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रूस-यूक्रेन युद्ध फिर हुआ तेज: पूर्वी यूक्रेन पर रूसी हमले, 7 लोगों की मौत, कई घायल

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कीव- रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध एक बार फिर तेज हो गया है। पूर्वी यूक्रेन के कई शहरों पर रूस ने ताजा मिसाइल और ड्रोन हमले किए, जिनमें कम से कम सात लोगों की मौत हो गई, जबकि 20 से अधिक लोग घायल बताए जा रहे हैं। हमलों के बाद कई रिहायशी इलाकों में भारी तबाही देखने को मिली और आपातकालीन सेवाएं राहत एवं बचाव कार्य में जुट गईं।

यूक्रेनी अधिकारियों के अनुसार, हमलों में आवासीय इमारतों और नागरिक बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा है। घायलों को अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, जबकि प्रभावित क्षेत्रों से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है।

रूस-यूक्रेन युद्ध को ढाई साल से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन संघर्ष थमने का नाम नहीं ले रहा। लगातार हो रहे हमलों से क्षेत्र में मानवीय संकट और गहरा होता जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने एक बार फिर दोनों देशों से संयम बरतने और कूटनीतिक समाधान की दिशा में आगे बढ़ने की अपील की है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि संघर्ष जल्द नहीं थमा, तो इसका असर केवल यूरोप ही नहीं बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था, ऊर्जा सुरक्षा और खाद्य आपूर्ति श्रृंखला पर भी पड़ सकता है। फिलहाल पूरी दुनिया की नजरें युद्ध के अगले घटनाक्रम और संभावित शांति प्रयासों पर टिकी हुई हैं।

भारत-जापान के बीच टोक्यो में 8वीं रक्षा नीति वार्ता आयोजित, रक्षा सहयोग को और मजबूत करने पर सहमति

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भारत और जापान के बीच 13 जुलाई 2026 को जापान की राजधानी टोक्यो में 8वीं रक्षा नीति वार्ता (Defence Policy Dialogue) आयोजित हुई। भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने किया, जबकि जापानी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व अंतरराष्ट्रीय मामलों के उप रक्षा मंत्री  कानो कोजी ने किया।

बैठक में दोनों पक्षों ने पिछली रक्षा नीति वार्ता के बाद से द्विपक्षीय रक्षा सहयोग में हुई उल्लेखनीय प्रगति की समीक्षा की और भारत-जापान विशेष रणनीतिक एवं वैश्विक साझेदारी (Special Strategic and Global Partnership) को और मजबूत बनाने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

वार्ता के दौरान दोनों देशों ने क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य पर व्यापक चर्चा की तथा साझा हितों से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान किया। बैठक में सैन्य-से-सैन्य सहयोग, संयुक्त मुख्यालयों के बीच समन्वय, समुद्री सहयोग, रक्षा अभ्यास, क्षमता निर्माण, रक्षा उपकरण एवं प्रौद्योगिकी सहयोग (विशेष रूप से समुद्री प्रौद्योगिकी) तथा संस्थागत सहयोग सहित रक्षा संबंधों के सभी प्रमुख पहलुओं की समीक्षा की गई।

दोनों पक्षों ने रक्षा सहयोग के लगातार विस्तार का स्वागत किया और नियमित उच्च-स्तरीय संवाद एवं आदान-प्रदान की आवश्यकता पर बल दिया। इस वर्ष प्रस्तावित मंत्रिस्तरीय यात्राओं और 2+2 मंत्रिस्तरीय वार्ता के संभावित परिणामों पर भी चर्चा हुई।

बैठक में रक्षा औद्योगिक सहयोग, तकनीकी नवाचार, साइबर सुरक्षा, अंतरिक्ष तथा अन्य उभरते रणनीतिक क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के उपायों पर भी विचार-विमर्श किया गया। दोनों देशों ने क्षेत्रीय एवं वैश्विक सुरक्षा मुद्दों पर बढ़ती समानता पर संतोष व्यक्त किया और हिंद-प्रशांत (Indo-Pacific) क्षेत्र में मिलकर कार्य जारी रखने पर सहमति जताई। साथ ही, अंतरराष्ट्रीय कानून के सम्मान पर आधारित स्वतंत्र, मुक्त और नियम-आधारित हिंद-प्रशांत क्षेत्र को बढ़ावा देने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने भारत के रक्षा क्षेत्र में जापान के निरंतर सहयोग की सराहना करते हुए कहा कि भारत-जापान विशेष रणनीतिक एवं वैश्विक साझेदारी के तहत व्यावहारिक सहयोग को और मजबूत करना महत्वपूर्ण है। वहीं, कानो कोजी ने प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में भारत के साथ रक्षा संबंधों के और विस्तार के प्रति जापान की प्रतिबद्धता दोहराई।

