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बिलासपुर में शिक्षक निलंबित, नशे की हालत में स्कूल पहुंचने का आरोप; वीडियो हुआ वायरल

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बिलासपुर- जिले के कोटा विकासखंड के बहेरामुड़ा स्थित अनुदान प्राप्त विद्यामंदिर प्राथमिक विद्यालय में पदस्थ एक सहायक शिक्षक के खिलाफ शिक्षा विभाग ने कार्रवाई की है। शिक्षक पर स्कूल समय में कथित तौर पर नशे की हालत में पहुंचने और अनुशासनहीन एवं अमर्यादित व्यवहार करने का आरोप है।


वायरल वीडियो से सामने आया मामला

घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद शिक्षा विभाग ने मामले को संज्ञान में लिया। प्रारंभिक जांच में शिक्षक के स्कूल परिसर में कथित रूप से नशे की हालत में पाए जाने और अनुचित व्यवहार की बात सामने आई।

DEO ने दिए तत्काल निलंबन के निर्देश

जिला शिक्षा अधिकारी ने विद्यालय प्रबंधन समिति को संबंधित सहायक शिक्षक के खिलाफ तत्काल निलंबन की कार्रवाई करने और कार्रवाई की रिपोर्ट 24 घंटे के भीतर प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।

10 महीने से वेतन नहीं मिलने का दावा

वायरल वीडियो में शिक्षक कथित तौर पर लंबे समय से वेतन नहीं मिलने की बात कहते हुए दिखाई देते हैं। रिपोर्टों के अनुसार, उन्होंने करीब 10 महीने से वेतन लंबित होने का दावा किया है। हालांकि, वेतन लंबित रहने के कारणों की अलग से पुष्टि/जांच की जानी बाकी है।

आगे विभागीय कार्रवाई संभव

शिक्षा विभाग ने फिलहाल प्रारंभिक जांच और उपलब्ध शिकायतों के आधार पर निलंबन की कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। मामले में आगे की विभागीय प्रक्रिया के बाद अंतिम कार्रवाई तय की जाएगी।


भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा में 6500 विद्यार्थियों ने दिलाई परीक्षा

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सनातन के प्रश्नों में उलझे नजर आए बच्चे 

आरंग- शिक्षा के साथ संस्कार का संगम देखने को मिला विकासखंड आरंग में। अखिल विश्व गायत्री परिवार, शांतिकुंज हरिद्वार द्वारा आयोजित भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा में इस वर्ष आरंग ब्लॉक के करीब 6500 से अधिक छात्र-छात्राओं ने भाग लेकर एक नया कीर्तिमान बनाया।3 अक्टूबर को आयोजित इस राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा में देश के लाखों बच्चों ने एक साथ भारतीय संस्कृति, नैतिक शिक्षा और राष्ट्र गौरव से जुड़े प्रश्नों को हल किया।विकासखंड के शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला चरौदा में भी 111 विद्यार्थी परीक्षा में शामिल हुए। शाला के शिक्षक महेन्द्र कुमार पटेल ने कहा, "हमारे बच्चे हर साल इस परीक्षा का बेसब्री से इंतजार करते हैं। यह परीक्षा उन्हें किताबी ज्ञान से आगे ले जाकर जीवन जीने की कला और अपनी परंपराओं पर गर्व करना सिखाती है। साथ ही ओएमआर शीट पर परीक्षा का अभ्यास भविष्य की बड़ी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए उन्हें तैयार करता है।"

परीक्षा के बाद बच्चों में भारतीय संस्कृति को लेकर नई ऊर्जा और जिज्ञासा देखी गई।इस महापरीक्षा को सफल बनाने में गायत्री शक्तिपीठ आरंग परिवार से पवन साहू, जगमोहन चंद्राकर, रामानुज हिरवानी, शिवदयाल वर्मा,ओमप्रकाश साहू,लता साहू,कृष्णकुमार साहू,गेंदराम साहू, विजय वर्मा,भीम यादव, महेन्द्र पटेल ,सहित गायत्री परिवार के अन्य सदस्यों ने अहम् भूमिका निभाई।




शिक्षकों की मांग को लेकर NH-53 पर चक्काजाम, भगतदेवरी में ग्रामीणों का प्रदर्शन

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स्कूल में शिक्षकों की कमी से नाराज पालक-ग्रामीणों ने जताया विरोध, प्रशासन के आश्वासन के बाद खत्म हुआ आंदोलन

महासमुंद- जिले के भगतदेवरी गांव में स्कूल में शिक्षकों की कमी को लेकर पालकों और ग्रामीणों ने विरोध प्रदर्शन किया। शिक्षकों की व्यवस्था की मांग को लेकर बड़ी संख्या में ग्रामीण NH-53 पर पहुंच गए और चक्काजाम कर दिया। सड़क पर प्रदर्शन के कारण कुछ समय के लिए आवागमन प्रभावित हुआ।

ग्रामीणों का कहना है कि स्कूल में पर्याप्त शिक्षकों की व्यवस्था नहीं होने से विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। पालकों ने लंबे समय से चली आ रही इस समस्या का समाधान करने और स्कूल में आवश्यक संख्या में शिक्षकों की नियुक्ति अथवा वैकल्पिक व्यवस्था किए जाने की मांग की।

NH-53 पर प्रदर्शन से बढ़ी परेशानी

शिक्षकों की मांग को लेकर ग्रामीणों के सड़क पर उतरने से NH-53 पर यातायात प्रभावित हुआ। प्रदर्शन की जानकारी मिलने के बाद प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों से चर्चा की।

