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राजस्व मामलों में देरी बर्दाश्त नहीं, समय पर निपटाएं नामांतरण और बंटवारा’-मंत्री टंक राम वर्मा

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धमतरी में विभागीय कार्यों की समीक्षा बैठक- बाढ़ आपदा से निपटने के दिए पुख्ता निर्देश

​मंत्री ने हितग्राहियों को सौंपे स्वामित्व कार्ड और जाति प्रमाण पत्र

रायपुर- छत्तीसगढ़ शासन के राजस्व एवं उच्च शिक्षा मंत्री टंकराम वर्मा ने कलेक्टोरेट सभाकक्ष धमतरी में कल आयोजित समीक्षा बैठक के दौरान प्रशासनिक अधिकारियों को विभिन्न निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि नामांतरण, बंटवारा, सीमांकन, स्वामित्व कार्ड और भूमि डायवर्सन जैसे जनहित से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की अनावश्यक देरी या लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। आम जनता को छोटे-छोटे कामों के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर न लगाने पड़ें, यह प्रशासन की सर्वाेच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।

अंतिम व्यक्ति तक पहुँचे सरकारी योजनाओं का लाभ

बैठक को संबोधित करते हुए मंत्री वर्मा ने कहा कि शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं की वास्तविक सार्थकता तभी है, जब उनका सीधा लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक समय पर पहुंचे। उन्होंने अधिकारियों को संवेदनशीलता, पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ कार्य करने का आह्वान किया। इस अवसर पर मंत्री वर्मा ने 5 हितग्राहियों को स्वामित्व कार्ड तथा 5 हितग्राहियों को जाति प्रमाण पत्र का वितरण भी किया।

मानसून और संभावित बाढ़ आपदा से निपटने की तैयारी तेज़

मानसून के मौसम को ध्यान में रखते हुए मंत्री ने संभावित बाढ़ और आपदा प्रबंधन की तैयारियों का बारीकी से जायजा लिया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि ​बाढ़ संभावित संवेदनशील क्षेत्रों की चौबीसों घंटे निगरानी की जाए। ​राहत एवं बचाव दलों को पूरी तरह अलर्ट मोड पर रखा जाए। ​किसी भी आपात स्थिति में जन-धन की सुरक्षा के लिए संसाधन और त्वरित राहत व्यवस्था सुनिश्चित हो।

बैठक के दौरान मंत्री टंक राम वर्मा ने विभिन्न विभागीय कार्यों की प्रगति पर भी विस्तृत दिशा-निर्देश दिये। उन्होंने स्कूल शिक्षा विभाग को निर्देशित किया कि नए शैक्षणिक सत्र में विद्यार्थियों को पाठ्यपुस्तकें, गणवेश और साइकिल का वितरण समय पर हर हाल में सुनिश्चित किया जाए, ताकि उनकी पढ़ाई में कोई बाधा न आए। वहीं, कृषि विभाग को निर्देश देते हुए कहा कि मानसून और बोआई के इस मौसम में किसानों को खाद एवं बीज की उपलब्धता में किसी भी तरह की कमी का सामना न करना पड़े। इसके साथ ही, स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा करते हुए मंत्री वर्मा ने ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ बनाने तथा आयुष्मान भारत योजना का अधिकतम लाभ आम जनता तक प्राथमिकता के आधार पर पहुंचाने पर विशेष जोर दिया।

धमतरी में बुनियादी ढांचे और स्वास्थ्य सेवाओं का हो रहा विस्तार

समीक्षा के दौरान कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने जिले में चल रही विकास परियोजनाओं की जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि जिले में 200 बिस्तरीय मातृ-शिशु अस्पताल, नेत्र एवं ट्रॉमा सेंटर के साथ-साथ कुरूद में 100 बिस्तरीय अस्पताल व नर्सिंग कॉलेज का निर्माण प्रगति पर है। इसी तरह सड़क, ऑडिटोरियम, इनडोर स्टेडियम, नालंदा परिसर, रेलवे, औद्योगिक पार्क और पर्यटन विकास के कार्यों को आगामी दो वर्षों में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

