Media24Media.com: #Shardiya Navratri 2025

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नवरात्रि 2025 का पांचवां दिन: मां स्कंदमाता की पूजा से मिलेगी संतान सुख, समृद्धि और शांति

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 Shardiya navratri 2025: शारदीय नवरात्र का पांचवां दिन देवी दुर्गा के पंचम स्वरूप मां स्कंदमाता की पूजा-अर्चना के लिए समर्पित है. इन्हें भगवान कार्तिकेय की जननी होने के कारण यह नाम प्राप्त हुआ. मां के विग्रह में बालरूप स्कंद उनकी गोद में विराजमान रहते हैं, इसलिए इन्हें मातृत्व और करुणा की प्रतीक देवी भी माना जाता है.


मां स्कंदमाता का शरीर श्वेतवर्ण है और ये कमल के पुष्प पर विराजित रहती हैं. इनकी चार भुजाओं में से एक हाथ में भगवान स्कंद, दो हाथों में कमल का पुष्प और एक हाथ सदैव अभय मुद्रा में रहता है. यह मुद्रा भक्तों को निर्भयता, सुरक्षा और मातृत्व की ऊष्मा का आशीर्वाद देती है.

माना जाता है कि मां स्कंदमाता की आराधना करने से भक्तों के जीवन में सुख-शांति, समृद्धि और संतान सुख की प्राप्ति होती है. मां यह संदेश भी देती हैं कि जीवन स्वयं एक संग्राम है और हमें अपनी सफलता के लिए स्वयं सेनापति बनकर संघर्ष करना चाहिए.

पंचमी 2025 की तिथि और शुभ मुहूर्त

द्रिक पंचांग के अनुसार, शारदीय नवरात्र 2025 के दौरान पंचमी तिथि 26 सितंबर को सुबह 9 बजकर 34 मिनट से लेकर 27 सितंबर को दोपहर 12 बजकर 05 मिनट तक रहेगी. ऐसे में स्कंदमाता की पूजा 27 सितंबर को होगी.

पूजा शुभ मुहूर्त

नवरात्र के पांचवें दिन 27 सितंबर को ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4 बजकर 36 मिनट से 5 बजकर 24 मिनट तक रहने वाला है. इस दिन प्रात:कालीन संध्या सुबह 5 बजे से 6 बजकर 12 मिनट तक है. इसके अलावा अभिजीत मुहूर्त दोपहर 11 बजकर 48 मिनट से 12 बजकर 36 मिनट तक रहेगा. इस दिन संध्या पूजा मुहूर्त शाम 6 बजकर 30 मिनट से 7 बजकर 42 मिनट तक रहेगा. माना जाता है कि इन समय पर पूजा करने से भक्तों को विशेष लाभ प्राप्त होता है.

स्कंदमाता का प्रिय भोग

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां स्कंदमाता को पीला रंग अति प्रिय है. पंचमी के दिन भक्त उन्हें पीले रंग से जुड़े प्रसाद अर्पित करते हैं. जैसे केसर से बनी खीर, पीली मिठाई, केला और हलवा. मान्यता है कि इन भोगों को अर्पित करने से मां प्रसन्न होकर भक्तों को निरोगी जीवन, वैभव और सुख-समृद्धि का वरदान देती हैं.

शारदीय नवरात्रि 2025: मां दुर्गा हाथी पर सवार होकर आ रही हैं, क्या बदल जाएगी किस्मत या बढ़ेंगी मुश्किलें? पढ़े पूरी खबर

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 Shardiya Navratri 2025 : शारदीय नवरात्रि हिंदू धर्म का एक प्रमुख और आस्था से जुड़ा हुआ पर्व है। इस दौरान नौ दिनों तक मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। साल 2025 में शारदीय नवरात्रि का शुभारंभ 22 सितंबर, सोमवार से हो रहा है।


धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नवरात्रि किस वार से शुरू होती है, उसके अनुसार मां दुर्गा की सवारी बदलती है। इस बार चूंकि नवरात्रि सोमवार से प्रारंभ हो रही है, इसलिए माता दुर्गा हाथी पर सवार होकर आ रही हैं।

माता की सवारी और उसका महत्व

माता दुर्गा की सवारी कभी पालकी, कभी घोड़ा, कभी नाव और कभी हाथी मानी जाती है। इनमें से हाथी को विशेष रूप से शुभ और मंगलकारी माना गया है। मान्यता है कि जब मां हाथी पर सवार होकर आती हैं तो यह सुख-समृद्धि, स्थिरता और शांति का संदेश लेकर आता है।

