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विशाखापत्तनम में राष्ट्रीय समुद्री खाद्य निर्यात कार्यशाला आयोजित, 5 वर्षों में 30 अरब डॉलर के निर्यात का लक्ष्य

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विशाखापत्तनम- वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के वाणिज्य विभाग ने मत्स्य पालन विभाग तथा खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय (MoFPI) के सहयोग से 5-6 जून 2026 को विशाखापत्तनम में राष्ट्रीय समुद्री खाद्य (सीफूड) निर्यात कार्यशाला का आयोजन किया। दो दिवसीय इस कार्यशाला में मूल्य संवर्धन, स्थिरता, बाजार पहुंच, नवाचार और अवसंरचना विकास के माध्यम से भारत के समुद्री खाद्य निर्यात को बढ़ाने पर व्यापक विचार-विमर्श किया गया।

कार्यशाला में एन. चंद्रबाबू नायडू,पीयूष गोयल,राजीव रंजन सिंह,किंजारापु राममोहन नायडू,चिराग पासवान सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति शामिल हुए।

उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि समुद्री खाद्य निर्यात को बढ़ावा देने के लिए सरकार समन्वित दृष्टिकोण के साथ कार्य कर रही है। उन्होंने बताया कि पिछले एक दशक में भारत के समुद्री उत्पाद निर्यात के मूल्य में लगभग 70 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। वर्तमान में वैश्विक समुद्री खाद्य व्यापार में भारत की हिस्सेदारी लगभग 4 प्रतिशत है। उन्होंने अगले पांच वर्षों में 30 अरब अमेरिकी डॉलर के समुद्री खाद्य निर्यात का लक्ष्य हासिल करने के लिए मूल्य संवर्धन, ब्रांडिंग, गुणवत्ता सुधार, स्थिरता और नए निर्यात बाजारों पर विशेष ध्यान देने का आह्वान किया।

पीयूष गोयल ने रेडी-टू-ईट और रेडी-टू-कुक उत्पादों सहित मूल्य संवर्धित समुद्री खाद्य उत्पादों की हिस्सेदारी बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने निर्यातकों से हाल ही में संपन्न मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) के माध्यम से उपलब्ध वैश्विक बाजार अवसरों का लाभ उठाने का आग्रह किया।

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने मत्स्य पालन और जलीय कृषि क्षेत्र में राज्य की अग्रणी भूमिका तथा समुद्री खाद्य निर्यात में उसके महत्वपूर्ण योगदान को रेखांकित किया। उन्होंने आंध्र प्रदेश को सतत जलीय कृषि और समुद्री खाद्य निर्यात का वैश्विक केंद्र बनाने की प्रतिबद्धता दोहराई।

केंद्रीय मत्स्य पालन मंत्री राजीव रंजन सिंह ने बताया कि भारत में मछली उत्पादन वर्ष 2012-13 के 95.8 लाख टन से बढ़कर 2024-25 में लगभग 198 लाख टन तक पहुंच गया है। उन्होंने कहा कि वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारत का समुद्री खाद्य निर्यात लगभग 73,890 करोड़ रुपये (8.46 अरब अमेरिकी डॉलर) तक पहुंच गया है। फ्रोजन श्रिम्प (झींगा) देश का प्रमुख निर्यात उत्पाद बना हुआ है।

केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री किंजारापु राममोहन नायडू ने उच्च मूल्य वाले समुद्री खाद्य निर्यात के लिए मजबूत लॉजिस्टिक्स और एयर कार्गो अवसंरचना की आवश्यकता पर बल दिया। वहीं खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री चिराग पासवान ने समुद्री खाद्य क्षेत्र में मूल्य संवर्धन, प्रसंस्करण, ब्रांडिंग और तकनीकी नवाचार की अपार संभावनाओं को रेखांकित किया।

मत्स्य पालन विभाग के सचिव डॉ. अभिलक्ष लिक्खी ने निर्यात पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत बनाने के लिए सभी हितधारकों के समन्वित प्रयासों की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने अवसंरचना विकास, प्रमाणन, नवाचार, मूल्य संवर्धन और बाजार पहुंच को वैश्विक प्रतिस्पर्धा बढ़ाने का प्रमुख आधार बताया।

कार्यशाला में केंद्र एवं राज्य सरकारों के वरिष्ठ अधिकारियों, विभिन्न संस्थानों, समुद्री खाद्य निर्यातकों, प्रसंस्करण इकाइयों, उद्योग संगठनों, स्टार्टअप्स, शोधकर्ताओं तथा जलीय कृषि किसानों ने भाग लिया। इस दौरान प्रधानमंत्री मत्स्य किसान समृद्धि सह-योजना (PMKSSY), किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) और अन्य सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों को भी लाभ वितरित किए गए।

