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PM-SETU के तहत ITI आधुनिकीकरण को बड़ी मंजूरी, राजस्थान-UP-तेलंगाना के लिए ₹735.70 करोड़ के निवेश को स्वीकृति

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नई दिल्ली- देश में औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (ITI) को आधुनिक और रोजगारपरक बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। प्रधानमंत्री स्किलिंग एंड एम्प्लॉयबिलिटी ट्रांसफॉर्मेशन थ्रू अपग्रेडेड ITIs (PM-SETU) योजना के तहत 5वीं राष्ट्रीय संचालन समिति (NSC) की बैठक में राजस्थान, उत्तर प्रदेश और तेलंगाना के ITI क्लस्टरों के लिए कुल ₹735.70 करोड़ के निवेश प्रस्तावों को मंजूरी दी गई।

बैठक की अध्यक्षता कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय (MSDE) की सचिव श्रीमती देबाश्री मुखर्जी ने की। बैठक में प्रशिक्षण महानिदेशालय (DGT) के महानिदेशक दिलीप कुमार, अतिरिक्त सचिव एवं वित्तीय सलाहकार जी. मधुमिता दास, संयुक्त सचिव मानसी सहाय ठाकुर सहित मंत्रालय और राज्य सरकारों के वरिष्ठ अधिकारी, बहुपक्षीय विकास बैंकों के प्रतिनिधि और उद्योग जगत के साझेदार शामिल हुए।

9 ITI क्लस्टरों में अब तक ₹2,171 करोड़ का निवेश

5वीं NSC की मंजूरी के बाद PM-SETU के तहत अब तक 9 ITI क्लस्टरों के लिए कुल ₹2,171 करोड़ के निवेश को मंजूरी मिल चुकी है। सरकार का लक्ष्य इन संस्थानों को आधुनिक सुविधाओं, नई तकनीकों और उद्योग की बदलती जरूरतों के अनुरूप तैयार करना है।

PM-SETU के तहत इंडस्ट्री-लेड हब एंड स्पोक मॉडल अपनाया जा रहा है। इसमें एक प्रमुख Hub ITI के साथ कई Spoke ITI को जोड़ा जाता है, जिससे संसाधनों, प्रशिक्षण और आधुनिक तकनीक का बेहतर समन्वय हो सके।

राजस्थान को ₹241 करोड़ की मंजूरी

राजस्थान के भिवाड़ी ITI क्लस्टर के लिए ₹241 करोड़ के Strategic Investment Plan (SIP) को मंजूरी दी गई है। इसे H.G. Infra Engineering Limited (HGIEL) ने प्रस्तुत किया था।

इस क्लस्टर में Government ITI Bhiwadi को Hub ITI बनाया गया है, जबकि Government ITI Alwar, Neemrana, Tijara और Kishangarh Bas को Spoke ITI के रूप में शामिल किया गया है।

तेलंगाना के लिए ₹254.30 करोड़

तेलंगाना के Medchal ITI क्लस्टर के लिए ₹254.30 करोड़ के निवेश प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। यह प्रस्ताव ZEN Technologies Limited ने प्रस्तुत किया था।

यह प्रस्ताव पहले 4वीं NSC बैठक में कुछ स्पष्टीकरणों के अभाव में टाल दिया गया था। बाद में कोर्स स्ट्रक्चर, वित्तीय गणना, पात्रता, दस्तावेज और सिविल वर्क्स से जुड़े विस्तृत स्पष्टीकरण दिए गए, जिसके बाद समिति ने जवाबों को संतोषजनक मानते हुए प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान की।

इस क्लस्टर में Government ITI Medchal Hub के रूप में होगा, जबकि Alwal, Shameerpet, Kukunoorpally और Siddipet ITI को Spoke संस्थानों के रूप में शामिल किया गया है।

उत्तर प्रदेश के मेरठ ITI क्लस्टर को ₹240.40 करोड़

उत्तर प्रदेश के Meerut ITI क्लस्टर के लिए ₹240.40 करोड़ के Strategic Investment Plan को भी मंजूरी मिली है। यह प्रस्ताव National Skill Development Corporation (NSDC) ने प्रस्तुत किया था।

