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प्राथमिक विद्यालय सलिहाभांठा के बच्चों ने निकाली भव्य कांवड़ यात्रा, जगह-जगह हुआ स्वागत

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पटेवा- सावन माह के पावन अवसर पर प्राथमिक विद्यालय सलिहाभांठा के बच्चों ने श्रद्धा, उत्साह और धार्मिक आस्था के साथ भव्य कांवड़ यात्रा निकाली। विद्यालय प्रबंधन समिति के मार्गदर्शन तथा प्रधान पाठक योगेश निर्मलकर एवं शिक्षक रामेश्वर ढीढी के नेतृत्व में आयोजित इस धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम ने पूरे गांव में उत्साह का माहौल बना दिया।

कांवड़ यात्रा के लिए बच्चों ने आकर्षक रूप से सजी कांवड़ लेकर यात्रा प्रारंभ की। इस दौरान बच्चे भगवान शिव-पार्वती तथा विभिन्न गणों के आकर्षक वेशभूषा में नजर आए। बच्चों की मनमोहक प्रस्तुति और धार्मिक उत्साह ने ग्रामीणों का ध्यान आकर्षित किया।

जुन्ना तालाब से जल लेकर पहुंचे शिव मंदिर

विद्यालय से प्रारंभ हुई कांवड़ यात्रा जुन्ना तालाब पहुंची, जहां बच्चों ने विधि-विधान से जल लिया। इसके बाद कांवड़ यात्री बच्चे तालाब स्थित शिव मंदिर पहुंचे और पूजा-अर्चना के बाद गांव के मुख्य शिव मंदिर की ओर रवाना हुए।

पूरे रास्ते बच्चों में गजब का उत्साह देखने को मिला। कांवड़ यात्रा के दौरान ग्रामीणों ने जगह-जगह बच्चों का स्वागत किया। कई स्थानों पर ग्रामीणों ने पुष्पवर्षा कर उनका अभिनंदन किया, वहीं अनेक ग्रामीण उत्साहपूर्वक बच्चों के साथ नाचते-गाते हुए यात्रा में शामिल हुए। इससे पूरा गांव भक्तिमय वातावरण में सराबोर हो गया।

मुख्य शिव मंदिर में किया जलाभिषेक

कांवड़ यात्रा गांव के मुख्य शिव मंदिर पहुंची, जहां बच्चों ने भगवान शिव को पवित्र जल अर्पित कर जलाभिषेक किया। इस दौरान बच्चों ने श्रद्धापूर्वक भगवान शिव की आराधना की और गांव की सुख-समृद्धि एवं खुशहाली की कामना की।

विद्यालय द्वारा आयोजित इस पहल को ग्रामीणों और पालकों का भी भरपूर सहयोग मिला। कार्यक्रम ने बच्चों को धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं से जोड़ने के साथ-साथ उनमें सामूहिकता, अनुशासन, सेवा और संस्कार की भावना विकसित करने का संदेश दिया।

विद्यालय में हुई भजन संध्या

कांवड़ यात्रा पूरी करने के बाद सभी बच्चे वापस विद्यालय पहुंचे। यहां पालकों और ग्रामीणों के साथ भजन संध्या का आयोजन किया गया। भक्ति गीतों और भजनों से विद्यालय परिसर का वातावरण भक्तिमय हो गया। बच्चों, पालकों और ग्रामीणों ने उत्साहपूर्वक भजन संध्या में सहभागिता की।

कार्यक्रम के समापन पर पालकों और गांववासियों के सहयोग से प्रसाद वितरण किया गया। बच्चों सहित कार्यक्रम में उपस्थित सभी श्रद्धालुओं और आगंतुकों को प्रसाद वितरित किया गया।

ग्रामीणों के सहयोग से सफल हुआ आयोजन

कांवड़ यात्रा को सफल बनाने में विद्यालय प्रबंधन समिति, पालकों, शिक्षकों और ग्रामीणों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। कार्यक्रम में पिरीत राम साहू, पंचराम ध्रुव, भोजराम साहू, योगीराम साहू, बैगा नंद ध्रुव, भुनेश्वर साहू, भीम यादव, कार्तिक सिन्हा, उमेश सिन्हा, पूर्णिमा यादव, देवकी सिन्हा, बरतनीन दीवान, प्रमिला ध्रुव, बिसनी दीवान, हेमलता ध्रुव, तिलक यादव, भुवन साहू, तिलक साहू, उमेन्द्र दीवान, भूपेंद्र मनोज साहू, सुकदेव दीवान, लीलेश्वर साहू एवं विष्णु दीवान का विशेष सहयोग रहा।