चर्चा सत्रों में रोग प्रबंधन, बढ़ती उत्पादन लागत, गुणवत्तापूर्ण बीज उपलब्धता, कोल्ड चेन अवसंरचना, लॉजिस्टिक्स, प्रमाणन, ट्रेसबिलिटी और सतत मत्स्य पालन जैसे मुद्दों पर विस्तार से विचार किया गया। दूसरे दिन तकनीकी सत्रों में ट्रेसबिलिटी सिस्टम, सतत प्रमाणन, मूल्य संवर्धन, निर्यात संवर्धन, गहरे समुद्र में मत्स्य पालन तथा समुद्री खाद्य क्षेत्र के लिए संभावित उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI) ढांचे पर चर्चा हुई।

कार्यशाला का समापन समुद्री खाद्य क्षेत्र में स्थिरता, ट्रेसबिलिटी, मूल्य संवर्धन, निर्यात अवसंरचना, नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा देने की साझा प्रतिबद्धता के साथ हुआ। कार्यशाला से प्राप्त सुझावों को भारत के समुद्री खाद्य निर्यात की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने तथा विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

मत्स्य पालन विभाग ने नई दिल्ली में ‘सीफूड एक्सपोर्टर्स मीट 2026’ का किया आयोजन

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मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय के अंतर्गत मत्स्य पालन विभाग ने अंबेडकर भवन, नई दिल्ली में सीफूड एक्सपोर्टर्स मीट 2026 का आयोजन किया। इस बैठक में केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह, राज्य मंत्री प्रो. एस.पी. सिंह बघेल और जॉर्ज कुरियन सहित कई वरिष्ठ अधिकारी और उद्योग प्रतिनिधि शामिल हुए।

इस मीट का उद्देश्य सरकार और उद्योग के बीच संवाद स्थापित करना, निर्यातकों की समस्याओं को समझना तथा बाजार विस्तार, मूल्य संवर्धन और निर्यात बढ़ाने के उपायों पर चर्चा करना था।

प्रमुख बिंदु:

  • केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह ने निर्यातकों के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारत के सीफूड निर्यात में मजबूत वृद्धि हुई है।

  • उन्होंने नए बाजारों की खोज, उत्पाद विविधीकरण और सख्त गुणवत्ता मानकों (जैसे एंटीबायोटिक प्रतिबंध और ट्रेसबिलिटी) के पालन पर जोर दिया।

  • अंडमान-निकोबार, EEZ और गहरे समुद्र में टूना जैसी उच्च मूल्य वाली प्रजातियों के निर्यात की संभावनाओं पर प्रकाश डाला गया।

  • बेहतर कोल्ड-चेन, पैकेजिंग, प्रोसेसिंग और वैल्यू एडिशन को बढ़ावा देने की आवश्यकता बताई गई।

  • निर्यातकों को ₹1 लाख करोड़ के लक्ष्य को हासिल करने के लिए प्रोत्साहित किया गया।

अन्य महत्वपूर्ण बातें:

  • राज्य मंत्री जॉर्ज कुरियन ने मत्स्य क्षेत्र को उच्च मूल्य और उच्च मांग वाले सेक्टर के रूप में विकसित करने पर जोर दिया।

  • सचिव डॉ. अभिलक्ष लिक्खी ने बताया कि लगभग 40 देशों के साथ मार्केट डाइवर्सिफिकेशन रणनीति पर काम किया जा रहा है।

  • रेडी-टू-ईट और वैल्यू एडेड उत्पादों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

चुनौतियां और सुझाव:

  • निर्यातकों ने मार्केट एक्सेस, उच्च अनुपालन लागत, कोल्ड-चेन की कमी और लॉजिस्टिक्स समस्याओं को प्रमुख चुनौतियां बताया।

  • कैच सर्टिफिकेट प्रक्रिया को सरल बनाने, समुद्री शैवाल (सीवीड) खेती को बढ़ावा देने और फिश फीड उत्पादन में सुधार की मांग उठाई गई।

पृष्ठभूमि:

  • भारत का सीफूड निर्यात पिछले 11 वर्षों में औसतन 7% वार्षिक वृद्धि के साथ बढ़ा है।

  • 2013-14 में ₹30,213 करोड़ से बढ़कर 2024-25 में ₹62,408 करोड़ हो गया।

  • झींगा (श्रिम्प) निर्यात का इसमें सबसे बड़ा योगदान है।

  • भारत लगभग 130 देशों में 350 से अधिक उत्पाद निर्यात करता है।

यह बैठक भारत के सीफूड निर्यात को और मजबूत करने तथा वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

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