इस क्लस्टर में Government ITI, Saket, Meerut को Hub ITI बनाया गया है। इसके साथ Ghaziabad, Hapur, Gautam Buddha Nagar और Baghpat के Government ITI को Spoke ITI के रूप में जोड़ा गया है।

उद्योग की भागीदारी से बदलेगा ITI का स्वरूप

PM-SETU का उद्देश्य सरकारी ITI को आधुनिक तकनीक, बेहतर आधारभूत ढांचे और उद्योग की जरूरतों के अनुरूप प्रशिक्षण सुविधाओं से लैस करना है। स्वीकृत योजनाओं में इन्फ्रास्ट्रक्चर का आधुनिकीकरण, मौजूदा ट्रेड्स का अपग्रेडेशन, नए लॉन्ग-टर्म और शॉर्ट-टर्म कोर्स शुरू करना तथा संस्थानों की संचालन क्षमता मजबूत करना शामिल है।

इन योजनाओं से ITI में पढ़ने वाले युवाओं को उभरती तकनीकों और बदलती औद्योगिक जरूरतों के अनुरूप प्रशिक्षण मिलने की उम्मीद है। इससे रोजगार के नए अवसरों के लिए युवाओं की तैयारी को भी मजबूती मिलेगी।

राजस्थान बना PM-SETU के तहत SHA साइन करने वाला पहला राज्य

बैठक के दौरान एक महत्वपूर्ण उपलब्धि भी हासिल हुई। H.G. Infra Engineering Limited, राजस्थान सरकार और कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय (भारत सरकार) के बीच Shareholders' Agreement (SHA) पर हस्ताक्षर किए गए।

राजस्थान के कौशल, रोजगार एवं उद्यमिता विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव संदीप वर्मा की मौजूदगी में हुए इस समझौते के साथ भिवाड़ी ITI क्लस्टर में PM-SETU के तहत कार्यान्वयन की औपचारिक शुरुआत हो गई। इसके साथ राजस्थान PM-SETU के तहत SHA पर हस्ताक्षर करने वाला देश का पहला राज्य बन गया है।

युवाओं को भविष्य की नौकरियों के लिए तैयार करने पर जोर

PM-SETU केंद्र सरकार की प्रमुख कौशल विकास योजनाओं में से एक है, जिसका उद्देश्य ITI इकोसिस्टम को उद्योग के साथ जोड़कर आधुनिक बनाना है। योजना के तहत बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर, आधुनिक प्रशिक्षण कार्यक्रम और उद्योग आधारित कौशल के जरिए युवाओं की रोजगार क्षमता (Employability) बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।

राजस्थान, उत्तर प्रदेश और तेलंगाना के तीन ITI क्लस्टरों के लिए ₹735.70 करोड़ की ताजा मंजूरी को देश में आधुनिक, उद्योग-उन्मुख और भविष्य के रोजगार बाजार के लिए तैयार ITI विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

जयपुर में CJP टीम पर हमले का मामला: आशुतोष रांका पर मारपीट का आरोप, ग्रामीणों ने लगाए गंभीर आरोप

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जयपुर- राजस्थान की राजधानी जयपुर में शुक्रवार, 21 अगस्त 2026 को सरकारी स्कूल की स्थिति का जायजा लेने पहुंची कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की टीम और स्थानीय ग्रामीणों के बीच विवाद ने तूल पकड़ लिया। बगरू क्षेत्र के रामपुरा-कंवरपुरा गांव में हुई इस घटना में CJP के सह-संयोजक आशुतोष रांका समेत पार्टी के कार्यकर्ताओं को ग्रामीणों के विरोध का सामना करना पड़ा। दोनों पक्षों की ओर से घटना को लेकर एक-दूसरे पर गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं।

सरकारी स्कूल का जायजा लेने पहुंची थी CJP टीम

जानकारी के मुताबिक, CJP की टीम अपने ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान के तहत जयपुर के ग्रामीण इलाकों में सरकारी स्कूलों की स्थिति का जायजा लेने पहुंची थी। रामपुरा-कंवरपुरा गांव के सरकारी स्कूल का निरीक्षण भी इसी अभियान का हिस्सा था।