इससे पहले रक्षा सचिव ने जापान के रक्षा मंत्री शिंजिरो कोइज़ुमी से मुलाकात कर उन्हें रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने जापानी रक्षा मंत्री को भारत आने के लिए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का औपचारिक निमंत्रण भी सौंपा। दोनों पक्षों ने भारत-जापान विशेष रणनीतिक एवं वैश्विक साझेदारी में लगातार आ रही मजबूती पर संतोष व्यक्त किया।

अपने दौरे की शुरुआत में रक्षा सचिव ने टोक्यो स्थित सेल्फ-डिफेंस फोर्सेज मेमोरियल स्टोन पर पुष्पांजलि अर्पित कर जापान सेल्फ-डिफेंस फोर्सेज के उन जवानों को श्रद्धांजलि दी, जिन्होंने राष्ट्र की सेवा में सर्वोच्च बलिदान दिया।

यह यात्रा भारत और जापान के बीच लगातार मजबूत होते रक्षा संबंधों, पारस्परिक सम्मान तथा हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और स्थिरता के प्रति साझा प्रतिबद्धता का प्रतीक रही।

आईएनएस सुनयना ने थाईलैंड से रवाना होकर समुद्री सहयोग को दिया नया आयाम

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फुकेट: INS Sunayna (आईओएस सागर) ने 17 अप्रैल 2026 को फुकेट, थाईलैंड से तीन दिवसीय ऑपरेशनल टर्नअराउंड (OTR) सफलतापूर्वक पूरा करने के बाद प्रस्थान किया। यह मौजूदा तैनाती के दौरान उसका दूसरा पोर्ट कॉल था।

इस दौरान जहाज ने रॉयल थाई नौसेना के साथ कई पेशेवर, रणनीतिक और सांस्कृतिक गतिविधियों में भाग लिया, जिससे भारत और थाईलैंड के बीच नौसैनिक सहयोग और मजबूत हुआ।

जहाज के कमांडिंग ऑफिसर सिद्धार्थ चौधरी ने रियर एडमिरल सथापोर्न वाजरत से मुलाकात कर समुद्री सहयोग के प्रति साझा प्रतिबद्धता दोहराई।

दोनों नौसेनाओं के बीच मैत्रीपूर्ण फुटबॉल मैच और संयुक्त योग सत्र का आयोजन किया गया, जिससे आपसी संबंध और मजबूत हुए। साथ ही, जहाज पर आयोजित डेक रिसेप्शन में वरिष्ठ नौसैनिक अधिकारियों ने भाग लिया, जहां समुद्री सुरक्षा और सहयोग पर चर्चा हुई।

पैसेज एक्सरसाइज (PASSEX) के दौरान एचटीएमएस क्लोंगयाई के साथ संयुक्त अभ्यास किया गया, जिसमें संचार ड्रिल और फॉर्मेशन संचालन के जरिए दोनों नौसेनाओं के बीच बेहतर तालमेल और क्षमता का प्रदर्शन हुआ।

यह दौरा भारत और थाईलैंड के बीच मजबूत समुद्री साझेदारी को दर्शाता है, जो ‘MAHASAGAR’ दृष्टिकोण के अनुरूप है।

अब आईओएस सागर जकार्ता, इंडोनेशिया की ओर रवाना हो चुका है, जहां वह अपने अगले पोर्ट कॉल के तहत क्षेत्रीय समुद्री सहयोग को और सशक्त करेगा।


विश्व बॉर्डर सुरक्षा कांग्रेस 2026 में भारत ने समुद्री सुरक्षा में नेतृत्व का किया प्रदर्शन