मंत्री टंक राम वर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत 2047 और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के विकसित छत्तीसगढ़ के संकल्प को साकार करने में प्रत्येक अधिकारी की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। ​बैठक में पुलिस अधीक्षक, वनमंडलाधिकारी, जिला पंचायत सीईओ सहित जिले के सभी प्रमुख प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित थे।

विशेष लेख : ​राजस्व सुधारों की नई इबारत लिखता छत्तीसगढ़: ‘ऑटो म्यूटेशन’ और ‘ऑटो डायवर्सन’ से जमीन संबंधी सेवाओं में ऐतिहासिक बदलाव

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​99.95 प्रतिशत ऑटो म्यूटेशन सफलता दर ने रचा रिकॉर्ड, ऑटो डायवर्सन में 83.71 प्रतिशत प्रकरणों का हुआ निराकरण

​कोरिया बना नंबर-1, धमतरी ने टॉप-5 में दर्ज कराई दमदार मौजूदगी; जिलों के प्रदर्शन ने दिखाई जवाबदेह प्रशासन की तस्वीर

​NGDRS इंटीग्रेशन, मल्टीपल खसरा और रिकवरी मॉड्यूल से राजस्व सेवाओं को मिलेगा नया डिजिटल ढांचा

​आम नागरिक को दफ्तरों के चक्कर से राहत, पारदर्शिता और समयबद्ध निस्तारण के साथ सुशासन का मजबूत मॉडल बन रहा छत्तीसगढ़

​रायपुर-सुशासन के नए डिजिटल युग में राजस्व प्रशासन अब फाइलों और लंबित प्रकरणों के पारंपरिक चक्रव्यूह से बाहर निकल चुका है। राज्य शासन के राजस्व, आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विभाग ने तकनीक को माध्यम बनाकर जमीन से जुड़ी सेवाओं का पूरी तरह कायाकल्प कर दिया है। 'ऑटो म्यूटेशन' (स्वतः नामांतरण) और 'ऑटो डायवर्सन' (स्वतः व्यवर्तन) जैसी जन-हितैषी व्यवस्थाओं ने विभाग को तेज, पारदर्शी और मानवीय हस्तक्षेप से मुक्त बनाया है। इससे आम नागरिकों को दफ्तरों के चक्कर, लंबे इंतजार और मानसिक व शारीरिक प्रताड़ना से स्थायी मुक्ति मिली है।

पहले रजिस्ट्री के बाद नामांतरण के लिए अलग से आवेदन और भौतिक सत्यापन की थकाऊ प्रक्रिया से गुजरना पड़ता था, लेकिन छत्तीसगढ़ सरकार की मजबूत इच्छाशक्ति से अब यह स्वतः संपन्न हो रहा है। इसके साथ ही, भूमि उपयोग परिवर्तन (डायवर्सन) के लिए आवेदन, प्रीमियम निर्धारण और शुल्क गणना को भी आधुनिक तकनीक से त्रुटिहीन बनाया गया है। छत्तीसगढ़ का यह डिजिटल गवर्नेंस मॉडल आज देश के लिए एक अनुकरणीय उदाहरण बनकर उभरा है।

​आंकड़ों की जुबानी: सफलता की एक नई गाथा

राजस्व विभाग द्वारा जारी प्रामाणिक आंकड़े इस ऐतिहासिक परिवर्तन की गवाही देते हैं। राज्य में अब तक कुल 1 लाख 40 हज़ार 607 पंजीकृत विलेखों में से रिकॉर्ड 1 लाख 40 हज़ार 536 मामलों का सफलतापूर्वक ऑटो म्यूटेशन किया जा चुका है। संपूर्ण प्रदेश में केवल 71 प्रकरण प्रक्रियाधीन हैं, जिससे विभाग ने 99.95 प्रतिशत की अभूतपूर्व सफलता दर हासिल की है।

