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भविष्य के युद्ध की तैयारी: मुख्यालय एकीकृत रक्षा स्टाफ करेगा ‘ब्रेनस्टॉर्मिंग सेशन 2.0’ का आयोजन

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मुख्यालय एकीकृत रक्षा स्टाफ (HQ IDS) द्वारा भारतीय रक्षा निर्माता सोसायटी (SIDM) के सहयोग से “ब्रेनस्टॉर्मिंग सेशन 2.0” का आयोजन 14 नवंबर 2025 को मानेकशॉ सेंटर, नई दिल्ली में किया जाएगा। इस कार्यक्रम का मुख्य विषय होगा — ‘भविष्य के युद्ध के लिए रक्षा उद्योग पारिस्थितिकी तंत्र का उपयोग’ (Leveraging Defence Industry Ecosystem for Future Warfare)।

कार्यक्रम को जनरल अनिल चौहान, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ, रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह, और रक्षा उत्पादन सचिव संजीव कुमार संबोधित करेंगे। यह एक दिवसीय सत्र रक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों की अध्यक्षता में आयोजित कई उच्च-स्तरीय चर्चाओं से युक्त होगा, जिसमें मुख्यालय IDS, तीनों सेनाओं के मुख्यालय, रक्षा उत्पादन विभाग, DRDO, शैक्षणिक संस्थान और रक्षा निर्माण उद्योगों के वरिष्ठ अधिकारी भाग लेंगे।

चर्चा का केंद्र भविष्य के युद्ध से संबंधित महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर रहेगा — जैसे गोला-बारूद एवं विस्फोटक, स्वायत्त प्रणालियाँ (Autonomous Systems) और भविष्य की प्रौद्योगिकियों में अनुसंधान एवं विकास (R&D)।

यह कार्यक्रम राष्ट्रीय सुरक्षा और रक्षा क्षेत्र के प्रमुख हितधारकों को एक मंच पर लाकर प्राथमिक चुनौतियों की पहचान, विकास के अवसरों की खोज, और व्यावहारिक कार्य योजनाओं के निर्माण को प्रोत्साहित करेगा।

इस सत्र से प्राप्त निष्कर्ष आत्मनिर्भरता (Aatmanirbharta) को आगे बढ़ाने, भविष्य के युद्ध क्षेत्रों में भारत की नेतृत्व क्षमता को सशक्त करने, और रक्षा क्षेत्र की परिचालन तत्परता एवं औद्योगिक क्षमताओं को और मजबूत करने में सहायक होंगे।

राजनाथ सिंह ने SIDM वार्षिक सत्र में कहा — ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में मेड-इन-इंडिया उपकरणों के प्रभावी उपयोग ने बढ़ाई भारत की वैश्विक प्रतिष्ठा, निजी क्षेत्र को नवाचार और आत्मनिर्भरता पर दिया जोर

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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा — “ऑपरेशन सिंदूर में भारतीय सशस्त्र बलों द्वारा मेड-इन-इंडिया उपकरणों के प्रभावी उपयोग ने भारत की क्षेत्रीय और वैश्विक प्रतिष्ठा को मजबूत किया”

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय सशस्त्र बलों द्वारा ‘मेड-इन-इंडिया’ उपकरणों के प्रभावी उपयोग ने भारत की प्रतिष्ठा को क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और अधिक सुदृढ़ किया है। उन्होंने घरेलू उद्योग, विशेष रूप से निजी क्षेत्र से, आत्मनिर्भरता की दिशा में नवाचार, अनुसंधान एवं विकास (R&D), तकनीक आधारित विनिर्माण, उप-प्रणालियों और घटकों के उत्पादन तथा आपूर्ति व रखरखाव श्रृंखलाओं में प्रभुत्व स्थापित करने पर ध्यान केंद्रित करने का आग्रह किया।

वे 27 अक्टूबर 2025 को नई दिल्ली में आयोजित सोसाइटी ऑफ इंडियन डिफेंस मैन्युफैक्चरर्स (SIDM) के वार्षिक सत्र को संबोधित कर रहे थे, जिसका विषय था — “Defence Self-Reliance: Strengthening National Security through Indigenous Industry”।

रक्षा मंत्री ने कहा कि दुनिया ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान आकाश मिसाइल सिस्टम, ब्रह्मोस, आकाशतीर एयर डिफेंस कंट्रोल सिस्टम और अन्य स्वदेशी प्लेटफॉर्म की ताकत देखी। उन्होंने कहा कि इस अभियान की सफलता का श्रेय भारतीय सशस्त्र बलों के साथ-साथ उन “उद्योग योद्धाओं” को भी जाता है, जिन्होंने नवाचार, डिजाइन और विनिर्माण के मोर्चे पर काम किया।

