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रेल यात्रियों के खाने-पानी की क्वालिटी पर रेलवे अलर्ट, खाना कैसा और पानी कितना साफ? अब हर चीज पर रहेगी नजर

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नई दिल्ली- भारतीय रेलवे से सफर करने वाले करोड़ों यात्रियों के लिए खाने-पीने की गुणवत्ता और स्वच्छता बेहद महत्वपूर्ण मुद्दा है। ट्रेन में सफर के दौरान यात्रियों को मिलने वाले भोजन की गुणवत्ता, रसोई की साफ-सफाई और पीने के पानी की सुरक्षा को लेकर रेलवे अब निगरानी व्यवस्था को और मजबूत कर रहा है। खासतौर पर IRCTC की रसोइयों में भोजन तैयार होने से लेकर उसके रखरखाव तक की प्रक्रिया पर तकनीक के जरिए नजर रखी जा रही है।

खाने की गुणवत्ता पर रेलवे की कड़ी नजर

ट्रेनों में यात्रियों को परोसे जाने वाले भोजन को लेकर समय-समय पर शिकायतें सामने आती रही हैं। कहीं खाने की गुणवत्ता खराब होने की शिकायत होती है तो कहीं भोजन में कीड़े या साफ-सफाई से जुड़ी समस्याएं सामने आती हैं। इन शिकायतों को देखते हुए रेलवे और IRCTC ने रसोई की निगरानी व्यवस्था को अधिक तकनीकी और प्रभावी बनाने पर जोर दिया है।

रिपोर्टों के मुताबिक, देशभर में यात्रियों के लिए खाना तैयार करने वाली 800 से अधिक IRCTC रसोइयों की निगरानी लगभग 2,400 AI आधारित CCTV कैमरों के माध्यम से की जा रही है। इन कैमरों की मदद से रसोई में साफ-सफाई, खाद्य सामग्री के रखरखाव और संभावित कीट-पतंगों जैसी समस्याओं पर नजर रखी जा रही है।

AI कैमरे बताएंगे रसोई में क्या चल रहा है

नई निगरानी व्यवस्था में AI तकनीक का इस्तेमाल महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यदि रसोई में चूहे, कॉकरोच, मच्छर या मक्खियों जैसी समस्या दिखाई देती है अथवा साफ-सफाई के मानकों में कमी मिलती है, तो इसकी सूचना संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाई जा सकती है।

रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर स्थित एक मास्टर कंट्रोल रूम से इन कैमरों की निगरानी की जाती है। किसी रसोई में समस्या सामने आने पर संबंधित किचन मैनेजर को उसे ठीक करने के निर्देश दिए जाते हैं। लगातार लापरवाही होने पर कार्रवाई की व्यवस्था भी बताई गई है। 

रोटी और पराठे की गुणवत्ता भी होगी मॉनिटर

हाल ही में रेलवे की ओर से रोटी और पराठे की गुणवत्ता पर भी विशेष ध्यान देने की बात सामने आई है। इनके निर्माण की पूरी प्रक्रिया की समीक्षा करने और गुणवत्ता में एकरूपता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

इसके साथ ही कच्चे माल के स्टोरेज एरिया में अतिरिक्त कैमरे लगाने तथा PTZ कैमरे के जरिए निगरानी बढ़ाने की योजना बताई गई है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि भोजन तैयार करने से पहले इस्तेमाल होने वाली सामग्री भी उचित परिस्थितियों में रखी जाए।

अब सवाल—रेलवे स्टेशन का पानी कितना साफ है?