ग्रामीणों ने अधिकारियों के सामने स्कूल की समस्याएं रखीं और जल्द से जल्द शिक्षकों की व्यवस्था करने की मांग की। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि बच्चों की पढ़ाई से जुड़ा मामला होने के कारण इस पर तत्काल ध्यान दिया जाना जरूरी है।

दो शिक्षकों की वैकल्पिक व्यवस्था का आश्वासन

प्रशासन की ओर से ग्रामीणों को दो शिक्षकों की वैकल्पिक व्यवस्था किए जाने का आश्वासन दिया गया। अधिकारियों के आश्वासन के बाद ग्रामीणों ने चक्काजाम समाप्त कर दिया और सड़क पर यातायात सामान्य हुआ।

ग्रामीणों ने उम्मीद जताई कि प्रशासन द्वारा दिए गए आश्वासन के अनुसार जल्द ही स्कूल में शिक्षकों की व्यवस्था की जाएगी, जिससे विद्यार्थियों की पढ़ाई नियमित रूप से संचालित हो सके।

शिक्षा व्यवस्था को लेकर उठे सवाल

भगतदेवरी में शिक्षकों की कमी को लेकर हुए इस प्रदर्शन ने ग्रामीण क्षेत्रों में स्कूलों में पर्याप्त शिक्षकीय व्यवस्था की आवश्यकता को सामने ला दिया है। पालकों का कहना है कि बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए स्कूलों में विषयवार और पर्याप्त संख्या में शिक्षक होना जरूरी है।

फिलहाल प्रशासन के आश्वासन के बाद आंदोलन समाप्त हो गया है। अब ग्रामीणों की नजर इस बात पर है कि दो शिक्षकों की वैकल्पिक व्यवस्था कब तक लागू होती है और विद्यार्थियों की पढ़ाई किस तरह सुचारु होती है।

ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि उनकी मांग बच्चों की शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने और स्कूल में पर्याप्त शिक्षक उपलब्ध कराने को लेकर है।


शराब के नशे में स्कूल पहुंचने का आरोप, हेडमास्टर का वीडियो वायरल; शिकायत की चुनौती देने के बाद निलंबित

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जांजगीर-चांपा- जांजगीर-चांपा जिले के पामगढ़ विकासखंड से शिक्षा व्यवस्था से जुड़ा एक मामला सामने आया है। भांठापारा भुईगांव के शासकीय स्कूल में पदस्थ हेडमास्टर योगेश्वर सिंह कंवर का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वीडियो में वे कथित तौर पर नशे की हालत में स्कूल परिसर में नजर आ रहे हैं।

मामला सामने आने के बाद जिला प्रशासन ने इसे गंभीरता से लिया। कलेक्टर जन्मेजय महोबे के निर्देश पर मामले की जांच शुरू की गई, जिसके बाद जिला शिक्षा अधिकारी ने हेडमास्टर को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। निलंबन अवधि के दौरान उन्हें पामगढ़ विकासखंड शिक्षा अधिकारी (BEO) कार्यालय से अटैच किया गया है।

वायरल वीडियो में क्या दिख रहा है?

सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में हेडमास्टर स्कूल परिसर में दिखाई दे रहे हैं। वीडियो को लेकर दावा किया जा रहा है कि उस समय वे शराब के नशे में थे और उनका व्यवहार सामान्य नहीं था।

बताया जा रहा है कि स्कूल के कुछ शिक्षकों ने उनके व्यवहार पर आपत्ति जताई। इसी दौरान कथित तौर पर उन्होंने शिक्षकों को शिकायत करने की चुनौती दी।

वायरल वीडियो में वे कथित तौर पर शिक्षकों से वीडियो बनाने और उसे जहां शिकायत करनी हो वहां भेजने की बात कहते सुनाई दे रहे हैं। वीडियो में BEO, DEO और कलेक्टर तक शिकायत करने का भी जिक्र बताया जा रहा है।

हालांकि, वीडियो में दिखाई देने वाली स्थिति और लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि विभागीय जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।

महिला शिक्षक से विवाद का भी जिक्र

मामले के साथ स्कूल में हेडमास्टर और एक महिला शिक्षक के बीच कथित विवाद की बात भी सामने आई है।

आरोप है कि हेडमास्टर ने बच्चों के सामने महिला शिक्षक के साथ अभद्र व्यवहार किया और उनके पढ़ाने के तरीके पर टिप्पणी की। वायरल वीडियो में भी महिला शिक्षक से संबंधित बातचीत सुनाई देने का दावा किया जा रहा है।

हालांकि, इस संबंध में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। विभागीय जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

जनप्रतिनिधियों ने स्कूल पहुंचकर संभाली स्थिति

हेडमास्टर के कथित व्यवहार की जानकारी मिलने के बाद गांव के कुछ जनप्रतिनिधि भी स्कूल पहुंचे। उन्होंने मामले को शांत कराने और हेडमास्टर को समझाने का प्रयास किया।

इसी दौरान स्कूल परिसर में हुई बातचीत और घटनाक्रम का वीडियो रिकॉर्ड किया गया। बाद में यही वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया और मामला प्रशासन तक पहुंचा।

कलेक्टर के निर्देश पर तत्काल कार्रवाई

वायरल वीडियो सामने आने के बाद जिला प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लिया। कलेक्टर जन्मेजय महोबे ने जांच के निर्देश दिए।

जिला शिक्षा अधिकारी मनोहर प्रताप सिंह के अनुसार, हेडमास्टर के शराब के नशे में स्कूल पहुंचने संबंधी जानकारी वायरल वीडियो के माध्यम से सामने आई थी। इसके बाद उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया और पामगढ़ BEO कार्यालय से अटैच किया गया।

प्रशासन के अनुसार, जांच में यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित शिक्षक के खिलाफ नियमों के तहत आगे की विभागीय कार्रवाई की जाएगी।

