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रमन रिसर्च इंस्टिट्यूट ने सिंगल-मॉलिक्यूल स्टडीज़ के लिए नया डुअल-ट्रैप ऑप्टिकल ट्वीज़र्स विकसित किया

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रमन रिसर्च इंस्टिट्यूट (RRI), जो विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (DST), भारत सरकार के तहत एक स्वायत्त संस्था है, के शोधकर्ताओं ने डुअल-ट्रैप ऑप्टिकल ट्वीज़र्स का नया संस्करण विकसित किया है, जिससे यह उन्नत तकनीक अब भारत में वैज्ञानिकों के लिए सुलभ हो गई है। इस नवाचार से न केवल न्यूरोसाइंस बल्कि दवा विकास और अन्य चिकित्सा अनुसंधान क्षेत्रों में नई खोजों को गति मिलने की उम्मीद है।

पारंपरिक डुअल-ट्रैप ऑप्टिकल ट्वीज़र्स सेट-अप

ऑप्टिकल ट्वीज़र्स, जो 2018 के नोबेल पुरस्कार विजेता उपकरण हैं, प्रकाश का उपयोग करके बेहद छोटे कणों को नियंत्रित करने की सुविधा प्रदान करते हैं। इन्हें जीवविज्ञान, बायोइंजीनियरिंग, सामग्री विज्ञान और नैनोप्रौद्योगिकी जैसी विविध क्षेत्रों में अति-सूक्ष्म बलों को मापने के लिए उपयोग किया जाता है। पारंपरिक रूप से, डुअल-ट्रैप सिस्टम—दो बीम का उपयोग करके कणों को नियंत्रित करने वाले—सिग्नल इंटरफेरेंस की समस्या से जूझते हैं क्योंकि पारंपरिक डिजाइन में फंसे कणों से गुजरने वाले प्रकाश का उपयोग करके उनकी स्थिति मापी जाती है। यह प्रयोगों को जटिल बनाता है, माप की सटीकता को कम करता है और इमेजिंग तकनीकों के साथ एकीकरण में बाधा डालता है।

RRI का नया डिज़ाइन इन चुनौतियों को कॉनफोकल डिटेक्शन स्कीम का उपयोग करके हल करता है, जिसमें प्रत्येक डिटेक्टर केवल अपने ट्रैप से वापस छिटकने वाले प्रकाश को मॉनिटर करता है और दूसरे ट्रैप से कोई हस्तक्षेप नहीं होता। ट्रैप्स के स्थान बदलने पर भी डिटेक्टर पूरी तरह से संरेखित रहते हैं, जिससे प्रत्येक ट्रैप के लिए स्वतंत्र और सटीक माप संभव होता है।

इस डिज़ाइन के प्रमुख लाभ हैं:

  • क्रॉस-टॉक की कमी: दो ट्रैप्स से आने वाले सिग्नल आपस में हस्तक्षेप नहीं करते, चाहे ट्रैप्स पास में हों।

  • बहुउद्देश्यीय और स्थिर: ट्रैप्स को स्वतंत्र रूप से स्थानांतरित किया जा सकता है, जबकि पार्टिकल ट्रैकिंग बनी रहती है; सिस्टम लंबी अवधि और तापमान परिवर्तन में भी स्थिर रहता है।

  • सीमलेस इंटीग्रेशन: यह फ़ेज़ कॉन्ट्रास्ट और फ्लोरेसेंस जैसी इमेजिंग तकनीकों के साथ बिना किसी संशोधन के काम करता है।

  • कॉम्पैक्ट और मॉड्यूलर डिज़ाइन: इसे सामान्य माइक्रोस्कोप में आसानी से जोड़ा जा सकता है बिना उसके मूल ढांचे में बदलाव किए।

RRI के लीड PI प्रमोद ए पुलरकट ने कहा, “यह सिंगल-मॉड्यूल डिज़ाइन सिंगल-मॉलिक्यूल के उच्च-सटीक बल मापन अध्ययन, सॉफ्ट मटीरियल्स की जांच और जीवविज्ञान के नमूनों जैसे सेल्स की माइक्रोमैनिपुलेशन को अधिक सुविधाजनक और लागत प्रभावी बनाता है।”

बैकवर्ड-स्कैटर किए गए प्रकाश का उपयोग करते हुए नवीन डुअल-ट्रैप ऑप्टिकल ट्वीज़र्स सेट-अप
RRI की टीम अब इस डुअल-ट्रैप ऑप्टिकल ट्वीज़र्स सिस्टम को वाणिज्यिक रूप से उपलब्ध कराने और इसे प्लग-एंड-प्ले मॉड्यूल के रूप में मौजूदा माइक्रोस्कोप में जोड़ने पर विचार कर रही है। इस डिज़ाइन को पेटेंट संरक्षण के लिए भी मजबूत उम्मीदवार माना जा रहा है क्योंकि यह डुअल-ट्रैप सिस्टम की पुरानी समस्याओं को सरल और प्रभावी तरीके से हल करता है।

यह विकास सिंगल-मॉलिक्यूल के लिए उच्च-सटीक मापन उपकरणों में महत्वपूर्ण प्रगति का प्रतीक है, जिससे प्रयोगों की विविधता बढ़ेगी और बायोमेडिकल अनुसंधान में नए अवसर पैदा होंगे।


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