उन्होंने कहा, “हालांकि हमने दृढ़ संकल्प के साथ दृढ़ जवाब दिया है और हमारी सेनाएँ देश की सीमाओं की रक्षा के लिए पूरी तरह तैयार हैं, फिर भी हमें आत्ममंथन करना होगा। ऑपरेशन सिंदूर हमारे लिए एक केस स्टडी होना चाहिए, जिससे हम भविष्य की दिशा तय करें। यह घटना हमें एक बार फिर याद दिलाती है कि सीमाओं पर कभी भी, कहीं भी, कुछ भी हो सकता है — हमें हर स्थिति के लिए तैयार रहना चाहिए और यह तैयारी हमारे अपने संसाधनों पर आधारित होनी चाहिए।”

राजनाथ सिंह ने कहा कि आज के वैश्विक अनिश्चितताओं के दौर में ‘स्वदेशीकरण’ ही रक्षा क्षेत्र में उभरती चुनौतियों का एकमात्र समाधान है। उन्होंने कहा कि “स्थापित विश्व व्यवस्था कमजोर हो रही है और कई क्षेत्रों में संघर्ष बढ़ रहे हैं। ऐसे में भारत को अपनी सुरक्षा और रणनीति को पुनर्परिभाषित करना आवश्यक है।”

उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने रक्षा निर्माण को बढ़ावा देने और घरेलू पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने के लिए समान अवसरों वाला माहौल बनाया है। “हम यह सुनिश्चित करने का प्रयास कर रहे हैं कि भारत में केवल असेंबली न हो, बल्कि वास्तविक विनिर्माण आधार तैयार किया जाए — जो ‘Made in India, Made for the World’ की भावना को साकार करे,” उन्होंने कहा।

रक्षा मंत्री ने बताया कि 2014 से पहले भारत अपनी सुरक्षा जरूरतों के लिए पूरी तरह आयात पर निर्भर था, लेकिन आज वह स्वयं रक्षा उपकरणों का निर्माण कर रहा है।
उन्होंने बताया — “2014 में रक्षा उत्पादन ₹46,000 करोड़ के आसपास था, जो अब बढ़कर ₹1.51 लाख करोड़ हो गया है, जिसमें ₹33,000 करोड़ निजी क्षेत्र का योगदान है। रक्षा निर्यात जो 10 वर्ष पहले ₹1,000 करोड़ से भी कम था, अब लगभग ₹24,000 करोड़ तक पहुँच गया है और मार्च 2026 तक ₹30,000 करोड़ तक पहुँचने का लक्ष्य है।”

उन्होंने कहा कि सरकार ने हाल ही में डिफेंस प्रोक्योरमेंट मैनुअल 2025 लॉन्च किया है और डिफेंस एक्विजिशन प्रोसीजर 2020 में संशोधन पर काम चल रहा है। उन्होंने निजी क्षेत्र से आग्रह किया कि वे रक्षा निर्माण में अपने योगदान को वर्तमान 25% से बढ़ाकर अगले तीन वर्षों में कम से कम 50% तक करें।

रक्षा मंत्री ने कहा कि उद्योग को घरेलू स्तर पर उप-प्रणालियों और घटकों के निर्माण पर ध्यान देना चाहिए, ताकि विदेशी उपकरणों पर निर्भरता कम हो सके। उन्होंने कहा — “जब हम विदेशी प्लेटफॉर्म खरीदते हैं, तो उनके रखरखाव और पुर्जों की आपूर्ति पर भारी खर्च होता है। यदि हम इनके घटकों का निर्माण देश में ही करें, तो हमारी आत्मनिर्भरता बढ़ेगी।”

उन्होंने यह भी कहा कि “हमारा उद्देश्य सिर्फ भारत में असेंबली करना नहीं, बल्कि प्रौद्योगिकी आधारित विनिर्माण विकसित करना होना चाहिए।”

रक्षा मंत्री ने नवाचार और अनुसंधान पर जोर देते हुए कहा — “कोई भी देश नवाचार के बिना आगे नहीं बढ़ सकता। SIDM के दस वर्ष पूरे होने पर, उद्योग को चुनौती लेनी चाहिए कि वह बड़े पैमाने पर तकनीकी उत्पाद विकसित करे और सरकार को प्रस्तुत करे। सरकार निजी क्षेत्र के साथ मिलकर काम करने के लिए प्रतिबद्ध है।”

इस अवसर पर रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह, SIDM अध्यक्ष राजिंदर सिंह भाटिया, महानिदेशक रमेश के, पूर्व अध्यक्ष एस.पी. शुक्ला, सशस्त्र बलों, रक्षा मंत्रालय, उद्योग और स्टार्टअप जगत के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

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