CJP की ओर से स्कूल की बदहाल स्थिति और बुनियादी सुविधाओं को लेकर सवाल उठाए गए हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, संबंधित स्कूल की इमारत को असुरक्षित घोषित किए जाने के बाद बच्चों की कक्षाएं वैकल्पिक स्थान पर संचालित होने की बात भी सामने आई है।

लेकिन टीम के गांव पहुंचते ही स्थानीय लोगों ने इसका विरोध शुरू कर दिया। देखते ही देखते मामला कहासुनी से बढ़कर धक्का-मुक्की और कथित मारपीट तक पहुंच गया।

CJP का आरोप- बीजेपी समर्थकों ने बनाया निशाना

घटना के बाद CJP ने आरोप लगाया कि उनकी टीम पर पहले से योजनाबद्ध तरीके से हमला किया गया। पार्टी नेताओं का दावा है कि हमला करने वाले सामान्य ग्रामीण नहीं, बल्कि बीजेपी समर्थक लोग थे।

CJP नेताओं के मुताबिक, कार्यकर्ताओं के साथ मारपीट की गई, उन्हें गांव से बाहर खदेड़ा गया और वाहनों को भी नुकसान पहुंचाया गया। आशुतोष रांका ने आरोप लगाया कि उनके साथ मारपीट की गई और कुछ कार्यकर्ताओं को चोटें आईं।

CJP की ओर से यह भी आरोप लगाया गया कि पुलिस मौके पर मौजूद होने के बावजूद स्थिति को नियंत्रित करने में प्रभावी हस्तक्षेप नहीं कर पाई।

ग्रामीणों ने CJP के आरोपों को बताया गलत

दूसरी ओर, ग्रामीणों ने CJP के आरोपों को खारिज करते हुए पूरी घटना की अलग तस्वीर पेश की है। ग्रामीणों का कहना है कि CJP की टीम जिस तरह गांव में पहुंची और गतिविधियां कर रही थी, उससे स्थानीय लोगों में नाराजगी पैदा हुई।

ग्रामीणों की ओर से दावा किया गया कि CJP कार्यकर्ताओं के पास हथियार मौजूद थे और गांव में उन्होंने कथित तौर पर ‘देश विरोधी’ नारे लगाए। हालांकि, ये ग्रामीणों के आरोप हैं और इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है।

गाड़ियों के शीशे खुद तोड़ने का भी दावा

इस विवाद में ग्रामीणों ने CJP पर ही एक और गंभीर आरोप लगाया है। उनका दावा है कि टीम के सदस्यों ने कथित तौर पर अपनी ही गाड़ियों के शीशे खुद तोड़े, ताकि घटना को हमले के रूप में पेश किया जा सके।

ग्रामीणों का कहना है कि उनके ऊपर हमला करने या वाहनों में तोड़फोड़ करने के आरोप सही नहीं हैं। हालांकि, इस दावे की भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और घटना से जुड़े वीडियो तथा अन्य साक्ष्यों के आधार पर ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

CJP ने बताई स्कूल की बदहाल स्थिति

विवाद के बीच CJP का कहना है कि उसका उद्देश्य किसी राजनीतिक दल से टकराव करना नहीं, बल्कि सरकारी स्कूलों की स्थिति को सामने लाना है।

पार्टी की टीम जिस स्कूल का निरीक्षण करने पहुंची थी, उसकी हालत को लेकर पहले से सवाल उठ रहे थे। रिपोर्टों में स्कूल भवन के असुरक्षित होने और वैकल्पिक व्यवस्था में पढ़ाई कराए जाने की बात सामने आई है। CJP का दावा है कि वह इसी तरह के स्कूलों की स्थिति को जनता और सरकार के सामने लाने के लिए अभियान चला रही है।

आशुतोष रांका ने सरकार को दिया अल्टीमेटम

घटना के बाद आशुतोष रांका ने राजस्थान सरकार और शिक्षा मंत्री मदन दिलावर पर भी निशाना साधा। CJP की ओर से आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है।

