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महाराष्ट्र को राष्ट्रीय कृषि विकास योजना की दूसरी किस्त मिलेगी, केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने की समीक्षा बैठक

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नई दिल्ली- केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आज राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (RKVY) के तहत जारी धनराशि के उपयोग की समीक्षा के लिए एक वर्चुअल बैठक की। बैठक में महाराष्ट्र सरकार को योजना की दूसरी किस्त (Second Installment) जारी करने पर भी विचार किया गया।

बैठक में महाराष्ट्र के कृषि मंत्री दत्तात्रेय भरणे, भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के वरिष्ठ अधिकारी तथा महाराष्ट्र सरकार के अधिकारी शामिल हुए।

समीक्षा के दौरान केंद्रीय मंत्री ने बताया कि केंद्र सरकार ने पहले चरण में महाराष्ट्र को ₹335 करोड़ की राशि जारी की थी। राज्य सरकार ने इस राशि में से लगभग ₹260 करोड़ का उपयोग कर लिया है, जो निर्धारित 75 प्रतिशत उपयोग के मानक से अधिक है। इसके आधार पर महाराष्ट्र दूसरी किस्त प्राप्त करने वाला देश का पहला राज्य बन गया है। उन्होंने बताया कि ₹335 करोड़ की दूसरी किस्त जारी करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

शिवराज सिंह चौहान ने महाराष्ट्र सरकार को इस उपलब्धि पर बधाई देते हुए कहा कि तय समय के भीतर 75 प्रतिशत से अधिक धनराशि का प्रभावी उपयोग राज्य की कृषि विकास योजनाओं के प्रति गंभीरता और प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

उन्होंने कहा कि सरकारी धन का समय पर खर्च होने के साथ-साथ उसकी निरंतर निगरानी भी आवश्यक है, ताकि राशि का उपयोग केवल निर्धारित उद्देश्यों के लिए ही किया जाए। केंद्रीय मंत्री ने फार्मर आईडी (Farmer ID) बनाने में महाराष्ट्र के प्रदर्शन की भी सराहना की। उन्होंने बाढ़ प्रभावित किसानों को करीब ₹14,000 करोड़ की सहायता राशि मात्र पांच दिनों में सीधे बैंक खातों में हस्तांतरित करने की राज्य सरकार की पहल की प्रशंसा की।

बैठक में मिशन फॉर इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट ऑफ हॉर्टिकल्चर (MIDH) के तहत हुई प्रगति पर संतोष व्यक्त किया गया। वहीं डिजिटल कृषि, कृषि विस्तार, राष्ट्रीय बागवानी मिशन (NHM), बीज, तिलहन तथा एग्रोफॉरेस्ट्री जैसे क्षेत्रों में खर्च की गति बढ़ाने और लंबित देनदारियों का शीघ्र निपटारा करने के निर्देश दिए गए।

समीक्षा बैठक में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) के क्रियान्वयन पर भी चर्चा हुई। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि फसल बीमा के लिए आवेदन करते समय किसानों द्वारा सही जानकारी देना बेहद जरूरी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) धारक और गैर-केसीसी दोनों प्रकार के किसान योजना का लाभ लेने के पात्र हैं, लेकिन आवेदन के दौरान किसी भी प्रकार की जानकारी छिपाने से बचना चाहिए। उन्होंने कहा कि पोर्टल पर प्रस्तावित घोषणा का उद्देश्य केवल पारदर्शिता और सही जानकारी सुनिश्चित करना है, न कि किसी पात्र किसान को योजना से वंचित करना।

बैठक के अंत में केंद्रीय मंत्री ने विश्वास जताया कि महाराष्ट्र सरकार राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के अन्य घटकों में भी बेहतर प्रदर्शन करते हुए देश के कृषि क्षेत्र के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देती रहेगी।

सफलता की कहानी-राष्ट्रीय कृषि विकास योजना से फायदा,ग्राफ्टेड टमाटर की खेती से दुबेलाल का बढ़ा मुनाफा

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रायपुर- प्रदेश के किसान शासन की योजनाओं का लाभ लेकर और आधुनिक खेती किसानी की तकनीकों को अपनाकर अपनी आमदानी में इजाफा कर रहे हैं। ऐसे ही महासमुन्द जिले के अंतर्गत ग्राम बम्बुरडीह के किसान दुबेलाल कोसरे ने आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाकर उल्लेखनीय सफलता अर्जित की है।दुबेलाल कोसरे, बताते हैं कि पूर्व में वे पारंपरिक रूप से धान एवं अन्य फसलों की खेती करते थे। इस पारंपरिक खेती में लागत अपेक्षाकृत अधिक होने के बावजूद उन्हें सीमित लाभ ही प्राप्त हो पाता था, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हो पा रहा था।

वर्ष 2025-26 में उद्यानिकी विभाग के मार्गदर्शन में उन्हें यह जानकारी प्राप्त हुई कि उद्यानिकी फसलों के माध्यम से कम क्षेत्र में अधिक उत्पादन एवं अधिक लाभ अर्जित किया जा सकता है। इस जानकारी से प्रेरित होकर उन्होंने राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के अंतर्गत ग्राफ्टेड टमाटर सीडलिंग प्रदर्शन घटक का लाभ लिया। दुबेलाल कोसरे बताते है कि योजना के तहत उन्हें 30 हजार रुपए का अनुदान भी प्राप्त हुआ, जिससे उन्होंने अपने 0.40 हेक्टेयर सिंचित भूमि में आधुनिक तकनीक के माध्यम से ग्राफ्टेड टमाटर की खेती प्रारंभ की।

कृषक दुबेलाल कोसरे द्वारा उच्च गुणवत्ता वाली ग्राफ्टेड पौध, सिंचाई हेतु ड्रिप प्रणाली तथा खरपतवार नियंत्रण के लिए मल्चिंग तकनीक का उपयोग किया गया। वे बताते हैं कि उन्नत तकनीकों के समुचित उपयोग से उन्हें प्रति एकड़ लगभग 16 से 18 टन तक उत्पादन प्राप्त हुआ। बाजार में टमाटर का औसत विक्रय मूल्य लगभग 20 रुपए प्रति किलोग्राम मिलने से उन्हें कुल लगभग 3 लाख 9 हजार रुपए का लाभ प्राप्त हुआ। यह लाभ धान की खेती की तुलना में कई गुना अधिक रहा, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।दुबेलाल कोसरे द्वारा अन्य किसानों को उन्नत तकनीकों को अपनाने तथा बाजार की मांग के अनुरूप फसल उत्पादन करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा हैं। उनके मार्गदर्शन से ग्राम बम्बुरडीह के अन्य कृषक भी उद्यानिकी फसलों की ओर आकर्षित हो रहे हैं और आधुनिक खेती को अपनाने लगे हैं।


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