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वियना: भारत  ने 14 से 16 अप्रैल 2026 तक वियना, ऑस्ट्रियामें आयोजित वर्ल्ड बॉर्डर सिक्योरिटी कांग्रेस 2026 में भाग लेते हुए समुद्री सुरक्षा के क्षेत्र में अपनी मजबूत भूमिका और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के प्रति प्रतिबद्धता को प्रदर्शित किया।

इस अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व अतिरिक्त महानिदेशक आनंद प्रकाश बडोला के नेतृत्व में तीन सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने किया।

भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने समुद्री सीमाओं की सुरक्षा के लिए देश की सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों (Best Practices) को प्रस्तुत किया, जिससे मजबूत और सक्षम समुद्री शासन प्रणाली के निर्माण पर भारत का ध्यान उजागर हुआ।

वर्ष 2012 में स्थापित वर्ल्ड बॉर्डर सिक्योरिटी कांग्रेस एक प्रमुख अंतरराष्ट्रीय मंच है, जहां वरिष्ठ सरकारी अधिकारी, सुरक्षा विशेषज्ञ और उद्योग जगत के प्रतिनिधि सीमा प्रबंधन से जुड़े नए चुनौतियों, तकनीकी नवाचारों और सर्वोत्तम उपायों पर विचार-विमर्श करते हैं।

इस मंच के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देने और वैश्विक सुरक्षा तंत्र को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास किए जाते हैं।


आर्मी कमांडर्स कॉन्फ्रेंस संपन्न, आधुनिकरण और डेटा आधारित युद्ध पर जोर

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नई दिल्ली- भारतीय सेना की द्विवार्षिक आर्मी कमांडर्स कॉन्फ्रेंस (ACC), जो 13 अप्रैल 2026 से शुरू हुई थी, 16 अप्रैल 2026 को संपन्न हो गई। इस सम्मेलन की अध्यक्षता सेना प्रमुख (COAS) ने की, जिसमें शीर्ष सैन्य नेतृत्व के साथ-साथ कैबिनेट सचिव, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ, रक्षा सचिव और नेवल स्टाफ प्रमुख सहित कई वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया।

सम्मेलन में भारतीय सेना के ‘फ्यूचर रेडी फोर्स’ बनने के विजन के तहत वर्ष 2026 को “नेटवर्किंग और डेटा सेंट्रिसिटी” का वर्ष घोषित किया गया।

इस दौरान आधुनिकीकरण, युद्ध में नई तकनीकों के उपयोग, प्रशिक्षण और सिद्धांतों में सुधार, तथा नेटवर्किंग और डेटा आधारित रणनीतियों पर विस्तार से चर्चा की गई, ताकि परिचालन क्षमता को मजबूत किया जा सके और उभरती सुरक्षा चुनौतियों का सामना किया जा सके।

सम्मेलन में ऑपरेशन सिंदूर से मिले अनुभवों और वैश्विक स्तर पर बदलती सैन्य परिस्थितियों के आधार पर मानव रहित हवाई प्रणालियों (UAS) और काउंटर-UAS के उपयोग पर भी विशेष ध्यान दिया गया।

विशेषज्ञ वक्ताओं ने बदलते भू-राजनीतिक परिदृश्य और वैश्विक व क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने भारत के रणनीतिक हितों की सुरक्षा के लिए “हार्ड पावर” की आवश्यकता पर जोर देते हुए मंत्रालयों के बीच बेहतर समन्वय, नागरिक और सैन्य संस्थानों के बीच तालमेल और ‘होल ऑफ नेशन’ दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता बताई।

चर्चा के दौरान रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को मजबूत करने के लिए स्वदेशी उत्पादन क्षमताओं को तेज करने की आवश्यकता भी सामने आई, ताकि वैश्विक सप्लाई चेन संकट के बीच दीर्घकालिक रणनीतिक मजबूती सुनिश्चित की जा सके।


आईएनएस त्रिकंड की केन्या यात्रा संपन्न, भारत-केन्या नौसैनिक सहयोग हुआ मजबूत

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भारतीय नौसेना के अग्रिम पंक्ति के गाइडेड मिसाइल फ्रिगेट आईएनएस त्रिकंड ने 10 अप्रैल 2026 को केन्या के मोम्बासा बंदरगाह पर अपनी यात्रा सफलतापूर्वक पूरी की।