रिपोर्टों के मुताबिक, रांका ने सरकार को 48 घंटे का अल्टीमेटम देते हुए कथित हमलावरों की गिरफ्तारी की मांग की है। CJP ने मांग पूरी नहीं होने पर राजस्थान में व्यापक आंदोलन शुरू करने की चेतावनी भी दी है।

राजनीतिक बयानबाजी भी तेज

घटना के बाद मामला सिर्फ स्थानीय विवाद तक सीमित नहीं रहा। CJP नेताओं ने बीजेपी पर सीधे आरोप लगाए, जबकि ग्रामीणों की ओर से CJP की गतिविधियों और उनके दावों पर सवाल उठाए गए।

आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल ने भी घटना को लेकर बीजेपी पर निशाना साधा और CJP कार्यकर्ताओं पर कथित हमले की आलोचना की।

इस तरह सरकारी स्कूल के निरीक्षण से शुरू हुआ विवाद अब राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप और कानून-व्यवस्था के मुद्दे में बदलता दिखाई दे रहा है।

आखिर विवाद की असली वजह क्या है?

पूरे मामले में फिलहाल दोनों पक्षों के दावे एक-दूसरे से बिल्कुल अलग हैं।

CJP का पक्ष:

  • टीम स्कूल की स्थिति देखने पहुंची थी।

  • ग्रामीणों ने उन्हें रोककर कथित तौर पर मारपीट की।

  • वाहनों में तोड़फोड़ और पथराव किया गया।

  • हमले के पीछे बीजेपी समर्थकों के होने का आरोप है।

  • पुलिस पर पर्याप्त कार्रवाई नहीं करने का आरोप लगाया गया है।

ग्रामीणों का पक्ष:

  • CJP की टीम के आने का स्थानीय लोगों ने विरोध किया।

  • ग्रामीणों ने CJP के कार्यकर्ताओं पर हथियार रखने और कथित ‘देश विरोधी’ नारे लगाने का आरोप लगाया।

  • ग्रामीणों ने CJP के वाहनों के शीशे खुद तोड़े जाने का दावा किया।

  • बीजेपी से जुड़े होने के आरोपों को ग्रामीणों ने खारिज किया है।

इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। इसलिए घटना की वास्तविक परिस्थितियां पुलिस जांच और उपलब्ध वीडियो/अन्य साक्ष्यों से ही स्पष्ट होंगी।

जांच के बाद साफ होगी तस्वीर

जयपुर की इस घटना ने सरकारी स्कूलों की स्थिति, राजनीतिक संगठनों के स्कूल निरीक्षण और ग्रामीण इलाकों में राजनीतिक टकराव को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि CJP टीम पर वास्तव में किसने हमला किया, वाहनों में तोड़फोड़ किसने की और ग्रामीणों द्वारा लगाए गए हथियार व कथित नारेबाजी के आरोपों में कितनी सच्चाई है। दोनों पक्षों के परस्पर विरोधी दावों के बीच निष्पक्ष जांच से ही पूरी तस्वीर सामने आ सकेगी।

https://youtube.com/shorts/i5VV-v__PeQ?feature=share

निष्कर्ष

जयपुर के रामपुरा-कंवरपुरा गांव में CJP टीम के स्कूल निरीक्षण के दौरान हुआ विवाद अब राजनीतिक मुद्दा बन चुका है। आशुतोष रांका और CJP ने बीजेपी समर्थकों पर हमले का आरोप लगाया है, जबकि ग्रामीणों ने इन आरोपों को खारिज करते हुए CJP कार्यकर्ताओं पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

एक तरफ CJP ने कार्रवाई नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी दी है, तो दूसरी तरफ ग्रामीण अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को गलत बता रहे हैं। ऐसे में अब पुलिस और प्रशासन की जांच अहम होगी, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि शुक्रवार को गांव में वास्तव में क्या हुआ था।

