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सीएसआईआर–राष्ट्रीय रासायनिक प्रयोगशाला (सीएसआईआर-एनसीएल), पुणे में अत्याधुनिक कौशल विकास केंद्र का उद्घाटन

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सीएसआईआर–राष्ट्रीय रासायनिक प्रयोगशाला (CSIR–NCL), पुणे ने अपने नवनिर्मित एवं अत्याधुनिक कौशल विकास केंद्र (Skill Development Center) का औपचारिक उद्घाटन किया। इस आधुनिक सुविधा का उद्घाटन सीएसआईआर-एनसीएल के निदेशक डॉ. आशीष लेले ने मुख्य अतिथि डॉ. विनय कुमार, नोडल वैज्ञानिक, सीएसआईआर-एकीकृत कौशल पहल (CSIR-Integrated Skill Initiative), सीएसआईआर-एचआरडीसी, गाज़ियाबाद, तथा एनवेलियर (Envalior) टीम के प्रतिनिधियों की उपस्थिति में किया। एनवेलियर ने अपनी कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) पहल के तहत इस केंद्र के आधुनिकीकरण को प्रायोजित किया है। कार्यक्रम में डॉ. राजेश गोनाडे, एनसीएल स्किल नोडल अधिकारी, तथा कनिका गोयल, नियंत्रक प्रशासन (COA), सीएसआईआर-एनसीएल सहित अनेक गणमान्य अतिथि भी उपस्थित रहे।

सीएसआईआर की एकीकृत कौशल पहल (CSIR-ISI) के अंतर्गत संचालित सीएसआईआर-एनसीएल के कौशल विकास कार्यक्रम (Skill Development Program–SDP) का उद्देश्य राष्ट्रीय कौशल पारिस्थितिकी तंत्र में विश्वस्तरीय उच्च स्तरीय प्रशिक्षण उपलब्ध कराना है। इसका लक्ष्य प्रयोगशाला की विशेषज्ञता वाले क्षेत्रों में उद्योगों की वर्तमान एवं भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप उच्च गुणवत्ता वाले कुशल मानव संसाधन का निर्माण करना है। यह कार्यक्रम एनसीएल के अनुभवी वैज्ञानिकों तथा अत्याधुनिक अनुसंधान अवसंरचना के माध्यम से संचालित किया जाता है।

उन्नत कौशल विकास केंद्र को एक समर्पित एवं पूर्णतः एकीकृत सुविधा के रूप में विकसित किया गया है, जहाँ एनसीएल की सभी कौशल विकास एवं तकनीकी प्रशिक्षण गतिविधियों का संचालन एक ही परिसर में किया जाएगा। इस आधुनिक केंद्र में इंटरैक्टिव स्मार्ट डिस्प्ले और डिजिटल पोडियम से युक्त अत्याधुनिक कक्षाएँ, समर्पित कंप्यूटर प्रशिक्षण कक्ष, उन्नत डिजिटल कॉन्फ्रेंस रूम, विश्लेषणात्मक प्रयोगशालाएँ तथा कौशल विकास कार्यक्रम (SDP) के लिए केंद्रीकृत कार्यालय जैसी आधुनिक सुविधाएँ उपलब्ध हैं।

उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए डॉ. आशीष लेले ने कहा कि नई सुविधाएँ प्रशिक्षुओं को अत्याधुनिक वैज्ञानिक उपकरणों पर व्यावहारिक अनुभव प्रदान करेंगी, उनकी औद्योगिक दक्षता को सुदृढ़ करेंगी तथा नवाचार को बढ़ावा देंगी।

मुख्य अतिथि डॉ. विनय कुमार ने इस आधुनिक अवसंरचना की सराहना करते हुए कहा कि यह सीएसआईआर-एकीकृत कौशल पहल के उस राष्ट्रीय दृष्टिकोण के अनुरूप है, जिसका उद्देश्य वैज्ञानिक कौशल को सशक्त बनाना तथा देश में टिकाऊ तकनीकी क्षमता का विकास करना है।



रमन रिसर्च इंस्टिट्यूट ने सिंगल-मॉलिक्यूल स्टडीज़ के लिए नया डुअल-ट्रैप ऑप्टिकल ट्वीज़र्स विकसित किया

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रमन रिसर्च इंस्टिट्यूट (RRI), जो विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (DST), भारत सरकार के तहत एक स्वायत्त संस्था है, के शोधकर्ताओं ने डुअल-ट्रैप ऑप्टिकल ट्वीज़र्स का नया संस्करण विकसित किया है, जिससे यह उन्नत तकनीक अब भारत में वैज्ञानिकों के लिए सुलभ हो गई है। इस नवाचार से न केवल न्यूरोसाइंस बल्कि दवा विकास और अन्य चिकित्सा अनुसंधान क्षेत्रों में नई खोजों को गति मिलने की उम्मीद है।

