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कटघोरा में अटलजी की कांस्य प्रतिमा मानकों के अनुरूप नहीं होने पर उप अभियंता तत्काल प्रभाव से निलंबित

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रायपुर- नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने कोरबा जिले के कटघोरा नगर पालिका में अटल परिसर में स्थापित कांस्य प्रतिमा के मानकों के अनुरूप नहीं होने पर उप अभियंता चन्द्र प्रकाश जायसवाल को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। नगरीय प्रशासन विभाग ने संचालनालय से आज उनके निलंबन का आदेश जारी किया है।

कटघोरा में अटल परिसर में स्थापित भारतरत्न पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी की प्रतिमा से संबंधित शिकायतों पर नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के बिलासपुर क्षेत्रीय कार्यालय के संयुक्त संचालक द्वारा प्रस्तुत जाँच प्रतिवेदन के आधार पर निलंबन की यह कार्रवाई की गई है। जांच प्रतिवेदन में प्रतिमा निर्माण कार्य प्राक्कलन के प्रावधानों के विपरीत होना, विभिन्न भागों से परत उखड़ने, सतत् क्षतिग्रस्त होने तथा कांस्य प्रतिमा मानकों के अनुरूप नहीं होने के कारण निर्माण प्रक्रिया में पदस्थापना के दौरान की गई अनियमितता में उप अभियंता चन्द्र प्रकाश जायसवाल उत्तरदायी पाये गये हैं। उनके इस कृत्य के पदीय कर्तव्यों के विपरीत होने के कारण तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है।

निलंबन अवधि में जायसवाल का मुख्यालय संयुक्त संचालक, क्षेत्रीय कार्यालय, नगरीय प्रशासन एवं विकास, दुर्ग नियत किया गया है। उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ते की पात्रता होगी।

राष्ट्रीय उपभोक्ता दिवस 2025 पर बम निष्क्रियकरण प्रणालियों के लिए नया भारतीय मानक IS 19445:2025 जारी

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नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में आयोजित राष्ट्रीय उपभोक्ता दिवस 2025 के अवसर पर केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री प्रल्हाद जोशी ने IS 19445:2025 – “बम निष्क्रियकरण प्रणालियां — प्रदर्शन मूल्यांकन और आवश्यकताएं” नामक नया भारतीय मानक जारी किया। यह मानक बम निष्क्रियकरण अभियानों में सुरक्षा और मानकीकरण को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

मानक की आवश्यकता

IS 19445:2025 के निर्माण की पहल गृह मंत्रालय और टर्मिनल बैलिस्टिक रिसर्च लेबोरेटरी (TBRL), DRDO के अनुरोध पर की गई। इसकी प्रमुख वजहें थीं—

  • सुरक्षा और नागरिक एजेंसियों द्वारा बम निष्क्रियकरण प्रणालियों का बढ़ता उपयोग

  • ऐसे उपकरणों के लिए अब तक किसी समर्पित भारतीय मानक का अभाव

  • अंतरराष्ट्रीय मानकों की सीमित उपलब्धता और भारतीय खतरा परिदृश्य से उनका पूर्ण मेल न होना

बम कंबल, बम बास्केट और बम इनहिबिटर जैसी प्रणालियां विस्फोटक खतरों को कम करने में व्यापक रूप से उपयोग की जाती हैं। इनके सुरक्षित और प्रभावी उपयोग के लिए कठोर एवं मानकीकृत परीक्षण आवश्यक हैं।

IS 19445:2025 की प्रमुख विशेषताएं

यह मानक बम निष्क्रियकरण प्रणालियों के विस्फोट दबाव (Blast Load) और छर्रे प्रभाव (Splinter Effect) के मूल्यांकन हेतु एक व्यापक ढांचा प्रदान करता है। इसमें शामिल हैं—

  • परीक्षण उपकरणों और परीक्षण क्षेत्र की आवश्यकताएं

  • निष्पक्ष प्रदर्शन मूल्यांकन की प्रक्रियाएं

  • परीक्षण पद्धतियां, उपकरण, नमूने और स्वीकृति मानदंड

यह मानक परीक्षण प्रायोजकों, निर्माताओं और मान्यता प्राप्त परीक्षण एजेंसियों के लिए एक समान परीक्षण, प्रमाणन और खरीद प्रक्रिया का आधार बनेगा।

