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छत्तीसगढ़ में आदिवासी विद्यार्थियों के लिए AI और रोबोटिक्स शिक्षा को बढ़ावा, स्कूलों-कॉलेजों में शुरू होंगे विशेष लर्निंग मॉड्यूल

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रायपुर- छत्तीसगढ़ सरकार आदिवासी विद्यार्थियों को भविष्य की तकनीकों से जोड़ने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), रोबोटिक्स और डिजिटल तकनीक आधारित शिक्षा को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठा रही है। इसके तहत राज्य के सरकारी स्कूलों, ओपन स्कूलों और कॉलेजों में विद्यार्थियों के शैक्षणिक स्तर के अनुरूप AI-सक्षम लर्निंग मॉड्यूल शुरू करने की योजना है। 

विद्यार्थियों को भविष्य की तकनीकों से जोड़ा जाएगा

प्रस्तावित लर्निंग मॉड्यूल विद्यार्थियों की कक्षा और शैक्षणिक स्तर के अनुसार तैयार किए जाएंगे। शुरुआत AI और डिजिटल तकनीक की बुनियादी जानकारी से होगी और आगे चलकर विद्यार्थियों को उन्नत तकनीकी अनुप्रयोगों से परिचित कराया जाएगा।

इस पहल का उद्देश्य आदिवासी और दूरदराज के क्षेत्रों के विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीक की शिक्षा तक बेहतर पहुंच उपलब्ध कराना और उन्हें भविष्य की नौकरियों तथा उभरते उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार करना है। 

AI और रोबोटिक्स लैब स्थापित करने की तैयारी

इस तकनीकी शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए आधुनिक AI और रोबोटिक्स लैब स्थापित करने की भी योजना बनाई गई है। इससे विद्यार्थियों को केवल सैद्धांतिक जानकारी ही नहीं, बल्कि तकनीक के व्यावहारिक उपयोग और प्रयोग का अवसर भी मिल सकेगा।

राज्य की व्यापक AI रणनीति में शैक्षणिक संस्थानों में AI एवं रोबोटिक्स क्लब, डिजिटल लैब और स्मार्ट क्लासरूम विकसित करने पर भी जोर दिया जा रहा है। 

कॉलेज विद्यार्थियों के लिए विशेष AI कोर्स

कॉलेजों में अध्ययनरत आदिवासी विद्यार्थियों के लिए विशेष और गहन AI पाठ्यक्रम शुरू करने की संभावनाओं पर भी काम किया जा रहा है। ये पाठ्यक्रम नियमित पढ़ाई के साथ किए जा सकेंगे, जिससे विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के साथ तकनीकी कौशल विकसित करने का अवसर मिलेगा। 

शिक्षकों के प्रशिक्षण पर भी जोर

AI शिक्षा को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए शिक्षकों को भी नई तकनीकों के अनुरूप प्रशिक्षित करने की आवश्यकता पर जोर दिया जा रहा है। इसका उद्देश्य ऐसा शैक्षणिक वातावरण तैयार करना है, जिसमें विद्यार्थी AI, कोडिंग, रोबोटिक्स और अन्य डिजिटल तकनीकों को व्यावहारिक रूप से समझ सकें।

प्रायस स्कूलों को भी मिलेगा लाभ

यह पहल प्रायस आवासीय विद्यालयों के मॉडल को पारंपरिक प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी से आगे बढ़ाकर विद्यार्थियों को भविष्य के तकनीकी क्षेत्रों के लिए तैयार करने की व्यापक योजना का हिस्सा है। राज्य में पहले से ही इन विद्यालयों में IIT और अन्य प्रतिष्ठित संस्थानों के विशेषज्ञों द्वारा पढ़ाई कराई जा रही है। अब उभरती तकनीकों जैसे AI, क्वांटम कंप्यूटिंग और सेमीकंडक्टर्स से विद्यार्थियों को परिचित कराने पर भी ध्यान दिया जा रहा है।

