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सुकमा में विस्फोटक निष्क्रिय करने के दौरान बड़ा हादसा, CRPF के 4 जवान घायल; 2 गंभीर

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 एलारमडगु कैंप के पास, सुकमा, छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग के सुकमा जिले से सुरक्षा बलों से जुड़ी एक महत्वपूर्ण खबर सामने आई है। गुरुवार, 8 अक्टूबर 2026 को पुराने और अनुपयोगी विस्फोटकों को नष्ट करने की प्रक्रिया के दौरान अचानक धमाका हो गया। इस घटना में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के चार जवान घायल हो गए। पुलिस के अनुसार, इनमें से दो जवानों को गंभीर चोटें आई हैं।

कहाँ और कैसे हुआ हादसा?

रिपोर्टों के अनुसार, घटना सुकमा जिले के कोंटा क्षेत्र में एलारमडगु (Elarmadgu) CRPF कैंप से लगभग 200 मीटर दूर बोडराजपाड़र नाला के पास हुई। जगदलपुर से आई एम्युनिशन टेक्नीशियन टीम (Ammunition Technician Team—ATT) कैंपों में रखे पुराने, बचे हुए और अनुपयोगी विस्फोटकों की जाँच करने तथा उन्हें सुरक्षित तरीके से नष्ट करने के लिए पहुँची थी।

प्रक्रिया के दौरान विस्फोटक का एक टुकड़ा उछलकर पास के क्षेत्र में जा पहुँचा और धमाका हो गया। इससे वहाँ मौजूद चार CRPF कर्मी घायल हो गए। पुलिस की प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, यह विस्फोटक नष्ट करने के दौरान हुआ हादसा था, न कि किसी नए नक्सली हमले की पुष्टि।

घायल जवानों के नाम और स्थिति

मीडिया रिपोर्टों में पुलिस के हवाले से चारों घायल कर्मियों की पहचान इस प्रकार बताई गई है।

जवान का नाम                       पद       चोट की स्थिति
एम.के. तिवारी        सहायक उप निरीक्षक (ASI), ATT टीम        गंभीर
अनीश खान        सहायक उप निरीक्षक (ASI), 50वीं बटालियन        गंभीर
अमरनाथ मिश्रा        इंस्पेक्टर, ATT टीम        मामूली
कुलदीप राज        हेड कांस्टेबल, 50वीं बटालियन        मामूली

घायल जवानों को कहाँ भर्ती कराया गया?

घटना के तुरंत बाद चारों जवानों को प्राथमिक उपचार दिया गया और कोंटा के सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया। गंभीर रूप से घायल दोनों जवानों को आवश्यकता पड़ने पर बेहतर चिकित्सा सुविधा वाले अस्पताल में भेजने की तैयारी की जा रही थी। उपलब्ध शुरुआती रिपोर्टों में आगे की चिकित्सा स्थिति की जानकारी नहीं दी गई है।

क्या यह नक्सली हमला था?

उपलब्ध पुलिस जानकारी के अनुसार, यह दुर्घटनावश हुआ विस्फोट था। शुरुआती खबरों में IED विस्फोट की बात सामने आई थी, लेकिन बाद की रिपोर्टों में स्पष्ट किया गया कि धमाका पुराने और अनुपयोगी विस्फोटकों को निष्क्रिय करने की प्रक्रिया के दौरान हुआ। इसे नक्सलियों द्वारा किए गए हमले के रूप में पेश करना उपलब्ध तथ्यों से समर्थित नहीं है।

इस घटना का महत्व

  • पुराने विस्फोटकों को निष्क्रिय करने का काम प्रशिक्षित तकनीकी टीमों द्वारा किया जाता है, फिर भी इसमें जोखिम बना रहता है।

  • घटना ने सुरक्षा शिविरों में रखे पुराने और अनुपयोगी विस्फोटकों के सुरक्षित निपटान के महत्व को सामने रखा है।

  • सुकमा बस्तर संभाग का संवेदनशील सुरक्षा क्षेत्र है, इसलिए ऐसी घटनाओं पर स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों की नजर रहती है।


नारायणपुर में सुरक्षा बलों की बड़ी कार्रवाई, नक्सलियों का हथियार और विस्फोटक डंप बरामद

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 नारायणपुर। जिले के अदनार क्षेत्र में पुलिस और BSF की संयुक्त टीम को सर्च ऑपरेशन के दौरान बड़ी सफलता मिली है। जंगल में तलाशी अभियान के दौरान सुरक्षा बलों ने नक्सलियों द्वारा पूर्व में छिपाकर रखे गए हथियार, गोला-बारूद और विस्फोटक सामग्री का डंप बरामद किया है।


