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स्टार्टअप इंडिया के एक दशक: भारत के नवाचार और आर्थिक परिवर्तन की कहानी

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मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • दिसंबर 2025 तक 2 लाख से अधिक DPIIT-मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स के साथ भारत विश्व के सबसे बड़े स्टार्टअप इकोसिस्टम में मजबूती से स्थापित है।

  • स्टार्टअप इंडिया के एक दशक में विचार (Ideation) से लेकर फंडिंग, मेंटरशिप और स्केल-अप तक पूर्ण जीवन-चक्र समर्थन प्रणाली विकसित हुई है।

  • लगभग 50% स्टार्टअप टियर-II और टियर-III शहरों से उभर रहे हैं, जो उद्यमिता के लोकतंत्रीकरण का संकेत है।

  • AIM 2.0 का फोकस इकोसिस्टम की कमियों को दूर करने हेतु नए प्रयोगों (पायलट) और सफल मॉडलों के विस्तार पर है, जिसमें सरकार, उद्योग, शिक्षा संस्थान और समुदायों के साथ सहयोग किया जा रहा है।

  • SVEP, ASPIRE और PMEGP जैसे ग्रामीण और जमीनी कार्यक्रम सूक्ष्म उद्यमों, महिला-नेतृत्व वाले उपक्रमों और स्थानीय रोजगार को बढ़ावा दे रहे हैं।

स्टार्टअप्स: आर्थिक परिवर्तन में निर्णायक भूमिका

16 जनवरी 2026 को राष्ट्रीय स्टार्टअप दिवस के अवसर पर स्टार्टअप इंडिया पहल के एक ऐतिहासिक दशक को चिह्नित किया जा रहा है। 2016 में उद्यमिता को गति देने के लिए शुरू हुई यह पहल आज विश्व के सबसे बड़े और विविध स्टार्टअप इकोसिस्टम में परिवर्तित हो चुकी है।
“स्टार्टअप इंडिया” के माध्यम से यह आंदोलन विकसित भारत 2047 के लक्ष्य से गहराई से जुड़ा है, जिसमें आर्थिक आधुनिकीकरण के साथ समावेशी और क्षेत्रीय विकास को भी प्राथमिकता दी गई है।

पिछले एक दशक में स्टार्टअप्स भारत के आर्थिक परिवर्तन के एक मजबूत स्तंभ के रूप में उभरे हैं—जो नवाचार, रोजगार सृजन और समावेशी विकास को आगे बढ़ा रहे हैं। दिसंबर 2025 तक भारत में 2 लाख से अधिक स्टार्टअप्स सक्रिय हैं। बेंगलुरु, हैदराबाद, मुंबई और दिल्ली-एनसीआर जैसे प्रमुख केंद्रों के साथ-साथ छोटे शहर भी इस गति में योगदान दे रहे हैं, जहाँ से लगभग 50% स्टार्टअप्स उभर रहे हैं।

आर्थिक विकास के प्रेरक के रूप में स्टार्टअप्स

स्टार्टअप्स:

  • तकनीकी नवाचार और उत्पादकता को बढ़ावा देते हैं

  • बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन करते हैं

  • वित्तीय समावेशन और डिजिटल पहुँच को मजबूत करते हैं

  • क्षेत्रीय और जमीनी स्तर की उद्यमिता को प्रोत्साहित करते हैं

एग्री-टेक, टेलीमेडिसिन, माइक्रोफाइनेंस, पर्यटन और एड-टेक जैसे क्षेत्रों में समाधान देकर स्टार्टअप्स ग्रामीण–शहरी अंतर को पाट रहे हैं।
दिसंबर 2025 तक 45% से अधिक मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स में कम से कम एक महिला निदेशक/भागीदार हैं, जो समावेशी और संतुलित विकास का स्पष्ट संकेत है।

स्टार्टअप इंडिया पहल: भारत के नवाचार तंत्र की रीढ़

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अंतर्गत DPIIT द्वारा संचालित स्टार्टअप इंडिया पहल आज एक बहुआयामी मंच बन चुकी है, जो विचार से लेकर विस्तार तक स्टार्टअप्स का समर्थन करती है।
2014 में जहाँ केवल 4 यूनिकॉर्न थे, वहीं आज 120 से अधिक यूनिकॉर्न कंपनियाँ हैं, जिनका संयुक्त मूल्यांकन 350 बिलियन डॉलर से अधिक है।