राजस्थान और तेलंगाना के लिए कृषि योजनाओं के तहत 605.71 करोड़ रुपये की मंजूरी

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भोपाल- केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रधानमंत्री राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (PM-RKVY) और कृषोन्नति योजना (KY) के तहत राजस्थान और तेलंगाना के लिए बड़ी वित्तीय मंजूरियों को स्वीकृति दी है। किसानों के हित, योजनाओं की प्रगति और व्यय की स्थिति को ध्यान में रखते हुए राजस्थान को 340.59 करोड़ रुपये तथा तेलंगाना को 265.12 करोड़ रुपये की राशि आवंटित की गई है।

चौहान ने आज भोपाल से राजस्थान के कृषि मंत्री किरोड़ी लाल मीणा और तेलंगाना के कृषि मंत्री तुम्मला नागेश्वर राव के साथ वर्चुअल बैठक की। बैठक में दोनों राज्यों के लिए PM-RKVY और कृषोन्नति योजना के तहत महत्वपूर्ण वित्तीय स्वीकृतियां जारी की गईं। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण सचिव अतिश चंद्र सहित केंद्र और दोनों राज्यों के वरिष्ठ कृषि अधिकारी भी बैठक में शामिल हुए।

ये स्वीकृतियां दोनों राज्यों की प्रोजेक्ट अप्रूवल कमेटी (PAC) बैठकों में स्वीकृत वार्षिक कार्य योजनाओं, पहली मदर सैंक्शन के उपयोग और अब तक हुए व्यय की समीक्षा के बाद जारी की गईं।

राजस्थान को 340.59 करोड़ रुपये

राजस्थान के लिए 20 अप्रैल 2026 को हुई PAC बैठक में वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 849.37 करोड़ रुपये की वार्षिक कार्य योजना को मंजूरी दी गई थी। इसमें केंद्र का हिस्सा 509.62 करोड़ रुपये था।

इसके बाद 4 मई 2026 को राज्य के लिए 216.13 करोड़ रुपये की पहली मदर सैंक्शन जारी की गई। अब तक राजस्थान द्वारा इसमें 164.39 करोड़ रुपये, यानी 76.06 प्रतिशत राशि खर्च की जा चुकी है।

केंद्रीय मंत्री की मंजूरी के बाद राजस्थान को कुल 340.59 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। इसमें 216.12 करोड़ रुपये RKVY तथा 124.47 करोड़ रुपये कृषोन्नति योजना के तहत शामिल हैं।

 शिवराज सिंह चौहान ने राजस्थान सरकार को कृषि के व्यापक विकास के लिए शुभकामनाएं दीं। उन्होंने किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) की स्थिति पर विशेष ध्यान देने और किसानों को समय पर तथा सुगमता से ऋण सुविधा उपलब्ध कराने की आवश्यकता पर जोर दिया।

तेलंगाना को 265.12 करोड़ रुपये

तेलंगाना के लिए 27 अप्रैल 2026 को हुई PAC बैठक में वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 651.06 करोड़ रुपये की वार्षिक कार्य योजना को मंजूरी दी गई थी। इसमें केंद्र का हिस्सा 390.63 करोड़ रुपये था।

12 मई 2026 को तेलंगाना के लिए 157.65 करोड़ रुपये की पहली मदर सैंक्शन जारी की गई थी। राज्य ने अब तक 96.05 करोड़ रुपये, यानी स्वीकृत राशि का 60.93 प्रतिशत खर्च किया है।

व्यय की प्रगति को देखते हुए चौहान की मंजूरी के बाद तेलंगाना को कुल 265.12 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। इसमें 157.66 करोड़ रुपये RKVY और 107.46 करोड़ रुपये कृषोन्नति योजना के तहत दिए जाएंगे।

किसान ID और उर्वरक वितरण मॉडल की सराहना

केंद्रीय कृषि मंत्री ने तेलंगाना सरकार द्वारा विकसित किसान ID और उर्वरक वितरण के नए मॉडल की सराहना की। उन्होंने तेलंगाना के कृषि मंत्री को इस पहल के लिए बधाई देते हुए कहा कि इससे किसानों तक सेवाएं अधिक पारदर्शी और प्रभावी तरीके से पहुंचाने में मदद मिलेगी।