स्कूलों की निगरानी बढ़ाने के निर्देश

घटना के बाद कलेक्टर ने जिले के शिक्षा अधिकारियों को स्कूलों की नियमित निगरानी के निर्देश दिए हैं।

जिला शिक्षा अधिकारी और सभी विकासखंड शिक्षा अधिकारियों को स्कूलों का निरीक्षण कर—

  • शिक्षकों की उपस्थिति,

  • अनुशासन,

  • स्कूल में शिक्षकों के आचरण,

  • शिक्षण व्यवस्था और

  • विद्यार्थियों के लिए सुरक्षित एवं अनुशासित वातावरण

की नियमित समीक्षा करने को कहा गया है।

इसके अलावा नशे की हालत में स्कूल आने या अनुशासनहीनता से संबंधित शिकायतें मिलने पर उनकी जांच कराने और आरोप सही पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।

पुराने मामलों की भी होगी समीक्षा

कलेक्टर ने जिले में पहले सामने आए शिक्षकों की अनुशासनहीनता से जुड़े मामलों की जानकारी भी मांगी है। अधिकारियों से ऐसे मामलों में हुई विभागीय जांच और अब तक की गई कार्रवाई की वर्तमान स्थिति बताने को कहा गया है।

इससे प्रशासन को यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि पूर्व में सामने आए मामलों में क्या कार्रवाई हुई और क्या कोई मामला अभी लंबित है।

अब जांच रिपोर्ट पर रहेगी नजर

फिलहाल हेडमास्टर को निलंबित कर दिया गया है और मामले की विभागीय जांच जारी है। जांच के दौरान वायरल वीडियो, संबंधित शिक्षकों के बयान और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर घटनाक्रम की वास्तविक स्थिति स्पष्ट की जाएगी।

जांच रिपोर्ट के आधार पर ही यह तय होगा कि हेडमास्टर के खिलाफ आगे क्या विभागीय कार्रवाई की जाएगी।

बैगलेस डे योजना प्रभावी नहीं, अभिभावकों में बढ़ रही नाराजगी

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स्कूलों में गतिविधियों के बजाय छुट्टी या सामान्य दिनचर्या, उद्देश्य पर उठ रहे सवाल

महासमुंद- स्कूलों में बच्चों के तनाव को कम करने और उन्हें किताबी पढ़ाई के साथ रचनात्मक, सांस्कृतिक एवं व्यावहारिक गतिविधियों से जोड़ने के उद्देश्य से लागू की गई बैगलेस डे योजना जिले के कई स्कूलों में प्रभावी रूप से क्रियान्वित होती दिखाई नहीं दे रही है। अभिभावकों का कहना है कि योजना के तहत होने वाली गतिविधियों और उसके सकारात्मक प्रभाव का उन्हें अपेक्षित रूप से अनुभव नहीं हो रहा है।

अभिभावकों के अनुसार, कई निजी स्कूलों में बैगलेस डे के नाम पर न तो पर्याप्त शैक्षणिक गतिविधियां आयोजित की जाती हैं और न ही सांस्कृतिक अथवा रचनात्मक कार्यक्रम। कुछ स्कूलों में इस दिन बच्चों की जल्दी छुट्टी कर दी जाती है। इससे अभिभावकों में यह सवाल उठ रहा है कि यदि बैगलेस डे का उद्देश्य बच्चों को पढ़ाई से अलग कर रचनात्मक और व्यावहारिक गतिविधियों से जोड़ना है, तो उसका धरातल पर सही क्रियान्वयन क्यों नहीं हो रहा है।

चेतना विकास मूल्य शिक्षा संचालित अभिभावक विद्यालय कोकड़ी के शिक्षक गेंदलाल कोकडिया ने इस संबंध में कहा कि बैगलेस डे की अवधारणा अच्छी है, लेकिन सरकारी और निजी दोनों स्कूलों में इसके वास्तविक उद्देश्य को पूरी तरह समझने और लागू करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि कई निजी स्कूलों में इस दिन न तो बैगलेस डे से संबंधित सांस्कृतिक कार्यक्रम और गतिविधियां दिखाई देती हैं और न ही बच्चों को नियमित पढ़ाई कराई जाती है।

उन्होंने कहा कि वर्तमान में सरकारी स्कूलों में वीएसके एप के माध्यम से शिक्षकों और विद्यार्थियों की उपस्थिति तथा शैक्षणिक गतिविधियों की निगरानी बढ़ी है। ऐसे में शनिवार को निजी स्कूलों में पढ़ने वाले कुछ बच्चे भी पढ़ाई के लिए सरकारी स्कूलों की ओर भेजे जाने की स्थिति बन रही है।

गेंदलाल कोकडिया का सुझाव है कि बैगलेस डे को केवल पढ़ाई से अलग रखने के बजाय पढ़ाई के साथ सांस्कृतिक, रचनात्मक, खेलकूद और व्यावहारिक गतिविधियों को जोड़कर आयोजित किया जाना चाहिए। इससे बच्चों की नियमित पढ़ाई भी प्रभावित नहीं होगी और बैगलेस डे का उद्देश्य भी पूरा किया जा सकेगा।

उन्होंने कहा कि यदि बैगलेस डे की गतिविधियां स्कूलों में प्रभावी रूप से संचालित नहीं हो पा रही हैं, तो शासन को इसकी समीक्षा करनी चाहिए। आवश्यकता होने पर उस दिन भी नियमित शैक्षणिक गतिविधियों के साथ सांस्कृतिक एवं रचनात्मक कार्यक्रम आयोजित किए ज

स्कूलों में 15 दिन की छुट्टियां घोषित, दशहरा-दीपावली और शीतकालीन अवकाश की तारीखें जारी