विद्यालय परिवार ने सभी पालकों, ग्रामीणों और सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रकार के आयोजन बच्चों को अपनी भारतीय संस्कृति, धार्मिक परंपराओं और सामाजिक मूल्यों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। बच्चों की सहभागिता और ग्रामीणों के उत्साह से कांवड़ यात्रा पूरे गांव के लिए यादगार बन गई।


https://youtu.be/weoLy9hhZTs

तेंदुवा धाम में श्रीराम कथा का भव्य शुभारंभ: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने लिया संतों का आशीर्वाद

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छत्तीसगढ़ “धान का कटोरा” होने के साथ-साथ सेवा, समर्पण और आस्था की भूमि - मुख्यमंत्री साय

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज जांजगीर-चांपा जिले के शिवरीनारायण स्थित राम मिलेंगे आश्रम, तेंदुवा धाम कुरियारी में आयोजित 9 दिवसीय श्रीराम कथा में शामिल हुए। उन्होंने अपनी धर्मपत्नी कौशल्या साय के साथ आश्रम पहुंचकर विधिवत पूजा-अर्चना की तथा प्रदेशवासियों की सुख, समृद्धि एवं खुशहाली की कामना की। इस दौरान उन्होंने पद्म विभूषण से सम्मानित जगद्गुरु रामभद्राचार्य महाराज से आशीर्वाद प्राप्त किया।

मुख्यमंत्री साय ने अपने संबोधन में कहा कि छत्तीसगढ़ की पावन भूमि सदैव भगवान श्रीराम के चरणों से धन्य रही है। उन्होंने वनवास काल में भगवान श्रीराम के आगमन और माता शबरी की अद्भुत भक्ति का उल्लेख करते हुए कहा कि इस धरती ने आस्था, समर्पण और विश्वास की अनूठी परंपरा को सहेज कर रखा है। उन्होंने कहा कि तेंदुवाधाम आज धार्मिक और सांस्कृतिक जागरण का प्रमुख केंद्र बनता जा रहा है, जहां हजारों श्रद्धालु एक साथ श्रीराम कथा का श्रवण कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने इस अवसर को अत्यंत सौभाग्यशाली बताते हुए कहा कि एक ही मंच से अनेक संतों का सान्निध्य और आशीर्वाद प्राप्त होना विशेष अनुभव है। उन्होंने आश्रम परिसर में हरिवंश औषधालय एवं पंचकर्म केंद्र, श्री राम-जानकी मंडपम, हरिवंश वैदिक पाठशाला, मां दुर्गा गौ मंदिर और हनुमत प्रवेश द्वार सहित विभिन्न धार्मिक एवं सांस्कृतिक संस्थानों के लोकार्पण पर आश्रम प्रबंधन और सहयोगियों का आभार व्यक्त किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ “धान का कटोरा” होने के साथ-साथ सेवा, समर्पण और आस्था की भूमि भी है। उन्होंने अयोध्या में भगवान श्रीराम मंदिर निर्माण के दौरान छत्तीसगढ़ से 11 ट्रक चावल और चिकित्सकों की टीम के वहां पहुंचने का उल्लेख करते हुए इसे प्रदेशवासियों की गहरी श्रद्धा का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि लगभग 500 वर्षों के लंबे इंतजार के बाद भगवान श्रीराम भव्य मंदिर में विराजमान हुए हैं, जो देश की सांस्कृतिक एकता और गौरव का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि श्रीरामलला दर्शन योजना के माध्यम से हजारों श्रद्धालु अयोध्या धाम के दर्शन कर लाभान्वित हो रहे हैं।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन और जवानों के अदम्य साहस से आज प्रदेश से नक्सलवाद समाप्त हो चुका है तथा राज्य में शांति, विकास और सामाजिक समरसता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। उन्होंने कहा कि “छत्तीसगढ़िया सबले बढ़िया” यहां की संस्कृति और जीवन मूल्यों की सच्ची पहचान है।

इस अवसर पर परमपूज्य वासुदेवनंद सरस्वती महाराज, किन्नर अखाड़ा प्रमुख मां टीना सहित अनेक संत-महात्माओं की गरिमामयी उपस्थिति में विभिन्न धार्मिक-सांस्कृतिक परियोजनाओं का लोकार्पण किया गया।

राघव सेवा समिति के प्रमुख डॉ. अशोक हरिवंश ने बताया कि यह स्थल माता शबरी की जन्मभूमि शिवरीनारायण में स्थित है, जहां ‘कलिंग शैली’ में भव्य श्रीराम मंदिर का निर्माण किया जा रहा है। आश्रम में औषधालय, वैदिक विद्यालय, गौ मंदिर, पंचमुखी हनुमान मंदिर, गीता वाटिका, शबरी रसोई और निर्धन कन्या विवाह जैसी अनेक सामाजिक-धार्मिक पहल संचालित हो रही हैं। कार्यक्रम के तहत विभिन्न वर्गों - दिव्यांगजन, रक्तदाता, कुष्ठ रोगी और प्रतिभाशाली विद्यार्थियों - को समर्पित विशेष दिवस भी आयोजित किए जा रहे हैं।