उन्होंने तेलंगाना में तिलहन और दलहन मिशन के तहत व्यय की प्रगति को अपेक्षाकृत धीमा बताया। उन्होंने राज्य सरकार को इन मिशनों के अंतर्गत खर्च और योजनाओं के क्रियान्वयन की नियमित निगरानी सुनिश्चित करने पर जोर दिया।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार किसानों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए राज्यों को कृषि क्षेत्र के विकास के लिए आवश्यक वित्तीय और नीतिगत सहयोग उपलब्ध करा रही है।

राजस्थान-हरियाणा के बीच यमुना जल परियोजना पर ऐतिहासिक समझौता, तीन दशक पुरानी पेयजल समस्या के समाधान की दिशा में बड़ा कदम

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नई दिल्ली- केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की उपस्थिति में राजस्थान और हरियाणा सरकारों ने यमुना जल परियोजना के निर्माण एवं क्रियान्वयन के लिए एक महत्वपूर्ण समझौते पर हस्ताक्षर किए। इस अवसर पर राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल सहित केंद्र और दोनों राज्यों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

प्रमुख बातें

  • लगभग 30 वर्षों से लंबित पेयजल विवाद के समाधान की दिशा में बड़ी सफलता।

  • जुलाई से अक्टूबर तक यमुना नहर से राजस्थान को 580 मिलियन क्यूबिक मीटर (MCM) पानी उपलब्ध कराया जाएगा।

  • पानी की आपूर्ति 3.6 मीटर से अधिक व्यास वाली तीन भूमिगत पाइपलाइनों के माध्यम से की जाएगी।

  • परियोजना से राजस्थान और हरियाणा दोनों राज्यों को पेयजल उपलब्ध होगा।

किन क्षेत्रों को मिलेगा लाभ?

राजस्थान

  • सीकर

  • चूरू

  • झुंझुनूं

हरियाणा

  • भिवानी

  • फतेहाबाद

समझौते की विशेषताएं

  • जल बंटवारा, लागत साझा करने और रखरखाव की स्पष्ट व्यवस्था।

  • आधुनिक निगरानी प्रणाली और पारदर्शी संचालन तंत्र।

  • विवाद समाधान के लिए मजबूत और वैज्ञानिक व्यवस्था।

  • केंद्र सरकार, दोनों राज्य सरकारों और केंद्रीय जल आयोग (CWC) के समन्वय से तैयार व्यापक ढांचा।

अमित शाह ने क्या कहा?

अमित शाह ने कहा कि यह समझौता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के "संवाद से समाधान" और सहकारी संघवाद (Cooperative Federalism) के सिद्धांत का उत्कृष्ट उदाहरण है। उन्होंने कहा कि वर्षों से व्यर्थ बह रहा पानी अब लोगों की प्यास बुझाएगा, भूजल स्तर को बढ़ाने में मदद करेगा और दोनों राज्यों के विकास को नई गति देगा।

परियोजना का उद्देश्य

यह परियोजना 1994 के अपर यमुना बेसिन जल बंटवारा समझौते के तहत राजस्थान को आवंटित यमुना जल का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करेगी। साथ ही, शुष्क और अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में लाखों लोगों को सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराकर सामाजिक और आर्थिक विकास को बढ़ावा देगी।

चूरू में लेफ्टिनेंट जनरल सागत सिंह की प्रतिमा का अनावरण, ओम बिरला ने दी श्रद्धांजलि

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 चूरू- ओम बिरला ने आज राजस्थान के चूरू में अदम्य योद्धा, स्वर्गीय लेफ्टिनेंट जनरल सागत सिंह राठौड़ की प्रतिमा के अनावरण समारोह में भाग लिया। इस अवसर पर ओम प्रकाश माथुर, भजनलाल शर्मा, भागीरथ चौधरी तथा अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