विकास प्रक्रिया

IS 19445:2025 का विकास आर्म्स एंड एम्युनिशन फॉर सिविलियन यूज सेक्शनल कमेटी (PGD 28) के अंतर्गत सहमति आधारित प्रक्रिया से किया गया। इसके लिए बम निष्क्रियकरण प्रणालियां पैनल (PGD 28/P1) का गठन किया गया, जिसकी संयोजकता TBRL, DRDO ने की।

इस प्रक्रिया में DRDO, NSG, CAPF, राज्य पुलिस, AAI, NCRTC, BPR&D, सार्वजनिक एवं निजी क्षेत्र के निर्माता तथा परीक्षण विशेषज्ञों सहित अनेक हितधारकों ने सक्रिय भागीदारी की, जिससे यह मानक मैदानी जरूरतों और सुरक्षा आवश्यकताओं के अनुरूप बन सका।

वैश्विक मानकों के अनुरूप

मानक के निर्माण में अंतरराष्ट्रीय सर्वोत्तम प्रथाओं को ध्यान में रखते हुए उन्हें भारतीय खतरा परिदृश्य और परिचालन परिस्थितियों के अनुसार अनुकूलित किया गया है। इससे वैश्विक सामंजस्य के साथ राष्ट्रीय आवश्यकताओं की पूर्ति सुनिश्चित होगी।

प्रमुख लाभ

  • स्पष्ट और वस्तुनिष्ठ प्रदर्शन मूल्यांकन मानदंड

  • ऑपरेटरों, प्रथम प्रतिक्रियाकर्ताओं और आम नागरिकों की सुरक्षा में वृद्धि

  • खरीद, परीक्षण और प्रमाणन में पारदर्शिता और एकरूपता

  • मेक इन इंडिया के तहत स्वदेशी नवाचार को बढ़ावा

  • विभिन्न एजेंसियों के बीच उपकरणों की विश्वसनीयता और संगतता में सुधार

उपभोक्ता मामले विभाग की सचिव निधि खरे ने बताया कि यह मानक स्वैच्छिक रूप से अपनाने के लिए है और इससे गुणवत्ता आधारित निर्माण को प्रोत्साहन मिलेगा तथा सुरक्षा अभियानों में प्रयुक्त उपकरणों पर भरोसा बढ़ेगा।

IS 19445:2025 का विमोचन भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) की राष्ट्रीय सुरक्षा, जन-सुरक्षा और तकनीकी आत्मनिर्भरता के प्रति प्रतिबद्धता को सुदृढ़ करता है।

स्वास्थ्य मंत्री के गृह ग्राम की ऐतिहासिक उपलब्धि : जिले के खड़गवां सीएचसी को मिला ISO प्रमाणपत्र

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रायपुर-छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य क्षेत्र में एक नई उपलब्धि दर्ज करते हुए सरगुजा संभाग का पहला ISO प्रमाणित कोल्ड चेन प्वाइंट बनने का गौरव मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र खड़गवां ने हासिल किया है। यह उपलब्धि स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल के गृह ग्राम खड़गवां में उनके सतत प्रयासों और दिशा-निर्देशों के परिणाम स्वरूप संभव हुई है। वहीं इस सफलता के पीछे सीएमएचओ डॉ. अविनाश खरे के कुशल मार्गदर्शन और स्वास्थ्य विभाग की समर्पित टीम की निरंतर मेहनत का अहम योगदान रहा।

कोल्ड चेन प्वाइंट खड़गवां को गुणवत्ता प्रबंधन प्रणाली की आवश्यकताओं के पूर्ण अनुपालन में पाया गया है, जिसके चलते इसे ISO सर्टिफिकेशन प्रदान किया गया है। यह प्रमाणपत्र स्वास्थ्य सेवाओं में उत्कृष्ट प्रबंधन, पारदर्शिता और दक्षता का प्रतीक माना जा रहा है। इस प्रमाणन के साथ खड़गवां सीएचसी ने टीकों और रसद के सुरक्षित, वैज्ञानिक और विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मानकों के अनुरूप भंडारण की नई मिसाल कायम की है। यहां सभी टीके CFC मुक्त और WHO प्रमाणित CCE तिथि वाले उपकरणों में अनुशंसित तापमान पर सुरक्षित रखे जाते हैं। आरआई टीकों और रसद की आपूर्ति श्रृंखला को प्रभावी बनाने के लिए ईवीआईएन (eVIN) के माध्यम से ऑनलाइन वास्तविक समय में स्टॉक अपडेट किया जाता है, जिससे पारदर्शिता और दक्षता दोनों में वृद्धि हुई है। 