कार्यक्रम में सांसद कमलेश जांगड़े, महंत रामसुंदर दास सहित अन्य जनप्रतिनिधि, अधिकारी एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।

आरंग में हर्षोल्लास से मनाया जाएगा हनुमान जन्मोत्सव, जगह-जगह होगा भोग भंडारे का आयोजन

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आरंग- मंदिरों की नगरी आरंग के हर गली मोहल्ले में स्थापित है पवन पुत्र हनुमान। जहां प्रतिदिन श्रद्धालु आते जाते मत्था टेककर कामना करते हैं। खासकर शनिवार और मंगलवार को भक्तगण यहां पहुंचकर सुंदर काण्ड और हनुमान चालीसा का जाप करते हैं। वहीं आज हनुमान जन्मोत्सव के अवसर पर नगर सहित अंचल के गांव-गांव में जगह-जगह भोग भंडारा, हनुमान चालीसा, सुंदर काण्ड पाठ, भजन कीर्तन किया जा रहा है। प्रातः से ही साधक हनुमान मंदिरो में पहुंचकर पूजा आराधना में जुट जाएंगे।

यह नगर में सबसे अधिक हनुमान जी का मंदिर है। जिनमें महामाया पारा में विराजमान उत्तरमुखी नारायणबन हनुमान, जगन्नाथ मंदिर में स्थापित दक्षिणमुखी हनुमान, गुप्ता पारा में स्थापित हनुमान, बागेश्वर मंदिर के सामने स्थापित हनुमान, पुराने सब्जी बाजार में स्थित रेणुक देव हनुमान, बरगुडी पारा का हनुमान, बस स्टैण्ड में स्थापित प्राचीन हनुमान मंदिर व प्रतिमाएं प्रमुख हैं। यही कारण है इस नगर में प्रतिवर्ष हनुमान जन्मोत्सव को बहुत ही हर्षोल्लास से मनाया जाता है।भक्त इस दिन प्रायः सभी हनुमान जी की प्रतिमाओ में सिंदूर का लेप कर विशेष रूप से पूजा अर्चना करते हैं। सुंदर काण्ड और हनुमान चालीसा का पाठ और भजन कीर्तन करते हैं। बहुत हर्षोल्लास से हनुमान जन्मोत्सव को मनाते है।


मुख्यमंत्री साय ने जुनवानी नर्मदा धाम में की पंच कुंडीय श्री रुद्र महायज्ञ की परिक्रमा

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व्यासपीठ की पूजा-अर्चना कर लिया आशीर्वाद, प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि की कामना

मुख्यमंत्री पंच कुंडीय श्री रुद्र महायज्ञ एवं श्री शिव महापुराण कथा में हुए शामिल

रायपुर- चैत्र नवरात्रि की पावन चतुर्थी तिथि पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय कबीरधाम जिले के ग्राम जुनवानी नर्मदा धाम में आयोजित पंच कुंडीय श्री रुद्र महायज्ञ एवं श्री शिव महापुराण कथा में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ विधि-विधान से यज्ञ की परिक्रमा की तथा व्यासपीठ की पूजा-अर्चना कर आशीर्वाद प्राप्त किया। मुख्यमंत्री साय ने इस धार्मिक अनुष्ठान के दौरान प्रदेशवासियों की सुख, शांति और समृद्धि की कामना करते हुए ईश्वर से प्रार्थना की। उन्होंने उपस्थित श्रद्धालुओं का आत्मीय अभिवादन किया और सभी को चैत्र नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं दीं। 

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि जिला साहू संघ द्वारा आयोजित पंच कुंडीय श्री रुद्र महायज्ञ एवं श्री शिव महापुराण कथा में शामिल होकर उन्हें अत्यंत प्रसन्नता हो रही है। उन्होंने कहा कि आज इस पावन यज्ञ में शामिल होने का अवसर मिलना उनके लिए बड़े सौभाग्य की बात है। मुख्यमंत्री साय ने अपने संबोधन में कहा कि साहू समाज एक विशाल, शिक्षित और समृद्ध समाज है, जो सदैव समाज को दिशा देने का कार्य करता रहा है। उन्होंने दानवीर भामाशाह का उल्लेख करते हुए कहा कि वे इसी समाज से थे, जिन्होंने अपने त्याग और दान से इतिहास में अमिट छाप छोड़ी है। उन्होंने आगे कहा कि रायगढ़ में पूज्य श्री सत्यनारायण बाबा भी इसी समाज से हैं, जो पिछले 28 वर्षों से खुले आसमान के नीचे तपस्या में लीन हैं। ऐसे महान संत समाज के लिए प्रेरणा स्रोत हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि जब कोई समाज संगठित होकर कार्य करता है, तो उसका लाभ केवल उस समाज तक सीमित नहीं रहता, बल्कि उससे पूरे राष्ट्र का विकास होता है। उन्होंने कहा कि साहू समाज इसी तरह संगठित और सशक्त होकर निरंतर प्रगति के पथ पर आगे बढ़ता रहेगा। 