खाने के साथ-साथ रेलवे स्टेशनों पर उपलब्ध पेयजल की गुणवत्ता भी यात्रियों के लिए बड़ा मुद्दा है। हालिया रिपोर्टों में CAG द्वारा किए गए निरीक्षण के बाद रेलवे स्टेशनों की पानी व्यवस्था को लेकर कई कमियां सामने आने की बात कही गई है।

रिपोर्ट के अनुसार, 512 गैर-उपनगरीय रेलवे स्टेशनों का निरीक्षण किया गया था। कुछ स्थानों से लिए गए पानी के नमूनों में E. coli और coliform bacteria पाए जाने की जानकारी सामने आई। इसके बाद पानी की नियमित जांच, टैंकों की सफाई और पानी की सप्लाई व्यवस्था को बेहतर बनाने पर जोर दिया गया है।

करीब 20 हजार स्थानों पर पानी की व्यवस्था मजबूत करने के निर्देश

रिपोर्ट के मुताबिक, रेलवे ने टैंक से नल तक पानी की सप्लाई व्यवस्था को मजबूत करने के लिए लगभग 20 हजार स्थानों पर सुधार के निर्देश दिए हैं। इसका उद्देश्य यात्रियों को सुरक्षित और स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना है।

निरीक्षण में केवल पानी की गुणवत्ता ही नहीं, बल्कि यात्रियों के लिए उपलब्ध नलों और अन्य सुविधाओं से जुड़ी कमियां भी सामने आईं। ऐसे में रेलवे की ओर से पानी की व्यवस्था की नियमित निगरानी और रखरखाव पर अधिक जोर दिया जा रहा है।

ट्रेन में पानी खरीदते समय यात्री भी रहें सावधान

रेलवे ने यात्रियों को ट्रेन या स्टेशन पर पानी खरीदते समय भी सावधानी बरतने की सलाह दी है। अनधिकृत विक्रेताओं से पानी खरीदने के बजाय यात्रियों को अधिकृत स्टॉल और अधिकृत ब्रांड से ही पैकेज्ड ड्रिंकिंग वॉटर लेने की सलाह दी जाती है।

पानी की बोतल खरीदते समय यात्रियों को सील, ब्रांड और MRP जरूर देखनी चाहिए। यदि कोई विक्रेता अधिक कीमत वसूलता है या बिना अनुमति वाला ब्रांड बेचता है, तो इसकी शिकायत रेलवे हेल्पलाइन 139 पर की जा सकती है।

खाने-पानी में गड़बड़ी मिले तो क्या करें?

अगर ट्रेन में भोजन खराब हो, भोजन में कोई बाहरी वस्तु या कीड़ा मिले, खाना बासी लगे या पानी की गुणवत्ता को लेकर संदेह हो, तो यात्री चुप रहने के बजाय शिकायत दर्ज करा सकते हैं।

यात्री अपनी शिकायत के लिए:

  • रेलवे हेल्पलाइन 139 का इस्तेमाल कर सकते हैं।

  • RailMadad के माध्यम से शिकायत दर्ज कर सकते हैं।

  • स्टेशन पर होने की स्थिति में स्टेशन मास्टर या संबंधित रेलवे अधिकारी को सूचना दे सकते हैं।

  • शिकायत करते समय ट्रेन नंबर, PNR, कोच और सीट की जानकारी देना उपयोगी रहेगा।

  • भोजन या पानी में समस्या होने पर संभव हो तो फोटो/वीडियो भी सुरक्षित रखें।

क्यों महत्वपूर्ण है यह कदम?

भारतीय रेलवे में रोजाना बड़ी संख्या में लोग यात्रा करते हैं। लंबी दूरी की यात्रा में यात्रियों के लिए भोजन और पीने का पानी बुनियादी जरूरत है। ऐसे में केवल भोजन उपलब्ध कराना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसकी गुणवत्ता, स्वच्छता, सुरक्षित भंडारण और सही तरीके से परोसे जाने की निगरानी भी जरूरी है।

AI आधारित कैमरों और केंद्रीय निगरानी व्यवस्था का इस्तेमाल इस दिशा में रेलवे की निगरानी क्षमता को बढ़ा सकता है। दूसरी ओर, पानी की नियमित जांच और सप्लाई सिस्टम में सुधार से यात्रियों को सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है।

यात्रियों के लिए सीधा संदेश

रेलवे की निगरानी व्यवस्था मजबूत हो रही है, लेकिन यात्रियों की सतर्कता भी उतनी ही जरूरी है। ट्रेन या स्टेशन पर अनधिकृत वेंडर से खाना-पानी न खरीदें, पैकेज्ड पानी की सील और MRP जांचें और भोजन की गुणवत्ता खराब लगे तो तुरंत शिकायत करें।