सुरक्षा बलों ने मौके से 10 राइफल, 2 बैरल ग्रेनेड लॉन्चर, 13 जिंदा BGL शेल, 16 कारतूस और करीब 2 किलो विस्फोटक पदार्थ बरामद किया है। बरामद सामग्री को सुरक्षा मानकों के तहत जब्त कर लिया गया है।

29 अगस्त को चलाया गया सर्च अभियान

पुलिस के मुताबिक, 29 अगस्त को अदनार क्षेत्र के जंगलों में सर्चिंग और एरिया डॉमिनेशन अभियान चलाया जा रहा था। इसी दौरान पुलिस और 129वीं वाहिनी BSF की संयुक्त टीम ग्राम अदनार के उत्तर-पश्चिम दिशा में जंगल की तलाशी ले रही थी।

सर्चिंग के दौरान जवानों को एक स्थान पर कुछ संदिग्ध गतिविधि के संकेत मिले। इलाके की बारीकी से तलाशी लेने पर वहां नक्सलियों द्वारा पूर्व में छिपाकर रखा गया हथियार और विस्फोटक सामग्री का डंप मिला।

ये हथियार और सामग्री हुई बरामद

303 राइफल – 1
315 राइफल – 4
12 बोर राइफल – 5
बैरल ग्रेनेड लॉन्चर – 2
टेलिस्कोपिक साइट – 1
जिंदा BGL शेल – 13
12 बोर कारतूस – 16
विस्फोटक पदार्थ – करीब 2 किलो
पुराने नक्सली डंप की तलाश जारी

सुरक्षा बलों के अनुसार, बरामद हथियार और अन्य सामग्री नक्सलियों ने पहले किसी स्थान पर छिपाकर रखी थी। सर्चिंग के दौरान डंप का पता चलने के बाद सभी सामग्री को सुरक्षित तरीके से जब्त किया गया।

पुलिस के मुताबिक, नारायणपुर जिले में नक्सल गतिविधियों पर नियंत्रण के लिए लगातार अंदरूनी और संवेदनशील क्षेत्रों में एरिया डॉमिनेशन एवं सर्च ऑपरेशन चलाए जा रहे हैं। अभियान का उद्देश्य जंगलों में पहले से छिपाकर रखे गए हथियारों, विस्फोटकों और अन्य नक्सली संसाधनों को खोजकर निष्क्रिय करना है।

बरामद हथियारों और विस्फोटक सामग्री के संबंध में पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। अभियान के दौरान सामने आने वाले अन्य तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

लद्दाख में ‘We Are Gen Z’ वाला वीडियो वायरल: सेना से बहस करने वाली महिला ने मांगी माफी

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लद्दाख के मिनिमर्ग चेकपोस्ट पर सुरक्षाकर्मियों के साथ एक महिला पर्यटक की बहस का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने के बाद विवाद खड़ा हो गया। वीडियो में महिला सड़क पर लगी पाबंदी और यात्रियों को रोके जाने को लेकर सुरक्षाकर्मियों से बहस करती नजर आई। इसी दौरान उसके “We are Gen Z” वाले बयान पर सोशल मीडिया पर काफी प्रतिक्रियाएं आईं।


 5 घंटे इंतजार के बाद भड़का गुस्सा

रिपोर्टों के मुताबिक, महिला और अन्य पर्यटक सड़क बंद होने के कारण कई घंटे तक इंतजार कर रहे थे। इसी दौरान महिला ने सुरक्षाकर्मियों से सवाल-जवाब शुरू कर दिए। वायरल वीडियो में वह कथित तौर पर आम यात्रियों को रोके जाने और कुछ वाहनों को आगे जाने देने पर नाराजगी जताती दिखाई दी। 

वीडियो में महिला ने खुद को Gen Z बताते हुए कहा कि वह इस तरह की स्थिति को स्वीकार नहीं करेगी। वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने उसके व्यवहार की आलोचना की और सेना के जवानों के प्रति सम्मान बनाए रखने की बात कही।

सोशल मीडिया पर मचा बवाल

वीडियो वायरल होने के बाद मामला सिर्फ सोशल मीडिया तक सीमित नहीं रहा। पूर्व सैन्य अधिकारियों और नेताओं ने भी महिला की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया दी।

जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भी इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इस तरह का रवैया संवेदनशील इलाकों में लोगों और सुरक्षा बलों के बीच बने भरोसे को नुकसान पहुंचा सकता है।