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रायपुर- छत्तीसगढ़ के स्कूली विद्यार्थियों और शिक्षकों के लिए बड़ी खबर है। स्कूल शिक्षा विभाग ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए दशहरा, दीपावली और शीतकालीन अवकाश की तारीखें घोषित कर दी हैं। विभाग के 21 सितंबर 2026 को जारी आदेश के मुताबिक, इन तीनों अवसरों पर स्कूलों में कुल 15 दिनों का अवकाश रहेगा।

तीनों छुट्टियां 5-5 दिन की

जारी कार्यक्रम के अनुसार दशहरा अवकाश 17 अक्टूबर से 21 अक्टूबर 2026 तक रहेगा। इसके बाद दीपावली अवकाश 6 नवंबर से 10 नवंबर 2026 तक निर्धारित किया गया है। वहीं साल के अंत में शीतकालीन अवकाश 24 दिसंबर से 28 दिसंबर 2026 तक रहेगा। इस तरह तीनों अवकाश मिलाकर विद्यार्थियों को कुल 15 दिन की छुट्टी मिलेगी।

  • अवकाश
  • तारीख
  • कुल दिन
  • दशहरा
  • 17–21 अक्टूबर 2026
  • 5 दिन
  • दीपावली
  • 6–10 नवंबर 2026
  • 5 दिन
  • शीतकालीन
  • 24–28 दिसंबर 2026
  • 5 दिन
  • कुल
  • —
  • 15 दिन

किन संस्थानों पर लागू होगा आदेश?

रिपोर्टों के मुताबिक यह अवकाश कार्यक्रम शैक्षणिक सत्र 2026-27 में शासकीय, अनुदान प्राप्त और गैर-अनुदान प्राप्त स्कूलों के साथ-साथ D.Ed., B.Ed. और M.Ed. से जुड़े संस्थानों के लिए जारी किया गया है। आदेश में संबंधित संभागीय और जिला अधिकारियों को भी आवश्यक कार्रवाई के लिए सूचना भेजी गई है। 

गौरतलब है कि पिछले शैक्षणिक सत्र 2025-26 में दशहरा, दीपावली और शीतकालीन अवकाश 6-6 दिन, यानी कुल 18 दिन थे। इस बार इन तीनों प्रमुख अवकाशों की अवधि घटाकर 5-5 दिन निर्धारित की गई है।


बलौदाबाजार स्कूल विवाद: छात्र को थप्पड़ मारने का वीडियो वायरल, प्रभारी प्राचार्य पर हुई कार्रवाई

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शिक्षक पर लगे आरोपों से शुरू हुआ विवाद, शिकायत के दौरान छात्र को थप्पड़ मारने का वीडियो सामने आने के बाद प्रशासन ने की कार्रवाई

बलौदाबाजार- छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार स्थित पंडित चक्रपाणि शुक्ल हायर सेकेंडरी स्कूल में शिक्षक को लेकर शुरू हुआ विवाद उस समय और बढ़ गया, जब शिकायत के दौरान एक छात्र को थप्पड़ मारने का वीडियो सामने आया। मामले में शिक्षा विभाग ने कार्रवाई करते हुए प्रभारी प्राचार्य वंदनी श्रीवास्तव को प्राचार्य पद की जिम्मेदारी से हटा दिया है। उनकी जगह स्कूल के वरिष्ठ व्याख्याता को प्रभारी प्राचार्य की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

शिक्षक पर छात्रों ने लगाए थे गंभीर आरोप

रिपोर्ट के मुताबिक, विवाद की शुरुआत स्कूल में पदस्थ एक विज्ञान व्याख्याता को लेकर छात्रों की शिकायत से हुई। छात्रों ने आरोप लगाया था कि शिक्षक नशे की हालत में स्कूल आते हैं, छात्राओं के साथ कथित तौर पर दुर्व्यवहार करते हैं और शिकायत करने वाले विद्यार्थियों को परीक्षा में फेल करने की धमकी देते हैं।

हालांकि, प्रशासन ने इन सभी आरोपों को एक साथ अंतिम रूप से प्रमाणित नहीं माना है। बलौदाबाजार कलेक्टर के अनुसार, शिक्षक के नशे में पाए जाने के मामले में निलंबन की अनुशंसा की गई है, जबकि मारपीट और कथित दुर्व्यवहार से जुड़े अन्य आरोपों का विभागीय स्तर पर सत्यापन किया जा रहा है।

शिकायत के दौरान छात्र को मारा थप्पड़

विवाद उस समय बढ़ गया जब छात्र और उनके अभिभावक स्कूल प्रबंधन के सामने अपनी शिकायत रखने पहुंचे। इसी दौरान मीडिया भी स्कूल पहुंची थी।

रिपोर्ट के अनुसार, प्रभारी प्राचार्य के कक्ष में बातचीत के दौरान एक छात्र अपने मोबाइल फोन से पूरी घटना रिकॉर्ड कर रहा था। प्राचार्य ने उसे वीडियो बनाने से रोकने को कहा। छात्र के रिकॉर्डिंग जारी रखने पर प्राचार्य ने उसे थप्पड़ मार दिया। इस घटना का वीडियो सामने आने के बाद मामला और तूल पकड़ गया।

प्रशासन ने शुरू की जांच

मामले की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर के निर्देश पर कार्यवाहक जिला शिक्षा अधिकारी, ब्लॉक शिक्षा अधिकारी और तहसीलदार स्कूल पहुंचे। अधिकारियों ने छात्रों, अभिभावकों, शिक्षकों और स्कूल प्रबंधन से बातचीत कर उनके बयान दर्ज किए।