स्टार्टअप्स भारत की युवा जनसंख्या का लाभ उठाते हुए प्रौद्योगिकी, सेवाओं और विनिर्माण क्षेत्रों में रोजगार सृजित कर रहे हैं, साथ ही गिग इकॉनमी और सप्लाई चेन के माध्यम से अप्रत्यक्ष रोजगार भी बढ़ा रहे हैं।

स्टार्टअप इंडिया के प्रमुख कार्यक्रम

फंड ऑफ फंड्स फॉर स्टार्टअप्स (FFS)

  • कुल कोष: ₹10,000 करोड़

  • 140+ AIFs के माध्यम से 1,370+ स्टार्टअप्स में ₹25,500+ करोड़ निवेश

क्रेडिट गारंटी स्कीम फॉर स्टार्टअप्स (CGSS)

  • 330+ ऋण, ₹800 करोड़ से अधिक की गारंटी

स्टार्टअप इंडिया सीड फंड स्कीम (SISFS)

  • कुल कोष: ₹945 करोड़

  • 215+ इनक्यूबेटर्स को स्वीकृति

स्टार्टअप इंडिया हब

  • निवेशकों, मेंटर्स, इनक्यूबेटर्स और उद्यमियों को जोड़ने वाला डिजिटल मंच

स्टेट्स स्टार्टअप रैंकिंग फ्रेमवर्क (SRF)

  • राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों में प्रतिस्पर्धी संघवाद को बढ़ावा

राष्ट्रीय मेंटरशिप पोर्टल (MAARG)

  • देशभर के स्टार्टअप्स को अनुभवी मार्गदर्शकों से जोड़ता है

स्टार्टअप इंडिया इन्वेस्टर कनेक्ट पोर्टल

  • SIDBI के सहयोग से स्टार्टअप्स और निवेशकों को जोड़ने वाला मंच

स्टार्टअप इकोसिस्टम को सशक्त करने वाली अन्य योजनाएँ

अटल इनोवेशन मिशन (AIM)

  • कुल परिव्यय: ₹2,750 करोड़ (2028 तक)

  • 10,000+ अटल टिंकरिंग लैब्स, 1.1 करोड़ से अधिक छात्र लाभान्वित

AIM 2.0 में नई पहलें:

  • LIPI (भाषा समावेशन)

  • फ्रंटियर प्रोग्राम (J&K, NE, आकांक्षी जिले)

  • डीपटेक रिएक्टर

  • इंटरनेशनल इनोवेशन सहयोग

GENESIS (MeitY)

  • बजट: ₹490 करोड़

  • टियर-II/III शहरों में 1,600 डीपटेक स्टार्टअप्स को समर्थन

MeitY स्टार्टअप हब

  • 6,148+ स्टार्टअप्स, 517+ इनक्यूबेटर्स

TIDE 2.0

  • 51 इनक्यूबेटर्स के माध्यम से ICT आधारित स्टार्टअप्स को समर्थन

NIDHI (DST)

  • 12,000+ स्टार्टअप्स, 1.3 लाख+ रोजगार, 1,100+ IP

ग्रामीण और जमीनी स्तर की पहल

SVEP

  • 3.74 लाख उद्यमों को समर्थन (जून 2025 तक)

ASPIRE

  • ग्रामीण उद्योगों और माइक्रो-एंटरप्राइज को बढ़ावा

PMEGP

  • स्वरोजगार हेतु मार्जिन मनी सब्सिडी

  • विनिर्माण क्षेत्र में ₹50 लाख तक परियोजना समर्थन

आगे की राह: नवाचार और क्रियान्वयन का भविष्य

स्टार्टअप इंडिया के एक दशक बाद, भारत का स्टार्टअप इकोसिस्टम तेज़ विस्तार से टिकाऊ विकास की ओर अग्रसर है।
डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, युवा जनसंख्या और सुधार-आधारित नीतियों के बल पर स्टार्टअप्स भारत की $7.3 ट्रिलियन अर्थव्यवस्था (2030) और विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को साकार करने में केंद्रीय भूमिका निभाते रहेंगे।