यानी अब रेलवे का फोकस सिर्फ ट्रेन चलाने तक सीमित नहीं, बल्कि यात्रियों को साफ, सुरक्षित और बेहतर गुणवत्ता वाला खाना-पानी उपलब्ध कराने पर भी लगातार बढ़ रहा है।

जल जीवन मिशन 2.0 पर छत्तीसगढ़ के सांसदों के साथ मंथन

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छत्तीसगढ़ सदन में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री की अध्यक्षता में समीक्षा बैठक का आयोजन

रायपुर- नई दिल्ली स्थित छत्तीसगढ़ सदन में सोमवार शाम जल जीवन मिशन (जे.जे.एम.) 2.0 के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल ने की। इस दौरान छत्तीसगढ़ के लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री अरुण साव सहित राज्य के लोकसभा एवं राज्यसभा सांसद उपस्थित रहे। बैठक में सांसदों के संसदीय क्षेत्रों में जल जीवन मिशन की प्रगति, योजनाओं की वर्तमान स्थिति तथा आगामी कार्ययोजना पर विस्तृत चर्चा की गई।

बैठक में छत्तीसगढ़ के लोकसभा सांसद व केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू, चिंतामणि महाराज, राधेश्याम राठिया, कमलेश जांगड़े, ज्योत्सना महंत, संतोष पांडेय, विजय बघेल, बृजमोहन अग्रवाल,  रूपकुमारी चौधरी, महेश कश्यप और भोजराज नाग तथा राज्यसभा सांसद राजा देवेंद्र प्रताप सिंह, लक्ष्मी वर्मा और फूलो देवी नेताम उपस्थित रहे।

बैठक में जल जीवन मिशन 2.0 के अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्रों में हर घर तक सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने, परियोजनाओं में तेजी लाने, गुणवत्ता सुनिश्चित करने तथा जनप्रतिनिधियों के सुझावों के आधार पर योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर विचार-विमर्श किया गया। सांसदों ने अपने-अपने संसदीय क्षेत्रों से जुड़े सुझाव और आवश्यकताएं भी साझा की।

बैठक में मिशन के कार्यों की नियमित मॉनिटरिंग, समयबद्ध क्रियान्वयन तथा केंद्र और राज्य सरकार के समन्वय से योजनाओं को गति देने पर विशेष जोर दिया गया। अधिकारियों ने जल जीवन मिशन 2.0 की प्रमुख विशेषताओं और क्रियान्वयन रणनीति की भी जानकारी प्रस्तुत की।

बैठक में सांसदों की भूमिका पर भी विस्तार से चर्चा की गई। जनप्रतिनिधियों से आग्रह किया गया कि वे जिला स्तरीय की बैठकों में सक्रिय भागीदारी निभाते हुए योजनाओं के क्रियान्वयन में आने वाली बाधाओं के समाधान में सहयोग करें। साथ ही, श्जल अर्पणश् कार्यक्रमों में सहभागिता कर पूर्ण हो चुकी पेयजल योजनाओं के लोकार्पण तथा ग्राम पंचायतों को उनके हस्तांतरण को प्रोत्साहित करें। जल जीवन मिशन के लक्ष्यों को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के लिए राज्य एवं जिला प्रशासन के साथ समन्वय स्थापित कर योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में सहयोग देने का भी आह्वान किया गया।

बैठक में केंद्रीय जलशक्ति मंत्रालय के अधिकारियों सहित छत्तीसगढ़ के लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के सचिव मोहम्मद कैसर अब्दुल हक़ भी उपस्थित रहे।


प्रत्येक परिवार तक सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण पेयजल पहुंचाना लक्ष्य-मुख्य सचिव विकासशील

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मुख्य सचिव विकासशील की अध्यक्षता में हर घर नल-जल जीवन मिशन की प्रगति पर कलेक्टर कॉन्फ्रेंस सम्पन्न