वहीं, संबंधित शिक्षक का मेडिकल परीक्षण भी कराया गया। प्रशासन अब शिक्षक पर लगे आरोपों के साथ-साथ छात्र को थप्पड़ मारने की घटना और पूरे मामले को स्कूल प्रबंधन द्वारा संभालने के तरीके की भी जांच कर रहा है।

प्रभारी प्राचार्य को हटाया गया

बलौदाबाजार कलेक्टर के अनुसार, स्कूल प्रशासन की ओर से समन्वय और नीतियों के क्रियान्वयन में कमी पाई गई, जिसके बाद प्रभारी प्राचार्य को पद की जिम्मेदारी से हटा दिया गया। स्कूल के वरिष्ठ व्याख्याता को नया प्रभारी प्राचार्य बनाया गया है।

पत्रकारों ने भी जताई नाराजगी

घटना के दौरान स्कूल प्रबंधन के व्यवहार को लेकर पत्रकारों की ओर से भी नाराजगी सामने आई। रिपोर्ट के मुताबिक, पत्रकारों ने स्कूल के बाहर विरोध प्रदर्शन किया और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की।


गरियाबंद में जान जोखिम में डालकर स्कूल पहुंच रहे बच्चे, 20 फीट ऊंची लोहे की सीढ़ी बनी मजबूरी

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गरियाबंद/मैनपुर- शिक्षा को बच्चों का मौलिक अधिकार माना जाता है, लेकिन छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले के मैनपुर विकासखंड में स्कूली बच्चों के सामने पढ़ाई तक पहुंचने के लिए ही जान जोखिम में डालने की मजबूरी खड़ी हो गई है। यहां देहारगुड़ा और खामभाठा के बीच पैरी नदी पर वर्षों से अधूरा पड़ा पुल बच्चों के लिए परेशानी और खतरे का बड़ा कारण बन गया है।

मानसून के दौरान पैरी नदी का जलस्तर बढ़ने के बाद नदी पार करना बेहद मुश्किल हो जाता है। ऐसे में आसपास की बस्तियों के दर्जनों बच्चे स्कूल जाने के लिए अधूरे पुल के एक पिलर पर लगी करीब 20 फीट ऊंची और संकरी लोहे की सीढ़ी का सहारा लेने को मजबूर हैं। पीठ पर भारी स्कूल बैग और नीचे तेज बहाव वाली नदी—इस खतरनाक रास्ते से गुजरना बच्चों की रोजमर्रा की मजबूरी बन गया है।

छह साल से अधूरा पड़ा है पुल

मैनपुर तहसील मुख्यालय से करीब 5 किलोमीटर दूर देहारगुड़ा और खामभाठा के बीच पैरी नदी पर करीब 300 मीटर लंबे पुल का निर्माण पिछले लगभग 5-6 वर्षों से चल रहा है। लंबे समय के बावजूद पुल का निर्माण पूरा नहीं हो सका है। ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण कार्य बेहद धीमी गति से चल रहा है और कई बार शिकायत करने के बाद भी स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ।

पुल का निर्माण पूरा नहीं होने के कारण बारिश के दिनों में नदी पार करने का सुरक्षित रास्ता बंद हो जाता है। यही वजह है कि बच्चों को अधूरे पुल के पिलर और उससे जुड़ी लोहे की सीढ़ी के सहारे आवागमन करना पड़ रहा है।

एक गलती और हो सकता है बड़ा हादसा

इस पूरे रास्ते में सबसे बड़ा खतरा बच्चों की सुरक्षा को लेकर है। लोहे की सीढ़ी संकरी है और बारिश के दौरान फिसलन भी बढ़ जाती है। इसके अलावा निर्माणाधीन पुल के कई हिस्सों में लोहे के सरिए बाहर निकले हुए बताए जा रहे हैं। ग्रामीणों के अनुसार इन सरियों से चोट लगने का खतरा भी बना रहता है।

जब बच्चे सीढ़ी से ऊपर-नीचे होते हैं, तो उनके परिजनों और ग्रामीणों की चिंता बढ़ जाती है। जरा सा पैर फिसलने या संतुलन बिगड़ने पर नीचे बह रही नदी में गिरने का गंभीर खतरा है।

बारिश में और भयावह हो जाती है स्थिति

पैरी नदी सामान्य दिनों में अपेक्षाकृत शांत रहती है। गर्मी के मौसम में नदी का जलस्तर काफी कम हो जाने से कई स्थानों पर लोग आसानी से आवागमन कर लेते हैं। लेकिन मानसून के दौरान भारी बारिश के कारण नदी उफान पर आ जाती है और बच्चों के लिए यह रास्ता बेहद खतरनाक हो जाता है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि बारिश के मौसम में बच्चों के स्कूल जाने की चिंता अभिभावकों को लगातार सताती रहती है। इसके बावजूद बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसलिए वे इस जोखिम भरे रास्ते से स्कूल पहुंचने को मजबूर हैं।

पहले भी दिए जा चुके हैं निर्माण पूरा करने के निर्देश

जानकारी के मुताबिक, पुल निर्माण में देरी को लेकर ग्रामीणों की शिकायत के बाद स्थानीय जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों ने पहले भी निर्माण स्थल का निरीक्षण किया था। निर्माण एजेंसी को काम में तेजी लाने और निर्धारित समय में पुल पूरा करने के निर्देश दिए गए थे। ग्रामीणों के मुताबिक, इसके बावजूद निर्माण कार्य अपेक्षित गति से आगे नहीं बढ़ सका।

अब बच्चों के इस खतरनाक सफर का वीडियो सामने आने के बाद मामला फिर चर्चा में है और प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग तेज हो गई है।