वहीं दूसरी ओर, 'ऑटो डायवर्सन' व्यवस्था के तहत कुल 5 हजार 661 आवेदन दर्ज किए गए, जिनमें से 4 हज़ार 739 मामलों का त्वरित निराकरण किया गया। इस प्रकार 83.71 प्रतिशत प्रकरणों का निस्तारण कर यह साबित कर दिया गया कि जटिल तकनीकी प्रक्रियाओं को भी डिजिटल माध्यम से सुगम और पारदर्शी बनाया जा सकता है। राजस्व सेवाएँ सीधे नागरिक के जीवन, संपत्ति और निवेश से जुड़ी होती हैं; अतः इनमें गति आने से राज्य की आवासीय, वाणिज्यिक और औद्योगिक गतिविधियों को नई रफ्तार मिली है।

​ऑटो म्यूटेशन ने बदली नामांतरण की तस्वीर

किसी भी संपत्ति की रजिस्ट्री के बाद भू-अभिलेखों में नाम दर्ज होना एक अनिवार्य प्रक्रिया है। पुराने दौर में पटवारियों और तहसील कार्यालयों के चक्कर काटना, दस्तावेजों की जांच में महीनों गंवाना और अनिश्चितता का सामना करना आम बात थी, जिसने भ्रष्टाचार को भी बढ़ावा दिया।

आज छत्तीसगढ़ की तस्वीर बदल चुकी है। 1 लाख 40 हज़ार 607 पंजीकृत विलेखों में से 1 लाख 40 हज़ार 536 मामलों का स्वतः नामांतरण होना यह दर्शाता है कि अब नागरिक को अपने हक के लिए संघर्ष नहीं करना पड़ रहा है। इस व्यवस्था से समय और धन की भारी बचत हो रही है और रिकॉर्ड रीयल-टाइम अपडेट होने से जमीनी धोखाधड़ी पर लगाम लगी है।

इस सफलता को बनाए रखने के लिए राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (NIC) द्वारा एक सख्त तकनीकी लॉक सिस्टम विकसित किया गया है। इसके तहत, यदि किसी संपत्ति का एक भी पुराना ऑटो म्यूटेशन लंबित है, तो संबंधित सब-रजिस्ट्रार कार्यालय में उस संपत्ति की अगली रजिस्ट्री तब तक नहीं हो पाएगी जब तक पिछला म्यूटेशन क्लियर न हो जाए। यह कदम निचले स्तर के प्रशासनिक अमले को जवाबदेह बनाता है।

​ऑटो डायवर्सन से भूमि उपयोग परिवर्तन की प्रक्रिया हुई तेज

कृषि भूमि को आवासीय, वाणिज्यिक या औद्योगिक उपयोग में बदलना (डायवर्सन) शहरीकरण, निवेश और रोजगार सृजन की रीढ़ है। पहले आवेदकों को शुल्क, आवश्यक दस्तावेजों और समय सीमा की स्पष्ट जानकारी नहीं होती थी।

फरवरी से जून 2026 के बीच 5 हजार 661 आवेदनों में से 4 हजार 739 का त्वरित निस्तारण यह दिखाता है कि विभाग ने गाइडलाइन दरों के आधार पर प्रीमियम निर्धारण जैसी पेचीदा प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित कर दिया है। वर्तमान में जो 922 लंबित मामले हैं, उनके पीछे अपूर्ण दस्तावेज, चालान राशि में तकनीकी अंतर या नगर तथा ग्राम निवेश (TNCP) के मास्टर प्लान से भिन्न प्रयोजन होना जैसे व्यावहारिक कारण हैं। इन चुनौतियों को सार्वजनिक करना विभाग की पारदर्शिता और विश्वसनीयता को दर्शाता है।