रायपुर- मुख्य सचिव विकासशील की अध्यक्षता में आज यहां मंत्रालय महानदी भवन में राज्य के सभी जिलों के कलेक्टरों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से हर घर नल (जल जीवन मिशन) की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की गई। मुख्य सचिव ने कहा कि जल जीवन मिशन वर्ष 2019 में भारत सरकार द्वारा सभी क्षेत्रों के प्रत्येक घर तक नल के माध्यम से स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से प्रारंभ किया गया था। उन्होंने कहा कि राज्य का लक्ष्य प्रत्येक परिवार तक सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण पेयजल पहुंचाना है। उन्होंने बताया कि इस योजना से महिलाओं का समय बचेगा और जलजनित बीमारियों में कमी आएगी तथा ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन को भी बढ़ावा मिलेगा।


पूर्ण योजनाओं को 31 अगस्त तक भौतिक सत्यापन करें

मुख्य सचिव ने सभी कलेक्टरों को निर्देश दिए कि प्रत्येक जिले में मिशन मोड में कार्य करते हुए स्पष्ट कार्ययोजना तैयार की जाए। उन्होंने कहा कि ग्राम पंचायतों की सक्रिय भागीदारी से योजना का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए। मुख्य सचिव ने कलेक्टरों से कहा कि वे प्रत्येक माह जल जीवन मिशन की प्रगति की समीक्षा करें। बैठक में मुख्य सचिव ने पूर्ण हो चुकी और हस्तांतरित योजनाओं के भुगतान की समीक्षा करते हुए निर्देश दिए कि जिन योजनाओं का कार्य पूर्ण हो चुका है, उनका 31 अगस्त तक भौतिक सत्यापन कर भुगतान सुनिश्चित किया जाए। जिन योजनाओं का कार्य अधूरा है, उन्हें 31 दिसंबर तक हर हाल में पूर्ण कर लिया जाए। उन्होंने कहा कि सभी योजनाओं का शत-प्रतिशत भौतिक सत्यापन किया जाए। उन्होंने कहा कि कार्य में लापरवाही बरतने वाले ठेकेदारों के विरुद्ध कार्रवाई की जाए।

जलस्रोत संरक्षण एवं रिचार्ज व्यवस्था विकसित करने कार्ययोजना तैयार करें 

मुख्य सचिव ने कहा कि जिला कलेक्टर समयबद्ध तरीके से रनिंग बिलों के भुगतान की प्रक्रिया सुनिश्चित करें, जिससे निर्माण कार्य बाधित नही हो। मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि वीबी-जी राम जी एवं स्थानीय संसाधनों, जिला खनिज न्यास (डीएमएफ), सांसद निधि, विधायक निधि, सीएसआर एवं अन्य उपलब्ध स्रोतों से आवश्यक वित्तीय व्यवस्था कर योजनाओं को पूर्ण किया जाए। उन्होंने प्रत्येक जिले को जलस्रोतों का आकलन कर नए स्रोतों की पहचान करने, जलस्रोत संरक्षण एवं रिचार्ज व्यवस्था विकसित करने तथा प्रत्येक स्रोत के संरक्षण की कार्ययोजना तैयार करने के भी निर्देश दिए है। उन्होंने कहा कि जिन योजनाओं में वर्तमान स्रोत से पेयजल उपलब्ध कराना संभव नहीं है, उनके लिए वैकल्पिक स्रोतों की पहचान कर शीघ्र कार्रवाई की जाए। ग्रामीण क्षेत्रों को स्वच्छ पेयजल से वंचित नहीं रखा जा सकता। बैठक में सोलर आधारित नल जल योजनाओं की प्रगति की भी समीक्षा की गई। मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि योजना-वार विश्लेषण कर स्वीकृत राशि एवं व्यय का समुचित मिलान किया जाए।

