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मिट्टी बचेगी तो खेती बचेगी: वैज्ञानिक मृदा प्रबंधन से कृषि को मिल रही नई दिशा

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नई दिल्ली- भारत की कृषि व्यवस्था की नींव मानी जाने वाली मिट्टी को सुरक्षित और उपजाऊ बनाने के लिए केंद्र सरकार कई महत्वपूर्ण योजनाओं पर तेजी से काम कर रही है। वैज्ञानिक मृदा प्रबंधन, प्राकृतिक खेती, संतुलित उर्वरक उपयोग और डिजिटल तकनीकों के माध्यम से देश में खेती को अधिक टिकाऊ और जलवायु-अनुकूल बनाने की दिशा में बड़े कदम उठाए जा रहे हैं।


देश के कुल 306.65 मिलियन हेक्टेयर क्षेत्रफल में लगभग 59 प्रतिशत भूमि कृषि के अंतर्गत आती है। ऐसे में मिट्टी की गुणवत्ता सीधे तौर पर खाद्य सुरक्षा, किसानों की आय और देश की आर्थिक स्थिरता को प्रभावित करती है। इसी उद्देश्य से सरकार मृदा संरक्षण और वैज्ञानिक खेती को बढ़ावा दे रही है।

25.89 करोड़ से अधिक किसानों को मिला मृदा स्वास्थ्य कार्ड

किसानों को उनकी भूमि की वास्तविक पोषक स्थिति की जानकारी देने के लिए चलाई जा रही मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना के तहत अब तक 25.89 करोड़ से अधिक कार्ड जारी किए जा चुके हैं। इस योजना के माध्यम से किसानों को फसल के अनुसार उर्वरकों के संतुलित उपयोग की सलाह दी जा रही है, जिससे उत्पादन बढ़ने के साथ-साथ लागत में भी कमी आ रही है।

प्राकृतिक खेती को मिल रहा बढ़ावा

सरकार द्वारा शुरू किए गए राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन (NMNF) के तहत मार्च 2026 तक देशभर में 18,786 क्लस्टरों में 8.80 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को शामिल किया जा चुका है। इस अभियान से 18 लाख से अधिक किसान जुड़ चुके हैं। मिशन का उद्देश्य रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम कर मिट्टी की उर्वरता बढ़ाना और पर्यावरण के अनुकूल खेती को प्रोत्साहित करना है।

'खेत बचाओ अभियान' से बढ़ी किसानों की जागरूकता

संतुलित उर्वरक उपयोग और मिट्टी संरक्षण को लेकर सरकार द्वारा चलाए गए 'खेत बचाओ अभियान' के तहत देशभर में हजारों प्रशिक्षण कार्यक्रम, जागरूकता शिविर और खेत प्रदर्शन आयोजित किए गए। इस अभियान से करीब 1.07 करोड़ किसानों और अन्य हितधारकों तक सीधा संदेश पहुंचा, जबकि सोशल मीडिया के माध्यम से लगभग 4.5 करोड़ लोगों को जोड़ा गया।

AI और डिजिटल तकनीक बदल रही खेती की तस्वीर

अब खेती केवल पारंपरिक अनुभव पर नहीं, बल्कि आधुनिक तकनीकों पर भी आधारित हो रही है। सरकार भू-स्थानिक (Geospatial) मैपिंग, डिजिटल एग्रीकल्चर मिशन और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के माध्यम से किसानों को मिट्टी, मौसम और फसल के अनुसार सटीक सलाह उपलब्ध करा रही है। इससे उर्वरकों और पानी का बेहतर उपयोग संभव हो रहा है तथा खेती अधिक लाभदायक बन रही है।

किसानों को मिला सीधा लाभ

झारखंड के धनबाद के किसान निरापदो गोराई ने मृदा स्वास्थ्य कार्ड की सलाह के अनुसार उर्वरकों का उपयोग किया, जिससे प्रति एकड़ उर्वरक लागत में लगभग 720 रुपये की बचत हुई और धान की पैदावार 1,000 किलोग्राम से बढ़कर 1,320 किलोग्राम प्रति एकड़ हो गई। यह उदाहरण बताता है कि वैज्ञानिक खेती किसानों की आय बढ़ाने में कितनी प्रभावी साबित हो रही है।

निष्कर्ष

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मिट्टी का स्वास्थ्य बेहतर रहेगा तो कृषि उत्पादन, किसानों की आय और देश की खाद्य सुरक्षा भी मजबूत होगी। मृदा संरक्षण, प्राकृतिक खेती और आधुनिक तकनीकों के समन्वय से भारत टिकाऊ कृषि की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

विदिशा में बनेगा देश का मॉडल किसान स्कूल, शिवराज सिंह चौहान ने रखी आधारशिला

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विदिशा- केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने रविवार को विदिशा जिले के Berkhedi Jetu में किसानों के लिए एक अनूठे “किसान स्कूल” की आधारशिला रखी। इस अवसर पर उन्होंने खेती को लाभकारी बनाने के लिए वैज्ञानिक कृषि, आधुनिक तकनीक और एकीकृत खेती को बढ़ावा देने का संकल्प दोहराया।