पारंपरिक डुअल-ट्रैप ऑप्टिकल ट्वीज़र्स सेट-अप

ऑप्टिकल ट्वीज़र्स, जो 2018 के नोबेल पुरस्कार विजेता उपकरण हैं, प्रकाश का उपयोग करके बेहद छोटे कणों को नियंत्रित करने की सुविधा प्रदान करते हैं। इन्हें जीवविज्ञान, बायोइंजीनियरिंग, सामग्री विज्ञान और नैनोप्रौद्योगिकी जैसी विविध क्षेत्रों में अति-सूक्ष्म बलों को मापने के लिए उपयोग किया जाता है। पारंपरिक रूप से, डुअल-ट्रैप सिस्टम—दो बीम का उपयोग करके कणों को नियंत्रित करने वाले—सिग्नल इंटरफेरेंस की समस्या से जूझते हैं क्योंकि पारंपरिक डिजाइन में फंसे कणों से गुजरने वाले प्रकाश का उपयोग करके उनकी स्थिति मापी जाती है। यह प्रयोगों को जटिल बनाता है, माप की सटीकता को कम करता है और इमेजिंग तकनीकों के साथ एकीकरण में बाधा डालता है।

RRI का नया डिज़ाइन इन चुनौतियों को कॉनफोकल डिटेक्शन स्कीम का उपयोग करके हल करता है, जिसमें प्रत्येक डिटेक्टर केवल अपने ट्रैप से वापस छिटकने वाले प्रकाश को मॉनिटर करता है और दूसरे ट्रैप से कोई हस्तक्षेप नहीं होता। ट्रैप्स के स्थान बदलने पर भी डिटेक्टर पूरी तरह से संरेखित रहते हैं, जिससे प्रत्येक ट्रैप के लिए स्वतंत्र और सटीक माप संभव होता है।

इस डिज़ाइन के प्रमुख लाभ हैं:

  • क्रॉस-टॉक की कमी: दो ट्रैप्स से आने वाले सिग्नल आपस में हस्तक्षेप नहीं करते, चाहे ट्रैप्स पास में हों।

  • बहुउद्देश्यीय और स्थिर: ट्रैप्स को स्वतंत्र रूप से स्थानांतरित किया जा सकता है, जबकि पार्टिकल ट्रैकिंग बनी रहती है; सिस्टम लंबी अवधि और तापमान परिवर्तन में भी स्थिर रहता है।

  • सीमलेस इंटीग्रेशन: यह फ़ेज़ कॉन्ट्रास्ट और फ्लोरेसेंस जैसी इमेजिंग तकनीकों के साथ बिना किसी संशोधन के काम करता है।

  • कॉम्पैक्ट और मॉड्यूलर डिज़ाइन: इसे सामान्य माइक्रोस्कोप में आसानी से जोड़ा जा सकता है बिना उसके मूल ढांचे में बदलाव किए।

RRI के लीड PI प्रमोद ए पुलरकट ने कहा, “यह सिंगल-मॉड्यूल डिज़ाइन सिंगल-मॉलिक्यूल के उच्च-सटीक बल मापन अध्ययन, सॉफ्ट मटीरियल्स की जांच और जीवविज्ञान के नमूनों जैसे सेल्स की माइक्रोमैनिपुलेशन को अधिक सुविधाजनक और लागत प्रभावी बनाता है।”

बैकवर्ड-स्कैटर किए गए प्रकाश का उपयोग करते हुए नवीन डुअल-ट्रैप ऑप्टिकल ट्वीज़र्स सेट-अप
RRI की टीम अब इस डुअल-ट्रैप ऑप्टिकल ट्वीज़र्स सिस्टम को वाणिज्यिक रूप से उपलब्ध कराने और इसे प्लग-एंड-प्ले मॉड्यूल के रूप में मौजूदा माइक्रोस्कोप में जोड़ने पर विचार कर रही है। इस डिज़ाइन को पेटेंट संरक्षण के लिए भी मजबूत उम्मीदवार माना जा रहा है क्योंकि यह डुअल-ट्रैप सिस्टम की पुरानी समस्याओं को सरल और प्रभावी तरीके से हल करता है।

यह विकास सिंगल-मॉलिक्यूल के लिए उच्च-सटीक मापन उपकरणों में महत्वपूर्ण प्रगति का प्रतीक है, जिससे प्रयोगों की विविधता बढ़ेगी और बायोमेडिकल अनुसंधान में नए अवसर पैदा होंगे।


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