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दूरसंचार क्षेत्र में सर्कुलर इकोनॉमी को बढ़ावा देने पर राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन

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दूरसंचार विभाग (DoT), संचार मंत्रालय ने संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) के सहयोग से नई दिल्ली में “दूरसंचार क्षेत्र में सर्कुलर इकोनॉमी को बढ़ावा देना: नीति और व्यवहार को सक्षम बनाना” शीर्षक से राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया। इस कार्यशाला में नीति निर्माता, उद्योग विशेषज्ञ, प्रौद्योगिकी प्रदाता, अकादमिक, अंतरराष्ट्रीय संगठन और मूल्य-श्रृंखला के हितधारक शामिल हुए, जिन्होंने भारत के दूरसंचार क्षेत्र में सर्कुलर इकोनॉमी प्रथाओं को तेज़ी से अपनाने के लिए विचार-विमर्श किया।

कार्यशाला का उद्देश्य विभिन्न हितधारकों के दृष्टिकोण को एकत्रित करना और दूरसंचार मूल्य-श्रृंखला में स्थायित्व और संसाधन दक्षता सुनिश्चित करने के लिए व्यावहारिक उपायों की पहचान करना था। इसमें टिकाऊ उत्पाद डिजाइन, संसाधन की कुशल उपयोगिता, जीवनचक्र प्रबंधन, डिजिटल उपकरण और वित्तपोषण तंत्र पर चर्चा हुई।

प्रारंभिक सत्र की अध्यक्षता डॉ. शिल्पी कर्मकार, परियोजना प्रबंधक, UNDP ने की, जिन्होंने कार्यशाला के उद्देश्य बताए। स्वागत भाषण और सन्दर्भ प्रस्तुत डॉ. आशीष चतुर्वेदी, प्रमुख – ACE, UNDP ने किया। इसके बाद डॉ. अंगेला लुसिज़ी, रेज़िडेंट रिप्रेज़ेंटेटिव, UNDP ने बहु-हितधारक सहयोग के महत्व पर विशेष भाषण दिया।

मुख्य भाषण देते हुए आर. एन. पालाई, सदस्य (प्रौद्योगिकी), डिजिटल कम्युनिकेशंस कमीशन और दूरसंचार विभाग के सचिव (ex-officio) ने कहा कि दूरसंचार में स्थायित्व और सर्कुलैरिटी अब वैकल्पिक नहीं बल्कि रणनीतिक आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि भारत का दूरसंचार क्षेत्र देश में कुल ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में केवल 2% योगदान देता है, लेकिन लगभग 1.2 बिलियन उपयोगकर्ताओं तक इसकी पहुँच इसे पर्यावरणीय रूप से जिम्मेदार प्रथाओं को अपनाने की जिम्मेदारी देती है।

पालाई ने सर्कुलर इकोनॉमी को केवल ऊर्जा दक्षता तक सीमित न रखते हुए दूरसंचार उत्पादों और अवसंरचना के पूरे जीवनचक्र में विस्तार देने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने ई-कचरा प्रबंधन, राइट-टू-रिपेयर और टिकाऊ डिजाइन जैसे मुद्दों पर ध्यान देने की बात कही।

डॉ. अंगेला लुसिज़ी ने UNDP के योगदान और दूरसंचार क्षेत्र में सर्कुलर इकोनॉमी योजनाओं के निर्माण में सहयोग की जानकारी दी। उन्होंने कार्यशाला को एक समयबद्ध रोडमैप तैयार करने के लिए मंच के रूप में उपयोग करने का आह्वान किया।

कार्यशाला में अरुण अग्रवाल, DDG (सैटेलाइट), DoT ने भारतीय दूरसंचार क्षेत्र में सर्कुलर इकोनॉमी एक्शन प्लान प्रस्तुत किया, जिसमें स्थायी डिजाइन, जीवनचक्र प्रबंधन, ई-कचरा न्यूनीकरण, डिजिटल ट्रैकिंग और पारदर्शी आपूर्ति श्रृंखला को सुदृढ़ करने के सुझाव दिए गए।

तकनीकी सत्रों में दो प्रमुख पैनल चर्चाएँ हुईं:

  1. “सर्कुलैरिटी और स्थायित्व के लिए दूरसंचार आपूर्ति श्रृंखला पर पुनर्विचार” – इस सत्र में नीति हस्तक्षेप, मूल्य-श्रृंखला के महत्वपूर्ण पहलू, स्थायी खरीद और उद्योग की मौजूदा प्रथाओं पर चर्चा हुई।

  2. “सर्कुलर इकोनॉमी की ओर डिजिटल उपकरण” – इसमें डिजिटल प्लेटफार्म, ब्लॉकचेन-आधारित ट्रेसबिलिटी, डेटा एनालिटिक्स, AI और IoT के उपयोग पर जोर दिया गया।

समापन सत्र में सभी प्रतिभागियों ने भारत के दूरसंचार क्षेत्र में सर्कुलर, टिकाऊ और लचीला ढांचा बनाने के लिए साझा प्रतिबद्धता व्यक्त की।

यह कार्यशाला दूरसंचार क्षेत्र में नीति, उद्योग और तकनीकी समाधानों के माध्यम से सर्कुलर इकोनॉमी को बढ़ावा देने में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुई।

खनन मंत्रालय ने ₹1,500 करोड़ की ‘क्रिटिकल मिनरल रिसाइक्लिंग प्रोत्साहन योजना’ के दिशा-निर्देश जारी किए

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नई दिल्ली – केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा 03.09.2025 को क्रिटिकल मिनरल रिसाइक्लिंग को बढ़ावा देने के लिए ₹1,500 करोड़ की प्रोत्साहन योजना को मंजूरी देने के बाद, खनन मंत्रालय ने 02.10.2025 को योजना के कार्यान्वयन हेतु विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं।

दिशा-निर्देश योजना की प्रक्रियाओं को स्पष्ट करते हैं, जिनमें रिसाइक्लिंग सिस्टम के लिए अनुमानित व्यय, प्रोत्साहन आवंटन की पद्धति, आवेदन, मूल्यांकन और भुगतान प्रक्रियाएँ, संस्थागत तंत्र और प्रदर्शन समीक्षा शामिल हैं। ये दिशा-निर्देश उद्योग और अन्य संबंधित हितधारकों के साथ विस्तृत परामर्श के बाद अंतिम रूप दिए गए हैं।

यह योजना राष्ट्रीय क्रिटिकल मिनरल मिशन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है और इसका उद्देश्य देश में द्वितीयक स्रोतों से क्रिटिकल मिनरल्स के पृथक्करण और उत्पादन के लिए रिसाइक्लिंग क्षमता विकसित करना है। पात्र फीडस्टॉक स्रोत हैं: ई-कचरा, प्रयुक्त लिथियम-आयन बैटरी (LiB) और अन्य स्क्रैप सामग्री।

यह योजना नई इकाइयों में निवेश के साथ-साथ मौजूदा इकाइयों की क्षमता विस्तार / आधुनिकीकरण और विविधीकरण पर लागू होगी। प्रोत्साहन केवल उस मूल्य श्रृंखला के लिए होगा जो क्रिटिकल मिनरल्स के वास्तविक निष्कर्षण में शामिल है।

योजना 02.10.2025 से आवेदन के लिए खुली है और आवेदन की अवधि छह (6) महीने यानी 01.04.2026 तक है। योजना दिशा-निर्देश और आवेदन लिंक खनन मंत्रालय की वेबसाइट पर उपलब्ध हैं।


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