कार्यक्रम की खास बात यह रही कि इसे पारंपरिक राजनीतिक सभा के बजाय किसानों की प्रशिक्षण कक्षा के रूप में आयोजित किया गया। मंत्री ने कहा कि यहां आए सभी किसान विद्यार्थी हैं और उन्हें सीधे खेतों में आधुनिक कृषि तकनीकों का प्रदर्शन कर प्रशिक्षण दिया जाएगा।

49 एकड़ में बनेगा मॉडल कृषि विज्ञान केंद्र

बेरखेड़ी जेतू में बनने वाला कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) 49 एकड़ क्षेत्र में विकसित किया जाएगा। इसे देश का मॉडल केवीके बनाया जाएगा, जहां आधुनिक खेती के प्रदर्शन प्लॉट तैयार किए जाएंगे। भवन निर्माण पूरा होने का इंतजार किए बिना इसी खरीफ सीजन से खेतों में प्रशिक्षण और प्रदर्शन कार्य शुरू कर दिए जाएंगे।

ढाई एकड़ में भी संभव सम्मानजनक आय

शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि भूमि के छोटे होते आकार के बावजूद वैज्ञानिक और एकीकृत खेती अपनाकर एक हेक्टेयर (करीब ढाई एकड़) भूमि से भी परिवार की आजीविका सम्मानजनक रूप से चलाई जा सकती है। इसके लिए विदिशा, रायसेन, सीहोर और देवास जिलों के लिए विशेष कृषि रोडमैप तैयार किया गया है।

‘खेत बचाओ अभियान’ को मिलेगा विस्तार

केंद्रीय मंत्री ने ‘खेत बचाओ अभियान’ के तहत किसानों से मृदा परीक्षण कराने और संतुलित उर्वरकों के उपयोग की अपील की। उन्होंने कहा कि रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों का अंधाधुंध उपयोग मिट्टी की उर्वरता को नुकसान पहुंचा रहा है। अभियान के तहत मृदा स्वास्थ्य कार्ड, प्राकृतिक खेती और जैविक खेती को बढ़ावा दिया जाएगा।

किसानों को मिलेगी एग्री क्लिनिक और मोबाइल सलाह

नए कृषि विज्ञान केंद्र में ‘एग्री क्लिनिक’ स्थापित किया जाएगा, जहां किसान पौधों, पत्तियों और मिट्टी के नमूने लाकर रोगों की पहचान और उपचार संबंधी सलाह प्राप्त कर सकेंगे। साथ ही हेल्पलाइन और मोबाइल ऐप के माध्यम से भी किसानों को तत्काल वैज्ञानिक सलाह उपलब्ध कराई जाएगी।

नकली बीज और खाद पर सख्ती

केंद्रीय मंत्री ने नकली बीज, उर्वरक और कीटनाशकों की बिक्री पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी। उन्होंने किसानों से खरीद के समय बिल लेने और क्यूआर कोड के जरिए उत्पादों की जांच करने की अपील की।

छोटे किसानों के लिए मशीन बैंक

सरकार छोटे और सीमांत किसानों के लिए कस्टम हायरिंग सेंटर और मशीन बैंक स्थापित करेगी। यहां लेजर लेवलर, डीएसआर मशीन, ड्रिप और स्प्रिंकलर जैसी आधुनिक मशीनें किराये पर उपलब्ध कराई जाएंगी, ताकि किसान कम लागत में आधुनिक तकनीक का लाभ उठा सकें।

कृषि आधारित स्टार्टअप और प्रोसेसिंग पर जोर

कार्यक्रम में कृषि उत्पादों की वैल्यू एडिशन और फूड प्रोसेसिंग को बढ़ावा देने की घोषणा भी की गई। युवाओं को मशरूम उत्पादन, डेयरी, मधुमक्खी पालन और पोल्ट्री जैसे कृषि आधारित उद्यमों के लिए प्रशिक्षण दिया जाएगा।

दाल और तिलहन उत्पादन बढ़ाने का लक्ष्य

शिवराज सिंह चौहान ने दाल एवं तिलहन उत्पादन बढ़ाने के लिए विशेष अभियान चलाने की बात कही। उन्होंने आश्वासन दिया कि किसानों द्वारा उत्पादित दालों की खरीद न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर की जाएगी और अधिक उत्पादन वाले क्षेत्रों में दाल मिल स्थापित करने के लिए 25 लाख रुपये तक की सहायता दी जाएगी।

कार्यक्रम के अंत में किसानों ने मिट्टी की सेहत सुधारने, संतुलित उर्वरकों के उपयोग और पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लिया। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि यह पहल केवल सरकारी योजना नहीं, बल्कि किसानों की आय बढ़ाने और खेती को टिकाऊ बनाने का एक जनआंदोलन है।

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