जल जीवन मिशन की नियमित मॉनिटरिंग करें

मुख्य सचिव विकासशील ने प्रत्येक जिले को हर घर जल के लिए नया लक्ष्य निर्धारित करने एवं गांवों को इकाई मानकर शत-प्रतिशत नल जल कवरेज सुनिश्चित करने तथा जिला जल एवं स्वच्छता समिति की नियमित मासिक बैठक आयोजित करने के निर्देश दिए है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक बैठक की कार्यवाही का समय पर विभागीय पोर्टल पर अपलोड की जाए तथा जल जीवन मिशन की नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित होना चाहिए। उन्होंने कहा कि सभी कलेक्टर स्पष्ट आकलन, बेहतर योजना और प्रभावी समन्वय के साथ मिशन मोड में कार्य करें, ताकि राज्य के प्रत्येक परिवार को समयबद्ध रूप से हर घर नल से जल उपलब्ध कराया जा सके। वीडियो कॉन्फ्रेंस से आयोजित इस बैठक में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के सचिव मोहम्मद कैसर अब्दुल हक, सभी जिलों के कलेक्टर एवं विभागीय अधिकारी शामिल हुए।

विशेष लेख -सहूलियत, सम्मान और सेहत...हर घर नल से बदली जिंदगी

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रोज सुबह उठते ही घर में नल से साफ पानी आते देखने की खुशी क्या होती है, इसे कमली से पूछिए। उप मुख्यमंत्री अरुण साव को अपने आंगन में लगे नल से आ रहे पानी की धार को दिखाते खुशी से उनकी आंखें डबडबा गईं। जल जीवन मिशन ने कमली जैसी हजारों महिलाओं को अमूल्य खुशियां दी हैं। कभी पीने और निस्तारी के पानी के लिए दिनभर चिंतित रहने वाली इन महिलाओं का जीवन घर में लगे नल ने बदल दिया है।

उप मुख्यमंत्री तथा लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री अरुण साव अपने चार दिनों के बस्तर प्रवास के दौरान जल जीवन मिशन का काम देखने कमली के भी गांव पहुंचे। कमली के गांव बस्तर जिले के तोकापाल विकासखण्ड के दुगनपाल में उन्होंने कुछ और घरों में भी जाकर नल से पानी आते देखा। जल जीवन मिशन से घर में पानी पहुंचने की खुशी सभी महिलाओं के चेहरे पर दिख रही थी।

जल जीवन मिशन दूरस्थ गांवों और वनांचलों की महिलाओं के जीवन में बड़ा बदलाव ला रहा है। आधी आबादी के एक बड़े हिस्से को पीने के पानी के लिए रोज जूझना पड़ता था। खासतौर से गर्मियों के दिनों में जब हर साल सिर पर पानी के बर्तन का सफर कुछ सौ मीटरों से कुछ किलोमीटरों में बदल जाता था। 

जीवन के लिए अनिवार्य जरुरत पानी की व्यवस्था गर्मियों में महिलाओं का जीवन दुष्कर बना देती थी। दुगनपाल में भी महिलाओं को रोज गांव के हैंडपंप या कुआं पर जाकर घर के सभी लोगों के लिए पानी का इंतजाम करना पड़ता था। घर में नल लग जाने से अब इस समस्या से निजात मिल गई है। जल जीवन मिशन के काम जैसे-जैसे पूरे होते जा रहे हैं, महिलाओं की बाहर से पानी लाने की चिंता और तकलीफ दूर होते जा रहे हैं। छत्तीसगढ़ में अब तक साढ़े आठ हजार से अधिक योजनाओं को पूर्ण कर संचालन के लिए पंचायतों को सौंपा जा चुका है।

जल जीवन मिशन महज हर घर तक पेयजल पहुंचाने की योजना नहीं है। यह महिलाओं की दिनचर्या और जीवन में भी बड़ा बदलाव ला रहा है। गांवों में परंपरागत रूप से घर में पेयजल और अन्य जरूरतों के लिए पानी के इंतजाम का जिम्मा महिलाओं पर ही है। घर तक पानी की पहुंच न होने के कारण उन्हें हैंडपंपो, सार्वजनिक नलों, कुंओं या अन्य स्रोतों से रोज पूरे परिवार के लिए जल संग्रहण करना पड़ता है। 

रोजाना का यह श्रमसाध्य और समयसाध्य काम बारिश तथा भीषण गर्मी के दिनों में और कठिन हो जाता है। कई इलाकों में गर्मियों में जलस्रोतों के सूख जाने के कारण दूर-दूर से पानी लाने की मजबूरी रहती है। परिवार के लिए पानी की व्यवस्था हर दिन का संघर्ष बन जाता है। महिलाओं के दिन के कई घंटे इसी काम में निकल जाते हैं।