पूर्व सेना अधिकारियों की ओर से भी महिला की टिप्पणी की आलोचना की गई। रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल केजेएस ढिल्लों ने सैनिकों के त्याग और जिम्मेदारियों का उल्लेख करते हुए महिला के बयान पर सवाल उठाया। 

विवाद बढ़ने के बाद महिला ने मांगी माफी

वीडियो पर बढ़ते विवाद के बीच महिला ने अब भारतीय सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस और लद्दाख पुलिस से माफी मांगी है। उसने कहा कि कई घंटों तक इंतजार करने की वजह से वह गुस्से और निराशा में थी और उसी दौरान उससे ऐसी बातें कही गईं, जिन्हें वह अब गलत मानती है। 

महिला ने अपने बयान में सेना के जवानों के प्रति सम्मान जताते हुए कहा कि उसका इरादा सैनिकों का अपमान करना नहीं था। उसने अपने व्यवहार को उस समय की नाराजगी का परिणाम बताया। 

पूर्व सेना प्रमुख ने भी दी अलग राय

इस विवाद के बीच पूर्व सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे ने Gen Z को लेकर संतुलित टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी चीजों को अलग तरीके से देख सकती है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि वह गलत है। उन्होंने युवाओं को समझने और उनकी ऊर्जा को सकारात्मक दिशा में इस्तेमाल करने की जरूरत पर जोर दिया।

संवेदनशील इलाका होने के कारण बढ़ी चर्चा

लद्दाख और कारगिल जैसे सीमावर्ती इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था बेहद महत्वपूर्ण होती है। ऐसे क्षेत्रों में सड़क बंद करने या यातायात रोकने के पीछे सुरक्षा संबंधी कारण हो सकते हैं। इसलिए पर्यटकों से भी सुरक्षा निर्देशों और स्थानीय प्रशासन के नियमों का पालन करने की अपेक्षा की जाती है।

निष्कर्ष

लद्दाख के मिनिमर्ग चेकपोस्ट का यह वीडियो अब सोशल मीडिया पर बड़ा विवाद बन चुका है। एक तरफ महिला की ‘We are Gen Z’ टिप्पणी को लेकर आलोचना हुई, वहीं महिला ने बाद में भारतीय सेना और पुलिस से माफी मांगते हुए इसे गुस्से में कही गई बात बताया। इस पूरे मामले ने संवेदनशील इलाकों में पर्यटकों के व्यवहार, सुरक्षा प्रोटोकॉल और नई पीढ़ी के रवैये को लेकर बहस छेड़ दी है। 

सुकमा में सुरक्षा बलों को बड़ी कामयाबी: जंगल से नक्सलियों के हथियारों और गोला-बारूद का डंप बरामद

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 सुकमा (छत्तीसगढ़)। छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में नक्सल विरोधी अभियान के दौरान सुरक्षा बलों को बड़ी सफलता हाथ लगी है। भेज्जी थाना क्षेत्र के बोधराजपाड़र के जंगलों में चलाए गए संयुक्त सर्च ऑपरेशन के दौरान जवानों ने नक्सलियों द्वारा जमीन में छिपाकर रखा गया हथियारों और गोला-बारूद का डंप बरामद किया है। मौके से एक रायफल और दर्जनों जिंदा कारतूस जब्त कर वैधानिक कार्रवाई शुरू कर दी गई है।


मुख्य बिंदु 

  • बरामदगी: एक .315 बोर बोल्ट एक्शन रायफल, 7.62×39 मिमी के 47 जिंदा कारतूस, 7.62×51 मिमी के 2 जिंदा कारतूस और एक एल्यूमिनियम कंटेनर।

  • संयुक्त टीम: भेज्जी थाना पुलिस और सीआरपीएफ (CRPF) की 50वीं बटालियन की कार्रवाई।

  • नेतृत्व: एसपी मयंक गुर्जर के निर्देशन और एएसपी (ऑप्स) रोहित शाह के मार्गदर्शन में चला अभियान।

खुफिया इनपुट पर हुई कार्रवाई

पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, सुरक्षा बलों को गुप्त सूचना मिली थी कि नक्सलियों ने बोधराजपाड़र के जंगलों में हथियार और गोला-बारूद छिपाकर रखे हैं। सूचना को गंभीरता से लेते हुए 3 अगस्त को भेज्जी थाना पुलिस और सीआरपीएफ 50वीं बटालियन की संयुक्त टीम को सर्च ऑपरेशन के लिए रवाना किया गया। सघन तलाशी के दौरान जवानों ने जमीन में दबाकर रखा गया डंप ढूंढ निकाला।

