतिक्रिया समय कम होगा और यात्रियों को होने वाली असुविधा में कमी आएगी। समय पर मरम्मत से सड़कों की संरचनात्मक मजबूती भी बनी रहेगी।

सड़कों की सफाई होगी अधिक प्रभावी

यांत्रिक सड़क सफाई मशीनों के माध्यम से धूल, गाद और अन्य कणों को व्यवस्थित रूप से हटाया जाएगा। इससे राष्ट्रीय राजमार्ग अधिक स्वच्छ रहेंगे, दृश्यता बेहतर होगी, सड़क सुरक्षा बढ़ेगी और धूल प्रदूषण में कमी आएगी।

इन मशीनों को वाराणसी-औरंगाबाद राष्ट्रीय राजमार्ग, हंडिया-राजातालाब राष्ट्रीय राजमार्ग तथा हरियाणा, पंजाब और गुजरात की विभिन्न परियोजनाओं में पहले ही तैनात किया जा चुका है।

एनएचएआई के अनुसार यांत्रिक ड्रेनेज सफाई, स्वचालित गड्ढा मरम्मत और आधुनिक सड़क सफाई तकनीकों को अपनाने से परिचालन दक्षता बढ़ेगी, निवारक रखरखाव को मजबूती मिलेगी और देशभर में राष्ट्रीय राजमार्ग उपयोगकर्ताओं को बेहतर यात्रा अनुभव प्राप्त होगा।

भारत-यूके सहयोग से EV चार्जिंग में बड़ी पहल, उन्नत तकनीक से बनेगा स्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर

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नई दिल्ली: भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) के तहत टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट बोर्ड (TDB) ने Scharge Pvt Limited के साथ “Powering EV Charging Innovation” परियोजना के लिए समझौता किया है। यह परियोजना भारत-यूके संयुक्त अनुसंधान कार्यक्रम के तहत चलाई जा रही है, जिसमें ब्रिटेन की Albright Product Design Limited भी भागीदार है।

⚡ EV चार्जिंग में नई तकनीक

इस परियोजना का उद्देश्य इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) के लिए अगली पीढ़ी की चार्जिंग प्रणाली विकसित करना है, खासकर:

  • कमर्शियल फ्लीट

  • डिपो ऑपरेशन्स

के लिए।

इसमें Scharge द्वारा विकसित स्मार्ट चार्ज कंट्रोलर और यूके पार्टनर की पेटेंटेड ऑटोमैटेड केबल मैनेजमेंट सिस्टम को जोड़ा जाएगा।

🚗 क्या है खास?

नई तकनीक में:

  • मोटराइज्ड ओवरहेड केबल मैनेजमेंट सिस्टम

  • कम मैन्युअल काम

  • केबल की कम टूट-फूट

  • बेहतर सुरक्षा और सुविधा

जैसी विशेषताएं शामिल हैं।

यह सिस्टम मौजूदा AC Type-2 EV चार्जर्स के साथ भी काम करेगा।

🏭 डिपो में काम होगा आसान

इस समाधान से:

  • चार्जिंग समय कम होगा

  • उपकरण सुरक्षित रहेंगे

  • कार्य प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित होगी

साथ ही केबल डैमेज और अन्य जोखिमों को भी कम किया जा सकेगा।

स्वदेशी तकनीक को बढ़ावा

Scharge Pvt Limited इस परियोजना के जरिए:

  • भारत में EV तकनीक को मजबूत करेगा

  • स्मार्ट चार्जिंग सिस्टम विकसित करेगा

  • टिकाऊ और बड़े स्तर पर उपयोगी इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करेगा

क्या बोले अधिकारी?

