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लड़कियों और महिलाओं के लिए सुरक्षित मासिक धर्म: सरकार की व्यापक स्वच्छता और जागरूकता पहल

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केंद्रीय सरकार ने विभिन्न मंत्रालयों और विभागों की योजनाओं और पहलों के माध्यम से मासिक धर्म स्वच्छता प्रथाओं को बेहतर बनाने के लिए आवश्यक कदम उठाए हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय किशोर लड़कियों (10–19 वर्ष) में मासिक धर्म स्वच्छता (MH) को बढ़ावा देने के लिए मासिक धर्म स्वच्छता संवर्धन योजना लागू करता है। इस योजना का उद्देश्य मासिक धर्म के प्रति जागरूकता बढ़ाना, सस्ते और सुरक्षित सैनिटरी नैपकिन तक पहुंच सुनिश्चित करना और पर्यावरण के अनुकूल डिस्पोजल प्रथाओं को प्रोत्साहित करना है।

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने स्कूल जाने वाली लड़कियों के लिए MH नीति बनाई है, जो विभिन्न मंत्रालयों के साथ विस्तृत विचार-विमर्श के बाद तैयार की गई। यह नीति सस्ते MH उत्पादों, लिंग-विशिष्ट शौचालय और सुरक्षित डिस्पोजल सुविधाओं तक पहुंच को सुव्यवस्थित करती है, स्कूल पाठ्यक्रम में MH शिक्षा को शामिल करती है और सभी स्कूलों में संवेदनशीलता और जागरूकता को प्राथमिकता देती है। इसके अलावा, शिक्षक और फ्रंटलाइन वर्कर्स—सहायक नर्स मिडवाइफ (FLW-ANMs), अक्रीडिटेड सोशल हेल्थ एक्टिविस्ट (ASHA) और आंगनवाड़ी कार्यकर्ता (AWWs)—को योजना के अंतर्गत उपयुक्त प्रशिक्षण दिया जाता है, जिसके लिए राशि राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम (RKSK) के तहत प्रदान की जाती है।

इसके अतिरिक्त, ‘मिशन शक्ति’ के ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ (BBBP) घटक का उद्देश्य भी मासिक धर्म और सैनिटरी नैपकिन के उपयोग के प्रति जागरूकता पैदा करना है।

राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5 (NFHS-5) के अनुसार, 15-24 वर्ष की महिलाओं में हाइजेनिक तरीकों का उपयोग करने वाली प्रतिशत संख्या NFHS-4 में 57.6% से बढ़कर NFHS-5 में 77.3% हो गई है।

जल शक्ति मंत्रालय ने स्वच्छ भारत अभियान के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में मासिक धर्म प्रबंधन (MHM) पर जागरूकता पैदा करने के लिए राष्ट्रीय दिशानिर्देश विकसित किए हैं। स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग ‘समग्र शिक्षा’ योजना के तहत विभिन्न राज्य-विशिष्ट परियोजनाओं के माध्यम से मासिक धर्म स्वास्थ्य और स्वच्छता में सुधार के लिए पहल करता है, जिसमें सैनिटरी पैड वेंडिंग मशीनों और इनसिनरेटर की स्थापना शामिल है। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय किशोर लड़कियों की स्वास्थ्य और पोषण स्थिति सुधारने तथा उन्हें स्कूल में लौटने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए किशोरियों की योजना (SAG) लागू करता है।

शिक्षा मंत्रालय ने 07.06.2024 को सभी राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों और स्वायत्त निकायों को दिशा-निर्देश जारी किए, जबकि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने 18.03.2025 को सभी उच्च शिक्षा संस्थानों से यह सुनिश्चित करने का अनुरोध किया कि उनके संस्थानों में सैनिटरी सुविधाओं की उपलब्धता हो।

स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग (MoHFW) नए मासिक धर्म प्रबंधन तरीकों और सैनिटरी नैपकिन के वैकल्पिक सतत विकल्पों पर शोध करता है, ताकि उनकी सुरक्षा, स्वीकार्यता, किफायतीपन और प्रभावशीलता सुनिश्चित की जा सके।

साथ ही, 2015-16 से मासिक धर्म स्वच्छता योजना को राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के तहत राज्य कार्यक्रम कार्यान्वयन योजना (PIP) के माध्यम से समर्थन दिया जा रहा है। 2021-22 में लगभग 34.92 लाख किशोर लड़कियों को हर महीने सैनिटरी नैपकिन पैक प्रदान किए गए।

दूसरी ओर, रसायन और उर्वरक मंत्रालय के तहत फार्मास्यूटिकल विभाग ने प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि परियोजना (PMBJP) के तहत देशभर में 16,000 से अधिक जनऔषधि केंद्र स्थापित किए हैं, जो पर्यावरण अनुकूल ऑक्सो-बायोडिग्रेडेबल सैनिटरी नैपकिन ‘सुविधा’ प्रति पैड केवल ₹1 में प्रदान करते हैं। ये पैड ASTM D-6954 मानकों के अनुरूप बायोडिग्रेडेबल हैं। 30.11.2025 तक सुविधा नैपकिन की कुल बिक्री 96.30 करोड़ पहुंच चुकी है।

यह जानकारी राज्य मंत्री, महिला एवं बाल विकास सावित्री ठाकुर ने आज राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी।

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