​जिला-वार प्रदर्शन ने दिखाई नई प्रशासनिक संस्कृति

ऑटो डायवर्सन के क्रियान्वयन में जिलों के बीच एक स्वस्थ और परिणाम-उन्मुख प्रतिस्पर्धा देखने को मिल रही है, जो यह प्रमाणित करती है कि सुधार जमीनी स्तर पर लागू हो चुके हैं। कोरिया जिला कुल 59 प्रकरणों में से सभी 59 का शत-प्रतिशत निराकरण कर 100 प्रतिशत सफलता दर के साथ पूरे राज्य में प्रथम स्थान पर रहा।कोरबा जिला 98.46 प्रतिशत की सफलता दर के साथ अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई। इसी तरह ​मुंगेली जिला 94.16 प्रतिशत मामलों का निपटारा कर उत्कृष्ट प्रदर्शन किया।​बालोद जिला 93.72 प्रतिशत निस्तारण दर के साथ शीर्ष जिलों में शामिल रहा।​धमतरी जिला कुल 165 प्रकरणों में से 153 का वैधानिक निराकरण कर 92.73 प्रतिशत सफलता दर के साथ राज्य में पाँचवाँ (शीर्ष-5) स्थान प्राप्त किया। धमतरी का यह प्रदर्शन नियमित समीक्षा और जवाबदेह कार्यशैली का परिणाम है।

​तकनीकी सुधार और नए डिजिटल मॉड्यूल्स

विभाग अपनी वर्तमान उपलब्धियों से आगे बढ़कर एक एकीकृत 'डिजिटल इकोसिस्टम' के निर्माण में जुटा है। ​NGDRS API Integration इसके माध्यम से सरकारी गाइडलाइन दरें सीधे पोर्टल से प्राप्त हो रही हैं, जिससे प्रीमियम का निर्धारण मानवीय हस्तक्षेप के बिना पूरी तरह स्वचालित और पारदर्शी हो गया है।

​'Diverted to Diverted' मॉड्यूल:

यदि पहले से डायवर्टेड भूमि का आंतरिक उपयोग बदलना हो (जैसे आवासीय से वाणिज्यिक), तो इस मॉड्यूल के तहत निस्तारण के लिए 15 दिवस की समय सीमा तय की गई है।

​'मल्टीपल खसरा' मॉड्यूल

एक से अधिक खसरों वाली भूमि के लिए अब एक ही आवेदन में अनेक खसरों का चयन, स्वतः शुल्क गणना और ई-चालान की सुविधा मिलेगी। इसके लिए समय सीमा जुलाई 2026 रखा गया है।

​'रिकवरी' मॉड्यूल

पुराने लंबित मामलों के निपटारे के लिए पूर्व भुगतानों की प्रविष्टि, शेष प्रीमियम की गणना, भू-राजस्व/उपकर की मांग और एक उच्च स्तरीय रिकवरी डैशबोर्ड की व्यवस्था की जाएगी।इसके लिए समय सीमा अगस्त 2026 निर्धारित किया गया है।

​सुशासन का नया मॉडल बनता छत्तीसगढ़

​यह ऐतिहासिक बदलाव सिर्फ तकनीकी आंकड़ों का नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ के पौने तीन करोड़ नागरिकों के जीवन को सरल और सुरक्षित बनाने का माध्यम है। किसान, गृहस्वामी, व्यापारी और औद्योगिक निवेशक सभी को अब घर बैठे अपने मोबाइल पर पारदर्शी सेवाएँ मिल रही हैं।

दिसंबर 2026 तक के लिए तय किए गए रोडमैप के अनुसार, राज्य के सभी क्षेत्रों की सैटेलाइट/ड्रोन मैपिंग, टीएनसीपी  से एनओसी लिंकिंग और मुख्य भू-अभिलेख पोर्टल का वृहद् अपग्रेडेशन किया जाना है। ये कदम छत्तीसगढ़ को डिजिटल राजस्व प्रशासन के क्षेत्र में एक राष्ट्रीय बेंचमार्क के रूप में स्थापित करने के लिए पूरी तरह तैयार कर रहे हैं। तकनीक, संवेदनशीलता और जवाबदेही के इस बेजोड़ संगम से छत्तीसगढ़ ने जन-केंद्रित शासन की एक नई मिसाल पेश की है।

