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छत्तीसगढ़ में 16 हजार कोटवारों का प्रदेशव्यापी प्रदर्शन: नियमितीकरण और ₹15,000 मासिक मानदेय की मांग

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छत्तीसगढ़ में कोटवार एसोसिएशन ऑफ छत्तीसगढ़ के आह्वान पर प्रदेश के लगभग 16,000 कोटवारों ने 23 अक्टूबर 2026 को एक दिवसीय प्रदेशव्यापी प्रदर्शन का कार्यक्रम रखा। संगठन ने जिला मुख्यालयों में धरना देकर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नाम जिला कलेक्टरों को ज्ञापन सौंपने की घोषणा की थी। नवा रायपुर के तूता धरना स्थल पर भी प्रदर्शन का आह्वान किया गया था।

यह आंदोलन कोटवारों की लंबे समय से लंबित मांगों को लेकर किया गया। संगठन का कहना है कि ग्रामीण स्तर पर शासन-प्रशासन के कामों में अहम भूमिका निभाने के बावजूद उन्हें नियमित सरकारी कर्मचारी का दर्जा और पर्याप्त आर्थिक सुरक्षा नहीं मिली है।

कोटवारों की प्रमुख चार मांगें

1. नियमित सरकारी कर्मचारी का दर्जा

कोटवारों की मांग है कि उन्हें नियमित कर्मचारी घोषित किया जाए और राजस्व विभाग में संविलियन किया जाए, ताकि उनकी सेवा को स्थायी सरकारी सेवा के रूप में मान्यता मिल सके।

2. न्यूनतम ₹15,000 मासिक मानदेय

संगठन ने महंगाई को देखते हुए पारिश्रमिक बढ़ाकर कम-से-कम ₹15,000 प्रतिमाह करने की मांग की है। फिलहाल पारिश्रमिक व्यवस्था में सेवा भूमि और श्रेणी के आधार पर अंतर होने की रिपोर्टें हैं।

3. कोटवार परिवार के पात्र सदस्यों को प्राथमिकता

संगठन चाहता है कि कोटवार की नियुक्ति या पद रिक्त होने पर नियमों के अनुसार उसके परिवार के पात्र सदस्यों को प्राथमिकता दी जाए। गैर-वंशजों की नियुक्ति में कथित अनियमितताओं पर रोक लगाने की मांग भी उठाई गई है।

4. सेवा संबंधी समस्याओं और अधिकारों का समाधान

संगठन की मांग है कि कोटवारों की लंबित सेवा समस्याओं का निराकरण किया जाए और उनके परिवारों की आर्थिक-सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ठोस निर्णय लिए जाएं। विस्तृत मांगपत्र में नियुक्ति प्रक्रिया और सेवा सुरक्षा से जुड़े विषय भी उठाए गए हैं।

पहले भी हो चुका है आंदोलन

कोटवार एसोसिएशन ने इससे पहले 3 जुलाई 2026 को तहसील स्तर पर एक दिवसीय धरना-प्रदर्शन किया था। उस दौरान भी मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर मांगों के निराकरण की अपील की गई थी।

संगठन के पदाधिकारियों के अनुसार, तीन महीने बाद भी मांगों पर संतोषजनक निर्णय नहीं होने के कारण 23 अक्टूबर को आंदोलन का दूसरा चरण आयोजित करने का फैसला लिया गया।

कोटवारों की भूमिका क्यों महत्वपूर्ण है?

कोटवार ग्रामीण क्षेत्रों में प्रशासन और स्थानीय लोगों के बीच संपर्क का महत्वपूर्ण माध्यम होते हैं। वे स्थानीय सूचनाएं पहुंचाने और राजस्व प्रशासन से जुड़े विभिन्न कार्यों में सहयोग करते हैं। संगठन का तर्क है कि उनकी जिम्मेदारियों और लंबे समय की सेवाओं के अनुरूप पारिश्रमिक तथा सेवा सुरक्षा मिलनी चाहिए।

क्या सरकार ने मांगें मान ली हैं?

उपलब्ध रिपोर्टों में 23 अक्टूबर के प्रदर्शन के आह्वान और मांगों की जानकारी है, लेकिन इन मांगों को स्वीकार करने या मानदेय बढ़ाने के संबंध में सरकार के किसी अंतिम निर्णय की पुष्टि नहीं मिली है। इसलिए ₹15,000 मासिक मानदेय को फिलहाल कोटवार संगठन की मांग के रूप में ही समझना चाहिए।


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