लेफ्टिनेंट जनरल सागत सिंह को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए ओम  बिरला ने कहा कि उनका जीवन साहस, नेतृत्व और राष्ट्रसेवा का प्रेरणादायक उदाहरण है। द्वितीय विश्व युद्ध में भारतीय सेना के साथ उनके पराक्रम से लेकर गोवा मुक्ति आंदोलन के दौरान राष्ट्रीय ध्वज फहराने तक, उनका योगदान अत्यंत उल्लेखनीय रहा। नाथू ला सीमा पर उनके साहसिक निर्णयों ने देश की सीमाओं को मजबूत किया, और 1971 के युद्ध में ढाका में पाकिस्तानी सेना के आत्मसमर्पण में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही, जिससे बांग्लादेश के निर्माण का मार्ग प्रशस्त हुआ।

राजस्थान की वीरता और देशभक्ति की परंपरा का उल्लेख करते हुए ओम  बिरला ने कहा कि राज्य का प्रत्येक परिवार राष्ट्र के प्रति समर्पण की भावना से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि यह प्रतिमा केवल एक स्मारक नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है, जो युवाओं को देशसेवा के लिए प्रेरित करेगी।

लोकसभा अध्यक्ष ने आगे कहा कि सागत सिंह की वीरता और विरासत पूरे राष्ट्र के लिए गौरव का विषय है। उनका जीवन सिखाता है कि साहस, दृढ़ संकल्प और समर्पण के साथ कोई भी लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है। उन्होंने युवाओं से ऐसे महान वीरों से प्रेरणा लेकर राष्ट्र निर्माण में सक्रिय योगदान देने का आह्वान किया।

केन्द्रीय सरकार ने राजस्थान और झारखंड में पंचायती राज संस्थाओं एवं ग्रामीण स्थानीय निकायों को XV वित्त आयोग अनुदान जारी किया

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केंद्र सरकार ने वित्तीय वर्ष 2025–26 में राजस्थान और झारखंड में पंचायती राज संस्थाओं (PRIs) और ग्रामीण स्थानीय निकायों (RLBs) को सशक्त बनाने के लिए पंद्रहवें वित्त आयोग (XV FC) के अनुदान जारी किए हैं।

राजस्थान में, FY 2025–26 के लिए पहली किस्त के बिना बंधन (Untied) अनुदान की राशि ₹303.0419 करोड़ जारी की गई है, जो राज्य के 24 जिला पंचायतों, 339 ब्लॉक पंचायतों और 3,857 ग्राम पंचायतों के लिए पात्र हैं। इसके अलावा, FY 2024–25 की पहली और दूसरी किस्तों के रोके गए हिस्से के ₹145.24 करोड़ अतिरिक्त पात्र ग्रामीण स्थानीय निकायों को जारी किए गए हैं।

झारखंड राज्य के लिए, Union Government ने FY 2025–26 की पहली किस्त के बिना बंधन अनुदान के रूप में ₹275.1253 करोड़ जारी किए हैं, जो राज्य के 24 जिला पंचायतों, 253 ब्लॉक पंचायतों और 4,342 ग्राम पंचायतों के लिए पात्र हैं।

भारत सरकार, मंत्रालय पंचायती राज और मंत्रालय जल शक्ति (पीने के पानी और स्वच्छता विभाग) के माध्यम से राज्यों को XV-FC अनुदान जारी करने की सिफारिश करती है, जिसे बाद में वित्त मंत्रालय द्वारा जारी किया जाता है। आवंटित अनुदान वित्तीय वर्ष में दो किस्तों में सिफारिश और जारी किए जाते हैं। बिना बंधन (Untied) अनुदान का उपयोग PRIs/ RLBs द्वारा स्थानीय स्तर की आवश्यकताओं के लिए किया जाएगा, जो संविधान की ग्यारहवीं अनुसूची में वर्णित 29 विषयों में आता है, सिवाय वेतन और अन्य स्थायी खर्चों के।

बंधित (Tied) अनुदान का उपयोग निम्नलिखित बुनियादी सेवाओं के लिए किया जा सकता है:
(a) स्वच्छता और ODF स्थिति का रखरखाव, जिसमें घरेलू कचरे का प्रबंधन और उपचार, मानव मल और फेकल स्लज प्रबंधन विशेष रूप से शामिल है, और
(b) पीने के पानी की आपूर्ति, वर्षा जल संचयन और जल पुनर्चक्रण।

भारत-यूके संयुक्त सैन्य अभ्यास “अजेय वारियर-25” का आठवां संस्करण राजस्थान में शुरू