देश-दुनिया पर असर

🔹 कृषि क्षेत्र – हाथी पर माता का आगमन खेती और किसानों के लिए शुभ संकेत है। संतुलित वर्षा और अच्छी फसल की संभावना बढ़ सकती है।
🔹 व्यापार और अर्थव्यवस्था – व्यापार जगत में तेजी आने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सकारात्मक बदलाव के आसार हैं।
🔹 मजदूर वर्ग और आम जनता – रोजगार और धन लाभ के नए अवसर मिल सकते हैं।
🔹 सामाजिक व राजनीतिक प्रभाव – समाज में मेल-जोल और एकजुटता बढ़ेगी, साथ ही कई राजनीतिक मुद्दों के समाधान की राह खुल सकती है।
🔹 जनजीवन – लोगों के जीवन में सुख-समृद्धि और खुशहाली का माहौल बनने की संभावना है।

सकारात्मक संदेश

कुल मिलाकर, इस वर्ष की शारदीय नवरात्रि हर वर्ग के लिए आशा, समृद्धि और शांति का संदेश लेकर आ रही है। मां दुर्गा का हाथी पर आगमन देश-दुनिया में खुशहाली और शुभ संकेतों का प्रतीक माना जा रहा है।

( Disclaimer: यह जानकारी धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित है। इसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। media24media इसकी सत्यता की पुष्टि नहीं करता।)।

 

Shardiya Navratri 2025 : न्यायधानी में 3 करोड़ की लागत से बनेगा राजस्थानी महल जैसा दुर्गा पंडाल, 100 कारीगर जुटे...

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Shardiya Navratri 2025 : इस बार नवरात्रि पर न्यायधानी बिलासपुर का गोंड़पारा इलाका भव्य दुर्गा महोत्सव का साक्षी बनेगा। आदर्श दुर्गोत्सव समिति अपने स्वर्ण जयंती वर्ष पर ऐसा आयोजन कर रही है, जिसे देखने हजारों श्रद्धालु और दर्शक जुटेंगे।


राजस्थानी महल की थीम

करीब 3 करोड़ रुपए की लागत से तैयार हो रहा यह पंडाल राजस्थानी महल की तर्ज पर बनाया जा रहा है। पंडाल की ऊँचाई करीब 25 फीट और चौड़ाई 50 फीट रखी जा रही है।

100 कारीगर जुटे निर्माण में

कोलकाता, राजस्थान और बेंगलुरु से आए लगभग 100 कारीगर बीते दो महीने से इस पंडाल के निर्माण में जुटे हैं। पंडाल को धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान देने के लिए हर हिस्से को विशेष रूप से सजाया जा रहा है।

3 किमी लंबी लाइटिंग

कोलकाता की मशहूर चंदनपुर लाइटिंग टीम पूरे 3 किलोमीटर क्षेत्र – न्यू रिवर व्यू से ओल्ड रिवर व्यू और गोलबाजार तक – आकर्षक रोशनी से सजा रही है।

40 फीट फाउंटेन और लेजर शो

बेंगलुरु से आई टीम प्रयागराज महाकुंभ की तर्ज पर 1.5 किमी लंबे क्षेत्र में लेजर शो पेश करेगी। इसमें 40 फीट ऊँचे फाउंटेन पर हर घंटे चार बार, 15-15 मिनट का लेजर शो होगा।

चार धाम और धार्मिक झांकियां

पंडाल में इस बार श्रद्धालु सिर्फ मां दुर्गा की पूजा ही नहीं करेंगे, बल्कि केदारनाथ, बद्रीनाथ, जगन्नाथपुरी और द्वारका धाम की झलक भी देख सकेंगे। साथ ही काली माता, भगवान शिव और नरसिंह अवतार की झांकियां भी आकर्षण का केंद्र होंगी।

परंपराएं होंगी जीवंत

दशहरे के दिन रावण दहन और पारंपरिक रामलीला का आयोजन होगा। समिति का कहना है कि यह परंपरा को जीवित रखने का प्रयास है।

भक्ति और संस्कृति से जुड़े कार्यक्रम

21 सितंबर : भजन गायक दुकालू यादव का जगराता और आतिशबाजी

22 सितंबर : महिलाओं की अगुवाई में 3.5 किलोमीटर लंबी साड़ी के साथ शोभायात्रा, पुराने पंडाल से नए पंडाल तक माँ दुर्गा की मूर्ति स्थापना

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