ग्रामीणों ने दी आंदोलन की चेतावनी

लंबे समय से पुल का निर्माण पूरा नहीं होने से नाराज ग्रामीणों ने प्रशासन से जल्द से जल्द समस्या का समाधान करने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि बच्चों के लिए सुरक्षित रास्ते की व्यवस्था नहीं की गई और पुल का निर्माण शीघ्र पूरा नहीं हुआ, तो वे आंदोलन और नेशनल हाईवे-130C पर चक्काजाम करने के लिए मजबूर होंगे।

प्रशासन ने समाधान का दिया भरोसा

मामला सामने आने के बाद प्रशासन भी हरकत में आया है। रिपोर्टों के अनुसार गरियाबंद कलेक्टर रणबीर शर्मा ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जल्द समाधान निकालने की बात कही है। प्रशासन की ओर से बच्चों के लिए सुरक्षित अस्थायी आवागमन की व्यवस्था और अधूरे पुल के निर्माण की समीक्षा किए जाने की बात सामने आई है।

सबसे बड़ा सवाल—आखिर कब खत्म होगा बच्चों का यह जोखिम?

एक ओर सरकार ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में शिक्षा और विकास को प्राथमिकता देने की बात करती है, वहीं दूसरी ओर मैनपुर क्षेत्र के बच्चों को स्कूल पहुंचने के लिए अपनी जान जोखिम में डालनी पड़ रही है। यह मामला सिर्फ अधूरे पुल का नहीं, बल्कि बच्चों की सुरक्षा, शिक्षा तक उनकी पहुंच और ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं से जुड़ा गंभीर सवाल है।

अब ग्रामीणों और अभिभावकों की नजर प्रशासन की कार्रवाई पर है। जरूरत इस बात की है कि किसी बड़े हादसे का इंतजार करने के बजाय बच्चों की सुरक्षित आवाजाही के लिए तत्काल व्यवस्था की जाए और वर्षों से अधूरे पड़े पुल का निर्माण समयबद्ध तरीके से पूरा कराया जाए।

स्वामी आत्मानंद स्कूल पटेवा के 9 विद्यार्थियों का संभाग स्तरीय प्रतियोगिता के लिए चयन

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पटेवा- स्वामी आत्मानंद इंग्लिश मीडियम स्कूल, पटेवा के विद्यार्थियों ने खेल के क्षेत्र में एक बार फिर शानदार प्रदर्शन करते हुए विद्यालय का नाम रोशन किया है। विद्यालय के 9 विद्यार्थियों का चयन संभाग स्तरीय प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए किया गया है।

चयनित विद्यार्थियों में बालक वर्ग से रुद्र पाटकर, युवराज ध्रुव और अमन दुबे शामिल हैं। वहीं बालिका वर्ग में यामिनी सेन, सुप्रिया जाटवर, पूजा पटेल, सिमरन जोगी, शीतल साहू और एक अन्य चयनित खिलाड़ी ने अपनी प्रतिभा के दम पर संभाग स्तरीय प्रतियोगिता में स्थान बनाया है।

विद्यालय प्रबंधन के अनुसार, पिछले चार वर्षों से स्वामी आत्मानंद विद्यालय, पटेवा के विद्यार्थी खेलकूद के क्षेत्र में लगातार उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहे हैं। विद्यालय के अनेक छात्र-छात्राएं जिला एवं संभाग स्तर के साथ-साथ राज्य और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में भी भाग लेकर विद्यालय का नाम गौरवान्वित कर चुके हैं।

विद्यार्थियों की इस उपलब्धि पर विद्यालय के व्यायाम शिक्षक वैभव मानिकपुरी एवं प्रधानाध्यापक अरुण बेनर्जी ने सभी चयनित विद्यार्थियों को बधाई दी और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों की मेहनत, अनुशासन और निरंतर अभ्यास ही उनकी सफलता की सबसे बड़ी कुंजी है। उन्होंने विश्वास जताया कि सभी चयनित खिलाड़ी संभाग स्तरीय प्रतियोगिता में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए अपनी प्रतिभा का परिचय देंगे और विद्यालय, अभिभावकों एवं क्षेत्र का नाम रोशन करेंगे।

विद्यालय परिवार ने चयनित सभी खिलाड़ियों को आगामी प्रतियोगिता के लिए शुभकामनाएं देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

बेंगलुरु के स्कूल में फ्लू का प्रकोप, 500 से अधिक छात्र बीमार; ऑफलाइन कक्षाएं अस्थायी रूप से बंद

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बेंगलुरु- बेंगलुरु के रिचर्ड्स टाउन स्थित क्लेरेंस हाई स्कूल में बड़ी संख्या में विद्यार्थियों और कर्मचारियों के फ्लू जैसे लक्षणों से प्रभावित होने के बाद स्कूल प्रशासन ने एहतियाती कदम उठाते हुए कुछ दिनों के लिए ऑफलाइन कक्षाएं स्थगित कर दी हैं। स्कूल के अनुसार, 500 से अधिक विद्यार्थी और 21 कर्मचारी बुखार, सर्दी, खांसी और शरीर में दर्द जैसे लक्षणों से प्रभावित बताए गए हैं।

दो H1N1 मामलों की पुष्टि

स्कूल प्रशासन ने बताया कि H1N1 के दो मामलों की पुष्टि हुई है और एक कर्मचारी का अस्पताल में उपचार चल रहा है। संक्रमण की आशंका को देखते हुए कक्षा 6 से 12 तक के विद्यार्थियों के लिए ऑनलाइन कक्षाएं संचालित की गईं, ताकि पढ़ाई प्रभावित न हो और संक्रमण के संभावित प्रसार को रोका जा सके।

