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लोक निर्माण विभाग के सचिव ने केशकाल घाट बायपास रुट का किया निरीक्षण, तत्काल काम शुरू करने के दिए निर्देश

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308 करोड़ की लागत से 11.38 किमी लंबा फोरलेन बायपास बनेगा 

रायपुर- लोक निर्माण विभाग के सचिव मुकेश कुमार बंसल ने आज रायपुर-जगदलपुर मार्ग पर बहुप्रतीक्षित केशकाल घाट फोरलेन बायपास रुट का निरीक्षण किया। उन्होंने विभागीय अधिकारियों और निर्माण एजेंसी के साथ बायपास के दोनों छोरों का निरीक्षण किया। उन्होंने बायपास का काम तत्काल प्रारंभ करने को कहा। लोक निर्माण विभाग के प्रमुख अभियंता वी.के. भतपहरी भी इस दौरान मौजूद थे।

मुकेश कुमार बंसल ने बायपास के रास्ते में शेष बचे पेड़ों की कटाई तत्परता से करने के निर्देश वन मंडलाधिकारी को दिए हैं। उन्होंने बायपास से संबंधित मुआवजा प्रकरणों की जानकारी लेकर लंबित मामलों का निराकरण यथाशीघ्र करने को कहा। उन्होंने कहा कि बस्तर और छत्तीसगढ़ के लिए यह बायपास अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसका तेजी से निर्माण कर आवाजाही शुरू करना सरकार की प्राथमिकता में है।

2 वृहद और 2 मध्यम पुल भी बनेंगे

लोक निर्माण विभाग द्वारा 308 करोड़ रुपए की लागत से 11.38 किमी लंबे केशकाल घाट बायपास का निर्माण किया जा रहा है। इस बायपास में दो वृहद और दो मध्यम पुल भी बनाए जाएंगे।

NH-160A हाईवे परियोजना को मंजूरी, 3,320 करोड़ रुपये की लागत से महाराष्ट्र में सड़क नेटवर्क को बड़ी मजबूती

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नई दिल्ली- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति (CCEA) ने महाराष्ट्र में घोटी–त्र्यंबकेश्वर (मोखाडा)–जवाहर–मनोऱ–पालघर खंड (NH-160A) के पुनर्वास और उन्नयन परियोजना को मंजूरी दे दी है। इस परियोजना की कुल लंबाई 154.635 किलोमीटर है और इसकी कुल पूंजीगत लागत 3,320.38 करोड़ रुपये है।

यह परियोजना इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट और कंस्ट्रक्शन (EPC) मोड पर लागू की जाएगी।

नासिक और मुंबई क्षेत्र को मिलेगा वैकल्पिक मार्ग

नासिक के पश्चिमी क्षेत्र, विशेषकर अंबाड और सतपुर औद्योगिक क्षेत्रों में बड़ी संख्या में उद्योग इकाइयाँ हैं, जिससे भारी मालवाहक यातायात उत्पन्न होता है। वर्तमान में यह यातायात नासिक शहर से होकर गुजरता है, जिससे शहरी सड़कों पर अत्यधिक दबाव पड़ता है।

NH-160A के उन्नयन से औद्योगिक क्षेत्रों को त्र्यंबकेश्वर के माध्यम से वैकल्पिक मार्ग मिलेगा, जिससे नासिक शहर में यातायात जाम में कमी आएगी।

4-लेन हाईवे और बेहतर कनेक्टिविटी

  • वर्ष 2028 के बाद इस कॉरिडोर पर यातायात 10,000 PCU प्रतिदिन से अधिक होने का अनुमान है, जिससे इसे 4-लेन हाईवे में विकसित किया जाएगा।

  • त्र्यंबकेश्वर से पालघर और मनोऱ तक का मार्ग दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे, NH-48 और पश्चिमी तटीय क्षेत्रों को जोड़ेगा।

  • शहरी क्षेत्रों में यातायात को सुगम बनाने के लिए मनोऱ–पालघर खंड को 4-लेन किया जाएगा।

PM गति शक्ति योजना के तहत विकास

यह परियोजना पीएम गति शक्ति सिद्धांतों के अनुरूप प्रस्तावित है और महाराष्ट्र में:

  • 6 आर्थिक नोड्स

  • 7 सामाजिक नोड्स

  • 8 लॉजिस्टिक्स नोड्स
    को जोड़ेगी।
    इससे देश के लॉजिस्टिक परफॉर्मेंस इंडेक्स (LPI) में भी सुधार होगा।

आर्थिक विकास और रोजगार को बढ़ावा

इस परियोजना से:

  • यात्रा समय में कमी आएगी

  • वाहन परिचालन लागत घटेगी

  • आदिवासी क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे का विकास होगा

  • क्षेत्रीय आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा

परियोजना से लगभग:

  • 19.98 लाख व्यक्ति-दिन का प्रत्यक्ष रोजगार

  • 24.86 लाख व्यक्ति-दिन का अप्रत्यक्ष रोजगार
    उत्पन्न होने का अनुमान है।

परियोजना का विवरण

  • परियोजना नाम: घोटी–त्र्यंबकेश्वर–जवाहर–मनोऱ–पालघर (NH-160A) उन्नयन

  • कुल लंबाई: 154.635 किमी

  • कुल लागत: ₹3,320.38 करोड़

  • मोड: EPC

  • प्रमुख एक्सप्रेसवे कनेक्शन: दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे, समृद्धि महामार्ग