अभियान रहेगा जारी

पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि सुकमा जिले में नक्सलियों के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा। सुरक्षा बल नक्सलियों के ठिकानों, डंप और गतिविधियों पर पैनी नजर बनाए हुए हैं और आगे भी इस तरह के सर्च ऑपरेशन चलाए जाते रहेंगे।

प्रमुख बदलाव जो किए गए हैं:

  • हेडलाइन एवं सब-हेडलाइन: खबर को अधिक प्रभावशाली बनाने के लिए स्पष्ट शीर्षक दिया गया है।
  • स्थान-रेखा (Dateline): समाचार के प्रारंभ में सुकमा (छत्तीसगढ़) जोड़ा गया है, जो अखबारों का मानक प्रारूप है।
  • हाइलाइट्स (Highlights) बॉक्स: पाठकों के लिए एक ही नज़र में मुख्य जानकारी (क्या बरामद हुआ, कौन सी टीम शामिल थी) समझना आसान बना दिया गया है।
  • पैराग्राफ फ्लो: वाक्यों को अखबार की सम्पादकीय शैली (Editorial Style) के अनुरूप व्यवस्थित किया गया है।

संसद पर आतंकी हमले में शहीद सुरक्षा कर्मियों को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की श्रद्धांजलि

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केंद्रीय गृह मंत्री और सहयोगिता मंत्री अमित शाह ने आज 13 दिसंबर 2001 को संसद भवन पर हुए आतंकवादी हमले में आतंकवादियों को कड़ा जवाब देते हुए शहीद हुए सुरक्षा कर्मियों को श्रद्धांजलि अर्पित की।

एक्स (X) पर अपने पोस्ट में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा:

"आज का दिन हमें फिर से याद दिलाता है कि हमारे सुरक्षा बलों का आतंकवाद के खिलाफ अदम्य साहस और शौर्य, जब उन्होंने 2001 में दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के मंदिर—संसद भवन—पर हुए कायरतापूर्ण आतंकवादी हमले को अपने उत्साह और समर्पण से विफल किया। मैं उन सुरक्षा कर्मियों को श्रद्धांजलि अर्पित करता हूँ जिन्होंने आतंकवादियों को कड़ा जवाब देते हुए शहीदता प्राप्त की। यह राष्ट्र हमेशा इन वीर योद्धाओं के बलिदान और शहादत का ऋणी रहेगा।"

बस्तर में शांति और विकास की नई दिशा : 65 लाख के इनामी 10 माओवादी आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटे

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बस्तर में विश्वास, सुरक्षा और स्थायी शांति का वातावरण हो रहा है स्थापित - मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि  “आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति 2025” तथा “पूना मारगेम : पुनर्वास से पुनर्जीवन” जैसी मानवीय, संवेदनशील और दूरदर्शी पहल ने बस्तर में विश्वास, सुरक्षा और स्थायी शांति का वातावरण स्थापित किया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि माओवादी भ्रमजाल में फँसे अनेक लोग अब हिंसा का मार्ग छोड़कर विकास और मुख्यधारा की ओर लौट रहे हैं। इसी क्रम में आज दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी के वरिष्ठ सदस्य एवं 25 लाख के इनामी चैतू उर्फ श्याम दादा सहित कुल 65 लाख रुपए के इनाम वाले 10 माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया है। मुख्यमंत्री ने इसे बदलते बस्तर और सरकार की नीतियों की सफलता का स्पष्ट प्रमाण बताया।

मुख्यमंत्री साय ने यह भी कहा कि सरकार की प्रतिबद्धता के अनुरूप सभी आत्मसमर्पित साथियों को सुरक्षित, सम्मानजनक और आत्मनिर्भर जीवन हेतु आवश्यक पुनर्वास सुविधाएँ उपलब्ध कराई जाएँगी। उन्होंने उल्लेख किया कि आत्मसमर्पण की बढ़ती संख्या यह दर्शाती है कि जनता सरकार की नीतियों पर भरोसा कर रही है और बस्तर तेजी से शांति, विश्वास और विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

मुख्यमंत्री ने इसे राज्य की प्रभावी रणनीति, पुलिस प्रशासन की सतत मेहनत और जनविश्वास का सामूहिक परिणाम बताते हुए बस्तर में स्थायी शांति स्थापना की दिशा में इसे एक महत्वपूर्ण उपलब्धि कहा।

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