स्टार्टअप्स अब केवल विकास के उत्प्रेरक नहीं, बल्कि भारत के भविष्य-तैयार, नवाचार-आधारित आर्थिक मॉडल के प्रतीक बन चुके हैं।

ग्रामीण तकनीक और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए RuTAG 2.0 की वार्षिक समीक्षा बैठक IIT गुवाहाटी में सम्पन्न

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भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार (PSA), प्रो. अजय कुमार सूद ने ग्रामीण प्रौद्योगिकी कार्य समूह (RuTAG) 2.0 की दूसरी वार्षिक समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। यह पहल प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार कार्यालय (OPSA) की ओर से चलाई जा रही है। बैठक 13 और 14 नवंबर 2025 को इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी (IIT) गुवाहाटी में आयोजित की गई। बैठक में डॉ. पर्विंदर मैनी, वैज्ञानिक सचिव, OPSA और डॉ. राकेश कौर, सलाहकार/वैज्ञानिक ‘G’, OPSA एवं RuTAG समन्वयक भी शामिल हुए।

बैठक के उद्घाटन सत्र की शुरुआत प्रो. सशिंद्र कुमार काकोटी, IIT गुवाहाटी के स्वागत भाषण के साथ हुई, जिन्होंने उत्तर-पूर्वी क्षेत्र में ग्रामीण तकनीकों को बढ़ावा देने और सतत आजीविका के लिए नवाचार की दिशा में संस्थान की पहल को रेखांकित किया। डॉ. कौर ने RuTAG 2.0 की 2024-25 की प्रगति का संक्षिप्त विवरण प्रस्तुत किया, जिसमें सात केंद्रों की उपलब्धियों और राज्य विभागों, उद्योगों और सामुदायिक संगठनों के साथ सहयोग का विस्तार शामिल था। प्रो. देवेंद्र जलीहल, निदेशक, IIT गुवाहाटी; डॉ. हफ़्सा अहमद, वैज्ञानिक ‘D’, OPSA; और डिबोजित पाठक, तकनीकी स्टाफ, OPSA भी सत्र में उपस्थित रहे।

अपने मुख्य भाषण में प्रो. सूद ने ग्रामीण भारत में जीवन स्तर सुधारने में विज्ञान और प्रौद्योगिकी की भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने कहा, “RuTAG हमारे अनुसंधान संस्थानों को ग्रामीण समुदायों की जरूरतों से जोड़ता है और यह सुनिश्चित करता है कि वैज्ञानिक ज्ञान सशक्तिकरण का एक उपकरण बने। जब ग्रामीण भारत स्थानीय विकसित प्रौद्योगिकियों के माध्यम से अपनी समस्याओं का समाधान करने में सक्षम होगा, तो यह आत्मनिर्भरता की नींव को मजबूत करेगा।” उन्होंने RuTAG केंद्रों में गुणवत्ता, मानकीकरण और सहयोग बनाए रखने के महत्व पर भी प्रकाश डाला।

डॉ. पर्विंदर मैनी ने कहा, “जब वैज्ञानिक प्रयास स्थानीय जरूरतों पर केंद्रित होते हैं, तो यह ग्रामीण आजीविका को बदल सकता है। अगले चरण में हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि RuTAG के तहत विकसित हर तकनीक लोगों तक स्थायी और प्रभावी तरीके से पहुंचे।” उन्होंने स्व-सहायता समूहों, सूक्ष्म उद्यमों और स्थानीय नवाचारकों के साथ जुड़ाव बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया।

प्रो. जलीहल ने RuTAG 2.0 से उन तकनीकों को प्राथमिकता देने का सुझाव दिया जिनका क्षेत्रीय परिनियोजन और मापनीय प्रभाव स्पष्ट हो। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम परिपक्वता की स्थिति तक पहुंच चुका है और केंद्रों को वास्तविक ग्रामीण चुनौतियों को हल करने वाले समस्या विवरणों का चयन करना चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि समाधान केवल प्रोटोटाइप तक सीमित न रहें, बल्कि व्यापक रूप से अपनाए जाएं।