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भारत-यूके संयुक्त सैन्य अभ्यास “अजेय वारियर-25” का आठवां संस्करण आज फॉरेन ट्रेनिंग नोड, महाजन फील्ड फायरिंग रेंजेस, राजस्थान में शुरू हुआ। यह 14 दिवसीय द्विपक्षीय अभ्यास 17 से 30 नवंबर 2025 तक आयोजित किया जाएगा।

इस अभ्यास में 240 कर्मी भाग ले रहे हैं, जिसमें भारतीय सेना और ब्रिटिश सेना का समान प्रतिनिधित्व है। भारतीय सेना का प्रतिनिधित्व सिख रेजिमेंट के सैनिक कर रहे हैं।

संयुक्त राष्ट्र के मैनडेट के तहत आयोजित, यह अभ्यास अर्ध-शहरी वातावरण में सांप्रदायिक विरोधी आतंकवाद संचालन पर केंद्रित है। अगले दो हफ्तों में प्रशिक्षण में ब्रिगेड स्तर पर संयुक्त मिशन योजना, एकीकृत सामरिक अभ्यास, सिमुलेशन आधारित परिदृश्य और कंपनी स्तर के फील्ड प्रशिक्षण अभ्यास शामिल होंगे, जो वास्तविक जीवन की आतंकवाद-रोधी परिस्थितियों की नकल करेंगे।

इस अभ्यास का उद्देश्य सर्वोत्तम प्रथाओं का आदान-प्रदान, सामरिक दक्षता बढ़ाना और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में जटिल संचालन को समन्वित रूप से प्रबंधित करने की क्षमता विकसित करना है।

2011 से प्रत्येक दो साल में आयोजित होने वाले अजेय वारियर अभ्यास ने भारतीय सेना और ब्रिटिश सेना के बीच एक प्रमुख कार्यक्रम का रूप ले लिया है। 2025 संस्करण पेशेवरता, सहयोग और क्षेत्रीय स्थिरता एवं वैश्विक शांति के प्रति साझा प्रतिबद्धता को और मजबूत करता है।


कानून और न्याय मंत्रालय ने जारी किए नोटरी (संशोधन) नियम, 2025 — चार राज्यों में नोटरी की अधिकतम संख्या बढ़ाई गई

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नई दिल्ली-कानून और न्याय मंत्रालय के कानूनी कार्य विभाग ने नोटरी (संशोधन) नियम, 2025 अधिसूचित किए हैं। यह अधिसूचना जी.एस.आर. 763(ई) के रूप में 17 अक्टूबर 2025 को जारी की गई है। इन नियमों के माध्यम से नोटरी नियम, 1956 में संशोधन किया गया है, जो नोटरी अधिनियम, 1952 की धारा 15 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए किया गया है।

इस संशोधन के तहत गुजरात, तमिलनाडु, राजस्थान और नागालैंड में राज्य सरकारों द्वारा नियुक्त किए जा सकने वाले नोटरी की अधिकतम संख्या में वृद्धि की गई है।

संशोधित आंकड़े इस प्रकार हैं —

  • गुजरात : 2,900 से बढ़ाकर 6,000

  • तमिलनाडु : 2,500 से बढ़ाकर 3,500

  • राजस्थान : 2,000 से बढ़ाकर 3,000

  • नागालैंड : 200 से बढ़ाकर 400

संशोधन के अनुसार, ये नियम राजपत्र में प्रकाशन की तिथि से प्रभावी होंगे।

केंद्र सरकार ने यह कदम संबंधित राज्य सरकारों से प्राप्त अनुरोधों के आधार पर उठाया है। राज्यों ने यह मांग जनसंख्या वृद्धि, जिलों, तहसीलों और तालुकों की संख्या में वृद्धि तथा नोटरी सेवाओं की बढ़ती मांग को देखते हुए की थी।

इस संशोधन से आम नागरिकों को नोटरी सेवाओं की बेहतर उपलब्धता सुनिश्चित होगी और राज्यों में कानूनी प्रक्रियाओं के सुचारू संचालन में सुविधा होगी।

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