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि यहां आयोजित रुद्र महाशिव यज्ञ एवं कथा से छत्तीसगढ़ के श्रद्धालुओं को विशेष आशीर्वाद प्राप्त होगा। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ संत-महात्माओं की तपोभूमि रही है। यह माता कौशल्या का मायका और प्रभु श्रीराम का ननिहाल है। भगवान श्रीराम ने अपने वनवास का अधिकांश समय इसी धरती पर बिताया है, वहीं माता शबरी का पावन स्थान भी छत्तीसगढ़ में स्थित है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि व्यासपीठ पर विराजमान संत-महात्माओं की कृपा से प्रदेश में सवा लाख शिवलिंग स्थापना का पावन कार्य भी किया जा रहा है, जो आध्यात्मिक चेतना को और सशक्त करेगा। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार द्वारा “रामलला दर्शन योजना” संचालित की जा रही है। छत्तीसगढ़ के लोग भगवान श्रीराम को अपना भांचा मानते हैं, इसलिए उन्हें अयोध्या धाम में रामलला के दर्शन कराने के उद्देश्य से यह योजना शुरू की गई है। अब तक 40 हजार से अधिक रामभक्त अयोध्या जाकर दर्शन कर चुके हैं। मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि “मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना” के तहत प्रदेश के बुजुर्गों को देशभर के प्रमुख तीर्थ स्थलों की यात्रा कराई जा रही है, ताकि वे अपने जीवन में धार्मिक आस्था के इन पवित्र स्थलों का दर्शन कर सकें।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र में सरकार ने कई महत्वपूर्ण विधेयक प्रस्तुत किए हैं। इनमें छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक प्रमुख है, जिसे समाज में बढ़ती संवेदनशील परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए लाया गया है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि पिछले कुछ समय से समाज के कमजोर वर्गों को निशाना बनाकर प्रलोभन, दबाव और भ्रम फैलाकर धर्मांतरण कराने की घटनाएं सामने आई हैं, जिससे सामाजिक ताने-बाने पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। इस गंभीर विषय को ध्यान में रखते हुए सरकार ने सख्त और स्पष्ट प्रावधानों के साथ यह विधेयक लागू करने का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि इस कानून के माध्यम से यह सुनिश्चित किया गया है कि किसी भी प्रकार के छल, प्रलोभन या दबाव के जरिए धर्म परिवर्तन न हो सके। साथ ही विवाह के माध्यम से धर्मांतरण की आड़ में हो रहे दुरुपयोग पर भी अब पूर्ण विराम लगेगा। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि धर्म की रक्षा और समाज की सुरक्षा ही सरकार का संकल्प है, और इसी उद्देश्य के साथ यह विधेयक लाया गया है, ताकि प्रदेश में सामाजिक सद्भाव और शांति बनी रहे।

उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि जुनवानी स्थित नर्मदा धाम के नर्मदा कुंड में स्नान करना, पूजा-अर्चना करना और ऐसे धार्मिक आयोजनों में शामिल होना क्षेत्रवासियों के लिए हमेशा से आस्था और प्रतीक्षा का विषय रहा है। उन्होंने कहा कि इस पवित्र स्थल से लोगों की गहरी भावनात्मक और धार्मिक आस्था जुड़ी हुई है। उप मुख्यमंत्री शर्मा ने कहा कि इस प्रकार के आयोजन न केवल धार्मिक आस्था को सशक्त करते हैं, बल्कि समाज में सकारात्मकता, एकता और सद्भाव का संदेश भी देते हैं। 

पंडरिया विधायक भावना बोहरा ने अपने संबोधन में कहा कि जब भी श्रीमद्भागवत, शिव महापुराण कथा एवं यज्ञ जैसे आयोजन होते हैं, तो सभी को इसमें अवश्य शामिल होना चाहिए। उन्होंने कहा कि अक्सर घर के बुजुर्ग ही कथा सुनने आते हैं, लेकिन बच्चों और युवाओं की सहभागिता भी उतनी ही जरूरी है, ताकि आने वाली पीढ़ी हमारी सनातन संस्कृति और परंपराओं से परिचित हो सके और उसे आगे बढ़ा सके।

इस अवसर पर पूर्व सांसद अभिषेक सिंह, पूर्व विधायक डॉ. सियाराम साहू सहित अन्य जनप्रतिनिधियों ने भी पंच कुंडीय श्री रुद्र महायज्ञ की परिक्रमा कर पूजा-अर्चना की और आशीर्वाद प्राप्त किया।

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