TDB के सचिव राजेश कुमार पाठक ने कहा कि भारत-यूके जैसे सहयोगी कार्यक्रम नई और उपयोगी तकनीकों के विकास में अहम भूमिका निभाते हैं। EV चार्जिंग में नवाचार, देश में इलेक्ट्रिक वाहनों को तेजी से अपनाने के लिए जरूरी है।

निष्कर्ष

यह परियोजना भारत में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को नई गति देगी। उन्नत तकनीक और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के जरिए देश में सुरक्षित, स्मार्ट और भविष्य के लिए तैयार EV चार्जिंग सिस्टम विकसित किया जाएगा।

आवास और बुनियादी ढांचा विकास के लिए एम.ओ.यू. पर हस्ताक्षर

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रायपुर- छत्तीसगढ़ में बुनियादी ढांचे के विकास और आवास निर्माण को गति देने के उद्देश्य से, छत्तीसगढ़ शासन ने हाउसिंग एंड अर्बन डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (आवास और शहरी विकास निगम हुडको) के साथ एक समझौता ज्ञापन (एम.ओ.यू.) पर हस्ताक्षर किए हैं। यह रणनीतिक साझेदारी राज्य के विकास लक्ष्यों की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिसका मुख्य उद्देश्य प्रमुख आवास और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए वित्तपोषण सुरक्षित करना है।

इस अवसर पर वित्त विभाग के सचिव मुकेश कुमार बंसल, विशेष सचिव चन्दन कुमार, विशेष सचिव शीतल शाश्वत वर्मा, उप सचिव ऋषभ कुमार पाराशर व अवर सचिव चंद्र प्रकाश पाण्डेय तथा हुडको से निदेशक वित्त दलजीत सिंह खत्री व क्षेत्रीय प्रमुख हितेश बोराड मौजूदगी में सम्पन्न हुए। यह कार्यक्रम महानदी भवन, मंत्रालय, नवा रायपुर, अटल नगर में कल संपन्न हुआ। यह समझौता हुडको द्वारा राज्य शासन की विभिन्न विकास पहलों के लिए वित्तीय सहायता और तकनीकी सहयोग प्रदान करने के लिए एक रूपरेखा स्थापित करता है।

समझौता ज्ञापन (एम.ओ.यू.) का मुख्य उद्देश्य है कि छत्तीसगढ़ में प्रमुख आवास परियोजनाओं और बुनियादी ढांचे के विकास के लिए वित्तपोषण की सुविधा प्रदान करना है। यह सहयोग मजबूत बुनियादी ढांचे के वित्तपोषण और किफायती आवास की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर केंद्रित होगा। इससे सीधे तौर पर छत्तीसगढ़ के नागरिकों के जीवन स्तर में सुधार लाने में योगदान मिलेगा।


 यह साझेदारी आधुनिकीकरण और सतत् विकास के प्रति राज्य सरकार की प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है। जो हुडको की विशेषज्ञता और वित्तीय क्षमता का लाभ उठाकर परिवर्तनकारी परियोजनाओं को मूर्त रूप देने में मदद करेगी। हाउसिंग एंड अर्बन डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (हुडको) एक नवरत्न केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उद्यम है, जो देश में आवासीय उद्देश्यों के लिए घरों के निर्माण या आवास और शहरी विकास कार्यक्रमों के वित्तपोषण के लिए दीर्घकालिक वित्त प्रदान करता है।

भारत मोबाइल कांग्रेस 2025 में DoT ने AI-सक्षम डिजिटल ट्विन पहल प्रदर्शित की, बुनियादी ढांचे की योजना और प्रबंधन में नई क्रांति की तैयारी

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नई दिल्ली- दूरसंचार विभाग (DoT) ने हाल ही में भारत मोबाइल कांग्रेस 2025 में अपनी अग्रणी डिजिटल ट्विन विद AI-ड्रिवन इनसाइट्स पहल का प्रदर्शन किया। इस पहल का उद्देश्य यह दिखाना है कि कैसे दूरसंचार, कंप्यूटेशन और सेंसिंग का समागम भारत में बुनियादी ढांचे की योजना और प्रबंधन के तरीके को बदल सकता है। यह पहल योजनाकारों को वर्तमान को स्पष्ट रूप से समझने, भविष्य का सिमुलेशन करने और नीतिगत परिणामों को आकार देने में सक्षम बनाती है।