भूमि संसाधन विभाग द्वारा राजस्व न्यायालय प्रक्रियाओं के आधुनिकीकरण पर दो दिवसीय राष्ट्रीय ‘चिंतन शिविर’ का आयोजन

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भूमि संसाधन विभाग (DoLR), भारत सरकार 31 अक्टूबर से 1 नवंबर 2025 तक पुणे स्थित यशदा (YASHADA) में दो दिवसीय राष्ट्रीय ‘चिंतन शिविर’ का आयोजन कर रहा है। यह कार्यशाला राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को एक साथ लाकर राजस्व न्यायालय प्रक्रियाओं के आधुनिकीकरण और राजस्व शब्दावली (Glossary of Revenue Terms) पर सामूहिक चर्चा के लिए एक मंच प्रदान करेगी।

भूमि लेनदेन की संख्या तेजी से बढ़ने के कारण, राजस्व न्यायालयों पर मामलों का बोझ, प्रक्रियागत विलंब और जटिलताओं में वृद्धि हो रही है, जिससे नागरिकों की आजीविका, संपत्ति अधिकार और निवेश प्रभावित हो रहे हैं। यह स्थिति मुख्य रूप से औपनिवेशिक काल से विरासत में मिली भूमि रिकॉर्ड प्रणालियों और प्रक्रियाओं के कारण और अधिक जटिल हो गई है।

इस पृष्ठभूमि में, राष्ट्रीय कार्यशाला चार प्रमुख विषयों पर केंद्रित होगी:

  1. राजस्व न्यायालय केस प्रबंधन प्रणाली (RCCMS) का आधुनिकीकरण – मामलों के शीघ्र, पारदर्शी और नागरिक-केंद्रित निपटान हेतु राज्यों के नवाचारों और तकनीकी श्रेष्ठ प्रथाओं का प्रदर्शन।

  2. एकीकृत राजस्व शब्दावली (Glossary of Revenue Terms) – परिभाषाओं और व्याख्याओं में एकरूपता लाकर भूमि प्रशासन में स्पष्टता और पारदर्शिता सुनिश्चित करना।

  3. अधिकार अभिलेख (Record of Rights - RoR) और कैडस्ट्रल मानचित्रों का मानकीकरण – ऐतिहासिक विसंगतियों को दूर करने हेतु भूमि रिकॉर्ड के लिए एक समान प्रारूप अपनाना।

  4. लिप्यंतरण एवं अनुवाद से संबंधित मुद्दे – नागरिकों के लिए बहुभाषीय भूमि रिकॉर्ड तक सुगम पहुंच सुनिश्चित करना।

यह कार्यशाला भूमि संसाधन विभाग की पहले से चल रही प्रमुख पहलों जैसे राजस्व न्यायालय प्रक्रियाओं का सरलीकरण, अधिकार अभिलेख प्रारूप का मानकीकरण, और एकीकृत राजस्व शब्दावली का निर्माण को और आगे बढ़ाएगी। यह शब्दावली 22 अनुसूचित भाषाओं में भूमि अभिलेखों को सुलभ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

‘चिंतन शिविर’ एक उच्चस्तरीय संवाद मंच के रूप में कार्य करेगा, जहां इन सुधार पहलों पर गहन चर्चा होगी। अपेक्षित परिणामों में शामिल हैं –

  • राजस्व शब्दों की एकीकृत शब्दावली का निर्माण,

  • भूमि रिकॉर्ड, पंजीकरण प्रणाली और राजस्व न्यायालयों के एकीकरण का रोडमैप,

  • और इन डिजिटल सुधारों का समर्थन करने हेतु आवश्यक विधायी संशोधनों की पहचान।

यह कार्यशाला भारत भर में राजस्व न्यायालयों के आधुनिकीकरण और भूमि प्रशासन में क्रांतिकारी बदलाव लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

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