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PMMSY के तहत सिरसा में खारे पानी की झींगा पालन क्लस्टर की समीक्षा, किसानों की आय बढ़ाने पर जोर

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सिरसा (हरियाणा)- भारत सरकार के मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय के तहत मत्स्य पालन विभाग के सचिव डॉ. अभिलक्ष लिखी ने आज हरियाणा के सिरसा जिले का दौरा कर प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) के अंतर्गत विकसित खारे पानी (Saline Water) एक्वाकल्चर क्लस्टर की प्रगति की समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने झींगा (श्रिम्प) और मछली किसानों से संवाद कर जमीनी स्तर पर आने वाली समस्याओं और चुनौतियों को समझा।

डॉ. लिखी ने किसानों को संबोधित करते हुए तकनीक आधारित झींगा पालन, वैज्ञानिक तालाब प्रबंधन और मजबूत बायो-सिक्योरिटी उपायों को अपनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सिरसा जैसे खारे पानी वाले क्षेत्र झींगा पालन के लिए बेहद उपयुक्त हैं और इससे किसानों की आय में विविधता, रोजगार सृजन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल सकती है। उन्होंने MPEDA को किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन देने और निर्यात से जोड़ने के निर्देश भी दिए। साथ ही, स्थानीय स्तर पर परीक्षण किट की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर बल दिया गया ताकि किसानों को दूर नहीं जाना पड़े।

चौधरी देवी लाल विश्वविद्यालय (CDLU) में आयोजित एक समीक्षा बैठक में PMMSY के तहत क्लस्टर आधारित मत्स्य विकास योजनाओं की प्रगति पर चर्चा की गई। इस बैठक में केंद्र और राज्य सरकार के अधिकारी, ICAR के वैज्ञानिक, NABARD, NFDB, MPEDA, मत्स्य किसान, सहकारी संस्थाएं और देशभर के प्रतिनिधि शामिल हुए। 500 से अधिक प्रतिभागियों ने बैठक में हिस्सा लिया। किसानों ने इस दौरान बिजली की ऊंची लागत, गुणवत्तापूर्ण बीज की कमी और पानी की उपलब्धता जैसी समस्याएं उठाईं और पंचायत भूमि को स्वयं सहायता समूहों को लीज पर देने की मांग की।

डॉ. लिखी ने सिरसा के रघुआना गांव में PMMSY के तहत विकसित एक सफल झींगा फार्म का भी दौरा किया। करीब 3 हेक्टेयर में फैले 7 तालाबों वाले इस फार्म से सालाना 28 टन उत्पादन हो रहा है, जिससे लगभग ₹90 लाख का कारोबार और स्थानीय रोजगार सृजन हो रहा है। उन्होंने कहा कि झींगा पालन के विस्तार के लिए बेहतर बीज, फीड, बुनियादी ढांचा और बाजार तक पहुंच को मजबूत करना जरूरी है।

हरियाणा ने PMMSY के तहत उल्लेखनीय प्रगति की है, जहां ₹760.88 करोड़ का निवेश आकर्षित हुआ है। राज्य में 456 RAS और बायोफ्लॉक सिस्टम स्थापित किए गए हैं, जबकि 3,766 हेक्टेयर तालाब और 2,204 हेक्टेयर खारे क्षेत्र में विकास कार्य किए जा रहे हैं। इसके अलावा, सिरसा में ₹110 करोड़ का एकीकृत एक्वापार्क स्थापित किया जा रहा है और कोल्ड-चेन इंफ्रास्ट्रक्चर भी विकसित किया जा रहा है।

भारत का झींगा निर्यात समुद्री उत्पादों का प्रमुख हिस्सा है, जो कुल निर्यात का लगभग 69% है। देश का समुद्री निर्यात पिछले दशक में दोगुना होकर ₹62,408 करोड़ तक पहुंच गया है, जिसमें झींगा का योगदान ₹43,334 करोड़ है।

देश में 34 मत्स्य क्लस्टर विकसित किए जा रहे हैं, जिनमें सिरसा का खारा पानी क्लस्टर एक प्रमुख उदाहरण है। यह क्लस्टर झींगा, स्कैम्पी और सीबास जैसी उच्च मूल्य वाली प्रजातियों के जरिए किसानों की आय बढ़ाने, रोजगार सृजन और संसाधनों के बेहतर उपयोग को बढ़ावा दे रहा है।

भारत का अंतर्देशीय मत्स्य क्षेत्र तेजी से बढ़ रहा है, जो कुल उत्पादन का 75% योगदान देता है। 2013-14 से 2024-25 के बीच उत्पादन 61 लाख टन से बढ़कर 153 लाख टन हो गया है। देश के विशाल जल संसाधनों को देखते हुए मत्स्य पालन क्षेत्र में विकास की अपार संभावनाएं हैं, जिसे सरकार प्राथमिकता दे रही है।

निष्कर्ष: सिरसा का यह मॉडल दर्शाता है कि सही नीति, तकनीक और सहयोग के जरिए खारे और अनुपयोगी क्षेत्रों को भी आय और रोजगार के मजबूत स्रोत में बदला जा सकता है।

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