PSA प्रो. सूद ने RuTAG 2.0 वार्षिक प्रगति रिपोर्ट 2024-25 जारी की, जिसमें कृषि, पशुपालन, पश्च-फसल प्रबंधन, नवीकरणीय ऊर्जा, जल शुद्धिकरण और ग्रामीण हस्तशिल्प जैसे क्षेत्रों में 56 से अधिक चल रहे परियोजनाओं का विवरण है, जिनमें कई प्रोटोटाइप और क्षेत्रीय परिनियोजन चरणों तक पहुंच चुकी हैं। प्रो. सूद ने IIT गुवाहाटी में कृषि एवं जलवोल्टिक्स नवाचार केंद्र (CIAAV) और वेलनेस-प्रोडक्ट नवाचार के लिए एकीकृत सुविधा (IFWPI) का भी उद्घाटन किया। इस केंद्र का उद्देश्य कृषि और जलवोल्टिक्स, वेलनेस-उत्पाद विकास में अंतरविषयक अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देना है, जिससे उत्तर-पूर्वी क्षेत्र में ग्रामीण उद्यमिता और आजीविका सृजन को सुदृढ़ किया जा सके।

एक ग्रासरूट नवाचार और स्टार्टअप प्रदर्शनी का आयोजन भी किया गया, जिसमें RuTAG केंद्रों और RuTAG 2.0 कार्यक्रम के तहत साझेदार संगठनों द्वारा विकसित तकनीक और प्रोटोटाइप प्रदर्शित किए गए। ड्रोन-आधारित ग्रामीण अनुप्रयोगों का भी School of Agro and Rural Technology (SART), IIT गुवाहाटी में प्रदर्शन किया गया।

समीक्षा सत्रों के दौरान सभी सात RuTAG केंद्रों (IIT गुवाहाटी, SKUAST-कश्मीर, IIT दिल्ली, IIT बॉम्बे, IIT रुड़की, ICAR-NAARM हैदराबाद और IIT मद्रास) ने अपनी वार्षिक प्रगति प्रस्तुत की और क्षेत्रीय कार्यान्वयन से मिली अंतर्दृष्टियाँ साझा की। चर्चा का फोकस प्रमाणित तकनीकों को स्केल करने, अंतर-केंद्र सहयोग बढ़ाने और सरकारी विभागों, उद्योग और स्थानीय समुदायों के साथ साझेदारी स्थापित करने पर रहा।

साइडलाइन पर एक हितधारक बैठक भी आयोजित की गई, जिसमें उत्तर-पूर्व क्षेत्र विकास मंत्रालय (MDoNER), सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय (MSME), उत्तर प्रदेश सरकार, North East Centre for Technology Application and Reach (NECTAR), Assam Science Technology and Environment Council (ASTEC), NABARD और Assam State Rural Livelihoods Mission (ASRLM) के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

दो दिवसीय कार्यक्रम का समापन RuTAG 2.0 की रणनीतिक रोडमैप पर विचार-विमर्श के साथ हुआ, जिसका उद्देश्य सहयोगी विज्ञान, नवाचार और साझेदारियों के माध्यम से ग्रामीण विकास को और अधिक उन्नत बनाना है।

विशेष लेख :मिलाराबाद के किसान अंतर्यामी ऑर्गेनिक खेती अपनाकर समाज में मिसाल पेश की

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हम गाय को नहीं, बल्कि गाय हमें पालती है: किसान अंतर्यामी प्रधान 

रायपुर-महासमुंद जिले के विकासखंड बसना के ग्राम मिलाराबाद के किसान शिक्षित किसान अंतर्यामी प्रधान और उनके पुत्र लक्ष्मी नारायण प्रधान ने पूरी तरह ऑर्गेनिक खेती अपनाकर समाज के लिए मिसाल पेश की है। अंतर्यामी प्रधान बी.एससी. तक और लक्ष्मी नारायण प्रधान बैचलर इन फिजियोथेरेपी तथा बीजेएमसी की पढ़ाई की है। वे लगभग 29 एकड़ भूमि में ऑर्गेनिक खेती करते हुए इन्होंने यह साबित किया है कि कम लागत और स्वस्थ तरीके से भी किसान अच्छी आमदनी कमा सकते हैं। 

