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ग्राम पंचायत बेलसोंडा की सचिव पर RTI में भ्रामक जानकारी देने का आरोप, हिफाजतनामे से उठे दस्तावेजों की उपलब्धता पर सवाल

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महासमुंद- ग्राम पंचायत बेलसोंडा की सचिव नेहा शर्मा पर सूचना का अधिकार (RTI) के तहत मांगी गई जानकारी के संबंध में भ्रामक जानकारी देने का आरोप लगा है। शिकायतकर्ता के अनुसार, सचिव ने अपने लिखित जवाब में पंचायत बैठक पंजी का मूल रजिस्टर न्यायालय में जमा होने का हवाला देते हुए जानकारी उपलब्ध कराने में असमर्थता जताई थी। वहीं, पुलिस रिकॉर्ड से संबंधित बताए जा रहे हिफाजतनामे में कुछ पंचायत रजिस्टर सचिव की सुपुर्दगी में होने का उल्लेख सामने आया है। इस विरोधाभास के बाद दस्तावेजों की वास्तविक स्थिति और सूचना उपलब्ध नहीं कराने के कारणों को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

RTI आवेदन के जवाब में न्यायालय में रजिस्टर जमा होने का उल्लेख

प्राप्त जानकारी के अनुसार, RTI आवेदक लक्ष्मीकांत चंद्राकर ने 28 जुलाई 2026 को ग्राम पंचायत बेलसोंडा से साफ-सफाई एवं अन्य कार्यों पर किए गए व्यय से संबंधित जानकारी मांगी थी।

आवेदन के जवाब में पंचायत सचिव नेहा शर्मा द्वारा 25 सितंबर 2026 को जारी पत्र में कथित तौर पर कहा गया कि पंचायत प्रस्ताव बैठक पंजी में दर्ज किए जाते हैं और मूल रजिस्टर न्यायालय में जमा होने के कारण मांगी गई जानकारी उपलब्ध कराना संभव नहीं है।

हिफाजतनामे में रजिस्टर सुपुर्दगी का उल्लेख

मामले में थाना महासमुंद के अपराध क्रमांक 396/2026 का भी उल्लेख किया गया है। उपलब्ध कराए गए विवरण के अनुसार, 4 जुलाई 2026 को पुलिस ने संबंधित रजिस्टर जब्त किए थे। इस प्रकरण में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 329(3) एवं 324(3) का उल्लेख है।

शिकायतकर्ता के अनुसार, सचिव नेहा शर्मा द्वारा दिए गए हिफाजतनामे में पंचायत के आवश्यक कार्यों के लिए सत्यापित छायाप्रतियां उपलब्ध कराने तथा मासिक बैठक पंजी, रोकड़ पंजी और बिल पंजी को अपनी सुपुर्दगी में प्राप्त करने का उल्लेख है।

यदि संबंधित दस्तावेजों और हिफाजतनामे की पुष्टि होती है, तो यह स्पष्ट करना आवश्यक होगा कि RTI के जवाब के समय कौन-कौन से मूल दस्तावेज न्यायालय में थे, कौन-से दस्तावेज सचिव की सुपुर्दगी में थे और मांगी गई सूचना उपलब्ध कराने में क्या बाधा थी।

कार्यवाही पंजी में छेड़छाड़ की आशंका, जांच की मांग

इस मामले में पंचायत की कार्यवाही पंजी और अन्य वित्तीय अभिलेखों की स्थिति को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। शिकायतकर्ता ने दस्तावेजों की उपलब्धता और उनके रखरखाव की निष्पक्ष जांच की मांग की है। हालांकि, कार्यवाही पंजी में छेड़छाड़ किए जाने की आशंका की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी आवश्यक है।

आखिर क्यों नहीं दी गई मांगी गई जानकारी?

सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के तहत सार्वजनिक प्राधिकरण के पास उपलब्ध या उसके नियंत्रण में मौजूद अभिलेखों तक नियमानुसार पहुंच सुनिश्चित की जाती है। ऐसे में इस मामले में यह जांच महत्वपूर्ण होगी कि मांगी गई जानकारी किस स्थिति में उपलब्ध थी और उसे न देने के लिए दिया गया कारण नियमानुसार उचित था या नहीं।

यदि जांच में जानबूझकर गलत या भ्रामक जानकारी देने अथवा सूचना रोकने की पुष्टि होती है, तो संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही निर्धारित की जा सकती है।

जिला प्रशासन से कार्रवाई की मांग

आवेदक लक्ष्मीकांत चंद्राकर और स्थानीय ग्रामीणों ने मामले की निष्पक्ष जांच कराए जाने तथा दोषी पाए जाने पर ग्राम पंचायत सचिव के खिलाफ नियमानुसार अनुशासनात्मक कार्रवाई करने की मांग की है। साथ ही, संबंधित पंचायत अभिलेखों की स्थिति स्पष्ट करने और RTI के तहत मांगी गई जानकारी उपलब्ध कराने की मांग भी उठाई गई है।

अब प्रमुख सवाल यह है कि जब हिफाजतनामे में संबंधित रजिस्टरों की सुपुर्दगी का उल्लेख है, तो RTI के जवाब में मूल रजिस्टर न्यायालय में जमा होने की बात किस आधार पर कही गई? इस सवाल का स्पष्ट उत्तर संबंधित दस्तावेजों की जांच और प्रशासनिक पक्ष सामने आने के बाद ही मिल सकेगा।


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