दिन में दो बार तापमान दर्ज कर टीकों की प्रभावकारिता सुनिश्चित की जाती है, वहीं वेब-आधारित डेटा लॉगर प्रणाली से उच्चस्तरीय सतत निगरानी भी की जाती है।

टीकों की आपूर्ति में FIFO (First In First Out) ) और  EEFO (Earliest Expiry First Out) दिशानिर्देशों का पालन किया जाता है, जिससे शून्य अपव्यय (Zero Wastage) सुनिश्चित हो रहा है। इसके अलावा, आवश्यकतानुसार VVM  (Vaccine Vial Monitor) आधारित आपूर्ति प्रणाली भी लागू की गई है।

टीकों के भंडारण हेतु एक अलग ICE Pack Conditioning Area,  निर्बाध बिजली आपूर्ति व्यवस्था, उचित रैंकिंग सिस्टम वाला सूखा भंडारण क्षेत्र, और प्रशिक्षित व दक्ष मानव संसाधन की उपलब्धता से यह केंद्र सरगुजा संभाग का मॉडल स्वास्थ्य संस्थान बन गया है। कोल्ड चेन प्वाइंट में  NCCMIS सॉफ्टवेयर के माध्यम से उपकरणों का सटीक प्रबंधन किया जा रहा है, साथ ही टीकाकरण अपशिष्ट निपटान प्रणाली को भी वैज्ञानिक और पर्यावरण हितैषी तरीके से अपनाया गया है।

NMDC स्टील लिमिटेड को “हॉट रोल्ड स्टील स्ट्रिप, शीट और प्लेट्स फॉर वेल्डेड स्टील पाइप” हेतु भारतीय मानक (IS 18384:2023) का पहला लाइसेंस प्राप्त

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भारत की सबसे युवा और अत्याधुनिक एकीकृत इस्पात संयंत्र, NMDC स्टील लिमिटेड (NSL) ने एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है और देश में यह पहली कंपनी बन गई है, जिसे “हॉट रोल्ड स्टील स्ट्रिप, शीट और प्लेट्स फॉर वेल्डेड स्टील पाइप फॉर पाइपलाइन ट्रांसपोर्टेशन सिस्टम्स – सामान्य आवश्यकताएँ (IS 18384:2023)” के लिए भारतीय मानक (IS) लाइसेंस प्राप्त हुआ।

यह प्रमाणपत्र भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) द्वारा विश्व मानक दिवस 2025 के अवसर पर रायपुर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम, रायपुर में प्रस्तुत किया गया।

इस सम्मान को NMDC Steel के चीफ जनरल मैनेजर (स्टील), अमृत नारायण ने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री, विष्णु देव साय, के हाथों प्राप्त किया। इस अवसर पर खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री, दयाल दास बघेल, और BIS रायपुर के निदेशक एवं प्रमुख, एस. के. गुप्ता की भी उपस्थिति रही।

यह प्रमाणपत्र NMDC Steel की गुणवत्ता, नवाचार और सतत विकास के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है। यह NSL के उस दृष्टिकोण को भी बल देता है जिसमें पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस क्षेत्रों में उच्चतम सुरक्षा और प्रदर्शन मानकों को पूरा करने वाले विश्वस्तरीय इस्पात उत्पादों का उत्पादन करना शामिल है।

IS 18384:2023 प्रमाणपत्र पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस उद्योग में पाइपलाइन ट्रांसपोर्टेशन सिस्टम्स के लिए डिज़ाइन किए गए इस्पात उत्पादों में उत्कृष्टता का एक महत्वपूर्ण मानक स्थापित करता है। यह NMDC Steel के तकनीकी उन्नति, उच्च गुणवत्ता वाले उत्पाद और सतत उत्पादन प्रथाओं पर ध्यान केंद्रित करने को दर्शाता है।

इस उपलब्धि पर बोलते हुए NMDC Steel के CMD,अमितावा मुखर्जी ने कहा, “हमें गर्व है कि हम भारत में इस BIS लाइसेंस को प्राप्त करने वाले पहले हैं। यह हमारी उत्कृष्टता के प्रति समर्पण और भारत के औद्योगिक मानकों और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने में हमारे योगदान का प्रमाण है।”

NMDC Steel Limited 3.0 MTPA क्षमता के साथ कार्य करता है और भारत में इस्पात क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।


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