गौरतलब है कि रासायनिक खेती के इस दौर में जहां किसान अधिक उपज की लालच में भूमि की उर्वरता और मानव स्वास्थ्य पर दुष्प्रभाव डाल रहे हैं। वहीं प्रधान परिवार ने तकरीबन सत्तर के दशक से रासायनिक खाद और जहरीली दवाइयों का उपयोग बंद कर ऑर्गेनिक खेती का आदर्श प्रस्तुत कर रहा है। कम लागत, स्वस्थ उत्पादन और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त धान की किस्में उगाकर इन्होंने यह साबित किया है कि ऑर्गेनिक खेती ही भविष्य की सच्ची जरूरत है। आज इनके पास 29 एकड़ जमीन पर ऑर्गेनिक खेती चल रही है, जिनमें से 15 एकड़ का एपीईडीए (APEDA) से रजिस्ट्रेशन भी हो चुका है।

विविध फसलें और खास किस्म का धान

किसान अंतर्यामी प्रधान ने बताया कि उनके खेती में कई उन्नत किस्म की फसलें लगाई गई हैं जिनमें धान में जवाफुल, कलानमक नरेंद्र 01, शाही नमक, कालीमुच, चिनौर कालाजीरा, गंगा बालू, दुबराज और सुपर फाइन जैसे उन्नत किस्म के धान का उत्पादन कर रहें है। इससे अच्छी आमदनी मिल रही है। वहीं यह उत्पाद स्वास्थ्य वर्धक भी है। सुपरफाइन किस्म की धान का कीमत लगभग 75 रूपए से शुरू है। काला नमक नरेंद्र कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाला चावल होने के कारण इसका कीमत 250 रूपए किलो के लगभग है। अवाम धान बीज 350 रूपए किलो तक बिकता है। उन्होंने बताया कि वे धान फसलों के साथ-साथ अपने खेतों में शरबती गेहूं C-306 किस्म के और अरहर का भी फसल लेते हैै।इसके साथ ही कोयंबतूर 86032 किस्म के गन्ना का फसल लेते है जो गुड़ बनाने में काफी अच्छा है। इसकी कीमत 120 रूपए किलो तक है। वे अपने खेतों में ग्रीष्मकालीन मौसम में मूंगफली का फसल लेते है। चार एकड़ में टॉप-10 वैरायटी के आम का पेड़ लगाया हुआ है। जिससे प्रतिवर्ष  25-30 क्विंटल आम का उत्पादन होता है। नारियल  के 160 पौधे लगाए है,  जिनमें फल आना शुरू हो रहा है।

जैविक खेती का आधार - गाय

जैविक खेती कर रहे किसान प्रधान परिवार ने बताया कि उनके पास 60 देसी नस्ल की गायें हैं, जिनमें गिर नस्ल प्रमुख है। इनके गोबर और गोमूत्र से ही खाद, बीजामृत, जीवामृत और ‘ब्रह्मास्त्र’ जैविक दवा बनाई जाती है। किसान अंतर्यामी प्रधान का कहना है - “हम गाय को नहीं पालते, बल्कि गाय हमें और हमारे पूरे परिवार को पालती है।”

प्राकृतिक कीटनाशक के रूप में नीम, सीताफल, करंज, भेरू, बेल और (अरंडी) के पत्ते है ब्रह्मास्त्र

अंतर्यामी प्रधान ने बताया कि प्राकृतिक कीटनाशक के रूप में नीम, सीताफल, करंज, भेरू, बेल और आक (अरंडी) के पत्ते ब्रम्हास्त्र के रूप में काम करते है। इन पेड़ों के पत्तों की पेस्ट बनाकर गोमूत्र के साथ मिट्टी के बर्तन में पकाया जाता है। इसे फसलों पर छिड़कने से कीट और रोगों से बचाव होता है। किसान अंतर्यामी ने बताया कि इसके अलावा गाय के गोबर से गैस संयंत्र से रसोई की जरूरत पूरी होती है। उन्हें राज्य शासन सहित राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन और नेशनल मिशन ऑन एडिबल ऑयल के अंतर्गत बीज और तकनीकी मदद मिलती है।


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