यह पोर्ट कॉल पश्चिमी नौसेना कमान के कमांडर-इन-चीफ वाइस एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन की केन्या यात्रा के साथ हुआ। इस दौरान एक औपचारिक समारोह में INSAS राइफल और गोला-बारूद केन्या नौसेना को सौंपे गए।

प्रमुख गतिविधियां:

  • छोटे हथियारों की हैंडलिंग और मेंटेनेंस प्रशिक्षण

  • VBSS (Visit, Board, Search and Seizure) अभ्यास

  • क्रॉस-डेक विजिट और संयुक्त अभ्यास

  • सामुदायिक सेवा और खेल प्रतियोगिताएं

  • योग सत्र और सांस्कृतिक कार्यक्रम

आईएनएस त्रिकंड के कमांडिंग ऑफिसर कैप्टन सचिन कुलकर्णी ने केन्या नौसेना के अधिकारियों से मुलाकात कर सहयोग को और मजबूत किया।

महत्व:

यह यात्रा भारत के MAHASAGAR विजन (Mutual and Holistic Advancement for Security and Growth Across Regions) को दर्शाती है। इससे भारत और केन्या के बीच नौसैनिक सहयोग, मित्रता और द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूती मिलेगी।



भारत-उज़्बेकिस्तान संयुक्त सैन्य अभ्यास ‘डस्टलिक-7’ के लिए भारतीय दल रवाना

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भारतीय सेना का दल आज भारत-उज़्बेकिस्तान संयुक्त सैन्य अभ्यास ‘डस्टलिक’ (Exercise DUSTLIK) के 7वें संस्करण में भाग लेने के लिए रवाना हुआ। यह अभ्यास 12 से 25 अप्रैल 2026 तक उज़्बेकिस्तान के नामंगन स्थित गुरुमसराय फील्ड ट्रेनिंग एरिया में आयोजित किया जाएगा।

यह अभ्यास हर वर्ष भारत और उज़्बेकिस्तान में बारी-बारी से आयोजित किया जाता है। पिछला संस्करण अप्रैल 2025 में पुणे (औंध) में हुआ था।

दल की भागीदारी

  • भारतीय दल में कुल 60 सैनिक शामिल हैं

    • 45 सैनिक भारतीय सेना (मुख्यतः महार रेजिमेंट से)

    • 15 कर्मी भारतीय वायुसेना

  • उज़्बेकिस्तान की ओर से भी लगभग 60 सैनिक भाग ले रहे हैं

अभ्यास का उद्देश्य

  • दोनों देशों के बीच सैन्य सहयोग को मजबूत करना

  • संयुक्त अभियानों में क्षमता और समन्वय बढ़ाना

  • अर्ध-पहाड़ी क्षेत्रों में ऑपरेशन की तैयारी

प्रमुख गतिविधियां

  • भूमि नेविगेशन और स्ट्राइक मिशन

  • दुश्मन के ठिकानों पर कार्रवाई

  • विशेष हथियारों के उपयोग का प्रशिक्षण

  • संयुक्त योजना और टैक्टिकल ड्रिल्स

  • 48 घंटे का अंतिम संयुक्त अभ्यास

महत्व

यह अभ्यास दोनों देशों के बीच सैन्य तालमेल, ऑपरेशनल क्षमता और आपसी विश्वास को बढ़ाएगा। साथ ही सैनिकों के बीच सौहार्द और सहयोग को भी मजबूत करेगा, जिससे द्विपक्षीय संबंध और बेहतर होंगे।


उत्तर बस्तर और अबूझमाड़ हुए नक्सलमुक्त — बस्तर में शांति और विकास का नया युग : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

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हिंसा की राह देती है अंतहीन दर्द, आत्मसमर्पण देता है जीवन को नई दिशा- मुख्यमंत्री साय

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में नक्सल उन्मूलन अभियान ऐतिहासिक सफलता की ओर