हालांकि, इस मामले में कर्नाटक स्वास्थ्य विभाग ने स्थिति को लेकर महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण दिया है। स्वास्थ्य आयुक्त गुरुदत्त हेगड़े के अनुसार, करीब 500 विद्यार्थियों के H1N1 संक्रमित होने की खबर सही नहीं है। उन्होंने कहा कि दो शिक्षकों में H1N1 की पुष्टि हुई है, जबकि किसी विद्यार्थी के H1N1 पॉजिटिव होने की पुष्टि नहीं हुई है। फ्लू जैसे लक्षण वाले विद्यार्थियों की स्वास्थ्य जांच की जा रही है।

स्वास्थ्य और स्वच्छता को लेकर उठे सवाल

स्कूल प्रशासन ने विद्यालय के आसपास साफ-सफाई की स्थिति को लेकर भी चिंता जताई है। स्कूल के आसपास मौजूद कुछ स्ट्रीट फूड विक्रेताओं और दुकानों के कारण कचरा जमा होने तथा स्वच्छता संबंधी समस्याओं का मुद्दा उठाया गया है। प्रशासन ने स्थानीय नागरिक निकाय से आसपास के क्षेत्र की सफाई और खाद्य विक्रेताओं के निरीक्षण की मांग की है।

नागरिक अधिकारियों ने स्कूल के आसपास सफाई और सैनिटाइजेशन की कार्रवाई भी की है। प्रशासन की ओर से विद्यार्थियों और कर्मचारियों के स्वास्थ्य पर लगातार नजर रखी जा रही है।

स्कूल 19 अगस्त से दोबारा खुलने की तैयारी में

स्कूल प्रशासन के अनुसार, एहतियाती तौर पर ऑफलाइन कक्षाएं 18 अगस्त तक स्थगित रखी गईं और इस दौरान ऑनलाइन पढ़ाई जारी रही। स्कूल ने बताया है कि स्वास्थ्य स्थिति की निगरानी के बाद 19 अगस्त से स्कूल दोबारा खोलने की योजना है।

स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से घबराने के बजाय सावधानी बरतने की अपील की है। फ्लू जैसे लक्षण दिखाई देने पर आराम करना, संक्रमण फैलने से रोकने के लिए सावधानी बरतना और जरूरत पड़ने पर चिकित्सकीय सलाह लेना महत्वपूर्ण है।

बेंगलुरु की यह घटना स्कूलों में स्वच्छता, स्वास्थ्य निगरानी और संक्रमण नियंत्रण की तैयारियों की अहमियत को एक बार फिर सामने लाती है। फिलहाल स्वास्थ्य विभाग और स्कूल प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।

शिक्षकों की कमी से छात्राओं का फूटा आक्रोश, स्कूल में जड़ा ताला

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पांच प्रमुख विषयों के शिक्षक नहीं होने से पढ़ाई प्रभावित, छात्राओं के साथ अभिभावक भी उतरे विरोध में

धमतरी- छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले के बारना स्थित शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में शिक्षकों की कमी को लेकर छात्र-छात्राओं और अभिभावकों का आक्रोश सोमवार को खुलकर सामने आया। लंबे समय से पर्याप्त शिक्षक नहीं होने से पढ़ाई प्रभावित होने का आरोप लगाते हुए विद्यार्थियों और ग्रामीणों ने स्कूल के मुख्य गेट पर तालाबंदी कर प्रदर्शन किया।

पांच विषयों की पढ़ाई पर संकट

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि स्कूल में हिंदी, अंग्रेजी, रसायन, भूगोल और सामाजिक विज्ञान जैसे महत्वपूर्ण विषयों के शिक्षक उपलब्ध नहीं हैं। शिक्षकों की कमी के कारण विद्यार्थियों को नियमित कक्षाएं नहीं मिल पा रही हैं और उनकी पढ़ाई पर सीधा असर पड़ रहा है।

विद्यार्थियों का कहना है कि परीक्षा और भविष्य की तैयारी के लिए विषयवार शिक्षकों की आवश्यकता है। शिक्षकों के अभाव में उन्हें पाठ्यक्रम पूरा करने और कठिन विषयों को समझने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

बारिश में भी प्रदर्शन पर डटे रहे विद्यार्थी और ग्रामीण

शिक्षकों की मांग को लेकर विद्यार्थी, अभिभावक और ग्रामीण स्कूल परिसर पहुंचे। बारिश के बावजूद प्रदर्शनकारियों ने स्कूल के मुख्य गेट पर ताला लगाकर नारेबाजी की। ग्रामीणों का कहना है कि वे लंबे समय से स्कूल में पर्याप्त शिक्षकों की नियुक्ति की मांग कर रहे हैं, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ।

कई बार दे चुके हैं आवेदन

ग्रामीणों के अनुसार, शिक्षकों की कमी दूर करने के लिए पहले भी संबंधित अधिकारियों को आवेदन और ज्ञापन दिए जा चुके हैं। इसके बावजूद जब स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो विद्यार्थियों और अभिभावकों को आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा। प्रदर्शनकारियों ने शिक्षा विभाग से जल्द से जल्द विषयवार शिक्षकों की व्यवस्था करने की मांग की है।

पढ़ाई के साथ भविष्य की चिंता

विद्यार्थियों का कहना है कि स्कूल में शिक्षक नहीं होने का असर केवल वर्तमान पढ़ाई पर नहीं, बल्कि उनके भविष्य पर भी पड़ रहा है। खासकर उच्च कक्षाओं के विद्यार्थियों के लिए विषय विशेषज्ञ शिक्षकों की कमी गंभीर समस्या बन गई है।

अभिभावकों ने भी कहा कि ग्रामीण क्षेत्र के बच्चों के लिए सरकारी स्कूल ही शिक्षा का प्रमुख माध्यम है। ऐसे में यदि स्कूल में पर्याप्त शिक्षक नहीं होंगे तो बच्चों की शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी प्रभावित होना स्वाभाविक है।