जल जीवन मिशन हर घर तक नल से जल पहुंचाने के साथ ही महिलाओं को कई समस्याओं से निजात दिला रहा है। घर तक स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल पहुंचने से वे कई चिंताओं से मुक्त हो गई हैं। अब रोज-रोज पानी के लिए बहुत सारा श्रम और समय नहीं लगाना पड़ता। इससे उन्हें घर के दूसरे कामों, बच्चों की परवरिश, खेती-बाड़ी एवं आजीविका के अन्य कार्यों के लिए अधिक समय मिल रहा है और वे इन कार्यों पर अपना ज्यादा ध्यान व समय दे पा रही हैं।

जल जीवन मिशन से बारहों महीने घर पर ही जलापूर्ति से लगातार बारिश तथा गर्मी के दिनों में बाहर से पानी लाने की मुसीबत दूर हो गई है। गर्मियों में जलस्तर के नीचे चले जाने से तथा बरसात में लगातार बारिश से जल की गुणवत्ता प्रभावित होती है। गुणवत्ताहीन पेयजल से पेट तथा निस्तारी के लिए खराब जल के उपयोग से त्वचा संबंधी रोगों का खतरा रहता है। जल जीवन मिशन ने सेहत के इन खतरों को भी दूर कर दिया है।

जल जीवन मिशन (JJM) – हर घर जल: ग्रामीण परिवारों के लिए नल कनेक्शन की उपलब्धता और निगरानी

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परिचय

अगस्त 2019 से, भारत सरकार जल जीवन मिशन (JJM) – हर घर जल को राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के साथ साझेदारी में लागू कर रही है, जिसका उद्देश्य देश के प्रत्येक ग्रामीण परिवार तक नल कनेक्शन द्वारा पीने के पानी की सुविधा पहुँचाना है। “पीने का पानी” एक राज्य विषय है, इसलिए योजना, अनुमोदन, क्रियान्वयन, संचालन और रख-रखाव की जिम्मेदारी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों की होती है। भारत सरकार तकनीकी और वित्तीय सहायता प्रदान करके राज्यों का समर्थन करती है।

योजना का संचालन और मार्गदर्शन

राज्यों को JJM के प्रभावी योजना और क्रियान्वयन में मदद करने के लिए विस्तृत ऑपरेशनल गाइडलाइन साझा की गई हैं, जो योजना, निष्पादन, गुणवत्ता आश्वासन, निगरानी और बनाए रखी जाने वाली बुनियादी संरचना के सभी पहलुओं को कवर करती हैं।

भारत सरकार समय-समय पर समीक्षा बैठकों और बहु-आयामी टीमों के दौरे के माध्यम से राज्यों के साथ मिशन के क्रियान्वयन की समीक्षा करती है और सुधार के क्षेत्रों को उजागर करती है।

प्रौद्योगिकी का उपयोग

  • JJM में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए तकनीक का उपयोग किया जाता है।

  • भौतिक और वित्तीय प्रगति JJM–IMIS (Integrated Management Information System) पर रिपोर्ट की जाती है।

  • सभी नल कनेक्शन परिवार के मुखिया के आधार कार्ड से लिंक किए जाते हैं।

  • निर्माण कार्य के तहत बनाए गए संपत्तियों की जियो-टैगिंग की व्यवस्था की गई है।

गुणवत्ता नियंत्रण और तृतीय पक्ष निरीक्षण

  • भुगतान से पहले तीसरे पक्ष के निरीक्षण और प्रमाणन को अनिवार्य किया गया है।

  • राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को तीसरे पक्ष निरीक्षण एजेंसियों (TPIAs) को सूचीबद्ध करने का अधिकार है, जो कार्य की गुणवत्ता, निर्माण सामग्री और मशीनरी की गुणवत्ता की जांच करें।