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि उत्तर बस्तर और अबूझमाड़ का नक्सलमुक्त होना यह प्रमाण है कि अब बस्तर भय नहीं, बल्कि विश्वास और विकास की नई पहचान बन चुका है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में भारत आज नक्सलवाद के अंत की दहलीज़ पर खड़ा है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि बीते दो दिनों में 258 नक्सलियों का आत्मसमर्पण इस बात का प्रतीक है कि बंदूक नहीं, बल्कि विश्वास की शक्ति जीत रही है। उन्होंने कहा कि बीते 22 महीनों में छत्तीसगढ़ में 477 नक्सली मारे गए, 2110 ने आत्मसमर्पण किया और 1785 गिरफ्तार हुए — यह आँकड़े हमारे राज्य को नक्सलमुक्त बनाने के अडिग संकल्प के साक्षी हैं।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि 31 मार्च 2026 तक छत्तीसगढ़ को पूरी तरह नक्सलमुक्त बनाने का लक्ष्य अब बहुत निकट है। यह परिवर्तन राज्य सरकार की “नक्सलवादी आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति 2025” तथा “नियद नेल्ला नार योजना” की सफलता का प्रत्यक्ष परिणाम है। डबल इंजन सरकार की संवेदनशील नीतियों, बस्तर में लगातार स्थापित हो रहे सुरक्षा शिविरों और वनांचलों में शासन के प्रति बढ़ते विश्वास ने इस सकारात्मक परिवर्तन को संभव बनाया है। उन्होंने कहा कि अब तक नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में 64 नए सुरक्षा कैंप स्थापित किए जा चुके हैं, जिससे न केवल सुरक्षा सुदृढ़ हुई है, बल्कि विकास और विश्वास की किरण भी हर गांव तक पहुँची है। 

मुख्यमंत्री साय ने हमारे वीर सुरक्षाबलों के अदम्य साहस और बलिदान को नमन करते हुए कहा कि उनके समर्पण से ही आज बस्तर भयमुक्त हुआ है और शांति की राह पर अग्रसर है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि अबूझमाड़ और उत्तर बस्तर नक्सल आतंक से पूर्णतः मुक्त हो चुके हैं, जबकि दक्षिण बस्तर में यह लड़ाई अपने निर्णायक चरण में है। “नियद नेल्ला नार” जैसी योजनाओं ने बस्तर में संवाद, विकास और संवेदना की नई धरती तैयार की है।

उन्होंने स्पष्ट कहा कि सरकार की नीति दो टूक है — हिंसा का कोई स्थान नहीं। जो नक्सली शांति और विकास का मार्ग चुनना चाहते हैं, उनका स्वागत है। लेकिन जो बंदूक उठाकर समाज में आतंक फैलाने की कोशिश करेंगे, उन्हें सुरक्षा बलों की सख़्त कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।

मुख्यमंत्री ने सभी नक्सलियों से अपील की — “हिंसा की राह अंतहीन पीड़ा देती है, जबकि आत्मसमर्पण जीवन को एक नई दिशा देते हुए एक नई शुरुआत का रास्ता खोलता है। अपनी मातृभूमि के भविष्य और अपने परिवारों के उज्जवल कल के लिए हथियार त्यागें और विकास की रोशनी में कदम रखें।”

उल्लेखनीय है कि  देश में नक्सलवाद के खिलाफ चल रही निर्णायक लड़ाई ने एक ऐतिहासिक मुकाम हासिल किया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर पोस्ट कर जानकारी  कि छत्तीसगढ़ के अबूझमाड़ और उत्तर बस्तर जैसे क्षेत्र, जो कभी नक्सल आतंक के गढ़ हुआ करते थे, अब पूरी तरह नक्सलमुक्त घोषित किए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि यह न केवल भारत की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था की बड़ी सफलता है, बल्कि विकास, विश्वास और संवेदना की नई कहानी भी है। बीते दो दिनों में देश में कुल 258 नक्सलियों ने हिंसा का रास्ता छोड़कर आत्मसमर्पण किया है। 

केंद्रीय गृह मंत्री शाह ने कहा कि यह परिवर्तन इस बात का प्रमाण है कि बंदूक नहीं, बल्कि संविधान पर विश्वास की शक्ति जीत रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार के निरंतर प्रयासों से नक्सलवाद अब अपने अंतिम चरण में है। 

केंद्रीय गृह मंत्री शाह ने आत्मसमर्पण करने वाले सभी नक्सलियों की सराहना करते हुए कहा कि यह कदम उनके बेहतर भविष्य और देश की एकता के प्रति समर्पण का प्रतीक है। उन्होंने सभी नक्सलियों से अपील की कि वे हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौटें और देश की प्रगति में सहभागी बनें।

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