डिजिटल डिवाइड कम करने की दिशा में कदम

सरकार का यह प्रयास विशेष रूप से आदिवासी और दूरस्थ क्षेत्रों के विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीकी शिक्षा से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। AI और रोबोटिक्स जैसी तकनीकों तक शुरुआती स्तर पर पहुंच मिलने से विद्यार्थियों में तकनीकी दक्षता, नवाचार और रोजगार की नई संभावनाएं विकसित हो सकती हैं।

कुल मिलाकर, छत्तीसगढ़ में AI और रोबोटिक्स शिक्षा का विस्तार आदिवासी युवाओं को भविष्य की तकनीकी अर्थव्यवस्था के लिए तैयार करने और डिजिटल डिवाइड कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।

रोबोटिक्स और कृत्रिम बुद्धिमता का उपयोग मानव कल्याण के लिए हो-राज्यपाल डेका

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रायपुर- राज्यपाल रमेन डेका ने आज भारत सेवाश्रम संघ द्वारा संचालित प्रणवानंद अकादमी में रोबोटिक्स लैबोरेट्री का लोकार्पण किया। इस लैबोरेट्री की स्थापना के लिए राज्यपाल द्वारा अपने स्वेछानुदान मद से राशि प्रदान की गई है ।

इस अवसर पर राज्यपाल ने अपने संबोधन ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमता, रोबोटिक्स जैसे तकनीक हमारे जीवन को आसान बनाते है। लेकिन आधुनिक तकनीक तभी सार्थक है, जब उसका उपयोग मानव जीवन के कल्याण और समाज के विकास के लिए किया जाए।

उन्होंने कहा कि किसी भी शिक्षण संस्थान की वास्तविक पहचान केवल  उत्कृष्ट परीक्षा परिणामों से नहीं होती, बल्कि ऐसे विद्यार्थियों से होती है जो ज्ञान के साथ मानवीय मूल्यों, संवेदनशीलता और सामाजिक उत्तरदायित्व का परिचय दें।  प्रणवानंद अकादमी शिक्षा के साथ-साथ संस्कार, अनुशासन और चरित्र निर्माण को भी समान महत्व देती है यह प्रसन्नता का विषय है।

राज्यपाल ने कहा कि आज कृत्रिम बुद्धिमत्ता रोबोटिक्स और अन्य आधुनिक तकनीकें विश्व को नई दिशा दे रही हैं। ऐसे समय में विद्यार्थियों को तकनीकी ज्ञान के साथ नैतिक मूल्यों को भी आत्मसात करना चाहिए। कोई भी नया आविष्कार या नवाचार मानवता के हित में होना चाहिए। मानव पर खुद का नियंत्रण होना चाहिए न कि कोई तकनीक उसे नियंत्रित करे।

राज्यपाल ने विद्यार्थियों को जीवन मूल्यों का संदेश देते हुए कहा कि जीवन में संतोष का विशेष महत्व है। हमें जो प्राप्त है, उसमें प्रसन्न रहना सीखना चाहिए तथा कठिन परिश्रम, सकारात्मक सोच और आत्मविश्वास के साथ अपने लक्ष्य की ओर निरंतर आगे बढ़ना चाहिए। जीवन में उतार-चढ़ाव एवं चुनौतियाँ आती हैं, लेकिन गिरने के बाद फिर से उठना और आगे बढ़ना ही सफलता का मार्ग है।

उन्होंने कहा कि समाज ने हमें क्या दिया, यह सोचने के बजाय हमें यह विचार करना चाहिए कि हम समाज को क्या दे सकते हैं। समाज के प्रति सेवा, सहयोग, संवेदनशीलता और पड़ोसियों के प्रति आत्मीयता की भावना हमारे जीवन में आनंद लाता है। 

कार्यक्रम में अकादमी के अध्यक्ष स्वामी शिवरूपानंद ने स्वागत उद्बोधन दिया तथा प्राचार्य नीति यदुवंशी ने आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर संस्थान के पदाधिकारी, शिक्षकगण एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित थे। 

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