प्रशासन से तत्काल नियुक्ति की मांग

प्रदर्शन कर रहे विद्यार्थियों, अभिभावकों और ग्रामीणों ने शिक्षा विभाग से मांग की है कि स्कूल में खाली पदों पर जल्द से जल्द शिक्षकों की नियुक्ति की जाए। प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट किया कि जब तक पढ़ाई सुचारु करने के लिए पर्याप्त शिक्षकों की व्यवस्था नहीं होती, तब तक समस्या को लेकर उनका विरोध जारी रह सकता है।

यह मामला छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की उपलब्धता और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े करता है। प्रदेश के कई हिस्सों में शिक्षकों की कमी को लेकर विद्यार्थियों और ग्रामीणों द्वारा प्रदर्शन किए जाने की खबरें सामने आई हैं।

स्कूल परिसर में शराब पार्टी का वीडियो वायरल, 5 शिक्षकों समेत 6 कर्मचारियों को नोटिस

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 सक्ती। मालखरौदा ब्लॉक स्थित शासकीय हायर सेकेंडरी स्कूल किरारी में परिसर के भीतर शिक्षकों और कर्मचारी द्वारा कथित रूप से शराब पीने का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। मामला उजागर होते ही शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है, जिसके बाद विभाग ने त्वरित कार्रवाई करते हुए संबंधित कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है।


प्राप्त जानकारी के अनुसार, वायरल वीडियो में स्कूल परिसर के अंदर पांच शिक्षक और एक स्वीपर आपस में बैठकर शराब का सेवन करते दिखाई दे रहे हैं। वीडियो सार्वजनिक होने के बाद जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) ने मामले को गंभीरता से लेते हुए प्रारंभिक जांच शुरू करा दी है।


3 दिनों के भीतर मांगा जवाब

जिला शिक्षा अधिकारी ने वीडियो में नजर आ रहे सभी छह कर्मचारियों को नोटिस जारी कर घटना के संबंध में तीन दिनों के भीतर लिखित स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।

दोषी पाए जाने पर होगी कड़ी कार्रवाई

शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार, कर्मचारियों के जवाब और उपलब्ध साक्ष्यों (वीडियो) का परीक्षण करने के बाद आगे की अनुशासनात्मक कार्रवाई तय की जाएगी। यदि जांच में आरोप सिद्ध होते हैं, तो नियम के तहत संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ निलंबन जैसी सख्त कार्रवाई की जा सकती है।

फिलहाल विभाग द्वारा वायरल वीडियो की सत्यता और घटना से जुड़े अन्य तथ्यों की पड़ताल की जा रही है। विद्या के मंदिर में इस तरह की घटना सामने आने से क्षेत्र के ग्रामीणों और अभिभावकों में भारी नाराजगी है।

अमानवीय: निजी स्कूल की शिक्षिका ने छात्र से 100 बार लिखवाईं अश्लील गालियां

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अंबिकापुर । छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर स्थित बिरला ओपन माइंड इंटरनेशनल स्कूल से एक सनसनीखेज और अमानवीय मामला सामने आया है। आरोप है कि दो छात्रों के बीच हुए मामूली विवाद के बाद एक शिक्षिका ने अनुशासनात्मक कार्रवाई के नाम पर छात्र से उसकी कॉपी में मां से जुड़ी अश्लील गालियां करीब 100 बार लिखवाईं। घटना के बाद छात्र मानसिक रूप से बेहद आहत है, वहीं परिजनों और छात्र संगठनों में भारी रोष व्याप्त है। मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) ने जांच के आदेश दे दिए हैं।


क्या है पूरा मामला?

प्राप्त जानकारी के अनुसार, स्कूल में पढ़ाई के दौरान दो छात्रों के बीच किसी बात को लेकर विवाद हो गया था। इसके बाद संबंधित शिक्षिका ने एक छात्र को सजा देने के लिए कॉपी में कई पन्नों तक अत्यंत आपत्तिजनक और अश्लील भाषा लिखने को कहा। छात्र से मां के लिए इस्तेमाल होने वाली गालियां बार-बार लिखवाई गईं। घर पहुंचने पर जब परिजनों को इस बात की जानकारी मिली, तो वे सन्न रह गए।

परिजनों और छात्र संगठनों का विरोध

पीड़ित छात्र के परिजनों ने शिक्षिका और स्कूल प्रबंधन के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। परिजनों का कहना है कि:

"अनुशासन सिखाने के कई सकारात्मक रास्ते हो सकते हैं, लेकिन इस तरह की अश्लील भाषा लिखवाना नैतिक मूल्यों और शिक्षा के मंदिर की गरिमा के पूरी तरह खिलाफ है। इससे बच्चे के मानसिक विकास पर गहरा और नकारात्मक प्रभाव पड़ा है।"

मामला सामने आते ही स्थानीय छात्र संगठनों ने भी स्कूल के बाहर विरोध दर्ज कराया और दोषी शिक्षिका के खिलाफ सख्त कदम उठाने की मांग की।

जिला शिक्षा अधिकारी ने दिए जांच के आदेश

मामले को गंभीरता से लेते हुए सरगुजा की जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) ने तत्काल संज्ञान लिया है। विभाग के उप संचालक को पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच का जिम्मा सौंपा गया है।

शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जांच रिपोर्ट आते ही तथ्यों के आधार पर कड़े नियम-कायदों के तहत कार्रवाई की जाएगी। यदि आरोप सत्य पाए जाते हैं, तो संबंधित शिक्षिका के साथ-साथ स्कूल प्रबंधन पर भी कड़ी कार्रवाई होगी।

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