निगरानी और सुधारात्मक कदम

  • अप्रैल 2025 से, राज्यों द्वारा हर महीने चार योजनाओं का यादृच्छिक निरीक्षण किया जा रहा है।

  • राष्ट्रीय WASH विशेषज्ञों (NWEs) के लिए निगरानी ढांचे को मजबूत किया गया है, जिसमें गुणवत्ता के मानक और TPI के ToR को संशोधित किया गया है।

  • IMIS के माध्यम से IT निगरानी का विस्तार किया गया है, जिससे जिला और ग्राम पंचायत स्तर के अधिकारियों को भी निगरानी की सुविधा मिली है।

  • राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को JJM में रिपोर्ट की गई अनियमितताओं (गुणवत्ता या वित्तीय) के प्रति नियमित रूप से सचेत किया जाता है और शून्य सहिष्णुता अपनाने के लिए निर्देशित किया गया है।

  • 32 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा रिपोर्ट किए गए अनुसार, कुल 17,036 शिकायतें मिलीं, जिनमें वित्तीय अनियमितताएँ और कार्य की खराब गुणवत्ता शामिल हैं।

  • राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा कुल 621 विभागीय अधिकारियों, 969 ठेकेदारों और 153 TPIAs के खिलाफ कार्रवाई की गई।

स्रोत: यह जानकारी जल शक्ति राज्य मंत्री वी. सोमन्ना ने आज राज्य सभा में लिखित उत्तर में दी।

जल जीवन मिशन: ग्रामीण भारत में हर घर जल सुनिश्चित करने की क्रांति

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भारत ने जल जीवन मिशन (Har Ghar Jal) के तहत ग्रामीण जल सुरक्षा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर हासिल किया है। 22 अक्टूबर 2025 तक, 15.72 करोड़ से अधिक ग्रामीण घरों में नल के माध्यम से सुरक्षित पेयजल पहुँचाया जा रहा है, जो ग्रामीण भारत में सार्वभौमिक जल सुरक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

मिशन की शुरुआत और दृष्टिकोण

प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त 2019 को मिशन की शुरुआत की, उस समय केवल 3.23 करोड़ (16.71%) घरों में नल का जल उपलब्ध था। मिशन के तहत अब 12.48 करोड़ अतिरिक्त घरों को जोड़ा जा चुका है, जिससे यह ग्रामीण भारत में सबसे तेजी से बढ़ती आधारभूत संरचना परियोजनाओं में से एक बन गया है।

जल जीवन मिशन का उद्देश्य माताओं और बहनों को पीने के जल के लिए दूर तक चलने के बोझ से मुक्त करना, उनके स्वास्थ्य, शिक्षा और सामाजिक-आर्थिक स्थिति में सुधार लाना, और ग्रामीण परिवारों के जीवन में सम्मान और गरिमा जोड़ना है।

मिशन के मुख्य उद्देश्य

  1. हर ग्रामीण घर में Functional Household Tap Connection (FHTC) सुनिश्चित करना।

  2. स्रोत स्थिरता: जल स्रोतों का संरक्षण और पुनर्भरण।

  3. समुदाय आधारित भागीदारी और जागरूकता अभियान।

  4. स्वास्थ्य और जीवन स्तर सुधार: जलजनित रोगों में कमी।

  5. सतत विकास: ग्रे वाटर प्रबंधन, वर्षा जल संचयन।

प्रगति (22 अक्टूबर 2025 तक)

  • 192 जिले: सभी घरों, स्कूलों और आंगनवाड़ी केंद्रों तक नल का जल।

  • ब्लॉक्स: 1,912 ने पूर्ण कवरेज रिपोर्ट की, 1,019 प्रमाणित।

  • ग्राम पंचायतें: 1,25,185 ने रिपोर्ट की, 88,875 प्रमाणित।

  • गांव: 2,66,273 रिपोर्ट किए, 1,74,348 प्रमाणित।

  • 100% कवरेज वाले राज्य/संघ राज्य क्षेत्र: 11, जिनमें गोवा, अंडमान और निकोबार, दादरा & नगर हवेली & दमण & दीव, हरियाणा, तेलंगाना, पुडुचेरी, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, मिजोरम और अरुणाचल प्रदेश शामिल हैं।