  • प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्ग: NH-848, NH-48

  • प्रमुख शहर: त्र्यंबकेश्वर, जवाहर, मनोऱ, पालघर, मुंबई, नासिक


प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना–IV के तहत 10,000 किलोमीटर से अधिक सड़क परियोजनाओं को मंजूरी, ग्रामीण कनेक्टिविटी में नया मील का पत्थर

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प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना–IV (PMGSY-IV) के तहत एक महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज की गई है। जम्मू और कश्मीर, छत्तीसगढ़, उत्तराखंड, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश और सिक्किम सहित राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों में 10,000 किलोमीटर से अधिक सड़क परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। यह कदम ग्रामीण विकास विभाग की विकसित भारत की दिशा में प्रतिबद्धता को मजबूत करता है।


कनेक्टिविटी से ग्रामीण विकास को नई दिशा

इन सड़कों का निर्माण केवल बुनियादी ढांचा नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण समुदायों को मुख्यधारा से जोड़ने का एक मजबूत माध्यम है। इन परियोजनाओं से लगभग 3,270 पहले असंयोजित बस्तियों को पहली बार कनेक्टिविटी मिलेगी। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार के अवसरों तक पहुँच आसान होगी और ग्रामीण जीवन में सकारात्मक बदलाव आएगा।

PMGSY-IV: लक्ष्य और दायरा

PMGSY-IV के तहत कुल 25,000 असंयोजित बस्तियों को कनेक्ट करने का लक्ष्य रखा गया है, जिनमें शामिल हैं:

  • मैदानी इलाकों में 500+ जनसंख्या वाली बस्तियाँ

  • उत्तर-पूर्व और पहाड़ी राज्यों/UTs में 250+ जनसंख्या वाली बस्तियाँ

  • विशेष श्रेणी क्षेत्र (जनजातीय क्षेत्र, आकांक्षी जिले/ब्लॉक, रेगिस्तानी क्षेत्र)

  • LWE प्रभावित जिलों में 100+ जनसंख्या वाली बस्तियाँ

योजना की विशेषताएँ

  • 62,500 किलोमीटर की ऑल-वेदर सड़कें बनाई जाएंगी

  • सड़क मार्गों के साथ आवश्यक पुलों का निर्माण भी सुनिश्चित किया जाएगा

वित्तीय एवं कार्यान्वयन ढांचा

केंद्र सरकार ने 11 सितंबर 2024 को PMGSY-IV की कार्यावधि (FY 2024-25 से 2028-29) को मंजूरी दी थी।

  • कुल अनुमानित लागत: ₹70,125 करोड़

  • केंद्र की हिस्सेदारी: ₹49,087.50 करोड़

  • राज्य की हिस्सेदारी: ₹21,037.50 करोड़


महासमुंद-राजिम मार्ग सुदृढ़ीकरण एवं उन्नयन कार्य के लिए 147 करोड़ रुपए स्वीकृत

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महासमुंद- केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने राज्य की सड़क अधोसंरचना को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से पांच जिलों के लगभग 174 किलोमीटर लंबी सड़कों का चौड़ीकरण, मजबूतीकरण और उन्नयन कार्य के लिए स्वीकृति प्रदान की है। इसमें राजिम–फिंगेश्वर–महासमुंद मार्ग के 35.5 किमी हिस्से के उन्नयन के लिए 146.86 करोड़ रुपए की स्वीकृति मिली है। 


इस संबंध में महासमुंद विधायक योगेश्वर राजू सिन्हा ने केंद्र एवं राज्य शासन को धन्यवाद ज्ञापित करते हुए जारी बयान में कहा है कि केंद्र सरकार की यह स्वीकृति छत्तीसगढ़ में अधोसंरचना विकास को नई दिशा देगी। बेहतर सड़कें न केवल यातायात को सुरक्षित बनाएंगी, बल्कि क्षेत्रीय व्यापार, रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा देंगी। उन्होंने आगे कहा कि महासमुंद से फिंगेश्वर और राजिम तक मार्ग का उन्नयन कार्य क्षेत्र की जनता के लिए काफी लाभकारी साबित होगा। दोनों जिलों को जोड़ने वाले इस सड़क के माध्यम से व्यापार सहित अन्य गतिविधियां जुड़ी हुई है। लोगों को आवागमन में काफी सुविधा होगी। महासमुंद विधानसभा क्षेत्र के लोगों द्वारा भी काफी समय से इस मार्ग के उन्नयन की मांग की जा रही थी। राजिम पूरे प्रदेश में आध्यात्मिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण स्थल है। आगामी दिनों में यहां लगने वाले मेला में भीड़ उमड़ती है। महासमुंद से भी हजारों की संख्या में श्रद्धालु राजीवलोचन मंदिर, कुलेश्वर महादेव के दर्शन करने जाते हैं, जिनका सफर अब सुगमता से पूरा होगा।

आर्थिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण

महासमुंद को राजिम से जोड़ने वाले यह मार्ग आर्थिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। सड़क चौड़ीकरण और मजबूतीकरण से 35 किमी का सफर अब कम समय में और सुगमता से पूरा होगा। महासमुंद और गरियाबंद दोनों जिलों के सैकड़ों गांवों के लोगों के लिए आवागमन आसान होगा, जिससे व्यापार और शिक्षा के क्षेत्रों में नई गति आएगी। फिंगेश्वर क्षेत्र के कई गांव के ग्रामीण जो महासमुंद की सीमा के आसपास हैं वें चिकित्सकीय सुविधा के लिए महासमुंद मेडिकल कॉलेज भी आते हैं। इन सभी के लिए यह काफी लाभदायक साबित होगा।

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