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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पूर्वोत्तर भारत पर केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया के लेख को किया साझा

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया द्वारा लिखे गए उस लेख को साझा किया, जिसमें उन्होंने बताया है कि किस प्रकार पूर्वोत्तर भारत दक्षिण-पूर्व एशिया के लिए भारत का “प्राकृतिक द्वार” बनता जा रहा है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि,

“इस विचारोत्तेजक लेख में केंद्रीय मंत्री @JM_Scindia ने पूर्वोत्तर भारत की यात्रा के अपने अनुभव साझा किए हैं, जहाँ उन्होंने इस क्षेत्र की प्राकृतिक सुंदरता और इसके लोगों की अटूट भावना का वर्णन किया है।

मंत्री ने पूर्वोत्तर को ‘अष्टलक्ष्मी’ के रूप में रेखांकित करते हुए बताया है कि यह क्षेत्र अब केवल भारत की सीमा नहीं, बल्कि उसका अग्रिम चेहरा बन चुका है।”

अपने लेख में सिंधिया ने विस्तार से बताया है कि किस प्रकार पूर्वोत्तर भारत अब देश की आर्थिक, सांस्कृतिक और रणनीतिक प्रगति का प्रमुख केंद्र बन रहा है। “अष्टलक्ष्मी” के रूप में प्रसिद्ध आठों राज्यों की पहचान आज विकास, कनेक्टिविटी और क्षेत्रीय सहयोग की दिशा में नए मानक स्थापित कर रही है।

प्रधानमंत्री द्वारा इस लेख को साझा किए जाने से यह संदेश स्पष्ट होता है कि पूर्वोत्तर भारत केवल भौगोलिक दृष्टि से नहीं, बल्कि भारत के विकास और दक्षिण-पूर्व एशिया से जुड़ाव के सेतु के रूप में भी अहम भूमिका निभा रहा है।

https://x.com/PMOIndia/status/1987393072146358424?ref_src=twsrc%5Etfw%7Ctwcamp%5Etweetembed%7Ctwterm%5E1987393072146358424%7Ctwgr%5E929000f5d7d8e33223e2815070c166a54ceae55b%7Ctwcon%5Es1_c10&ref_url=https%3A%2F%2Fwww.pib.gov.in%2FPressReleasePage.aspx%3FPRID%3D2187969

भारत-नेपाल ऊर्जा सहयोग को मिला नया आयाम: नई दिल्ली में हुई बैठक में सीमापार विद्युत प्रसारण परियोजनाओं पर संयुक्त समझौते पर हस्ताक्षर

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नेपाल के ऊर्जा, जल संसाधन एवं सिंचाई मंत्री, महामहिम कुलमान घिसिंग ने आज नई दिल्ली में भारत के विद्युत तथा आवास एवं शहरी कार्य मंत्री, मनोहर लाल से मुलाकात की। बैठक का उद्देश्य दोनों देशों के बीच ऊर्जा क्षेत्र में चल रहे सहयोग को और मजबूत करना था।

बैठक के दौरान नेपाल में जलविद्युत परियोजनाओं के विकास की प्रगति सहित कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई। दोनों पक्षों ने क्षेत्रीय ग्रिड कनेक्टिविटी पहलों पर भी विचार-विमर्श किया, जिनका उद्देश्य सीमापार बिजली व्यापार को सुगम बनाना, ऊर्जा सुरक्षा को सुदृढ़ करना और भारत-नेपाल के बीच स्वच्छ ऊर्जा संसाधनों के एकीकरण को बढ़ावा देना है।

मनोहर लाल और कुलमान घिसिंग की उपस्थिति में, भारत की महारत्न केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र की इकाई POWERGRID और नेपाल विद्युत प्राधिकरण (NEA) के बीच संयुक्त उपक्रम (Joint Venture) और शेयरधारक समझौते (Shareholders’ Agreements) पर हस्ताक्षर किए गए। ये समझौते भारत और नेपाल में दो संयुक्त उपक्रम संस्थाओं की स्थापना के लिए हैं, जो उच्च क्षमता वाले सीमापार विद्युत प्रसारण ढांचे के विकास हेतु गठित की जाएंगी।

प्रस्तावित सीमापार विद्युत प्रसारण प्रणाली परियोजनाओं में इनरुवा (नेपाल) – न्यू पूर्णिया (भारत) 400 केवी डबल सर्किट (Quad Moose) ट्रांसमिशन लिंक और लम्की (दोदोधारा) (नेपाल) – बरेली (भारत) 400 केवी डबल सर्किट (Quad Moose) ट्रांसमिशन लिंक का विकास शामिल है। इन परियोजनाओं के पूर्ण होने पर भारत और नेपाल के बीच बिजली विनिमय क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी, जिससे क्षेत्रीय ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी, ग्रिड की लचीलापन बढ़ेगा और दोनों देशों की सतत आर्थिक वृद्धि में योगदान मिलेगा।