  • संस्थागत कवरेज: 9,23,297 स्कूल और 9,66,876 आंगनवाड़ी केंद्रों में नल का जल।

गुणवत्ता आश्वासन और निगरानी

  • 2,843 जल परीक्षण प्रयोगशालाएं ने 38.78 लाख जल नमूनों की जांच की।

  • 24.80 लाख महिलाओं ने फील्ड टेस्टिंग किट्स (FTKs) के उपयोग में प्रशिक्षण प्राप्त किया।

  • यह समुदाय-संचालित दृष्टिकोण जल प्रदूषण का शीघ्र पता लगाने और स्थानीय स्वामित्व को मजबूत करता है।

मिशन के प्रमुख घटक

  1. ग्राम में पाइप्ड जल आपूर्ति – हर घर में नल का जल।

  2. सतत जल स्रोत – विश्वसनीय और दीर्घकालिक आपूर्ति।

  3. थोक जल स्थानांतरण और वितरण – ट्रिटमेंट प्लांट और वितरण नेटवर्क।

  4. तकनीकी हस्तक्षेप – जल गुणवत्ता सुधार।

  5. पिछले योजनाओं का उन्नयन – न्यूनतम सेवा स्तर 55 LPCD।

  6. ग्रे वाटर प्रबंधन – जल संरक्षण।

  7. समुदाय क्षमता निर्माण – सतत जल प्रबंधन में सामुदायिक क्षमता बढ़ाना।

  8. आपातकालीन निधि – प्राकृतिक आपदाओं या संकटों के लिए।

डिजिटल नवाचार

  • RPWSS मॉड्यूल: प्रत्येक योजना को डिजिटल ID देकर पारदर्शिता, ट्रेसबिलिटी और डेटा-आधारित निगरानी।

  • GIS और PM Gati Shakti के साथ एकीकृत, रियल-टाइम डैशबोर्ड और प्रेडिक्टिव एनालिटिक्स।

  • पंचायतों और जल समिति को सशक्त करना, स्थानीय कौशल विकास।

मिशन के प्रभाव

  • समय बचत: प्रत्येक दिन 5.5 करोड़ घंटे, मुख्यतः महिलाओं के लिए।

  • स्वास्थ्य लाभ: लगभग 4 लाख दस्त रोगों से होने वाली मौतों की रोकथाम, 14 मिलियन DALYs बचाई गई।

  • महिला सशक्तिकरण: 9 करोड़ महिलाएं अब पानी लेने नहीं जातीं।

  • नौकरी सृजन: लगभग 3 करोड़ व्यक्ति-वर्ष रोजगार के अवसर।

सामुदायिक और प्रौद्योगिकी-संचालित सफलता की कहानियाँ

  • महाराष्ट्र: Mhapan गांव में महिला स्वयं सहायता समूह ने 100% बिल संग्रह किया और स्व-सहायता मॉडल स्थापित किया।

  • नागालैंड: Wokha में जल स्रोत संरक्षण और वर्षा जल पुनर्भरण, युवा और महिलाओं के नेतृत्व में।

  • असम: Borbori में जलजनित रोग शून्य, सामुदायिक योगदान से सतत संचालन।

  • राजस्थान: Bothara में जल सुरक्षा योजना, चेक डैम और कंटूर ट्रेंच से जल स्तर 70 फीट बढ़ा।

  • पश्चिम बंगाल: ‘Jal Mitra’ ऐप ने निगरानी और पारदर्शिता सुनिश्चित की, 13.70 करोड़ सामुदायिक गतिविधियों को ट्रैक किया।

निष्कर्ष

जल जीवन मिशन ग्रामीण भारत में सुरक्षित नल जल, स्वास्थ्य, रोजगार और गरिमा सुनिश्चित कर रहा है। छह वर्षों में, यह हर घर जल के विजन को वास्तविकता में बदल रहा है। समुदाय-आधारित सहभागिता और डिजिटल नवाचार के माध्यम से यह मिशन सतत, समान और लोगों-केंद्रित विकास का आदर्श प्रस्तुत करता है।


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