डिजिटल ट्विन प्रदर्शनी और उपयोग मामले

चार दिवसीय IMC 2025 में DoT का डिजिटल ट्विन स्टॉल नीति निर्माताओं, योजनाकारों, AI/ML विशेषज्ञों और नवप्रवर्तकों से व्यापक रुचि आकर्षित करने में सफल रहा। इस पहल का विकास प्रमुख दूरसंचार ऑपरेटरों और OEMs जैसे RJIL, Bharti Airtel, Nokia आदि के सहयोग से किया गया। प्रदर्शनी में तीन मुख्य उपयोग मामलों को प्रदर्शित किया गया:

  1. शहरी गतिशीलता में दूरसंचार डेटा से अंतर्दृष्टि – वसंत कुंज और सेंट्रल विस्टा, नई दिल्ली जैसे मार्गों से डेटा विश्लेषण ने वास्तविक समय में आवागमन पैटर्न और आवासीय हॉटस्पॉट्स को उजागर किया। इससे मेट्रो और परिवहन एजेंसियों को यात्रियों के व्यवहार को समझने और निवेश योजनाओं को सटीक रूप से तैयार करने में मदद मिली।

  2. पर्यटन गतिशीलता अंतर्दृष्टि – अयोध्या के उदाहरण से दिखाया गया कि दूरसंचार-आधारित डेटा पर्यटन प्रवाह, यात्रा मोड और ठहरने की प्राथमिकताओं को दर्शाता है। यह योजनाकारों को यात्रा व्यवहार समझने और पर्यटन बुनियादी ढांचे व सेवाओं में सुधार करने में सहायता करता है।

  3. कनेक्टेड ट्रैफिक और ग्रीन कॉरिडोर समन्वय – दूरसंचार नेटवर्क, एज कंप्यूटिंग और कंप्यूटर विज़न एनालिटिक्स के माध्यम से विशेष वाहनों के लिए ग्रीन कॉरिडोर को गतिशील रूप से बनाया जा सकता है, जिससे प्राथमिक आवागमन में देरी कम होती है और सामान्य यातायात में व्यवधान न्यूनतम रहता है।

“Planning That Thinks Ahead” राउंडटेबल
DoT ने उच्च स्तरीय राउंडटेबल आयोजित किया, जिसमें सार्वजनिक बुनियादी ढांचे की योजना में स्पष्टता और डेटा-संचालित निर्णय लेने पर चर्चा हुई। प्रमुख विचारकों और विशेषज्ञों ने तीन प्राथमिकताओं पर जोर दिया:

  • प्रोत्साहन (Incentivisation): समयबद्ध, प्रमाणिक डेटा योगदान के लिए पुरस्कार और सहयोग सुनिश्चित करना।

  • नीति निश्चितता (Policy Certainty): दूरसंचार डेटा और डिजिटल ट्विन टूल्स को राष्ट्रीय योजना टूलकिट में एकीकृत करना।

  • नवाचार सशक्तिकरण (Innovation Enablement): क्रॉस-सेक्टरल पायलट प्रोजेक्ट्स के माध्यम से AI, डिजिटल ट्विन और प्राइवेसी-संरक्षित एनालिटिक्स को बढ़ावा देना।

संगम पहल और भविष्य की दिशा

Sangam Initiative के तहत, DoT AI मॉडल, डेटा फ्रेमवर्क और डिजिटल ट्विन टूलकिट के लिए Regulatory-cum-Innovation Sandbox विकसित कर रहा है। यह उद्योग, शिक्षा संस्थानों और विशेषज्ञों के साथ सुरक्षित, इंटरऑपरेबल और प्रेरित सह-विकास सुनिश्चित करेगा।

DoT और हाउसिंग एंड अर्बन अफेयर्स मंत्रालय (MoHUA) पहले से ही शहरी गतिशीलता योजना के लिए दूरसंचार डेटा और डिजिटल ट्विन तकनीकों का उपयोग कर रहे हैं। साथ ही, IISc, IIT कानपुर, IIT मद्रास, DMRC और CUMTA चेन्नई जैसी संस्थाओं के साथ सहयोग जारी है।

IMC 2025 में यह प्रदर्शनी दूरसंचार-समर्थित डिजिटल ट्विन को नागरिक-केंद्रित, डेटा-संचालित और अनुकूल बुनियादी ढांचे की योजना का केंद्र बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

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