आज की बैठक भारत-नेपाल ऊर्जा सहयोग में बढ़ती गति को दर्शाती है, जो दशकों पुराने राजनयिक संबंधों और सतत विकास व ऊर्जा सुरक्षा के प्रति साझा प्रतिबद्धता पर आधारित है।

नारायणपुर-अबूझमाड़ को महाराष्ट्र से जोड़ेगा नेशनल हाईवे 130-डी

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कुतुल से नीलांगुर महाराष्ट्र बॉर्डर तक एनएच-130-डी का होगा निर्माण

नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकास की गति तेज करने के लिए सरकार सतत प्रयासरत – मुख्यमंत्री साय

रायपुर- बस्तर अंचल को महाराष्ट्र से जोड़ने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग 130-डी के निर्माण को नई गति मिली है। छत्तीसगढ़ शासन ने कुतुल से नीलांगुर (महाराष्ट्र सीमा) तक 21.5 किलोमीटर हिस्से के निर्माण के लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी कर ली है। इस सड़क के निर्माण के लिए न्यूनतम टेंडर देने वाले ठेकेदार से अनुबंध की प्रक्रिया शर्तों सहित पूरी करने के निर्देश लोक निर्माण विभाग मंत्रालय द्वारा प्रमुख अभियंता, राष्ट्रीय राजमार्ग परिक्षेत्र रायपुर को दिए गए हैं। कुल तीन खंडों में निर्मित होने वाले 21.5 किलोमीटर सड़क के निर्माण हेतु लगभग 152 करोड़ रुपए न्यूनतम टेंडर दर प्राप्त हुई है, जिसे छत्तीसगढ़ शासन ने मंजूरी प्रदान कर दी है।

यह उल्लेखनीय है कि कुतुल, नारायणपुर जिले के अबूझमाड़ क्षेत्र में स्थित है और कुतुल से महाराष्ट्र सीमा पर स्थित नीलांगुर की दूरी 21.5 किलोमीटर है। यह नेशनल हाईवे 130-डी का हिस्सा है। इस सड़क का निर्माण टू-लेन पेव्ड शोल्डर सहित किया जाएगा।

उल्लेखनीय है कि एनएच-130डी राष्ट्रीय राजमार्ग है, जिसकी कुल लंबाई लगभग 195 किलोमीटर है। यह एनएच-30 का शाखा मार्ग (स्पर रूट) है। यह कोण्डागांव से शुरू होकर नारायणपुर, कुतुल होते हुए नीलांगुर (महाराष्ट्र सीमा) तक जाता है। आगे महाराष्ट्र में यह बिंगुंडा, लहरे, धोदराज, भमरगढ़, हेमा, लकासा होते हुए आलापल्ली तक पहुँचता है, जहाँ यह एनएच-353डी से जुड़ जाता है। इस मार्ग के विकसित होने से बस्तर क्षेत्र सीधे राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क से जुड़ जाएगा और व्यापार, पर्यटन एवं सुरक्षा को बड़ी मजबूती प्राप्त होगी।

नेशनल हाईवे 130-डी का कोण्डागांव से नारायणपुर तक का लगभग 50 किमी हिस्सा निर्माणाधीन है। नारायणपुर से कुतुल की दूरी 50 किमी है और वहाँ से महाराष्ट्र सीमा स्थित नीलांगुर तक 21.5 किमी की दूरी है। इस राष्ट्रीय राजमार्ग की कुल लंबाई 195 किमी है, जिसमें से लगभग 122 किमी का हिस्सा कोण्डागांव-नारायणपुर से कुतुल होते हुए नीलांगुर तक छत्तीसगढ़ राज्य में आता है। इस सड़क के बन जाने से बस्तर अंचल को महाराष्ट्र से सीधा और मजबूत सड़क संपर्क मिलेगा तथा नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षित एवं सुगम यातायात सुविधा सुलभ हो सकेगी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के सहयोग से इस नेशनल हाईवे के अबूझमाड़ इलाके में स्थित हिस्से के लिए फॉरेस्ट क्लियरेंस और निर्माण की अनुमति प्राप्त हुई, जिससे इस महत्वाकांक्षी परियोजना के निर्माण का रास्ता खुल गया है। राष्ट्रीय राजमार्ग 130-डी केवल सड़क नहीं बल्कि बस्तर अंचल की प्रगति का मार्ग है। हमारी सरकार ने इस परियोजना को तेजी देने के लिए लगातार प्रयास किए हैं। इस सड़क से बस्तर के लोगों को सीधा लाभ मिलेगा। यह सड़क न केवल छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र को जोड़ेगी, बल्कि बस्तर अंचल के सामाजिक एवं आर्थिक विकास में भी अहम भूमिका निभाएगी। नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकास की गति तेज करने के लिए यह परियोजना मील का पत्थर साबित होगी।

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